भारत में एक सबसे बड़ा झूठा दावा किया जाता है कि अंबेडकर ने दलितों और आदिवासियों को अधिकार दिलाया‼️
पर वास्तविकता ये है कि अंबेडकर दलितों को वोट देने के पक्ष में थे लेकिन आदिवासियों के बारे में उनका विचार यह था
Ambedkar clearly states on Aboriginal Tribes (आदिवासी/जनजाति, आज के Scheduled Tribes):
"The Aboriginal Tribes have not as yet developed any political sense to make the best use of their political opportunities and they may easily become mere instruments in the hands either of a majority or a minority and thereby disturb the balance without doing any good to themselves."
उन्होंने इनको वोट का अधिकार देने या सामान्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने से भी इनकार कर दिया।
उनके हिसाब से दलित समझदार है लेकिन आदिवासी नहीं अगर उन्हें कोर्ट का अधिकार मिला तो वह इसका दुरुपयोग कर सकते है
आज उन्हें फालतू में झूठ बोलकर आदिवासियों का भगवान बनाया जा रहा है
।आज Aboriginal Tribes (Scheduled Tribes) में कौन-कौन सी मुख्य जातियां/समुदाय आते है
भारत में 700+ notified Scheduled Tribes हैं (कुल आबादी ~8.6%)। राज्य-wise लिस्ट अलग-अलग है, लेकिन प्रमुख:
भिल (Bhil) - राजस्थान, गुजरात, MP, MH
गोंड (Gond) - MP, MH, छत्तीसगढ़, आंध्र
संthal (Santhal) - झारखंड, ओडिशा, बिहार, WB
मुंडा, ओरांव, हो - झारखंड क्षेत्र
मीणा (Meena) - राजस्थान
पूर्वोत्तर: नागा, मिजो, खासी, बोरो आदि।
अन्य: बैगा, सहारिया, जारावा (अंडमान) आदि।
Ambedkar Dalits के लिए लड़ सकते थे क्योंकि वे "सेंसिबल" मानते थे, लेकिन आदिवासियों को "not developed any political sense" कहकर अलग रखना चाहते थे।
आज के आदिवासियों से प्रश्न है कि क्या वह दलितों से कम परिपक्व थे जो उन्हें उस समय वोट के अधिकार की जरूरतनहीं थी
अंबेडकर कैसे तुम्हारे मसीहा हुए
मसीहा थे या एक शत्रु?