सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!!
"ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इसे 12 घण्टे पकाकर उस पर टूट पड़ो।"
जब सबसे बड़ी पार्टी होती थी तब यही उनकी पसंद की डिश थी। यह एकमात्र ऐसा क्रिएटिव अविष्कार है जो उनके देशों में विकसित हुआ।
इसके अलावा..... 
जहां पानी का नामोनिशान नहीं था, एक जलस्रोत के लिए लाखों लोग कत्ल किये गए, जहां हरियाली की कमी को हरे रंग से पूरा किया गया, जहां स्नान और मुंह धोने तक को पानी नहीं था, उन्होंने फव्वारा बना दिया!! न ग्रेविटी का ज्ञान न भूगोल न खगोल।
पृथ्वी की गतियों को अब भी नकारते हैं और फव्वारा बना गये!!
जहां शौच जाने के बाद गुदा को रेत पर रगड़ा जाता था क्योंकि वहाँ पानी बहुत कीमती था। और यदि रेत गर्म है तो मरे हुए ऊंट की घुटने वाली चिकनी हड्डी से पौंछने का विधान है क्योंकि पत्थर वहां थे ही नहीं।
पत्थर थे ही नहीं लेकिन उन्होंने विशाल भवनों के आर्किटेक्ट दिमाग में रखे, यह कैसे सम्भव है?
जहां चावल तो क्या, गेहूँ और मक्का तक नहीं होता था, खेती के नाम पर यहूदियों के बगीचों में कंटीले खजूर थे, उन्होंने 17 मसालों वाली बिरियानी खोज ली.... है न जादू!!
जहां लिखने वालों की सर्वश्रेष्ठ कल्पना भी शहद, शराब और मानव देह तक उड़ कर शांत हो गई, उन्होंने मार्बल, बगीचे और विज्ञान की खोज की होगी।
जिन्हें कभी घोड़े और ऊँट से नीचे उतरने की फुर्सत भी नहीं मिली उन्होंने 20-20 वर्ष में बनने वाले स्ट्रक्चर बनाये होंगे!!
जिनके घर का दूसरा तल्ला भी कभी नहीं बन सका उन्होंने कुतुबमीनार बनवा दी!
जिनकी किताब में लूट, खसोट, धोखा देने के तरीके और नियमों की भरमार है, वे ज्यामिति या नैतिकता के सौंदर्य बोध को समझेंगे?
जिन्हें नशा, वासना और कामुकता का इतना ज्वार था कि स्त्री को मात्र भोग्या के, अन्य कोई उपाधि ही नहीं दे सके और स्त्रियों का इतना अकाल था कि उनकी कमी छोटे नर बालकों से पूरी की जाती थी।
मुगलिया स्ट्रक्चर और मुगल स्थापत्यकला विशुद्ध वामपंथी प्रोपेगेंडा था जो इन्होंने भारतीय इतिहास में आरोपित कर दिया।
   आज आपको सच इसलिए लगता है क्योंकि आपने मास्टरी की परीक्षा देने से पहले वामपंथी चापलूसों द्वारा सुझाये गये, उन्हीं द्वारा स्थापित GK(जीके) में इसे बार बार पढ़ा है।
और आप क्लर्क से लेकर आईएएस भी तभी बन पाए, जब आपने इसे एकदम सच माना।
चारों तरफ युद्ध के माहौल से घिरे एक गुलाम 1206 से 1210 तक चार साल शासन करने वाले कुतुबुद्दीन ऐबक ने 72.5 मीटर ऊंची मीनार बनवा दी!! (जय जीके, जय कोचिंग)

अगर सच्चाई ही जाननी है तो उनके स्वयं के लिखे दस्तावेजों को ही खंगाल दीजिये जिनमें वे स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि उनके नाम पर जो जो भी स्थापित है, या तो वह लूट का माल है अथवा जबर्दस्ती का कब्ज़ा। जो सभी लुटेरों में बराबर का बांटेगा । औरतें भी और हां स्त्री को माल इन अमन पसन्द लोगों ने ही बनाया, जिन के यहां खुद की बेटी , बहन , मां , भाभी और बहू के साथ भी अपने बाग का फल खुद ही खाने और  हलाला के नाम पर रातें बीता सकतें हैं वो स्त्री को माल ही समझेंगे।
  
    जय हिंद 🇮🇳🇮🇳 राष्ट्रवादी

सनातनी योद्धा भाइयों और बहनों ध्यान दो

लड़का एक पैदा करेंगे, कोठी 04 बनाएंगे,
फिर झाडू पौछा औऱ घर में काम वाली बाई रेहाना औऱ नफीसा को रखेंगे!

साइकिल, स्कूटर औऱ कार क़ी मरम्मत कल्लन औऱ मुश्ताक से करवायेंगे, बाल व दाढ़ी जुम्मन मियाँ से बनवाएंगे!

