niraj babu jay prakash urf bade bhaiya

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LPG gas ⛽ के लिए हाहाकार

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है।😡
भारत कभी विकसित या विश्वगुरु नहीं बन सकता क्योंकि भारत चूतियों का देश है, भारत गधों का देश है, भारत प्रचंड मूर्खों का देश है, भारत स्वार्थी और पागलों का देश है

LPG गैस सिलेंडर के नाम पर ऐसे रंडी रोना किया जा रहा है, जैसे सामूहिक शोक हो गया हो

दूसरे देशों में युद्ध छिड़ा है तो भारत के लोगों का गैस के नाम पर रो-रोकर बुरा हाल है

जरा सोचिए कि अगर अपना देश महीने भर के लिए युद्ध में चला जाए तो ये लोग क्या करेंगे ?

अमेरिका, इजरायल, ईरान में युद्ध हो रहा है तो मोदी क्या करे ? सेना लेकर कूद जाए भेंचो कि हमारे तेल के भेजो, बाद में फिर लड़ लेना क्योंकि हमारे लोगों को सिलेंडर सुलगाकर उस पर पिछवाड़ा सेंकना है

जरा भी कॉमनसेंस नहीं है भारत की बड़ी आबादी में

जब भारत LPG का 60% हिस्सा आयात करता है और खाड़ी देशों में युद्ध छिड़ा है तो थोड़ा बहुत क्राइसिस होगा ही, फिर गैस एजेंसिया क्राइसिस को बढ़ावा देंगी, फिर विपक्षी नेता इस क्राइसिस को और बढ़ावा देंगे और जनता LPG के नाम पर हाय हाय मोदी मर जा तू कहते हुए दहाड़ें मारकर रोएगी

5-7 साल पहले दिल्ली के अफ़वाह उड़ी कि नमक खत्म हो गया तो आधी दिल्ली परचूनी/किराना की दुकानों पर लाइन में लग गई थी और 50-50 किलो नमक ख़रीदकर घरों में रख लिया था

हम नमक के लिए रोने लगते हैं, प्याज के नाम पर रोते हैं, LPG के लिए रो रहे हैं और फिर भी कहते हैं कि हम तो विश्वगुरु और विकसित बनेंगे

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है

भारत के आधे लोग ईरान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन वहां भयानक महंगाई है, जरूरत की तमाम चीजें नहीं मिल रही हैं. आपको ईरान का समर्थन करना है कि ईरान युद्ध के कारण LPG संकट आ गया तो रोने लगे भेंचो

आधे लोग इजरायल का समर्थन कर रहे हैं, वहां ईरान ताबड़तोड़ बम और मिसाइलें मार रहा है, भयानक तबाही मची है. आपको इजरायल का समर्थन करके बहादुर बनना है लेकिन LPG संकट के नाम पर रंडी रोना भी करना है

भाई, भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के हर देश में ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा पदार्थों का संकट आया है तो इस समय रोने की नहीं धैर्य की जरूरत है

मोदी पेशाब करके क्रूड आयल पैदा नहीं कर देगा जिससे पेट्रोल, डीजल या LPG बन सके

या मोदी के बदले राहुल को Pm बना दो तो भी वो आपके घरों में गैस से भरे सिलेंडर नहीं भेज देंगे क्योंकि क्रूड तो उनकी पेशाब से भी नहीं निकलेगा, वहां से भी मूत निकलेगा

पूरे देश को पैनिक मोड में लाकर खड़ा कर दिया है भेंचो

इसमें एक बड़ा वर्ग उन लोगों का है, जिनके पास 5/7 साल पहले तक गैस सिलेंडर नहीं थे, मोदी ने ही दिए और मोदी के दिए हुए सिलेंडर ही मोदी पर भारी पड़ रहे हैं

तुम दूसरे देशों के बीच युद्ध के कारण इस तरह रो रहे हो और तुम चाहते हो कि तुम्हें पाकिस्तान के साथ युद्ध करके कश्मीर दे दिया जाये, बलूचिस्तान, सिंध, गिलगिट बाल्टिस्तान को आजाद कराया जाए

अबे अगर ऐसा करने का सोचा भी तो तुम संसद और PM आवास घेर लोगे नामक, तेल, आटा या किसी अन्य चीज के नाम पर

भारत जैसे महान देश में कैसे विशुद्ध पगलैट पब्लिक पैदा होती है यार 

अरे सिलेंडर मिल जायेगा यार और अगर कालाबाजारी के कारण न भी मिले तो इंडेक्शन ले लो, इंडेक्शन न मिले तो कुछ चूल्हे पर पका लेना

देश के प्रति कुछ तो दायित्व निभाओ

ये देश सिर्फ उनका ही नहीं है जो सीमा पर मर जाते हैं, ये देश आपका भी है और सिर्फ वोट देकर आप अपने दायित्व की इतिश्री नहीं कर सकते

जब संकट भी घड़ी हो आपको भी सैनिक बनकर किसी युद्ध लड़ना पड़ सकता है

हरिओम पंवार साहब ने लिखा है

क्या ये देश उन्हीं का है जो सीमा पर मर जाते हैं
अपना लहू बहाकर टीका सरहद पर कर जाते हैं
ऐसा युद्ध वतन की ख़ातिर सबको लड़ना पड़ता है
संकट की घड़ियों में सबको सैनिक बनना पड़ता है
जो भी क़ौम वतन की ख़ातिर लड़ने को तैयार नहीं
उसकी संतति को आजादी जीने का अधिकार नहीं।😐
at March 15, 2026 No comments:
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क्या गाजा भूखा है

इज़रियल फ़िलिस्तीन में रसद नहीं पहुँचने दे रहा है- ये एक आम नैरेटिव है जो हाल में चल रहा है। जो फ़िलिस्तीन के समर्थक है, वो इस पे क्रन्दन करते है। जो फ़िलिस्तीन के विरोधी है, वो इस पे हंसते है।

हकीकत क्या है? क्या वाक़ई में फ़िलिस्तीन को खाना नहीं मिल रहा है?

इसका उत्तर यूएई के एक प्रख्यात पत्रकार और एनालिस्ट अमजद तहा के इस ट्वीट से समझें।

आपके सुभीते के लिए इस ट्वीट का हिंदी अनुवाद ये है-

⸻

मुझे पता है कि आपको तर्क पसंद नहीं है। 7 अक्टूबर 2023 से, ग़ाज़ा को 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक मानवीय सहायता मिली है, जो 22,000 से अधिक ट्रकों के माध्यम से केवल 2.1 मिलियन लोगों की आबादी के लिए पहुँचाई गई है। इसका मतलब है कि कुछ ही महीनों में प्रति व्यक्ति लगभग 143 किलोग्राम सहायता। यदि हम मान लें कि एक किलोग्राम खाद्य सामग्री में औसतन 3,500 कैलोरी होती है (जो आपातकालीन राशन के लिए मानक है), तो यह सहायता कुल मिलाकर 1.05 ट्रिलियन से अधिक कैलोरी प्रदान करती है। ग़ाज़ा की जनसंख्या को प्रतिदिन लगभग 4.2 अरब कैलोरी की आवश्यकता होती है (प्रति व्यक्ति 2,000 कैलोरी के हिसाब से), तो यह सहायता अकेले ही पूरी आबादी को लगातार 250 से अधिक दिनों तक तीन समय का भोजन और मिठाई सहित खिलाने के लिए पर्याप्त है। अगर भोजन की मात्रा बढ़ाकर दिन में चार भारी भोजन कर दी जाए (जो किसी भी मानवीय न्यूनतम से कहीं अधिक है), तब भी ग़ाज़ा की आबादी के लिए यह सहायता लगभग 190 दिनों तक पर्याप्त होगी।

अगर इसकी तुलना यूरोप के शहरों से करें, तो 2.1 मिलियन आबादी वाला पेरिस शहर इसी मात्रा की कैलोरी से आठ महीने तक पूरी तरह खिलाया जा सकता है। बर्लिन, जिसकी आबादी 3.6 मिलियन है, को पांच महीने और रोम (2.8 मिलियन) को छह महीने तक यह सहायता पर्याप्त होती। इस बीच, अफ्रीका के कई देशों में वास्तविक अकाल की स्थिति है, जिन्हें न तो इतना ध्यान मिलता है और न ही इतनी सहायता। दक्षिण सूडान, जहाँ 6.3 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, ग़ाज़ा की प्रति व्यक्ति सहायता का एक चौथाई से भी कम पाते हैं। सोमालिया, जहाँ 7 मिलियन से अधिक लोग ज़रूरतमंद हैं, को इससे भी कम सहायता मिलती है—अनुमानों के अनुसार प्रति व्यक्ति केवल 30 डॉलर की सहायता मिलती है, जबकि ग़ाज़ा में यह लगभग 133 डॉलर प्रति व्यक्ति है। चाड, नाइजर और बुर्किना फासो को इतनी कम सहायता मिलती है कि वे वैश्विक न्यूनतम पोषण स्तर तक भी नहीं पहुँच पाते।

अगर हम #ग़ाज़ा को एक प्रतीकात्मक रेस्टोरेंट मानें, तो यह ऐसा है मानो हर दिन 400 ट्रक यहाँ सप्लाई दे रहे हों, हर गली में ‘गौर्मे’ स्तर की लॉजिस्टिक्स पहुँच रही हो, जबकि अफ्रीका के युद्धग्रस्त क्षेत्र पत्तियाँ बीनकर और गंदा पानी पीकर गुज़ारा करने को मजबूर हैं—बिलकुल बिना किसी मीडिया हेडलाइन या हैशटैग के।

अब यह भूख का मुद्दा नहीं रहा। यह एक पक्षपाती नैरेटिव को ज़रूरत से ज़्यादा पोषित करने का मामला बन गया है। जब मानवीय सहायता भेजी जाती है, तो यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि यह वास्तव में लोगों तक पहुँचे और आतंकवादी संगठन द्वारा नियंत्रित इलाक़े को उन संसाधनों से न भर दे जो अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों को नहीं मिलते। इस बीच, बर्मिंघम (यूके) में स्थित ‘इस्लामिक रिलीफ’ जैसे समूह तटस्थता का दावा करते हैं, जबकि उनकी सहायता सुविधा से गायब होकर हमास की सुरंगों और गोदामों में जा पहुँचती है। टिग्राय, नाइजर और #सूडान जैसे स्थानों में वास्तविक भूख चुपचाप मर रही है—बिना किसी कैमरे, बिना किसी रोशनी के—जबकि फ्रांस और यूके जैसे देश एक ऐसे संघर्ष को ईंधन दे रहे हैं जिसे वे हल करने का दिखावा कर रहे हैं।

