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आँत का कैंसर

  

आंत का कैंसर

परिचय-

कैंसर एक बहुत ही गंभीर रोग है जिसका पूरा व सही तरह से इलाज न कराने से रोगी की जान भी जा सकती है। आंत का कैंसर भी एक ऐसा ही रोग है। यह रोग 40 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में अधिक पाया जाता है।

कारण-

आंत का कैंसर गलत तरीके के भोजन जैसे ज्यादा रिफाइंड में पके हुए और कम रेशेवाले भोजन को खाने से होता है। गुदा से सम्बंधित रोग और आंत के अल्सर के कारण भी यह रोग हो सकता है।

लक्षण-

इस रोग में रोगी को पेट में कब्ज बने रहना, पेट में हल्का-हल्का चुभने वाला दर्द रहना, मल के साथ रक्त का आना, पेट में मुलायम गांठ का उभरना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

उपचार-

आंत के कैंसर रोग में शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का सहारा लिया जाता है क्योंकि इस रोग में आंत का वह हिस्सा जो कैंसर से ग्रस्त होता है, गल जाता है और शल्य चिकित्सा द्वारा उसे काटकर अलग कर दिया जाता है। अगर आंत का कैंसर कुछ कम या शुरुआती हो तो एक्युप्रेशर चिकित्सा से उपचार किया जा सकता है।।      

हर्पीज रोग

 

गुप्तांगों की हर्पीज

परिचय-

गुप्तांगों का हर्पीज एक कष्टकारक और बार-बार होने वाला संक्रमण है। कहते हैं कि अगर इसका वायरस एक बार शरीर में घुस जाए तो जिंदगी भर शरीर में ही रहता है। किसी-किसी को तो यह वायरस एक बार परेशान करता है मगर कुछ लोगों को तो यह बार-बार परेशान करता रहता है।

कारण-

          गुप्तांगों के हर्पीज रोग का संक्रमण संभोग करने के कारण ज्यादा फैलता है। योनि अथवा गुदा मैथुन के अलावा यह रोग मुखमैथुन करने से भी फैल सकता है।

लक्षण-

          संभोग के द्वारा इस रोग का संक्रमण फैलने के 1 या 2 हफ्ते बाद पीड़ित व्यक्ति की योनि या लिंग पर जलन और खुजली होने लगती है। यह गुदाद्वार में भी फैल सकता है। इस रोग में गुप्तांगों पर छोटे-छोटे छालों का गुच्छा भी देखा जा सकता है। ये छाले 10 से 12 दिनों में ठीक हो जाते हैं। इस रोग में रोगी को हल्का बुखार सा भी हो सकता है और उसके पेड़ू में लगी ग्रन्थियां बढ़ जाती हैं।

चिकित्सा-

          रोगी के शरीर के इस रोग से संक्रमित स्थान पर बने छालों को गुनगुने नमकीन पानी से धोने से आराम मिलता है।

     




अल्सर

पेप्टिक अल्सर

परिचय-

शरीर में पाये जाने वाले पाचनतन्त्र में होने वाले घाव को अल्सर कहते हैं। इस रोग में रोगी के आमाशय तथा आंत दोनों में अल्सर हो जाता है। वैसे यह रोग अधिकतर अधेड़ उम्र के पुरुषों तथा स्त्रियों में होता है। जब आमाशय या आंत के किसी भाग की सतह में पाचक रसों के प्रतिरोध की क्षमता खो जाती है तो इस प्रकार का रोग हो जाता है।

कारण-

        आमाशय तथा आंत का अल्सर कई कारणों से हो सकता है जैसे- अधिक मात्रा में शराब का सेवन या धूम्रपान करने आदि से। यह रोग उन व्यक्तियों को भी हो सकता है जो अनियमित रूप से भोजन का सेवन करते हैं। इस कारण से होने वाले रोगों को पेप्टिक अल्सर कह सकते हैं। इनके अलावा यह रोग कई सारी दवाईयों के साइड इफेक्ट से भी हो सकता है।

लक्षण-

        इस रोग के कारण व्यक्ति के पेट के ऊपरी भाग या बाईं पसलियों के नीचे की ओर जलन युक्त दर्द होता है। कई बार यह दर्द खाना खाने के बाद शुरू हो जाता है। लेकिन कई बार खाना खाने से यह दर्द कम भी हो जाता है। वैसे यह दर्द लम्बे समय तक रुक-रुककर भी होता रहता है। इस रोग से पीड़ित कुछ व्यक्तियों को जी-मिचलाने की भी शिकायत हो सकती है।

एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा पेप्टिक अल्सर रोग का उपचार-

          देखा जाए तो यह रोग कुछ महीने के अन्दर ही ठीक हो सकता है लेकिन कभी-कभी इस तरह के रोग को ठीक होने में वर्षों भी लग जाते हैं। यह रोग कई वर्षों तक बना रहता है। कुछ अल्सर रोग में रोगी को उल्टी या मल के साथ खून आना शुरू हो जाता है। यह रोग आगे चलकर कैंसर का रूप भी धारण कर सकता है। इसलिए इन रोगों का सही तरीके से इलाज करना चाहिए। पेप्टिक अल्सर रोग का उपचार एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा भी किया जा सकत हैं।

                         अल्सर रोग का उपचार किया जा सकता है। रोगी को अपना इलाज किसी अच्छे एक्यूप्रेशर चिकित्सक की देख-रेख में कराना चाहिए क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सक को सही दबाव देने का अनुभव होता है और वह सही तरीके से पेप्टिक अल्सर से पीड़ित रोगी का उपचार कर सकता है। जब रोगी को पेट में इस रोग के कारण दर्द हो रहा हो तो रोगी को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए तथा सदैव पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।



सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...