दूध रफीक औऱ शफीक से लेंगे, कपडे हुसैन और महबूब से सिलवाएंगे, नफीस के प्रेस में शादी का कार्ड छपवायेंगे, मेहंदी सहनवाज और शान मोहमद से लगाएंगे, आजाद का 50 हजार का बैंड बजवाएंगे, मुनव्वर की आतिशबाजी छुड़वाएंगे, बग्गी रईस की करेंगे,
टेंट रशीद का करेंगे, बस खालिद भाई की करेंगे, नाई फरीद को बुलाएंगे!

फिर अपनी लुगाइयों को,
आधे कपड़े पहना कर उनके बीच में सड़कों पर ठुमके लगवाएंगे!

फिर दारू पीकर 100,200, 500, 2000 हजार रू० के नोट बरसाएंगे,
Social Media पर जिहाद जिहाद चिल्लाएंगे, बढ़ती मुस्लिम आबादी का शोर मचाएंगे,

बन्द करो यह फालतू का रोना धोना,अगर हिंदुत्व की वास्तव में चिंता करते हो तो यह प्रतिज्ञा करो कि हिन्दू विरोधी को आज से कोई भी आर्थिक लाभ नहीं देंगे,

जब किसी मुस्लिम फकीर के पास न जमीन है न नौकरी फिर वह कैसे 14 बच्चे पाल रहा है क्योंकि तुम रोज उसकी झोली में 50 किलो आटा भर देते हो, इस आटे को खाकर ही वह 14 बच्चे बनाता है व रोज गाय का मांस लाता है
मुस्लिम आबादी का 05% प्रतिशत भाग फकीरों का है यानि देश में एक करोड़ जिहादियों की आबादी हमारे दिए आटे से पल व बढ़ रही है।

कल से इन जिहादियों को केवल भीख देनी ही बन्द करके देख लो न आबादी बढ़ा पाएंगे न जिहाद चला पाएंगे

देश की दुर्दशा का प्रमुख घटक खुद हिंदू है

मकान बनाओगे कलीम से
प्लंबर होगा अनीश
इलेक्ट्रीशियन होगा फारुख
कारपेंटर होगा सलीम
अगर ऐसे ही इन जिहादियों को रोजगार देते रहोगे तो कुछ वर्षों के बाद सिवाय हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं  बचेगा

जागो हिन्दू जागो
अभी नहीं तो फिर कभी नहीं

लंदन के बस चालक का जवाब सुनिए... रोचक लेकिन सच्ची घटना

एक अरब मुस्लिम लन्दन में एक बस में चढ़ा और उसने बस चालक से अनुरोध किया कि "बस में बज रहे पाश्चात्य संगीत (Western Music) को तत्काल बन्द कर दे।"

बस चालक ने इसका कारण पूछा तो अरब मुस्लिम ने कहा कि "इस्लाम की शिक्षा के अनुसार संगीत सुनना हराम है क्यूँ कि प्यारे नबी के समय संगीत नहीं था और विशेष रूप से पाश्चात्य संगीत।"

बस चालक ने विनम्रतापूर्वक रेडियो बन्द कर दिया!

बस का दरवाज़ा खोला और अरब मुस्लिम को बस से नीचे उतर जाने का निवेदन किया!

अरब मुस्लिम ने इसका कारण पूछा

बस चालक ने विनम्रता से उत्तर दिया - "हे अरबी भाई! प्यारे नबी के समय कोई टेक्सी नहीं थी, कोई बस नहीं थी, कोई बम नहीं थे, हवाई जहाजों का अपहरण करने वाले नहीं थे, मस्जिद में शोरगुल मचाने वाले लाउडस्पीकर नहीं थे, कोई आत्मघाती हमले नहीं होते थे, आर डी एक्स नहीं था, AK 47 नहीं थी, सर्वत्र केवल शान्ति थी

इस्लामियत के नाम पर दोहरी चाल कहीं और जाकर चलाओ। चुपचाप नीचे उतर जाओ और गंतव्य तक पहुँचने के लिए ऊँट का इन्तजार करो

नानक से पहले कोई सिक्ख नहीं था!
जीसस से पहले कोई ईसाई नहीं था! 
मुहम्मद से पहले कोई मुसलमान नहीं था!
ऋषभदेव से पहले कोई जैनी नहीं था! 
बुद्घ से पहले कोई बौद्ध नहीं था!
कार्ल मार्क्स से पहले कोई वामपंथी नहीं था! 

लेकिन :
कृष्ण से पहले राम
राम से पहले जमदग्नि
जमदग्नि से पहले अत्री
अत्री से पहले अगस्त्य
अगस्त्य से पहले पतंजलि
पतंजलि से पहले *कणाद
कणाद से पहले *याज्ञवल्क्य
याज्ञवलक्य से पहले...  
सभी "सनातन वैदिक" धर्मी थे..!