——————-

अमजद तहा साफ़ बतला रहा है कि फ़िलिस्तीन को मनो भर रसद जा रही है और फिर भी नैरेटिव ऐसा चल रहा है जैसे वहाँ अक़ाल पड़ा हुआ है।

नैरेटिव बनाने में दूसरा पक्ष कितना हुशियार है।

इन नैरेटिव को ही अल तकिया कहा जाता है 

at May 21, 2025 No comments:
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संविधान क्या केवल भीम राव का था

हिंदुओं को टॉर्चर किया जा रहा है और यह #संविधान निर्माताओं का अपमान है जो कि इसके असली हकदार को भूला दिया गया 

#संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष 
डॉ राजेंद्र प्रसाद (श्रीवास्तव –कायस्थ)

#संविधान_सभा के अटॉर्नी जनरल 
BN RAW (#यदुवंशी – #अहीर)

#संविधान_सभा के अस्थाई अध्यक्ष 
डॉ– सच्चिदानंद सिन्हा (#यदुवंशी – गोप)

#संविधान सभा की कुल 22 समितियाँ थीं । जिनमें से 8 समितियाँ प्रमुख समितियाँ थीं और बाकी छोटी समितियाँ थीं। 

इन छोटी #समितियों में से एक समिति जिसे #प्रस्तावना कहा जाता है उसके अध्यक्ष थे भीम राव आंबेडकर वह भी 7 माननीय सांसद महोदय के साथ थे 

#संविधान_सभा में कुल 292 जन प्रतिनिधि चुने हुए थे यानी सांसद महोदय थे 
93 देशी स्वतंत्र राजा महाराजा और ब्रिटिश क्राउन वाले राजा महाराजा के साथ साथ 4 गवर्नर प्रेसीडेंसी रूल के सदस्य थे 
मतलब कुल सदस्यों की संख्या 389 

तो देश के लोगों तुमने अपने जाति पूर्वजों पुरखों को भुला दिया 
लेकिन भीम राव आंबेडकर के जाति वाले ने उनको नहीं भुलाया नतीजा सामने है 
आज भीम राव आंबेडकर के ऊपर टिप्पणी हो जाए 
या #जयभीम
न बोलो तो ये लुटेरे वर्ग खुलेआम #SCSTACT लगाते है और कोर्ट उनको एकमुश्त 1 लाख रुपए नकद रुपया देती हैं वह भी टैक्स पेयर/#IMF #वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर 
इनकी भरपाई कौन करेगा???

उस पुलिस अधिकारी पर भी कार्यवाही होनी चाहिए जो कि हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के लिए उन पर बिना किसी ठोस सबूत के  #SCSTACT #scstact लगा देता है 

#संविधान हम सभी का है किसी एक का नहीं है 
बहुत हुआ बर्दास्त अब और नहीं 

#जागो_हिंदुओं_जागो 
#संविधान_बचाओ
at May 13, 2025 No comments:
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औरंगजेब और ज्ञानवापी मन्दिर का सच

ज्ञानवापी मंदिर तोड़ने का फरमान औरंगज़ेब ने जारी किया था
*****
पर आप जानते हैं  - क्यों?
कच्छ की महारानी के साथ मंदिर के महन्त ने बलात्कार की कोशिश की थी
मंदिर के तहखाने में अनेक औरतें और लाशें बंद पाई गई थीं
मंदिर तोड़ने से पहले औरंगज़ेब ने महारानी से पूछा था कि क्या करना है
महारानी ने जब तोड़ने की अनुमति दी तब फरमान जारी हुआ था

देखिए

इतिहासकार बी द्वारा एन पांडेय के अनुसार: कच्छ की 8 रानियां बनारस शहर में काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए गईं, जिनमें से सुंदर रानी का ब्राह्मण महंतों द्वारा अपहरण कर लिया गया।

कच्छ के राजा द्वारा औरंगजेब को इसकी सूचना दी गई, जिन्होंने कहा कि यह उनका धार्मिक व व्यक्तिगत मामला है।वह उनके आपसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन जब कच्छ के राजा ने शिकायत की, तो औरंगजेब ने सच्चाई का पता लगाने के लिए कुछ हिंदू सैनिकों को भेजा, लेकिन महंत के लोगों ने औरंगजेब के सैनिकों को मार डाला, डांटा और भगा दिया।

जब औरंगजेब को इस बात का पता चला तो उसने स्थिति का जायजा लेने के लिए कुछ विशेषज्ञ सैनिकों को भेजा, लेकिन मंदिर के पुजारियों ने उनका विरोध किया। मुगल सेना भी लड़ाई में आ गई, मुगल सैनिक और महंत मंदिर के अंदर फंस गए और युद्ध में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।तीसरे दिन सैनिकों को सुरंग में प्रवेश करने में सफलता मिली और वहां हड्डियों की कई संरचनाएं मिलीं। जो केवल महिलाओं के थे।

सैनिकों ने मंदिर में प्रवेश किया और लापता रानी की तलाश शुरू कर दी।
इस संबंध में, मुख्य मूर्ति (देवता) के पीछे एक गुप्त सुरंग की खोज की गई थी जो बहुत जहरीली गंध छोड़ रही थी। दो दिन तक दवा छिड़ककर बदबू दूर करने की कोशिश करते रहे और सैनिक देखते रहे।

कच्छ की लापता रानी का शव भी उसी स्थान पर पड़ा हुआ था, उसके शरीर पर एक कपड़ा भी नहीं था। मंदिर के मुख्य महंत को गिरफ्तार कर लिया गया और कड़ी सजा दी गई।

(बी. एन. पाण्डेय, खुदाबख्श मेमोरियल एनविल लेक्चर्स, पटना, 1986 द्वारा उद्धृत। ओम प्रकाश प्रसाद: औरंगज़ेब एक नई दृष्टि, पृष्ठ 20, 21)

at August 25, 2024 No comments:
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सेक्स के सपने दूर करने के नुक्शे

सेक्स के सपने

युवावस्था की सामान्य प्रॉब्लम है कि उन्हें उम्र के साथ सेक्स के सपने परेशान करते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि नेचुरल प्रोसेस है आपके बड़े होने की। लेकिन अति हर बात की बुरी होती है। इस स्वप्न दोष भी कहते हैं। अगर आपका ऐसे सपनों पर कोई कंट्रोल नहीं है तो पेश है कुछ आसान से घरेलू उपचार : 

आंवले का मुरब्बा रोज खाएं ऊपर से गाजर का रस पिएं। 

तुलसी की जड़ के टुकड़े को पीसकर पानी के साथ पीना लाभकारी होता है। अगर जड़ नहीं उपलब्ध हो तो तो बीज 2 चम्मच शाम के समय लें। 

लहसुन की दो कली कुचल कर निगल जाएं। थोड़ी देर बाद गाजर का रस पिएं। 

मुलहठी का चूर्ण आधा चम्मच और आक की छाल का चूर्ण एक चम्मच दूध के साथ लें। 

काली तुलसी के पत्ते 10-12 रात में जल के साथ लें। 

रात को एक लीटर पानी में त्रिफला चूर्ण भिगा दें सुबह मथकर महीन कपड़े से छानकर पी जाएँ। 

अदरक रस 2 चम्मच, प्याज रस 3 चम्मच, शहद 2 चम्मच, गाय का घी 2 चम्मच, सबको मिलाकर सेवन करने से स्वप्नदोष तो ठीक होगा ही साथ मर्दाना ताकत भी बढ़ती है। 

नीम की पत्तियां नित्य चबाकर खाते रहने से स्वप्नदोष जड़ से गायब हो जाएगा। 

पेट में कब्ज हो तो भी जवानी के सपने ज्यादा आते हैं और ठंडी रात में बहुत परेशान करते हैं 
at February 02, 2023 No comments:
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गुर्दे का दर्द

गुर्दे का दर्द

तुलसी की पत्ते तुलसी के पत्ते (छाया में सुखाई हुई) --- 20 ग्राम
अजवायन अजमोद (साफ की हुई) ---- 20 ग्राम
सेंधा नमक सेंधा नमक --- 10 ग्राम

तीनों को पीस कर चूर्ण बना कर रख लें . जरुरत होने पर चूर्ण 2-2 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी से सुबह शाम लें . एक ही मात्रा लेने से गुर्दे के दर्द में राहत मिल जाएगी .

विशेष : -नज़ला सर्दी , जुकाम जुकाम , खांसी , खांसी , पेट - दर्द अफारा पेट दर्द , बदहजमी अपच , खट्टे डकार खट्टे डकार, कब्ज कब्ज , उल्टियों के लिए भी उल्टी रामबाण हैं 
at April 18, 2022 No comments:
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हिस्टीरिया, एक मानसिक रोग

हिस्टीरिया : मनोरोग का प्रकोप

सर्वप्रथम एरंड तेल में भुनी हुई छोटी काली हरड़ का चूर्ण ५ ग्राम प्रतिदिन लगातार दे कर उसका उदर शोधन तथा वायु का शमन करें।
सरसों, हींग, बालवच, करजबीज, देवदाख मंजीज, त्रिफला, श्वेत अपराजिता मालकंगुनी, दालचीनी, त्रिकटु, प्रियंगु शिरीष के बीज, हल्दी और दारु हल्दी को बराबर-बराबर ले कर, गाय या बकरी के मूत्र में पीस कर, गोलियां बना कर, छाया में सुखा लें। इसका उपयोग पीने, खाने, या लेप में किया जाता है। इसके सेवन से हिस्टीरिया रोग शांत होता है।
लहसुन को छील कर, चार गुना पानी और चार गुना दूध में मिला कर, धीमी आग पर पकाएं। आधा दूध रह जाने पर छान कर रोगी को थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें।

