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लू लगना , गर्मी में लू लगता है

लू लगना

परिचय-

जब किसी व्यक्ति का शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है तो इस अवस्था को लू लगना कहते हैं। इस प्रकार के रोग का इलाज यदि समय पर नहीं कराया जाता तो यह शरीर के लिए काफी घातक (खतरनाक) सिद्ध हो सकता है। इस रोग से अधिकतर वे लोग पीड़ित होते हैं जो ज्यादातर गर्म जलवायु वाले भागों में रहते हैं। इस रोग के होने का खतरा छोटे बच्चों तथा बूढ़े व्यक्तियों को अधिक होता है।

कारण-

  • ज्यादा देर तक तेज धूप में रहने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है जिसके कारण शरीर में 2 परिवर्तन होते हैं-
  • तेज धूप में रहने के कारण शरीर से काफी ज्यादा पसीना निकलता है जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है तथा कमजोरी आ जाती है।
  • तेज धूप में रहने के कारण शरीर में तापमान को नियन्त्रित करने वाली प्रणाली नष्ट हो जाती है जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
  • इस रोग के होने के और भी कई कारण हैं जैसे- ज्यादा भोजन करना, बहुत अधिक शराब का सेवन करना, अत्यधिक थकाने वाले व्यायाम करना तथा मौसम के अनुसार कपड़े न पहनना आदि।

लक्षण-

        इस रोग के होने की शुरुआती पहचान शरीर का तापमान बढ़ने से होती है। इस रोग से पीड़ित रोगी की त्वचा का रंग उड़ जाता है तथा उसकी त्वचा ठंडी और चिपचिपी हो जाती है। इस रोग में रोगी के शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलता है तथा उसे अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, सुस्ती, नाड़ी का तेज चलना तथा उल्टियां होने लगती हैं। जब रोगी का रोग बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसके शरीर से पसीना निकलना कम हो जाता है या रुक जाता है। रोगी के शरीर की त्वचा गर्म, सूखी और लाल सी हो जाती है। रोगी की नाड़ी तेज चलने लगती है और कमजोर हो जाती है। इस रोग के और भी कई लक्षण है जैसे- सिर में दर्द रहना, शरीर में कमजोरी आ जाना तथा जी मिचलाना आदि।

उपचार-

        यदि लू लगना रोग से पीड़ित व्यक्ति की अवस्था ज्यादा गंभीर हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के शरीर के तापमान को घटाने का उपाय करना चाहिए अर्थात रोगी को ठंडक देनी चाहिए और उसके शरीर की पानी की कमी को जल्दी पूरा कराना चाहिए। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के शरीर से तुरंत गर्म कपड़ों को उतारकर उसे ठंडी जगह पर सीधा लिटा देना चाहिए। लू से पीड़ित व्यक्ति के शरीर का तापमान तथा नब्ज को मापना चाहिए। रोगी को तब तक पौष्टिक द्रव्य पदार्थों का सेवन कराते रहना चाहिए जब तक की वह ठीक न हो जाए। यदि रोगी की अवस्था बहुत अधिक गंभीर हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

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