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दौनी के तेल से मानसिक शांति

 दौनी तेल (रोजमेरी तेल) का नाम सर्वप्रथम आता है। इस तेल को दौनी के पत्तों से निकाला जाता है जिसमें बहुत हीं औषधीय गुण होते हैं। इसमें मष्तिष्क की शक्ति बढ़ाने के गुण होते हैं जिसकी वजह से इसे ब्रेन टोनिक भी कहा जाता है। इसके तेल का उपयोग स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए सदियों से किया जाता रहा है। इसकी तीखी खुशबू की वजह से लोग इसे खाना पकाने के काम में भी लाते हैं। इसकी खुशबू के कारण इसे सुगंध चिकित्सा में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी तीखी खुशबू आपके मष्तिष्क को उत्प्रेरित करती है जिसकी वजह से आपके दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ जाती है तथा आपकी एकाग्रता बढती है जिनकी वजह से आप अपने काम पर अच्छी तरह से ध्यान लगा पाते हैं।

अरोमा थेरेपी और उपचार


‘एरोमा’ का शाब्दिक अर्थ है  सुगंध के द्वारा उपचार कोई नयी विषय वस्तु नहीं। फूल सिर में लगाना, फूलों के गजरे पहनना, सिर एवं बालों की सुगंधित तेलों से मालिश करना, सुगंधित उबटन लगाना, सुगंधित लकड़ियां, धूप, पाउडर आदि कक्ष में जलाना विशेषकर, जब महिलायें बच्चों को जन्म दे चुकी हों यानी डिलीवरी के पश्चात् पुरानी प्रथायें हैं। एरोमाथेरेपी बिना किसी प्रकार से शरीर को नुक्सान पहुंचाये एवं एलर्जी उत्पन्न किये शरीर को बीमारियों से न केवल बचाती है, लेकिन अभी एक विशेष वर्ग ही ‘एरोमाथेरेपी’ के गुण एवं उपचार विधि से अवगत है। फूलों से अर्क एवं तेल निकालने की एक विशेष पध्दति है। ये विभिन्न तेल और अर्क विशेष क्रिया और प्लांट से गुजार कर निर्मित किये जाते हैं।

उदाहरण के लिए नेरोली तेल फूलों से, रोजमेरी तेल पत्तियों से, लेवेण्डर तेल रोज फूलों से, पीपरमेन्ट का तेल पत्तियों से, चन्दन का तेल चन्दन की लकड़ी से, संतरे का तेल संतरे के छिलके से और कई तेल पेड़ों की छाल एवं जड़ों से भी निकाले जाते हैं। ये तेल दूसरे तेलों से भिन्न होते हैं, क्योंकि ये तेल प्रकृति प्रदत्त हैं, साथ ही ये पानी से भी ज्यादा हल्के होते हैं। ये तेल जर्म्स वाले होते हैं, लेकिन मनुष्य को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाते, न ही मनुष्य के शरीर में स्थित सफेद रक्त कोशिकाओं को जो मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति या क्षमता उत्पन्न करती है। इन तेलों का प्रत्यक्ष प्रयोग नहीं किया जाता। इन्हें अन्य दूसरे साधारण तेलों में मिलाकर ही इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें त्वचा पर लगाने पर दर्द कम करने की अभूतपूर्व क्षमता होता है।

ये तेल अन्तः त्वचा के माध्यम से रक्त में भिद जाते हैं, शरीर की तेल मालिश करने पर। शरीर में तेल भिदने और अपना माकूल प्रभाव छोड़ने में लगभग 20 से 70 मिनट लग जाते हैं। ेएरोमाथेरेपी में प्रयोग में आने वाले तेल शुध्द, प्राकृतिक एरोमेटिक होने चाहिए। ये किसी भी प्रकार के सिन्थेटिक सुगंध वाले य कृत्रिम सुगंध वाले नहीं होने चाहिए। यह दुर्भाग्य की बात है कि बाजार में उपलब्ध होने वाले अधिकांश तेल नकली सिन्थेटिक ही होते हैं। एरोमेटिक चिकित्सा शरीर और मन दोनों पर प्रभावशाली असर करती है। यह शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार के तनाव कम करती है, कहते हैं मानव शरीर में मेग्नेटिक पावर होता है और यह पावर शरीर को उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने में संतुलन का कार्य करती है।