 "राजनीतिक शतरंज" की इन चालों को, ध्यान से समझें 

01. मुगल," "भारतीय" बन गए और, "भारतीय" "काफ़िर"

02. मोमिन "कश्मीरी" बन गए
और, "कश्मीरी पंडित", "शरणार्थी"

03. "बांग्लादेशी"- "बंगाली" बन गये
और, "बंगाली", "बाहरी हिन्दू"

04. सैनिको के "हत्यारे" और "पत्थर बरसाने वाले "आंदोलनकारी" बन गए और,"सेना", 
"मानवाधिकार उल्लंघनकारी"

05. "टुकड़े- टुकड़े गैंग", "देशभक्त" बन गया और, "देशभक्त", ब्रांडेड कट्टर अतिवादी

06. "चिता की लकड़ी", पर्यावरणीय चिंता" बन गई और, "दफनाने" में "बर्बाद होने वाली भूमि", "जन्मसिद्ध अधिकार" हो गई

07. "राखी" में इस्तेमाल किया गये "ऊन" से, "भेड़" को "चोट" पहुंची और "बकरीद" में "हजारों बकरियों" का "कत्ल", "धार्मिक स्वतंत्रता" बन गया

08 "तुष्टिकरण", "धर्मनिरपेक्ष" हो गया
जबकि, "समानता", "कम्यूनल" हो गई

9. "आरएसएस", "आतंकवादी" बन गया
और, "ओसामा जी"..., "हाफिज साहेब" और -"हुर्रियत", "शांति के शिखर"

10. “भारत माता की जय”, "सांप्रदायिक" हो गया" और, “भारत तेरे टुकडे होंगे,” "फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन हो गया"

ऐसे ही सोए रहे
तो - पता भी नही चलेगा?
कब "आतंकी" देश के "नागरिक" बन गए

अब केवल पढ़ेंगे या RT LIKE करके आगे भी बढ़ायेंगे 🤦

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (#कोयरी) अनपढ़ हैं

जन सुराज के प्रेस वार्ता में बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर जो आरोप लगाए थे उससे जुड़े तथ्य ⬇️

@IndiaToday ने November 29, 1999 को इसे अपने आर्टिकल में रिपोर्ट किया है।

Reporter: Sanjay Jha

तब के राज्यपाल सूरजभान जी ने न सिर्फ सम्राट चौधरी जी को बर्खास्त किया बल्कि Fraud और Forgery (गलत आयु, नाम) के लिए FIR दर्ज करने के लिए निर्देश दिया था।

इसके साथ ही मंत्री के तौर पर वेतन, भत्ता वसूल किए जाने का निर्देश दिया था।

इसके पश्चात उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त (बिहार) बसु साब ने बिहार के अगले राज्यपाल को समर्पित रिपोर्ट में कहा कि सम्राट चौधरी ने जांच में सहयोग नहीं किया और अपनी सही उम्र भी साबित नहीं कर सके।

BJP के नए चरित्रवान मुख्यमंत्री जी कुंडली है..

indiatoday.in/magazine/state…

@jansuraajonline @PrashantKishor
@UdaySinghJS @ManojBhartiJSP
@samrat4bjp @BJP4Bihar @BJP4India @narendramodi @AmitShah @ANI @ians_india @TheNewspinch @Abhinav_Pan @News18Bihar @BiharTakChannel @Live_Cities @ABPNews

#लव_जिहाद, हिंदुओं को समाप्त करने की पुरजोर तरीका

एक हिंदू ब्राह्मण परिवार की महिला की मुलाकात फेसबुक पर नवीन राणा नाम के एक व्यक्ति से हुई। जाति आधारित पारिवारिक प्रतिबंधों के कारण, वह उसके साथ इंदौर से दिल्ली भाग गई।

वहाँ पहुँचने पर उनकी मुलाकात नवीन के मित्र शाहनवाज से हुई, जिन्होंने दावा किया कि उनके पास रहने की कोई जगह नहीं है और उन्हें उत्तर प्रदेश के फुलत में मौलाना कलीम सिद्दीकी द्वारा संचालित एक मदरसे में भेज दिया।

महिला ने मदरसे को एक उच्च सुरक्षा सुविधा के रूप में वर्णित किया, जहाँ महिलाओं को बाहर जाने की मनाही थी। आगमन के कुछ ही समय बादः

उसे नवीन से अलग कर दिया गया और उसका फोन छीन लिया गया, जिससे उसके पास अपने परिवार से संपर्क करने का कोई साधन नहीं बचा।

उन्हें मेरठ के एक अन्य मदरसे में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्हें बताया गया कि उन्हें कई दिनों तक रहना होगा।

नवीन अंततः संक्षिप्त रूप से उससे मिलने गया, लेकिन केवल उसे यह सूचित करने के लिए कि वह अब "घर से बहुत दूर" है और उसे इस्लाम का अध्ययन करना चाहिए और निकाह (विवाह) करना चाहिए।