ब्रह्मी, जटामांसी शंखपुष्पी, असगंध और बच को समान मात्रा में पीस कर, चूर्ण बना कर, एक छोटा चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें। इसके साथ ही सारिस्वतारिष्ट दो चम्मच, दिन में दो बार, पानी मिला कर सेवन करें।
ब्राह्मी वटी और अमर सुंदरी वटी की एक-एक गोली मिला कर सुबह तथा रात में सोते समय दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।
जो रोगी बालवच चूर्ण को शहद मिला कर लगातार सवा माह तक खाएं और भोजन में केवल दूध एवं शाश का सेवन करे, उसका हिस्टीरिया शांत हो जाता है।
अगर रोगी कुंवारी लड़की है, तो उसकी जल्द शादी करवा देनी चाहिए। रोग अपने आप दूर हो जाएगा। 


 
at February 27, 2022 No comments:
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दात की बीमारी से छुटकारा

दांतों की बीमारिय में रामबाण

सैंधा  नमक मैदे की तरह बारीक पीस कर कपड-छान कर लें । ध्यान रहे, रगड़े नहीं । ऐसा नमक दो ग्राम हथेली पर रख कर उससे चार गुना सरसों का तेल डाल  दें । फिर हथेली को टेढ़ी कर तेल की बूंदों से ऊँगली से मसूड़ों की हल्के-हल्के भली प्रकार मालिश रोजाना प्रातः करे । खून निकले तो निकले दीजिये । कुछ देर नमकीन तेल की मसूड़ों पर मालिश करते रहने के पश्चात् तेल-भीगा बचा नमक दातों-दाड़ों  पर लेप की तरह ऊँगली से लगा कर रगड़ कर फ़ौरन सादे या गुनगुने पानी से कुल्ली कर लें ।

कुछ दिन लगातार दन्त साफ़ करते रहने से दांतों का ठंडा, गरम और खट्टा लग्न समाप्त हो जाता हैं हिलते हुए दांत  मजबूत हो जाते है । कलि पपड़ी नहीं जमती । दंत साफ़ और मजबूत होते हैं । दांतों के  कीड़े नष्ट हो जाते हैं । दन्त का दर्द और मसूड़ों की सुजन और टीस  मिट जाती हैं तथा फुले मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता हैं निरंतर एसा करने से पायरिया नष्ट हो जाता हैं 


at February 26, 2022 1 comment:
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स्वाइन फ्लू से छुटकारा

स्वाइन फ्लू

थायमॉल, मेंथॉल, कैंफर (कपूर) को बराबर मात्रा में मिला कर तैयार 'यू वायरल' के घोल की बूँदों को अगर रुमाल या टिश्यू पेपर पर डालकर लोग सूंघें तो भीड़ में मास्क पहन कर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पान के पत्ते पर दवा की तीन बूँदें डालकर 5 दिन तक दिन में दो बार खाने पर स्वाइन फ्लू से बचाव हो सकता है।

100 मि.ली. पानी में तीन ग्राम नीम, गिलोय, चिरैता के साथ आधा ग्राम काली मिर्च और एक ग्राम सोंठ का काढ़ा बना कर पीना भी काफी लाभदायक रहता है। इन चीजों को पानी के साथ तब तक उबालना है जब तक वह 60 मिली ग्राम न रह जाए। इसे एक सप्ताह के लिए रोज सुबह खाली पेट पीने पर स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए शरीर में जरूरी परिरक्षण क्षमता (इम्यूनिटी) पैदा हो जाएगी।

त्रिफला, त्रिकाटू, मधुयास्ती और अमृता को समान मात्रा में लेकर उसे एक चम्मच लेने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे बुखार भी कम होता है।

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at February 22, 2022 1 comment:
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आलू का हलवा

आलू का हलवा

आलू को आप व्रत में नमकीन आलू फ्राई बनाकर तो खाते ही है, आलू का हलवा (Potato Halwa) भी बनाया जाता है, ये आलू का हलवा अधिकतर व्रत के समय बनाकर खाया जाता है, ये हलवा भी बहुत ही स्वादिष्ट बनता है और बड़ी जल्दी बन जाता है, बनाने में बड़ा आसान भी है. आइये आज हम आलू का हलवा (Aloo Ka Halwa ) बनायें.

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Potato Halwa

आलू - 300 (4या 5 मध्यम साइज केआलू)
चीनी - 100 ग्राम(आधा कप)
घी - 4 टेबल स्पून
दूध - एक कप
किशमिश - 1 टेबल स्पून (डंठल तोड़िये और धो लीजिये)
काजू - 1 टेबल स्पून ( काजू के 5-6 टुकड़ों में काट लीजिये)
इलाइची - 5-6 (छील कर कूट लीजिये)
बादाम - 6-7 (बारीक कतर लीजिये)

विधि - How to make Potato halwa

आलू को धो कर, उबाल लीजिये, ठंडा कीजिये, छील कर तोड़ लीजिये.

कढ़ाई में 2 चम्मच घी डालिये, गरम होने दीजिये. घी में आलू डाल कर कलछी से चलाते हुए धीमी आग पर 7-8 मिनिट तक कलछी से भुनिये. भुने हुये आलू में दूध और चीनी, किशमिश और काजू डाल दीजिये. इस समय आप हलवा को लगातार कलछी से चलाते रहें, 6-7 मिनट में आलू का हलवा बनकर तैयार हो जायेगा. आग बन्द कर दीजिये. आलू के हलवे में इलाइची पाउडर डाल कर मिला दीजिये. बचा हुआ घी भी डाल दीजिये, लीजिये आपका आलू का हलवा तैयार है.

आलू के हलवा को प्याले में निकालिये. कतरे हुये बादाम ऊपर से डालकर सजाइये. गरमा गरम आलू का हलवा परोसिये और खाइये. ठंडा होने पर भी यह हलवा बहुत अच्छा लगता है.

आलू के हलवा (Alu ka Halwa) में आप अपनी पसन्द से कोई भी मेवा हटा सकते हैं और अपनी पसन्द की मेवा डाल भी सकते हैं.

4 सदस्यों के लिये
समय - 25 मिनिट

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at May 23, 2021 3 comments:
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ब्रेड का हलवा

ब्रेड का हलवा

ब्रेड का हलवा बनाने के लिये आप सूखी ब्रेड का चूरे से ब्रेड का हलवा बना सकते हैं. ब्रेड के छोटे छोटे टुकडे करके इसे घी में तल कर भी ब्रेड का हलवा बना सकते है लेकिन ब्रेड के छोटे छोटे टुकडों को कड़ाही में भूनकर हलवा बनाना अधिक सुविधा जनक लगता है.

आइये ब्रेड का हलवा बनाना शुरू करते हैं.

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Bread Halwa

ब्रेड स्लाइस - 10
दूध - 600 ग्राम (3 कप)
घी - आधा कप
चीनी -100 - 150 ग्राम ( 1/2 - 3/4 कप)
काजू - 12 -14 (छोटे छोटे काट लीजिये)
बादाम 8-10 (छोटे छोटे काट लीजिये)
इलाइची - 6-7 (इलाइची छील कर कूट लीजिये)

विधि - How to make Bread ka halwa

आटे या मैदा किसी भी तरह की ब्रेड हलवा के लिये ली जा सकती हैं. यदि आप चाहें तो मल्टीग्रेन ब्रेड भी ले सकते है. हर तरह के ब्रेड के हलवा (Bread Halwa) का अपना अलग स्वाद होता है.

ब्रेड को छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लीजिये. कढ़ाई में 2 टेबल स्पून घी डालकर गरम कीजिये, घी में ब्रेड के टुकड़े डालिये, मीडियम और धीमी आग पर ब्रेड के टुकड़े सुनहरी होने तक भून लीजिये.

भुने हुये ब्रेड के टुकड़े में दूध और चीनी डालिये और लगातार चलाते हुये हलवा को पकाइये, चमचे से दबा कर ब्रेड के टुकड़ों को तोड़ दीजिये, 2 टेबल स्पून घी डालकर हलवे को चिकना होने तक पकाइये. थोड़े से काजू बचा कर हलवा में सारे कतरे हुये काजू, बादाम और इलाइची डालकर मिला दीजिये.

ब्रेड का हलवा (Bread Halwa) तैयार है. ब्रेड के हलवा को प्याले में निकालिये, हलवा के ऊपर पिघला हुआ घी और काजू डालकर सजाइये. गरमा गरम ब्रेड का हलवा (Bread Halwa) परोसिये और खाइये.

4-5 सदस्यों के लिये
समय - 35 मिनिट

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at May 23, 2021 No comments:
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पेठा का हलवा

पेठे का हलवा

पेठा के नाम से हमें आगरे का पेठा (Agra Petha Recipe) का ध्यान आ जाता है जबकि पेठा के फल से सब्जियां, हलवा आदि भी बहुत स्वादिष्ट बनाये जाते हैं. आज हम पेठे का हलवा बनायेंगे.

पेठे का फल बाहर से एकदम सफेद लेकिन आकार में कद्दू से छोटा होता है. बाजार में पेठे का फल आराम से मिल जाता है. सब्जियां बनाने के लिये पेठे का फल कच्चा लेकिन पेठा मुरब्बा (Agra Petha) या पेठे का हलवा बनाने के लिये पका हुआ पेठा फल अधिक अच्छा रहता है.

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Petha Halwa

पेठा - 1 किग्रा
चीनी - 250 ग्राम (1 1/4 कप)
घी - 50 ग्राम (1/4 कप)
मावा - 250 ग्राम (एक कप)
काजू - 2 टेबल स्पून (एक काजू के 5-6 टुकड़े करते हुये काट लीजिये)
नारियल - कद्दूकस किया हुआ (2 टेबल स्पून)
पिस्ते - 1 टेबल स्पून(बारीक काट लीजिये)
बादाम - 1 टेबल स्पून (बारीक काट लीजिये)
छोटी इलाइची - 6-8 (छील कर कूट लीजिये)

विधि - How to make Petha Halwa

पेठे को मोटा छिलका उतारते हुये छीलिये, बीज और स्पंजी गूदा निकाल कर अलग कर दीजिये. पेठे का सख्त गूदा बड़े टुकड़े में काटिये, इन बड़े टुकड़ों को कद्दूकस (grate) कर लीजिये.

किसी बर्तन में इतना पानी लीजिये जिसमें ये कद्दूकस किया गया पेठा (grated petha) अच्छी तरह डूब सके. इस पानी में कद्दूकस किया पेठा डाल कर डुबाइये और दो बार धो कर निचोड़ लीजिये.