यहां एक बहुत ही कारगर एरोमाविधी स्ायुओं का दर्द कम करने हेतु दी जा रही है।

गर्मी में बेहाल, पसीने की बदबू से छुटकारा


गुलाब का तेल - 20 बूंद
जोजोबा तेल - 5 बूंद
ये तेल 50 मि.ली. नारियल अथवा तिल के तेल में मिलायें और इस तेल से पूरे बदन की विशेष कर कांख (बगल) की इस तेल से मालिख करें। पसीने या शरीर की दुर्गन्ध से छुटकारा मिल जायेगा। ग्रीष्म ऋतु में तो इस तेल की मालिश शरीर को आराम तथा राहत भी प्रदान करती है।

एरोमाथेरेपी निश्चयत ही सौंदर्य श्रृंगार एवं सेहत तीनों पर ही अनुकूल प्रभाव छोड़ती है। शरीर तत्काल राहत एवं स्वयं को चुस्त महसूस करने लगता है।

हमेशा जवान दिखने के लिए थेरेपी

जवाँ दिखने के लिए इन्हें आजमाएँ



सौंदर्य विज्ञान के क्षेत्र में बहुत उन्नति हुई है। अपनी त्वचा के अनुरूप सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करें। किसी सौंदर्य विशेषज्ञा से सलाह लेकर इनका उपयोग करें।

* आजकल पार्लर में मैच्योर स्किन के कई तरह के उपचार होते हैं। जैसे आयोनाइजेशन, डर्मापील, वेजिटेबल पील, केमिकल्स पील, फेस लिफ्ट (नॉन सर्जिकल), थर्मोहर्ब, वैक्स बाथ, ऑक्सीजन बाथ, फेशियल, आहा फेशियल, एरोमा फेशियल, स्किन पॉलिशिंग आदि कई उपचार हैं, जो हर त्वचा की जरूरत के हिसाब से किए जाते हैं।

मुहासों के लिए थेरैपी

मुँहासों के लिए ऐरोमा फेस मास्क



जब बात तैलीय त्वचा या मुँहासे की आती है, तब यह भ्रम पैदा हो जाता है कि एरोमा थेरेपी में ऑयल होते हैं और ऑयल से तैलीय त्वचा और तैलीय होकर मुँहासे की समस्या को और बढ़ावा देगी, पर यह सोच सर्वथा गलत है।

एरोमा ऑयल चिपचिपाहटरहित, एण्टीसेप्टिक व एण्टीबैक्टीरियल होते हैं। अतः ये तेलीय त्वचा के लिए बहुत लाभदायक हैं।

* एक चाय का चम्मच केयोलिन पाउडर, एक चाय का चम्मच आयुर्वेदिक पिंपल फेस पैक, एक-एक बूँद कैमोमिला, लेवेंडर, जूनियर पाचोली, लाइम एरोमा को एक साथ मिला लें व इस एसेन्शियल ऑयल की एक बूँद फेस मास्क में मिलाएँ।

* अब इसे ऐलोवेरा जेल के साथ मिलाकर चेहरे पर बीस मिनट लगाकर रखें व रोज दिन में दो बार उपरोक्त ऑयल की एक बूँद, एक चम्मच एलोवेरा तेल के साथ मिलाकर लगाएँ।

अरोमा थेरेपी

क्या है एरोमा थेरेपी



आजकल एरोमा थेरेपी के रूप में सौंदर्य निखारने का पुराना ट्रेंड नए कलेवर में हमारे सामने आ रहा है। एरोमा का अर्थ है खुशबू और थेरेपी यानी उपचार अर्थात खुशबू द्वारा उपचार।

* यह खुशबू प्राप्त करने के साधन हैं हमारा मस्तिष्क, हमारे स्नायुतंत्र, जिसमें पहचान पहले से व्याप्त रहती है और खुशबू वाली वस्तुएँ हैं- पेड़-पौधे, पत्तियाँ, जड़, तना, फल-फूल, सब्जियाँ, मसाले आदि।

* डिस्टीलेशन मेथड द्वारा फल, फूलों का अर्क निकाला जाता है, इसी अर्क को 'एसेन्शियल ऑयल' कहते हैं और हर अर्क की अपनी अलग खुशबू, पहचान होती है। इन्हीं अर्क से दिए जाने वाले उपचार को कहते हैं एरोमा थेरेपी।

* इसका उपचार देने से पहले आपको एरोमा ऑयल या एसेन्शियल ऑयल से मसाज करने का सही तरीका पता होना चाहिए। यह तेल आसानी से त्वचा में समा जाते हैं और अपना कार्य आरंभ कर देते हैं।

* एरोमा थेरेपी में इस्तेमाल होने वाले मुख्य ऑयल में बेंजाइन, यूकेलिप्टस, जिरेनियम, लेवेंडर, रोज, वर्गमोट आदि ऑयल प्रमुख है।

सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...