महिला का आरोप है कि उसे व्यवस्थित रूप से "यातना" दी गई, जिसमें उसे जबरन कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और तहज्जुद के लिए सुबह 4:00 बजे जगाया गया।

उसका दावा है कि हिंदू लड़कियों को भेदभावपूर्ण व्यवहार का शिकार बनाया जाता था। जहाँ अन्य लड़कियों को बेहतर भोजन मिलता था, वहीं उसे नाश्ते में केवल चाय और बाकी भोजन में केवल चावल /रोटी चटनी के साथ दी जाती थी।

मदरसे के अधिकारियों ने उसे स्पष्ट रूप से बताया कि उसके भोजन और उपचार में तभी सुधार होगा जब वह इस्लामी आयतों, नमाज़ और कुरान को सफलतापूर्वक याद कर लेगी।

नवीन राणा के लापता होने के बाद, फुलत मदरसा के मौलाना कलीम सिद्दीकी ने उस महिला का विवाह एक दूसरे मौलाना से करवा दिया।

उन्हें मुजफ्फरनगर ले जाया गया। उनके पति घर से बाहर जाते समय उन्हें पूरी तरह से ताला लगाकर रखते थे।

उसके द्वारा उसका विश्वास जीतने और भागने का रास्ता खोजने के प्रयासों के बावजूद, अंततः उसने उसे तलाक दे दिया और उसे फुलत मदरसा वापस भेज दिया।

मदरसे के अधिकारियों ने उससे कहा कि वह कभी भी अपने ब्राह्मण परिवार में वापस नहीं लौट सकती क्योंकि वे अब उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्हें सख्त नकाब/पर्दा पहनने के लिए मजबूर किया गया था, जिसमें नाखून तक दिखाई नहीं देते थे; उन्हें हर समय दस्ताने और मोजे पहनने पड़ते थे।

उसकी दूसरी शादी एक अलग स्थान पर हुई।

उनकी कहानी निकाह हलाला के एक परेशान करने वाले चक्र का विवरण देती है। पति अपने साले (जीजा) की शादी करवाता था और फिर उसे तलाक दे देता था ताकि वह खुद उससे दोबारा शादी कर सके।

वह अपने जीवन के इस दौर में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की संलिप्तता का उल्लेख करती हैं।

2019 में, उनकी शादी एक हाफ़िज़-ए-कुरान से हुई थी, जिसने झूठ बोला था और दावा किया था कि उसकी पहली पत्नी की मृत्यु हो गई है।

उसने उसे चार साल तक अपने पास रखा। एक और तलाक के बाद, उसके परिवार ने उसे एक कमरे में ही कैद कर दिया।

अंततः उसने उसे एक गुप्त फ्लैट में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ उसने अपने बहनोई के साथ मिलकर उससे दोबारा शादी करने के लिए हलाला अनुष्ठान किया।

एक महिला मित्र ने उसे भागने के लिए आवश्यक साहस और समर्थन प्रदान किया।

उसने पुलिस स्टेशन में हलाला और वर्षों से हो रहे दुर्व्यवहार का ब्योरा देते हुए शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, उसका आरोप है कि थाने के एसएचओ (स्टेशन हाउस ऑफिसर) ने मामले को साधारण "पति-पत्नी विवाद" में बदल दिया क्योंकि आरोपी धनी है, एक बड़ा स्कूल/मदरसा चलाता है, और कथित तौर पर एफआईआर दर्ज कराने में रिश्वत का इस्तेमाल किया।

उनका मामला फिलहाल अदालत में लंबित है। न्याय अवश्य मिलेगा।

लव जिहाद कोई सिद्धांत नहीं है... यह हिंदू लड़कियों की जिंदगी तबाह कर देता है।

"प्यार के वेश में किया गया विश्वासघात आत्मा पर एक ऐसा घाव छोड़ जाता है जो कभी नहीं भरता"

LPG gas ⛽ के लिए हाहाकार

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है।😡
भारत कभी विकसित या विश्वगुरु नहीं बन सकता क्योंकि भारत चूतियों का देश है, भारत गधों का देश है, भारत प्रचंड मूर्खों का देश है, भारत स्वार्थी और पागलों का देश है

LPG गैस सिलेंडर के नाम पर ऐसे रंडी रोना किया जा रहा है, जैसे सामूहिक शोक हो गया हो

दूसरे देशों में युद्ध छिड़ा है तो भारत के लोगों का गैस के नाम पर रो-रोकर बुरा हाल है

जरा सोचिए कि अगर अपना देश महीने भर के लिए युद्ध में चला जाए तो ये लोग क्या करेंगे ?