कढ़ाई गैस पर रखिये, घी डालकर गरम कीजिये, घी में पानी निचोड़ा हुआ पेठा डालिये और भूनिये, पेठे का रंग बदलने के बाद चीनी डालिये और धीमी आग पर पकने दीजिये, बीच बीच में पेठे चीनी को चलाते रहें.

मावा को अलग कढ़ाई में हल्का गुलाबी होने तक भून लीजिये.

पेठे और चीनी में पानी न रहने के बाद मावा मिलाइये और चलाते हुये 3-4 मिनिट तक भून लीजिये, हल्वे में कटे हुये सूखे मेवे मिला दीजिये (थोड़े से कटे मेवे हलवा के ऊपर डालने के लिये बचा लीजिये) आग बन्द कर दीजिये, पेठे के हलवा (Petha Halwa) में इलाइची डालकर मिला दीजिये.

पेठे का हलवा तैयार है, पेठे के हलवे को प्याले में निकालिये, कटे हुये मेवे डालकर हलवे को सजाइये, ताजा ताजा स्वादिष्ट पेठे का हलवा परोसिये और खाइये, बचा हुआ पेठे का हलवा कन्टेनर में भर कर फ्रिज में रख लीजिये, जब भी आपका मन करे पेठे का हलवा फ्रिज से निकालिये और 7 दिन तक खाइये.

पेठे के हलवे को चलाते हुये जमने वाली कनसिसटैन्सी तक पका लिया जाय, किसी ट्रे में घी लगाकर जमा दिया जाय, तब यह बर्फी की तरह टुकड़ों में काटा जा सकता है और आप इसे पेठे की बर्फी भी कह सकते हैं.

पेठा - पेठा कद्दू से थोड़ा छोटा सफेद रंग का फल होता है जिससे इसके कच्चे फल से सब्जी और पके हुये फल से हलवा और पेठा मिठाई (मुरब्बा) बनाई जाती है. पेठे की मिठाई इतना अधिक प्रसिद्ध है कि इसे ही पेठा कहा जाने लगा है. इस फल का चित्र निम्न है.

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बाजरे के आटे का हलवा

बाजरा के आटे का हलवा

सर्दी के मौसम में आयरन, कैल्सियम, और फाइबर बाजरा हम परम्परागत रूप से खाते रहे हैं. कड़कड़ाती सर्दी परेशान करे तो गरमागर्म बाजरे का हलवा का आनन्द लीजिये

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Bajra halwa recipe

बाजरे का आटा - 1/2 कप (80 ग्राम)
चीनी - 1/2 कप (100 ग्राम)
घी - 1/3 कप (80 ग्राम)
काजू - 8-10
किशमिश - 20-25
नारियल - 1 टेबल स्पून (कटा हुआ)
इलायची - 4 - 5

विधि - How to make Bajra Halwa

पैन में घी डाल कर गरम कीजिये. घी के हल्का गरम होने पर बाजरे का आटा डाल दीजिए. धीमी और मध्यम आंच पर आटे को लगातार चलाते हुये, हल्का ब्राउन, कलर डार्क होने और अच्छी महक आने तक भून लीजिये.

अब इसमें 1¼ कप पानी डाल दीजिए और चीनी डाल कर अच्छी तरह से मिला दीजिए और मध्यम आग पर पकने दीजिए और तब तक पकाएं जब तक कि हलवा गाढ़ा न हो जाए.

काजू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए, इलायची छिलकर कूट कर पाउडर बना लीजिए.

हलवे के गाढा़ होने पर इसमें काजू, किशमिश, कटा हुआ नारियल और इलायची का पाउडर डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिला दीजिए और 2 मिनिट के लिए और पका लीजिए. बाजरे के आटे का स्वादिष्ट हलवा बनकर तैयार है, हलवा को प्याले में निकाल लीजिए.

ऊपर से थोडा़ सा घी और कटे हुये काजू डालकर सजाइये और परोसिये. बाजरे के आटे के हलवे को फ्रिज में रखकर के 3-4 दिनों तक आराम से खाया जा सकता है.

सुझाव:

हलवा में चीनी अपनी पसन्द के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है.

हलवा में अपने पसन्द के ड्राई फ्रूट जो आपको ज्यादा पसन्द हो वह ज्यादा डाल दीजिये और जो आप नहीं पसन्द करते उन्हैं हटा दीजिये.

4 सदस्यों के लिये
समय - 30 मिनिट


at May 22, 2021 No comments:
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good morning, breakfast , सूजी का हलवा

माइक्रोवेव में सूजी का हलवा

सूजी का हलवा बनाना इतना आसान ओर तुरत फुरत बन जाता है कि जब भी कुछ मीठा खाने का मन हो इसे बना लीजिये. माइक्रोवेव में यही सूजी का हलवा और भी अधिक आसानी से बन जाता है.

आवश्यक सामग्री - Ingredients for Sooji Sheera

सूजी - 1/2 कप
पिस्ते - 5-6 (पतले पतले बारीक काट लीजिये)
छोटी इलाइची - 4 (छील कर पाउडर बना लीजिये)
चीनी - आधा कप से थोड़ी सी ज्यादा
घी - 1/4 कप
बादाम - 6-7 ( छोटे छोटे काट लीजिये)
किशमिश - 1 टेबल स्पून (डंठल हटा दीजिये )
दूध - 1 1/4 कप

विधि How to make Semolina Halwa in Microwave

माइक्रोवेव में सूजी का हलवा बनाने के लिये, माइक्रोवेव सेफ प्याले में सूजी डालिये और आधा घी डालकर सूजी में मिक्स कर दीजिये.

सूजी को माइक्रोवेव में 4 मिनिट तक भून लीजिये, सूजी को पहले माइक्रोवेव में हाई पावर पर 2 मिनिट तक भूनिये, अब सूजी को अच्छी तरह चमचे से चलाइये और 1 मिनिट भूनिये और चलाइये और फिर से 1 मिनिट भूनिये, सूजी भुन कर तैयार हो जायेगी.

सूजी में दूध डालकर मिला दीजिये, चीनी भी डालकर मिक्स कर दीजिये और हलवा को 4 मिनिट के लिये माइक्रोवेव कीजिये, हाई पावर पर पहले 2 मिनिट माइक्रोवेव कीजिये, हलवा को चमचे से चला दीजिये, अब 1 मिनिट हलवा को माइक्रोवेव कीजिये और चला दीजिये, और 1 मिनिट हाई पावर पर ही माइक्रोवेव कीजिये और चलाइये.

इसके बाद हलवा में 2 चम्मच घी बचाकर सारा घी डाल दीजिये, मेवे बादाम, किशमिश और इलाइची पाउडर भी डालकर मिक्स कर दीजिये.

हलवा को ढककर मीडियम पावर पर 2 मिनिट माइक्रोवेव कीजिये. हलवा को माइक्रोवेव से निकालिये और 2 मिनिट तक ढककर स्टेन्डिग टाइम दीजिये, हलवा अभी भी पक रहा है. प्याले को खोलिये, हलवा तैयार है, सूजी के हलवा को प्लेट या प्याले में निकालिये हलवा के ऊपर पिघला हुआ घी डालिये और पिस्ते डालकर गार्निस कीजिये.

माइक्रोवेव में बना हुआ स्वादिष्ट सूजी का हलवा तैयार है. गरमा गरम सूजी का हलवा परोसिये और खाइये.


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क्षत्रिय यदुवंशी





यदुवंश

भारत में समुदाय

यदुवंश अथवा यदुवंशी क्षत्रिय शब्द भारत के उस जन-समुदाय के लिए प्रयुक्त होता है जो स्वयं को प्राचीन राजा यदु का वंशज बताते हैं। यदुवंशी क्षत्रिय मूलतः अहीर थे।[1] भारतीय मानव वैज्ञानिक कुमार सुरेश सिंह के अनुसार माधुरीपुत्र, ईश्वरसेन व शिवदत्त नामक कई विख्यात अहीर राजा कालांतर में राजपूतों मे सम्मिलित होकर यदुवंशी राजपूत कहलाए।[2] तिजारा के खानजादा मुस्लिम भी अपनी उत्पत्ति यदुवंशी राजपूतों से बताते हैं।[3] मैसूर साम्राज्य के हिन्दू राजवंश को भी यादव कुल का वंशज बताया गया है।[4][5] चूड़ासमा राजपूतों को भी विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों मे मूल रूप से सिंध प्रांत का आभीर,[6][7][8] या सिंध का यादव माना गया है, जो कि 9वीं शताब्दी में गुजरात में आए थे।[9]

जाहल, सोनल बाई के साथ देवत बोदार नामक अहीर सामंत का चूड़ासम राजकुमार नवघन की रक्षा हेतु स्वयं के पुत्र का वध करते हुये का ऐतिहासिक चित्र [10]

यदुवंश पौराणिक कथा

यदु ऋग्वेद में वर्णित पाँच भारतीय आर्य जनों (पंचजन, पंचक्षत्रिय या पंचमानुष) में से एक है।[11]

हिन्दू महाकाव्य महाभारत, हरिवंश व पुराण में यदु को राजा ययाति व रानी देवयानी का पुत्र बताया गया है। राजकुमार यदु एक स्वाभिमानी व सुसंस्थापित शासक थे। विष्णु पुराण, भगवत पुराण व गरुण पुराण के अनुसार यदु के चार पुत्र थे, जबकि बाकी के पुराणो के अनुसार उनके पाँच पुत्र थे।[12] बुध व ययाति के मध्य के सभी राजाओं को सोमवंशी या चंद्रवंशी कहा गया है। महाभारत व विष्णु पुराण के अनुसार यदु ने पिता ययाति को अपनी युवावस्था प्रदान करना स्वीकार नहीं किया था जिसके कारण ययाति ने यदु के किसी भी वंशज को अपने वंश व साम्राज्य मे शामिल न हो पाने का श्राप दिया था।[13] इस कारण से यदु के वंशज सोमवंश से प्रथक हो गए व मात्र राजा पुरू के वंशज ही कालांतर में सोमवंशी कहे गए। इसके बाद महाराज यदु ने यह घोषणा की कि उनके वंशज भविष्य में यादव या यदुवंशी कहलएंगे। यदु के वंशजों ने अभूतपूर्व उन्नति की परंतु बाद मे वे दो भागों मे विभाजित हो गए।

उत्पत्ति

यदुवंशी अहीर कृष्ण के प्राचीन यादव जनजाति के वंशज माने जाते हैं। यदुवंशियो की उत्पत्ति पौराणिक राजा यदु से मानी जाती है।

वे टॉड की 36 राजवंशो की सूची में भी शामिल हैं। [16]

विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों और पुराने लेखों से संकेत मिलता है कि भारत में उनकी मौजूदगी 6000 ई.पू. से भी पहले प्राचीन काल से है।

वंशज जातियाँ

राजा सहस्रजीत के वंश को हैहय वंश कहा गया व उनके पौत्र का नाम भी हैहय था। राजा क्रोष्टा के वंशजों को कोई विशेष नाम नही दिया गया वे समान्यतः यादव कहलाए।,पी॰ एल॰ भार्गव के अनुसार जब राज्य का विभाजन हुआ तो सिंधु नदी के पश्चिम का राज्य सहस्रजीत को मिला व पूर्व का भाग क्रोष्टा को दिया गया।

आधुनिक भारत की अनेक जातियाँ जैसे कि यादव, पंजाबी सैनी, आयर, जडेजा, भाटी राजपूत,जादौन, तथा अहीर इत्यादि स्वयं को यदु वंशज मानते हैं।

कुछ विद्वान चूड़ासमा, जाडेजा व देवगिरि के यादवो को आभीर ही मानते हैं।[29]

राजपूत, पांचवीं और छठी शताब्दीमें पहली बार चित्र में आये थे। इसलिए यह किसी की कल्पना और समझ से परे है कि कैसे करौली के यादव (अलवर जिले में), रतलाम (मध्य प्रदेश में) और बीकानेर के भाटी (राजस्थान) खुद को राजपूत जाति के साथ कैसे जोड़ते हैं। हालाँकि, यह संभव है कि विदेशी "मनगढ़ंत खानाबदोशों" द्वारा आक्रमण के दौरान और उनके द्वारा प्राप्त की गई लगातार जीत के चलते, छोटे यादव राज्योंने अन्य रियासतों के साथ गठन करते समय, अपनी पहचान विलय कर दी हो।



  • आभीर

    प्राचीन भारतीय महाकाव्यों और शास्त्रों में वर्णित लोग

  • देवगिरि के यादव

  • ग्वालवंशी

    हिन्दू जाति


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यदुवंशी महाराज परीक्षित जी के बाद कि वंशावलि

कलियुग वंशावली पुराणों पर आधारित विभिन्न राजाओं की वंशावली है। यहां यह वंशावली मौर्य वंश तक की दी जायेगी। यह भारत के इतिहास को प्राचीन वंशावली, जो द्वापर के अन्त तक ही सीमित थी, से आगे महाभारत के युग के पश्चात के काल में ले आती है।

कुरु वंश - महाभारत पर्यान्त वंशावलीसंपादित करें

  • परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव
    • सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव
    • सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव
    • हर्नामदेव | सुल्कन्देव |
  • जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वमेधदत्त
  • अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | चित्ररथ | शुचिद्रथ
  • वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस्
  • सुखीबल | परिप्लव | सुनय | मेधाविन् | नृपञ्जय | ध्रुव, मधु|तिग्म्ज्योती
  • बृहद्रथ | वसुदान |शत्निक (बुद्ध कालीन )|
  • उदयन | अहेनर | निरमित्र (खान्दपनी ) |क्षेमक

ब्रहाद्रथ वंशसंपादित करें

यह वंश मगध में स्थापित था।

  • सोमाधि | श्रुतश्रव | अयुतायु | निरमित्र | सुकृत्त
  • बृहत्कर्मन् | सेनाजित् | विभु | शुचि
  • क्षेम | सुव्रत | निवृति | महासेन
  • सुमति | अचल | सुनेत्र | सत्यजित् | वीरजित् | अरिञ्जय

मगध वंशसंपादित करें

  • क्षेमधर्म ६३९-६०३
  • क्षेमजित् ६०३-५७९
  • बिम्बसार ५७९-५५१
  • अजात्शत्रु ५५१-५२४
  • दर्शक ५२४-५००
  • उदायि ५००-४६७
  • शिशुनाग ४६७-४४४
  • काकवर्ण ४४४-४२४ ईपू

नन्द वंशसंपादित करें

  • उग्रसेन ४२४-४०४
  • पण्डुक ४०४-३९४
  • पण्डुगति ३९४-३८४
  • भूतपाल ३८४-३७२
  • राष्ट्रपाल ३७२-३६०
  • देवानन्द ३६०-३४८
  • यज्ञभङ्ग ३४८-३४२
  • मौर्यानन्द ३४२-३३६
  • महानन्द ३३६-३२४
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चाणक्य नीति भाग 15

पन्द्रहवां अध्याय

यस्य चितं द्रवीभूतं कृपया सर्वजन्तुषु ।
तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटाभस्मलेपनैः ।।१।।
1.वह व्यक्ति जिसका ह्रदय हर प्राणी मात्र के प्रति करुणा से पिघलता है. उसे जरुरत क्या है किसी ज्ञान की, मुक्ति की, सर के ऊपर जटाजूट रखने की और अपने शारीर पर राख मलने की
एकमेवाक्षरं यस्तु गुरुः शिष्यं प्रबोधयेत् ।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चानृणी भवेत् ।।२।।
2. इस दुनिया में वह खजाना नहीं है जो आपको आपके सदगुरु ने ज्ञान का एक अक्षर दिया उसके कर्जे से मुक्त कर सके.
खलानां कण्टकानां च द्विविधैव प्रतिक्रिया ।
उपानद् मुखभङ्गो वा दूरतैव विसर्जनम् ।।३।।
3. काटो से और दुष्ट लोगो से बचने के दो उपाय है. पैर में जुते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो की वो अपना सर उठा ना सके और आपसे दूर रहे.
कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणां बह्वाशिनंनिष्ठुरभाषिणां च ।
सूर्योदये वाऽस्तमिते शयानं विमुञ्चति श्रीर्यदि चक्रपाणिः ।।४।।
4.जो अस्वच्छ कपडे पहनता है. जिसके दात साफ़ नहीं. जो बहोत खाता है. जो कठोर शब्द बोलता है. जो सूर्योदय के बाद उठता है. उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जायेगा.
त्यजन्ति मित्राणि धनैर्विहीनं दाराश्च भृत्याश्च सुहृज्जनाश्च ।
तं चार्थवन्तं पुनराश्रयन्ते ह्यर्थो हि लोके पुरुषस्य बन्धुः ।।५।।
5.जब व्यक्ति दौलत खोता है तो उसके मित्र, पत्नी, नौकर, सम्बन्धी उसे छोड़कर चले जाते है. और जब वह दौलत वापस हासिल करता है तो ये सब लौट आते है. इसीलिए दौलत ही सबसे अच्छा रिश्तेदार है.
अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति ।
प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति ।।६।।
6.पाप से कमाया हुआ पैसा दस साल रह सकता है. ग्यारवे साल में वह लुप्त हो जाता है, उसकी मुद्दल के साथ.
अयुक्तं स्वामिनो युक्तं युक्तं नीचस्य दूषणम् ।
अमृतं राहवे मृत्युर्विषं शंकरभूषणम् ।।७।।
7.एक महान आदमी जब कोई गलत काम करता है तो उसे कोई कुछ नहीं कहता. एक नीच आदमी जब कोई अच्छा काम भी करता है तो उसका धिक्कार होता है. देखिये अमृत पीना तो अच्छा है लेकिन राहू की मौत अमृत पिने से ही हुई. विष पीना नुकसानदायी है लेकिन भगवान् शंकर ने जब विष प्राशन किया तो विष उनके गले का अलंकार हो गया.
तद्भोजनं यद् द्विजभुक्तशेषं
तत्सौहृदं यत्क्रियते परस्मिन् ।
सा प्राज्ञता या न करोति पापं
दम्भं विना यः क्रियते पापं
दम्भं विना यः क्रियते स धर्मः ।।८।।
8.एक सच्चा भोजन वह है जो ब्राह्मण को देने के बाद शेष है. प्रेम वह सत्य है जो दुसरो को दिया जाता है. खुद से जो प्रेम होता है वह नहीं. वही बुद्धिमत्ता है जो पाप करने से रोकती है. वही दान है जो बिना दिखावे के किया जाता है.
मणिर्लुण्ठति पादाग्रे काचः शिरसि धार्यते ।
क्रय विक्रयवेलायां काचः काचो मणिर्मणिः ।।९।।
9.यदि आदमी को परख नहीं है तो वह अनमोल रत्नों को तो पैर की धुल में पडा हुआ रखता है और घास को सर पर धारण करता है. ऐसा करने से रत्नों का मूल्य कम नहीं होता और घास के तिनको की महत्ता नहीं बढती. जब विवेक बुद्धि वाला आदमी आता है तो हर चीज को उसकी जगह दिखाता है.
अनन्तंशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पं च कालो बहुविघ्नता च ।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं, हंसो यथा क्षीरमिवम्बुमध्यात् ।।१०।।
10. शास्त्रों का ज्ञान अगाध है. वो कलाए अनंत जो हमें सीखनी छाहिये. हमारे पास समय थोडा है. जो सिखने के मौके है उसमे अनेक विघ्न आते है. इसीलिए वही सीखे जो अत्यंत महत्वपूर्ण है. उसी प्रकार जैसे हंस पानी छोड़कर उसमे मिला हुआ दूध पी लेता है.
दूरागतं पथि श्रान्तं वृथा च गृहमागतम् ।
अनर्चयित्वा यो भुङ्क्ते स वै चाण्डाल उच्यते ।।११।।
11. वह आदमी चंडाल है जो एक दूर से अचानक आये हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.
पठन्ति चतुरो वेदान् धर्मशास्त्राण्यनेकशः ।
आत्मानं नैव जानन्ति दवी पाकरसं यथा ।।१२।।
12.एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.c
धन्या द्विजमयि नौका विपरीता भवार्णवे ।
तरन्त्यधोगताः सर्वे उपरिस्थाः पतन्त्यधः ।।१३।।
13. वह लोग धन्य है, ऊँचे उठे हुए है जिन्होंने संसार समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली. उनकी शरणागति ने नौका का काम किया. वे ऐसे मुसाफिरों की तरह नहीं है जो ऐसे सामान्य जहाज पर सवार है जिसके डूबने का खतरा है.
अयममृतनिधानं नायकोऽप्यौषधीनां ।
अमृतमयशरीरः कान्तियुक्तोऽपि चन्द्रः ।।
भवति विगतरश्मिर्मण्डलं प्राप्य भानोः ।
परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति ।।१४।।
14. चन्द्रमा जो अमृत से लबालब है और जो औषधियों की देवता माना जाता है, जो अमृत के समान अमर और दैदीप्यमान है. उसका क्या हश्र होता है जब वह सूर्य के घर जाता है अर्थात दिन में दिखाई देता है. तो क्या एक सामान्य आदमी दुसरे के घर जाकर लघुता को नहीं प्राप्त होगा.
अलिरयं नलिनीदलमध्यगः कमलिनीमकरन्दमदालसः ।
विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते ।।१५।।
15. यह मधु मक्खी जो कमल की नाजुक पंखडियो में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, वह अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना ताव मारती है. क्यों की वह ऐसे देश में आ गयी है जहा कमल है ही नहीं, उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते है.
पीतः क्रुध्देन तातश्चरणतलहता वल्लभो येन रोषा-
दाबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी में ।
गेहं मे छेदयन्ति प्रतिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं
तस्मात्खिन्नासदात्हंद्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ।।१६।।
16. हे भगवान् विष्णु, मेरे स्वामी, मै ब्राह्मणों के घर में इस लिए नहीं रहती क्यों की.....
अगस्त्य ऋषि ने गुस्से में समुद्र को ( जो मेरे पिता है) पी लिया.
भृगु मुनि ने आपकी छाती पर लात मारी.
ब्राह्मणों को पढने में बहोत आनंद आता है और वे मेरी जो स्पर्धक है उस सरस्वती की हरदम कृपा चाहते है.
और वे रोज कमल के फूल को जो मेरा निवास है जलाशय से निकलते है और भगवान् शिव की पूजा करते है.