अमेरिका, इजरायल, ईरान में युद्ध हो रहा है तो मोदी क्या करे ? सेना लेकर कूद जाए भेंचो कि हमारे तेल के भेजो, बाद में फिर लड़ लेना क्योंकि हमारे लोगों को सिलेंडर सुलगाकर उस पर पिछवाड़ा सेंकना है

जरा भी कॉमनसेंस नहीं है भारत की बड़ी आबादी में

जब भारत LPG का 60% हिस्सा आयात करता है और खाड़ी देशों में युद्ध छिड़ा है तो थोड़ा बहुत क्राइसिस होगा ही, फिर गैस एजेंसिया क्राइसिस को बढ़ावा देंगी, फिर विपक्षी नेता इस क्राइसिस को और बढ़ावा देंगे और जनता LPG के नाम पर हाय हाय मोदी मर जा तू कहते हुए दहाड़ें मारकर रोएगी

5-7 साल पहले दिल्ली के अफ़वाह उड़ी कि नमक खत्म हो गया तो आधी दिल्ली परचूनी/किराना की दुकानों पर लाइन में लग गई थी और 50-50 किलो नमक ख़रीदकर घरों में रख लिया था

हम नमक के लिए रोने लगते हैं, प्याज के नाम पर रोते हैं, LPG के लिए रो रहे हैं और फिर भी कहते हैं कि हम तो विश्वगुरु और विकसित बनेंगे

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है

भारत के आधे लोग ईरान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन वहां भयानक महंगाई है, जरूरत की तमाम चीजें नहीं मिल रही हैं. आपको ईरान का समर्थन करना है कि ईरान युद्ध के कारण LPG संकट आ गया तो रोने लगे भेंचो

आधे लोग इजरायल का समर्थन कर रहे हैं, वहां ईरान ताबड़तोड़ बम और मिसाइलें मार रहा है, भयानक तबाही मची है. आपको इजरायल का समर्थन करके बहादुर बनना है लेकिन LPG संकट के नाम पर रंडी रोना भी करना है

भाई, भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के हर देश में ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा पदार्थों का संकट आया है तो इस समय रोने की नहीं धैर्य की जरूरत है

मोदी पेशाब करके क्रूड आयल पैदा नहीं कर देगा जिससे पेट्रोल, डीजल या LPG बन सके

या मोदी के बदले राहुल को Pm बना दो तो भी वो आपके घरों में गैस से भरे सिलेंडर नहीं भेज देंगे क्योंकि क्रूड तो उनकी पेशाब से भी नहीं निकलेगा, वहां से भी मूत निकलेगा

पूरे देश को पैनिक मोड में लाकर खड़ा कर दिया है भेंचो

इसमें एक बड़ा वर्ग उन लोगों का है, जिनके पास 5/7 साल पहले तक गैस सिलेंडर नहीं थे, मोदी ने ही दिए और मोदी के दिए हुए सिलेंडर ही मोदी पर भारी पड़ रहे हैं

तुम दूसरे देशों के बीच युद्ध के कारण इस तरह रो रहे हो और तुम चाहते हो कि तुम्हें पाकिस्तान के साथ युद्ध करके कश्मीर दे दिया जाये, बलूचिस्तान, सिंध, गिलगिट बाल्टिस्तान को आजाद कराया जाए

अबे अगर ऐसा करने का सोचा भी तो तुम संसद और PM आवास घेर लोगे नामक, तेल, आटा या किसी अन्य चीज के नाम पर

भारत जैसे महान देश में कैसे विशुद्ध पगलैट पब्लिक पैदा होती है यार 

अरे सिलेंडर मिल जायेगा यार और अगर कालाबाजारी के कारण न भी मिले तो इंडेक्शन ले लो, इंडेक्शन न मिले तो कुछ चूल्हे पर पका लेना

देश के प्रति कुछ तो दायित्व निभाओ

ये देश सिर्फ उनका ही नहीं है जो सीमा पर मर जाते हैं, ये देश आपका भी है और सिर्फ वोट देकर आप अपने दायित्व की इतिश्री नहीं कर सकते

जब संकट भी घड़ी हो आपको भी सैनिक बनकर किसी युद्ध लड़ना पड़ सकता है

हरिओम पंवार साहब ने लिखा है

क्या ये देश उन्हीं का है जो सीमा पर मर जाते हैं
अपना लहू बहाकर टीका सरहद पर कर जाते हैं
ऐसा युद्ध वतन की ख़ातिर सबको लड़ना पड़ता है
संकट की घड़ियों में सबको सैनिक बनना पड़ता है
जो भी क़ौम वतन की ख़ातिर लड़ने को तैयार नहीं
उसकी संतति को आजादी जीने का अधिकार नहीं।😐

यहूदी

My heart is with Israel!! ❣️

बेंजामिन नेतन्याह के भाषण का अंश:--

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास न कोई देश था न कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65000 थें। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमलें होतें रहे, होते रहे। लेबनान, सीरिया, इराक़, जॉर्डन,मिश्र, लीबिया, सऊदी, अरब जैसे कई देशों ने हमारे उपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे, किंतु हम बच गए।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमें धरती दी,
वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। 
हमने उसको भी अपने खून से सींचा। 
हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सबकुछ था। 
हम कुछ नहीं भूलें। हम फिर इन से बच गए। 
हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए।
हम अरब से बच गए। 
हम सद्दाम हुसैन से बच गए। 
हम गद्दाफी से बच गए। 
हम हमास से भी बचेंगे, 
हम हिज्बुल्लाह से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरुसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 
39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया..
लेकिन हम अपने जेरुसलम को कभी नहीं भूले वह हमारे हृदय में हैं, वह हमारे मस्तिष्क में हैं और जब तक हम रहेंगे जेरुसलम हमारी आत्मा में रहेगा। 
संसार यें याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिश्र, लेबनान, वेवीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गयें है। 
हम फिर भी बचे रहें।

हमें वे (इस्लाम) खत्म करना चाहते हैं। 
उन्होंने हमारें रस्म रिवाज को कब्जाया। 
उन्होंने हमारें उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारें पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिया गया, सोलोमन, सुलेमान हो गया, डेविड, दाऊद बना दिया गया। मोजेज मूसा कर दिया गया। फिर एक दिन उन्होंने कहा - तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे नहीं स्वीकार किया। करते भी कैसे ? उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा स्वीकार करो़, कबूल लो। हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहर को कब्जाया गया। 
हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम क़त्ल हुए,भगा दिए गए।

मक्का के काबा में हम दों लाख थें, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर क़त्ल किया गया। 
फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। 
हम तीन लाख थें मार दिए गए इराक़ में हम दों लाख थें, तुर्की में चार लाख हमें मारा जाता रहा, मारें जाता रहा। वें हमें मार रहे हैं, मारते जा रहें हैं। हमारे शहर,धन, दौलत, घर, पशु, मान सम्मान सब कुछ कब्जाये़ जातें रहें, फिर भी हम बचें रहें। 1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया, फिर भी हम बचें रहें। 75 साल पहले वें हम पर थूकते थें, ज़लील करतें थें, मारते थे।हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे हैं।

आज हमारे पास एक अपना देश है। 
एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक जैसी कई संस्थाएं हमने इस दौर में बनाई।
आज हमारे चिकित्सक दवा बना रहे हैं, 
लेखक किताबें लिख रहें हैं। यें सबके लिए है, 
यह मानवता के कल्याण के लिए है।
हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला, 
हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है। हम किसी के दुश्मन नहीं है, 
हमने किसी को खत्म करने की क़सम नहीं खाई है। हमें किसी को बर्बाद नहीं करना, हम साजिश भी नहीं करते, हम जीना चाहते हैं सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, 
खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे। हम 3000 सालों से यरुसलम में ही थें। आज़ हम अपने पहले देश इजरायल में है। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा। यरुसलम हमसे है और हम यरुसलम से है।

जेरूसलम से एक यहूदी


आपको बता दिया जाए कि 1300 सौ ईसवी तक ईरान फारस देश था और ये फारसी हिंदू लोग हैं अग्नि और सूर्य पूजक वाले लोग 

#BenjaminNetanyahu
#Israel

#यदुवंशी वैदिक क्षत्रिय छत्रपति शिवाजी महाराज

#हिंदवी_स्वराज्य संस्थापक 
#छत्रपति शिवाजी राज महाराज 
वंश – #यदुवंश/#यदुवंशी/#यदु
कुल– हैहयवंशी_यादव (#क्षत्रिय कुलीन वर्ग)
जन्म दिवस (16 फरवरी 1630, शिवनेरी किला) निर्वाण दिवस ( 3 अप्रैल 1680 , राजगढ़ किला)
पिता – शाह जी भोसले जाधव 
माता – जीजाबाई जाधव 
उपलब्धि – हिंदवी स्वराज्य संस्थापक,
युद्ध – अनेक राज्यों को जीत लिया गया 
विवाह– पहली पत्नी 14 मई 1640 , सइबाई निंबालकर जाधव – पुत्र संभाजी बाद मे द्वितीय महाराज छत्रपति संभाजी महाराज बने ये विश्व के पहले बाल साहित्यकार हैं इन्होंने मात्र 14 वर्ष में ही संस्कृत, मराठी, फारसी, उर्दू, कन्नड़ तेलुगु , फारसी भाषा में किताब लिख दी थी।

यदुवंशी छत्रपति शिवाजी महाराज जी की अन्य पत्नियां भी थीं और इनके मात्र 2 पुत्र हुए थे 