बंधनानि खलु सन्ति बहूनि प्रेमरज्जुकृतबन्धनमन्यत् ।
दारुभेदनिपुणोऽपिषण्डघ्निर्निष्क्रियोभवति पंकजकोशे ।।१७।।
17. दुनिया में बाँधने के ऐसे अनेक तरीके है जिससे व्यक्ति को प्रभाव में लाया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है. सबसे मजबूत बंधन प्रेम का है. इसका उदाहरण वह मधु मक्खी है जो लकड़ी को छेड़ सकती है लेकिन फूल की पंखुडियो को छेदना पसंद नहीं करती चाहे उसकी जान चली जाए.
छिन्नोऽपि चंदनतरुर्न जहाति गन्धं
वृध्दोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः
क्षीणोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः ।।१८।।
18. चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बुढा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता. उसी प्रकार ऊँचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों ना बसर करना पड़े.
उर्व्यां कोऽपि महीधरो लघुतरो दोर्भ्यां धृतो लीलया
तेन त्वांदिवि भूतले च ससतं गोवर्धनी गीयसे ।
त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रेण तद् गण्यते
किंवा केशव भाषणेन बहुनापुण्यैर्यशो लभ्यते ।।१९।।
19. रुक्मिणी भगवान् से कहती हैं हे केशव! आपने एक छोटे से पहाड को दोनों हाथों से उठा लिया वह इसीलिये स्वर्ग और पृथ्वी दोनों लोकों में गोवर्धनधारी कहे जाने लगे। लेकिन तीनों लोकों को धारण करनेवाले आपको मैं अपने कुचों के अगले भाग से ही उठा लेती हूँ, फिर उसकी कोई गिनती ही नहीं होती। हे नाथ! बहुत कुछ कहने से कोई प्रयोजन नहीं, यही समझ लीजिए कि बडे पुण्य से यश प्राप्त होता है।

at May 18, 2021 No comments:
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चाणक्य नीति भाग 16

स्त्री (यहाँ लम्पट स्त्री या पुरुष अभिप्रेत है) का ह्रदय पूर्ण नहीं है वह बटा हुआ है. जब वह एक आदमी से बात करती है तो दुसरे की ओर वासना से देखती है और मन में तीसरे को चाहती है.
The heart of a woman is not united; it is divided. While she is talking with one man, she looks lustfully at another and thinks fondly of a third in her heart.

मुर्ख को लगता है की वह हसीन लड़की उसे प्यार करती है. वह उसका गुलाम बन जाता है और उसके इशारो पर नाचता है.
 The fool (mudha) who fancies that a charming young lady loves him, becomes her slave and he dances like a shakuntal bird tied to a string.

ऐसा यहाँ कौन है जिसमे दौलत पाने के बाद मस्ती नहीं आई. क्या कोई बेलगाम आदमी अपने संकटों पर रोक लगा पाया. इस दुनिया में किस आदमी को औरत ने कब्जे में नहीं किया. किस के ऊपर राजा की हरदम मेहेरबानी रही. किसके ऊपर समय के प्रकोप नहीं हुए. किस भिखारी को यहाँ शोहरत मिली. किस आदमी ने दुष्ट के दुर्गुण पाकर सुख को प्राप्त किया.
Who is there who, having become rich, has not become proud? Which licentious (Free) man has put an end to his calamities (A grievous disaster)? Which man in this world has not been overcome by a woman? Who is always loved by the king? Who is there who has not been overcome by the ravages of time? Which beggar has attained glory? Who has become happy by contracting the vices of the wicked?

व्यक्ति को महत्ता उसके गुण प्रदान करते है वह जिन पदों पर काम करता है सिर्फ उससे कुछ नहीं होता. क्या आप एक कौवे को गरुड़ कहेंगे यदि वह एक ऊँची ईमारत के छत पर जाकर बैठता है.
A man attains greatness by his merits, not simply by occupying an exalted seat. Can we call a crow an eagle (garuda) simply because he sits on the top of a tall building.

जो व्यक्ति गुणों से रहित है लेकिन जिसकी लोग सराहना करते है वह दुनिया में काबिल माना जा सकता है. लेकिन जो आदमी खुद की ही डींगे हाकता है वो अपने आप को दुसरे की नजरो में गिराता है भले ही वह स्वर्ग का राजा इंद्र हो.
The man who is praised by others as great is regarded as worthy though he may be really void of all merit. But the man who sings his own praises lowers himself in the estimation of others though he should be Indra (the possessor of all excellences).

यदि एक विवेक संपन्न व्यक्ति अच्छे गुणों का परिचय देता है तो उसके गुणों की आभा को रत्न जैसी मान्यता मिलती है. एक ऐसा रत्न जो प्रज्वलित है और सोने के अलंकर में मढने पर और चमकता है.
If good qualities should characterise a man of discrimination, the brilliance of his qualities will be recognised just as a gem which is essentially bright really shines when fixed in an ornament of gold.

वह व्यक्ति जो सर्व गुण संपन्न है अपने आप को सिद्ध नहीं कर सकता है जबतक उसे समुचित संरक्षण नहीं मिल जाता. उसी प्रकार जैसे एक मणि तब तक नहीं निखरता जब तक उसे आभूषण में सजाया ना जाए.
Even one who by his qualities appears to be all knowing suffers without patronage; the gem, though precious, requires a gold setting.

मुझे वह दौलत नहीं चाहिए जिसके लिए कठोर यातना सहनी पड़े, या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े.
I do not deserve that wealth which is to be attained by enduring much suffering, or by transgressing the rules of virtue, or by flattering an enemy.

जो अपनी दौलत, पकवान और औरते भोगकर संतुष्ट नहीं हुए ऐसे बहोत लोग पहले मर चुके है. अभी भी मर रहे है और भविष्य में भी मरेंगे.
Those who were not satiated with the enjoyment of wealth, food and women have all passed away; there are others now passing away who have likewise remained unsatiated; and in the future still others will pass away feeling themselves unsatiated.

सभी परोपकार और तप तात्कालिक लाभ देते है. लेकिन सुपात्र को जो दान दिया जाता है और सभी जीवो को जो संरक्षण प्रदान किया जाता है उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता.
All charities and sacrifices (performed for fruitive gain) bring only temporary results, but gifts made to deserving persons (those who are Krishna consciousness) and protection offered to all creatures shall never perish.

घास का तिनका हल्का है. कपास उससे भी हल्का है. भिखारी तो अनंत गुना हल्का है. फिर हवा का झोका उसे उड़ाके क्यों नहीं ले जाता. क्योकि वह डरता है कही वह भीख न मांग ले.
 A blade of grass is light, cotton is lighter, the beggar is infinitely lighter still. Why then does not the wind carry him away? Because it fears that he may ask alms of him.

बेइज्जत होकर जीने से अच्छा है की मर जाए. मरने में एक क्षण का दुःख होता है पर बेइज्जत होकर जीने में हर रोज दुःख उठाना पड़ता है.
 It is better to die than to preserve this life by incurring disgrace. The loss of life causes but a moment's grief, but disgrace brings grief every day of one's life.

सभी जीव मीठे वचनों से आनंदित होते है. इसीलिए हम सबसे मीठे वचन कहे. मीठे वचन की कोई कमी नहीं है.
All the creatures are pleased by loving words; and therefore we should address words that are pleasing to all, for there is no lack of sweet words.

इस दुनिया के वृक्ष को दो मीठे फल लगे है. मधुर वचन और सत्संग.
There are two nectarean fruits hanging from the tree of this world: one is the hearing of sweet words (such as Krishna-katha) and the other, the society of saintly men.

पहले के जन्मो की अच्छी आदते जैसे दान, विद्यार्जन और तप इस जनम में भी चलती रहती है. क्योकि सभी जनम एक श्रुंखला से जुड़े है.
The good habits of charity, learning and austerity practised during many past lives continue to be cultivated in this birth by virtue of the link (yoga) of this present life to the previous ones.

जिसका ज्ञान किताबो में सिमट गया है और जिसने अपनी दौलत दुसरो के सुपुर्द कर दी है वह जरुरत आने पर ज्ञान या दौलत कुछ भी इस्तमाल नहीं कर सकता.
One whose knowledge is confined to books and whose wealth is in the possession of others, can use neither his knowledge nor wealth when the need for them arises.