राज्याभिषेक–6 जून 1674 , रायगढ़ किला 


राज्याभिषेक दिवस 
6 जून 1674 को
 #यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी महाराज जी का राज्याभिषेक हुआ था...
मगर स्थानीय ब्राह्मणों के पास उतनी योग्यता नहीं थी जितनी वाराणसी के #गंगाभट्ट जी पास थी तो #वाराणसी से #ब्राह्मण गए थे 
#यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज 
को राजा बनाया गया 
#यदुवंशी_वीर_योद्धा का राज्याभिषेक करने काशी के सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण तैयार हुए थे जिसके बाद #गागा_भट्ट नाम के ब्राह्मण ने राज्याभिषेक कराया था इस पूरे कार्यक्रम में 
7 करोड रुपए खर्च आया था , इस राज्याभिषेक में आसपास के अनेकों महाराजा राजा जागीरदार सामंत पहुंचे हुए थे दक्षिण भारत के लगभग सभी राजा महाराजा शामिल रहे थे नॉर्थ इंडिया से बिहार, बंगाल ओडिसा असम पंजाब सहित सिख महाराजा रणजीत सिंह जी भी उपस्थित रहे थे कुल 11 हजार ब्राह्मण शामिल हुए थे यह राजसूर्य यज्ञ जितना खर्च हुआ था 

#यदुवंशी_यदुवीर_यदुकुल_शिरोमणि 
#छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज का राज्याभिषेक संपन्न हुआ था 

आज हमारे कुछ #यदुवंशी #यादव भाई अपनी गरीबी का रोना रोते हैं अपने को शोषित दबित पीड़ित वंचित पिछड़ा वर्ग का बोलते है यह वोट के लालच में खुद को अपमानित करने जैसा है यह खुद को धोखा देने जैसा है 

#यदुवंशी_वीर_छत्रपति_शिवाजी_महाराज अपने जाति, धर्म,कर्म से और अपने ताकत से उन सामंतवादी आक्रमणकारी हमलावर को अपने कदमों में झुका दिए थे मुगल बादशाह औरंगजेब का भारत विजेता का सपना अधूरा रह गया वह अपनी हार और अपमान बर्दास्त न कर सका और दक्षिण भारत में ही कब्र में दफनाना गया 
और कभी भी मुगलों का वो सपना की पूरा हिंदुस्तान अपना कभी भी पूरा नहीं होने दिया 


भारत कभी भी पूरी तरह गुलाम रहा ही नहीं 
यहां तक कि 1947 में जब अंग्रेज सरकार ने भारत छोड़ा उस समय भी लगभग 100 के आसपास स्वतंत्र देशी राजा महाराजा थे जो कि बिल्कुल आजाद थे 

#छत्रपती_श्री_शिवाजी_महाराज 
 जय यदुवंशी जय श्री कृष्ण 
💪#जय_वीर_शिवाजी 🙏

वीर अहीर आल्हा जयंती

#जय_श्री_कृष्ण
#जय_श्री_कृष्ण_जय_यदुवंश 
#यदुवंशी_वैदिक_क्षत्रिय_ब्राह्मण 
#भागवत_धर्म_की_जय 

#यदुवंशी परम प्रतापी, बलशाली, अदम्य साहस अकल्पनीय अपराजित अजेय योद्धा,
 52 गढ़ (#किला) और
 56 सूबों (राजा महाराजा) के विजेता जिसे कोई कभी न हरा सका..
जिसने कभी निहत्थे, भागते हुए और पहले दुश्मन पर वार नहीं किया जिसकी वीरता का सम्मान दुश्मन भी करते थे..

 ऐसे #वीर_अहीर_आल्हा की जयंती पर कोटि कोटि नमन।
आइए अपने समृद्ध वैभवशाली गौरव विरासत को याद करे 

#जय_मां_शारदा_भवानी 
#VeerAhirAlha
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlhaJayanti 
#VeerAhirAlhaJayanti 
#VeerAhirAlhaJayanti 
#VeerAhirAlhaJayanti 
#VeerAhirAlhaJayanti 
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#VeerAhirAlhaJayanti 
#VeerAhirAlhaJayanti 
#VeerAhirAlhaJayanti

क्या गाजा भूखा है

इज़रियल फ़िलिस्तीन में रसद नहीं पहुँचने दे रहा है- ये एक आम नैरेटिव है जो हाल में चल रहा है। जो फ़िलिस्तीन के समर्थक है, वो इस पे क्रन्दन करते है। जो फ़िलिस्तीन के विरोधी है, वो इस पे हंसते है।

हकीकत क्या है? क्या वाक़ई में फ़िलिस्तीन को खाना नहीं मिल रहा है?