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चाणक्य नीति भाग 15

पन्द्रहवां अध्याय

यस्य चितं द्रवीभूतं कृपया सर्वजन्तुषु ।
तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटाभस्मलेपनैः ।।१।।
1.वह व्यक्ति जिसका ह्रदय हर प्राणी मात्र के प्रति करुणा से पिघलता है. उसे जरुरत क्या है किसी ज्ञान की, मुक्ति की, सर के ऊपर जटाजूट रखने की और अपने शारीर पर राख मलने की
एकमेवाक्षरं यस्तु गुरुः शिष्यं प्रबोधयेत् ।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चानृणी भवेत् ।।२।।
2. इस दुनिया में वह खजाना नहीं है जो आपको आपके सदगुरु ने ज्ञान का एक अक्षर दिया उसके कर्जे से मुक्त कर सके.
खलानां कण्टकानां च द्विविधैव प्रतिक्रिया ।
उपानद् मुखभङ्गो वा दूरतैव विसर्जनम् ।।३।।
3. काटो से और दुष्ट लोगो से बचने के दो उपाय है. पैर में जुते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो की वो अपना सर उठा ना सके और आपसे दूर रहे.
कुचैलिनं दन्तमलोपधारिणां बह्वाशिनंनिष्ठुरभाषिणां च ।
सूर्योदये वाऽस्तमिते शयानं विमुञ्चति श्रीर्यदि चक्रपाणिः ।।४।।
4.जो अस्वच्छ कपडे पहनता है. जिसके दात साफ़ नहीं. जो बहोत खाता है. जो कठोर शब्द बोलता है. जो सूर्योदय के बाद उठता है. उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों न हो, वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जायेगा.
त्यजन्ति मित्राणि धनैर्विहीनं दाराश्च भृत्याश्च सुहृज्जनाश्च ।
तं चार्थवन्तं पुनराश्रयन्ते ह्यर्थो हि लोके पुरुषस्य बन्धुः ।।५।।
5.जब व्यक्ति दौलत खोता है तो उसके मित्र, पत्नी, नौकर, सम्बन्धी उसे छोड़कर चले जाते है. और जब वह दौलत वापस हासिल करता है तो ये सब लौट आते है. इसीलिए दौलत ही सबसे अच्छा रिश्तेदार है.
अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति ।
प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति ।।६।।
6.पाप से कमाया हुआ पैसा दस साल रह सकता है. ग्यारवे साल में वह लुप्त हो जाता है, उसकी मुद्दल के साथ.
अयुक्तं स्वामिनो युक्तं युक्तं नीचस्य दूषणम् ।
अमृतं राहवे मृत्युर्विषं शंकरभूषणम् ।।७।।
7.एक महान आदमी जब कोई गलत काम करता है तो उसे कोई कुछ नहीं कहता. एक नीच आदमी जब कोई अच्छा काम भी करता है तो उसका धिक्कार होता है. देखिये अमृत पीना तो अच्छा है लेकिन राहू की मौत अमृत पिने से ही हुई. विष पीना नुकसानदायी है लेकिन भगवान् शंकर ने जब विष प्राशन किया तो विष उनके गले का अलंकार हो गया.
तद्भोजनं यद् द्विजभुक्तशेषं
तत्सौहृदं यत्क्रियते परस्मिन् ।
सा प्राज्ञता या न करोति पापं
दम्भं विना यः क्रियते पापं
दम्भं विना यः क्रियते स धर्मः ।।८।।
8.एक सच्चा भोजन वह है जो ब्राह्मण को देने के बाद शेष है. प्रेम वह सत्य है जो दुसरो को दिया जाता है. खुद से जो प्रेम होता है वह नहीं. वही बुद्धिमत्ता है जो पाप करने से रोकती है. वही दान है जो बिना दिखावे के किया जाता है.
मणिर्लुण्ठति पादाग्रे काचः शिरसि धार्यते ।
क्रय विक्रयवेलायां काचः काचो मणिर्मणिः ।।९।।
9.यदि आदमी को परख नहीं है तो वह अनमोल रत्नों को तो पैर की धुल में पडा हुआ रखता है और घास को सर पर धारण करता है. ऐसा करने से रत्नों का मूल्य कम नहीं होता और घास के तिनको की महत्ता नहीं बढती. जब विवेक बुद्धि वाला आदमी आता है तो हर चीज को उसकी जगह दिखाता है.
अनन्तंशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पं च कालो बहुविघ्नता च ।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं, हंसो यथा क्षीरमिवम्बुमध्यात् ।।१०।।
10. शास्त्रों का ज्ञान अगाध है. वो कलाए अनंत जो हमें सीखनी छाहिये. हमारे पास समय थोडा है. जो सिखने के मौके है उसमे अनेक विघ्न आते है. इसीलिए वही सीखे जो अत्यंत महत्वपूर्ण है. उसी प्रकार जैसे हंस पानी छोड़कर उसमे मिला हुआ दूध पी लेता है.
दूरागतं पथि श्रान्तं वृथा च गृहमागतम् ।
अनर्चयित्वा यो भुङ्क्ते स वै चाण्डाल उच्यते ।।११।।
11. वह आदमी चंडाल है जो एक दूर से अचानक आये हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.
पठन्ति चतुरो वेदान् धर्मशास्त्राण्यनेकशः ।
आत्मानं नैव जानन्ति दवी पाकरसं यथा ।।१२।।
12.एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.c
धन्या द्विजमयि नौका विपरीता भवार्णवे ।
तरन्त्यधोगताः सर्वे उपरिस्थाः पतन्त्यधः ।।१३।।
13. वह लोग धन्य है, ऊँचे उठे हुए है जिन्होंने संसार समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली. उनकी शरणागति ने नौका का काम किया. वे ऐसे मुसाफिरों की तरह नहीं है जो ऐसे सामान्य जहाज पर सवार है जिसके डूबने का खतरा है.
अयममृतनिधानं नायकोऽप्यौषधीनां ।
अमृतमयशरीरः कान्तियुक्तोऽपि चन्द्रः ।।
भवति विगतरश्मिर्मण्डलं प्राप्य भानोः ।
परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति ।।१४।।
14. चन्द्रमा जो अमृत से लबालब है और जो औषधियों की देवता माना जाता है, जो अमृत के समान अमर और दैदीप्यमान है. उसका क्या हश्र होता है जब वह सूर्य के घर जाता है अर्थात दिन में दिखाई देता है. तो क्या एक सामान्य आदमी दुसरे के घर जाकर लघुता को नहीं प्राप्त होगा.
अलिरयं नलिनीदलमध्यगः कमलिनीमकरन्दमदालसः ।
विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते ।।१५।।
15. यह मधु मक्खी जो कमल की नाजुक पंखडियो में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, वह अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना ताव मारती है. क्यों की वह ऐसे देश में आ गयी है जहा कमल है ही नहीं, उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते है.
पीतः क्रुध्देन तातश्चरणतलहता वल्लभो येन रोषा-
दाबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी में ।
गेहं मे छेदयन्ति प्रतिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं
तस्मात्खिन्नासदात्हंद्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ।।१६।।
16. हे भगवान् विष्णु, मेरे स्वामी, मै ब्राह्मणों के घर में इस लिए नहीं रहती क्यों की.....
अगस्त्य ऋषि ने गुस्से में समुद्र को ( जो मेरे पिता है) पी लिया.
भृगु मुनि ने आपकी छाती पर लात मारी.
ब्राह्मणों को पढने में बहोत आनंद आता है और वे मेरी जो स्पर्धक है उस सरस्वती की हरदम कृपा चाहते है.
और वे रोज कमल के फूल को जो मेरा निवास है जलाशय से निकलते है और भगवान् शिव की पूजा करते है.

बंधनानि खलु सन्ति बहूनि प्रेमरज्जुकृतबन्धनमन्यत् ।
दारुभेदनिपुणोऽपिषण्डघ्निर्निष्क्रियोभवति पंकजकोशे ।।१७।।
17. दुनिया में बाँधने के ऐसे अनेक तरीके है जिससे व्यक्ति को प्रभाव में लाया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है. सबसे मजबूत बंधन प्रेम का है. इसका उदाहरण वह मधु मक्खी है जो लकड़ी को छेड़ सकती है लेकिन फूल की पंखुडियो को छेदना पसंद नहीं करती चाहे उसकी जान चली जाए.
छिन्नोऽपि चंदनतरुर्न जहाति गन्धं
वृध्दोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः
क्षीणोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः ।।१८।।
18. चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बुढा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता. उसी प्रकार ऊँचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों ना बसर करना पड़े.
उर्व्यां कोऽपि महीधरो लघुतरो दोर्भ्यां धृतो लीलया
तेन त्वांदिवि भूतले च ससतं गोवर्धनी गीयसे ।
त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रेण तद् गण्यते
किंवा केशव भाषणेन बहुनापुण्यैर्यशो लभ्यते ।।१९।।
19. रुक्मिणी भगवान् से कहती हैं हे केशव! आपने एक छोटे से पहाड को दोनों हाथों से उठा लिया वह इसीलिये स्वर्ग और पृथ्वी दोनों लोकों में गोवर्धनधारी कहे जाने लगे। लेकिन तीनों लोकों को धारण करनेवाले आपको मैं अपने कुचों के अगले भाग से ही उठा लेती हूँ, फिर उसकी कोई गिनती ही नहीं होती। हे नाथ! बहुत कुछ कहने से कोई प्रयोजन नहीं, यही समझ लीजिए कि बडे पुण्य से यश प्राप्त होता है।

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यहूदी ही यादव है

 महाभारत में छुपा है इसराइल के यहूदी धर्म का चौंकाने वाला रहस्य?

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यहां जो जानकारी दी जा रही है वह बाइबल और महाभारत के अलावा अन्य स्रोत पर आधारित है। जरूरी नहीं कि यह सच हो। यह शोध का विषय है। जिस तरह भगवान ब्रह्मा और प्रॉफेट अब्राहम, राजा मनु और प्रॉफेट नूह की कहानी में असाधारण रूप से समानता है उसी तरह मूसा और भगवान कृष्ण के जीवन में भी समानता है। समानताओं के आधार पर निश्‍चित ही यह कहा जा सकता है कि प्राचीनकाल में सभी धर्मों के रीति-रिवाज और नियम एक ही थे और संभवत: उक्त धर्मों की स्थापना किसी एक ही जाति समूह के लोगों ने की होगी। आओ जानते हैं इसी तरह की समानता को लेकर एक अन्य recommended by
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कहते हैं कि महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद गांधारी के शाप के चलते जब यदुवंशियों के बीच द्वारिका के प्रभाष क्षेत्र में मौसुल युद्ध हुआ तो उस समय कई यदुवंशी द्वारिका छोड़कर समुद्र के रास्ते पश्‍चिम की ओर भाग गए थे। भागकर वे शाम (सीरिया), अरब, मिस्र (इजिप्ट) होते हुए फिलिस्तीन, इसराइल पहुंच गए थे। यह घटना लगभग 3020 ईसा पूर्व की मानी जाती है। तभी से वहीं पर कुछ यदुवंशी रह रहे थे। उन्हीं यदुवंशियों ने इसराइल में एक नए साम्राज्य की स्थापना की। इधर, यदुवंशियों के कुछ समूह को अर्जुन बचाकर हस्तिनापुर ले जा रहे थे लेकिन रास्ते में दस्युओं के हमले से कई यदुवंशी मारे गए। बच गए थे तो श्रीकृष्ण की पत्नियां और उनका एक प्रपोत्र जिसका नाम व्रजनाभ था। व्रजनाभ से ही ब्रजमंडल प्रसिद्ध हुआ।

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जनश्रुति के अनुसार उधर इसराइल में बसे यदुवंशियों ने एक नए धर्म की स्थापना की जिसमें आगे चलकर ही अब्राह्म हुए। शोधकर्ताओं ने इसके बाद के यहूदी प्रॉफेट मूसा और श्रीकृष्ण की समानता पर शोध करके यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि यहूदी और हिन्दू धर्म में कितनी समानता है या कि यादवों के कारण ही यहूदी धर्म को यहूदी कहा जाता है। हालांकि इस पर और भी शोध किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि यह पूर्णत: सच नहीं हो सकता।
 
 
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण और मूसा और उनके भाई बलराम और हारून में बहुत हद तक समानता है, फिर भी दोनों अलग-अलग सभ्यताओं के जन्म देने वाले प्रॉफेट हैं। आओ हम जानते हैं कि उनमें क्या और किस तरह की समानताएं हैं?
 
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1. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के पहले अत्याचारी कंस के लिए आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की 8वी संतान तेरा वध करेगी। उसी तरह मूसा के जन्म के पहले मिस्र के राजा फराओ के लिए भविष्यवाणी की गई थी कि तेरा अंत राज्य में जन्मे एक व्यक्ति के हाथों होगा, जो जन्म ले चुका है।
 
 
2. आकाशवाणी सुनने के बाद कंस ने 8वीं संतान के उत्पन्न होकर गायब होने के बाद राज्य के सभी बच्चों को मारने का हुक्म दे दिया था। ठीक उसी तरह मिस्र के राजा ने भी राज्य के सभी बच्चों को मारने का हुक्म दे दिया था, जो 1 वर्ष से कम उम्र के थे।
 
3. हुक्म के पहले ही जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण को उनके पिता ने एक सूपड़े में रखकर नदी के पार नंद के यहां छोड़ दिया था, उसी तरह मूसा की माता ने मूसा को एक टोकरी में नदी में छोड़ दिया था। कुछ समय बाद मिस्र की रानी ने जब उस टोकरी को देखा तो उन्होंने उसमें से उस बच्चे को लेकर उसका पालन-पोषण किया। इस तरह श्रीकृष्ण और प्रॉफेट मूसा को दूसरी मां ने पाला।
 
 
4. जिस तरह श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम थे लेकिन प्रमुखता श्रीकृष्ण की थी, इसी तरह प्रॉफेट मूसा के बड़े भाई हारून थे लेकिन प्रसिद्धि प्रॉफेट मूसा को ही मिली।
 
5. भगवान श्रीकृष्ण के मुख से गीता की वाणी प्रकट हुई तो प्रॉफेट मूसा के मुख से यहूदी धर्म के 10 नियम निकले जिन पर यहूदी धर्म कायम है।
 
6. भगवान श्रीकृष्ण जिस तरह अपने लोगों के साथ मथुरा से निकलकर अपने पूर्वजों की भूमि द्वारका चले गए थे उसी तरह जब मूसा को पता चला कि मेरे पूर्वजों की भूमि तो बनी-इसराइल(यरुशलम) है, तो वे भी अपने सभी हिब्रू कबीले के लोगों को लेकर मिस्र से निकल गए थे। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक पलायन था।
 
 
7. श्रीकृष्ण के आखिरी दिनों में यदुवंशियों ने उनकी अवहेलना शुरू कर दी थी। कोई भी यदुवंशी उनकी बात नहीं मानता था और इसी कारण उनमें आपस में युद्ध हुआ और वे सभी मारे गए। इसी तरह मूसा की कहानी में भी यह पढ़ने को मिलता है कि बनी-इसराइल के लोगों ने बाद में मूसा के आदेश को मानने से इंकार कर दिया था जिसके कारण उनके कबीले में बिखराव हो गया था।
 
8. ऐसा कहते हैं कि प्रॉफेट मूसा जिस यहूदी जाति से हैं उस यहूदी जाति का नाम 'यदु' शब्द से ही निकला है। द्वारिका के जलमग्न होने और मूसा का कालखंड भी लगभग एक ही है। अरब के करीब बसे सीरिया का प्राचीन नाम शाम है, जो कृष्ण के श्याम नाम का ही अपभ्रंश है। इस तरह हमने देखा कि श्रीकृष्ण और प्रॉफेट मूसा में कितनी समानताएं हैं। श्रीकृष्ण और क्राइस्ट में भी ढेर सारी समानताएं देखने को मिलती है।
 
 
हालांकि यहूदी और ईसाई धर्म में हमें यह कहानी मिलती है-
 
बाढ़ के 350 साल बाद हज. नूह की वफात हो गई। नूह के स्वर्ग जाने के ठीक 2 साल बाद प्रॉफेट अब्राहम का जन्म हुआ। बाइबिल में जिसे उत्पत्ति कथा कहते हैं, उसे पुराणों में सृष्टि रचना कथा कहा गया है। ब्रह्मा के पुत्र और पौत्रों के वंश की कथा का विस्तार मिलता है। भारत की नदी सरस्वती के तट पर ही बैठकर वेद लिखे गए और यहीं पर ब्रह्मा और उनके पूर्वज रहते थे। कहते हैं कि जब सरस्वती नदी में तूफान शुरू हुआ तब प्रॉफेट अब्राहम के पिता अपने परिवार के साथ यह क्षेत्र छोड़कर उर प्रदेश में जाकर बस गए थे। प्रॉफेट अब्राहम के पिता का नाम तेरह था जिनकी 3 संतानें थीं अब्राहम, नाहूर और हराम। नूह के दूसरे बेटे शेम की नौवीं पीढ़ी में तेरह हुआ।
 
 
यहूदी धर्म की शुरुआत प्रॉफेट अब्राहम या अबराहम से मानी जाती है, जो ईसा से लगभग 2,000 वर्ष पूर्व हुए थे। पैगंबर अब्राहम के पहले बेटे का नाम हजरत इसहाक और दूसरे का नाम हजरत इस्माइल था। दोनों के पिता एक थे किंतु मां अलग-अलग थीं। हजरत इसहाक की मां का नाम सराह था और हजरत इस्माइल की मां हाजरा थीं।
 
इस्लाम के अनुसार प्रॉफेट अबराहम को पैगंबर अलै. इब्राहीम कहा जाता है। प्रॉफेट अब्राहम के पोते का नाम हजरत अलै. याकूब था। याकूब का ही दूसरा नाम इसराइल था। माना जाता है कि याकूब ने ही यहूदियों की 12 जातियों को मिलाकर एक सम्मिलित राष्ट्र इसराइल बनाया था। याकूब के एक बेटे का नाम यहूदा (जूदा) था। यहूदा के नाम पर ही उसके वंशज यहूदी कहलाए और उनका धर्म यहूदी धर्म कहलाया। हजरत अब्राहम को यहूदी, मुसलमान और ईसाई तीनों धर्मों के लोग अपना पितामह मानते हैं। आदम से अब्राहम और अब्राहम से मूसा तक यहूदी, ईसाई और इस्लाम सभी के पैगंबर एक ही हैं किंतु मूसा के बाद यहूदियों को अपने अगले पैगंबर के आने का अब भी इंतजार है।
 
 
यहूदी अपने ईश्वर को यहवेह या यहोवा कहते हैं। यहूदी मानते हैं कि सबसे पहले ये नाम ईश्वर ने हजरत मूसा को सुनाया था। ये शब्द ईसाइयों और यहूदियों के धर्मग्रंथ बाइबिल के पुराने नियम में कई बार आता है। यहूदियों की धर्मभाषा 'इब्रानी' (हिब्रू) और यहूदी धर्मग्रंथ का नाम 'तनख' है, जो इब्रानी भाषा में लिखा गया है। इसे 'तालमुद' या 'तोरा' भी कहते हैं। असल में ईसाइयों की बाइबिल में इस धर्मग्रंथ को शामिल करके इसे 'पुराना अहदनामा' अर्थात ओल्ड टेस्टामेंट कहते हैं। तनख का रचनाकाल ईपू 444 से लेकर ईपू 100 के बीच का माना जाता है।
 
 
ईसा से लगभग 1,500 वर्ष पूर्व अबराहम के बाद यहूदी इतिहास में सबसे बड़ा नाम 'पैगंबर मूसा' का है। मूसा ही यहूदी जाति के प्रमुख व्यवस्थाकार हैं। मूसा को ही पहले से ही चली आ रही एक परंपरा को स्थापित करने के कारण यहूदी धर्म का संस्थापक माना जाता है।
 
यहूदी धर्म का इतिहास करीब 6,000 साल पुराना माना जाता है। कहते हैं कि मिस्र के नील नदी से लेकर इराक के दजला-फरात नदी के बीच आरंभ हुआ यहूदी धर्म का इसराइल सहित अरब के अधिकांश हिस्सों पर राज था। प्रॉफेट मूसा से लेकर हजरत सुलेमान तक प्राचीन समय में ही यहूदियों का 'भारत' से गहरा संबंध रहा है। इस बात के कई प्रमाण मौजूद हैं। हालांकि क्या यादवों की एक शाखा से ही यहूदी धर्म की उत्पत्ति हुई है? यह शोध का विषय हो सकता है और इसे सच माना जाना कठिन है।

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