इसका उत्तर यूएई के एक प्रख्यात पत्रकार और एनालिस्ट अमजद तहा के इस ट्वीट से समझें।

आपके सुभीते के लिए इस ट्वीट का हिंदी अनुवाद ये है-


मुझे पता है कि आपको तर्क पसंद नहीं है। 7 अक्टूबर 2023 से, ग़ाज़ा को 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक मानवीय सहायता मिली है, जो 22,000 से अधिक ट्रकों के माध्यम से केवल 2.1 मिलियन लोगों की आबादी के लिए पहुँचाई गई है। इसका मतलब है कि कुछ ही महीनों में प्रति व्यक्ति लगभग 143 किलोग्राम सहायता। यदि हम मान लें कि एक किलोग्राम खाद्य सामग्री में औसतन 3,500 कैलोरी होती है (जो आपातकालीन राशन के लिए मानक है), तो यह सहायता कुल मिलाकर 1.05 ट्रिलियन से अधिक कैलोरी प्रदान करती है। ग़ाज़ा की जनसंख्या को प्रतिदिन लगभग 4.2 अरब कैलोरी की आवश्यकता होती है (प्रति व्यक्ति 2,000 कैलोरी के हिसाब से), तो यह सहायता अकेले ही पूरी आबादी को लगातार 250 से अधिक दिनों तक तीन समय का भोजन और मिठाई सहित खिलाने के लिए पर्याप्त है। अगर भोजन की मात्रा बढ़ाकर दिन में चार भारी भोजन कर दी जाए (जो किसी भी मानवीय न्यूनतम से कहीं अधिक है), तब भी ग़ाज़ा की आबादी के लिए यह सहायता लगभग 190 दिनों तक पर्याप्त होगी।

अगर इसकी तुलना यूरोप के शहरों से करें, तो 2.1 मिलियन आबादी वाला पेरिस शहर इसी मात्रा की कैलोरी से आठ महीने तक पूरी तरह खिलाया जा सकता है। बर्लिन, जिसकी आबादी 3.6 मिलियन है, को पांच महीने और रोम (2.8 मिलियन) को छह महीने तक यह सहायता पर्याप्त होती। इस बीच, अफ्रीका के कई देशों में वास्तविक अकाल की स्थिति है, जिन्हें न तो इतना ध्यान मिलता है और न ही इतनी सहायता। दक्षिण सूडान, जहाँ 6.3 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, ग़ाज़ा की प्रति व्यक्ति सहायता का एक चौथाई से भी कम पाते हैं। सोमालिया, जहाँ 7 मिलियन से अधिक लोग ज़रूरतमंद हैं, को इससे भी कम सहायता मिलती है—अनुमानों के अनुसार प्रति व्यक्ति केवल 30 डॉलर की सहायता मिलती है, जबकि ग़ाज़ा में यह लगभग 133 डॉलर प्रति व्यक्ति है। चाड, नाइजर और बुर्किना फासो को इतनी कम सहायता मिलती है कि वे वैश्विक न्यूनतम पोषण स्तर तक भी नहीं पहुँच पाते।

अगर हम #ग़ाज़ा को एक प्रतीकात्मक रेस्टोरेंट मानें, तो यह ऐसा है मानो हर दिन 400 ट्रक यहाँ सप्लाई दे रहे हों, हर गली में ‘गौर्मे’ स्तर की लॉजिस्टिक्स पहुँच रही हो, जबकि अफ्रीका के युद्धग्रस्त क्षेत्र पत्तियाँ बीनकर और गंदा पानी पीकर गुज़ारा करने को मजबूर हैं—बिलकुल बिना किसी मीडिया हेडलाइन या हैशटैग के।

अब यह भूख का मुद्दा नहीं रहा। यह एक पक्षपाती नैरेटिव को ज़रूरत से ज़्यादा पोषित करने का मामला बन गया है। जब मानवीय सहायता भेजी जाती है, तो यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि यह वास्तव में लोगों तक पहुँचे और आतंकवादी संगठन द्वारा नियंत्रित इलाक़े को उन संसाधनों से न भर दे जो अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों को नहीं मिलते। इस बीच, बर्मिंघम (यूके) में स्थित ‘इस्लामिक रिलीफ’ जैसे समूह तटस्थता का दावा करते हैं, जबकि उनकी सहायता सुविधा से गायब होकर हमास की सुरंगों और गोदामों में जा पहुँचती है। टिग्राय, नाइजर और #सूडान जैसे स्थानों में वास्तविक भूख चुपचाप मर रही है—बिना किसी कैमरे, बिना किसी रोशनी के—जबकि फ्रांस और यूके जैसे देश एक ऐसे संघर्ष को ईंधन दे रहे हैं जिसे वे हल करने का दिखावा कर रहे हैं।

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अमजद तहा साफ़ बतला रहा है कि फ़िलिस्तीन को मनो भर रसद जा रही है और फिर भी नैरेटिव ऐसा चल रहा है जैसे वहाँ अक़ाल पड़ा हुआ है।

नैरेटिव बनाने में दूसरा पक्ष कितना हुशियार है।

इन नैरेटिव को ही अल तकिया कहा जाता है 

सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...