मनुस्मृति जरूरी है न कि संविधान रद्दी का टुकड़ा

जब #मनुस्मृति थी तब #सावित्री ने अपने माता-पिता की मर्जी के बिना #सत्यवान के साथ विवाह किया था 

जब मनु स्मृति थी तब माता #सीता ने #स्वयंवर के माध्यम से अपना वर भगवान #राम को चुना था 

जब मनु स्मृति थी तब #गार्गी ने #वेदों की रचना में अपना योगदान दिया था 

जब मनु स्मृति थी तब #आपला और #घोषा ने #ऋग्वेद के दशम मंडल में सूक्त की रचना की थी
 
जब मनुस्मृति थी तो #मंडन मिश्र की पत्नी #भारती ने अपने पति और शंकराचार्य के मध्य #शास्त्रार्थ के निर्णायक के पद को स्वीकार किया था और अपने पति की इच्छा के विरुद्ध #निर्णय देने का काम किया था 

जब मनु स्मृति थी तो #शंकराचार्य जी का भारती के साथ-साथ शास्त्रार्थ हुआ था और शंकराचार्य जी ने उनकी विदुता का लोहा माना था 

जब मनु स्मृति थी तो एक #गड़रिये की बेटी अहिल्या का विवाह एक राजा के पुत्र के साथ हुआ था

जब मनु स्मृति थी तो एक नारी #देवीअहिल्या ने अपने राज्य का संचालन किया था जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है 

जब मनु स्मृति थी तो #जीजाबाई ने #शिवाजी जैसे पुत्र का पालन पोषण करके उन्हें योग्य बनाया था जिन्होंने #हिंदीस्वराज की स्थापना की थी

जब मनुस्मृति थी तो राजा के साथ राज सिंहासन पर उसकी पत्नी साथ में बैठती थी और राजकाज में अपनी भूमिका का निर्वाह करती थी

जब मनु स्मृति थी तो 22 महिलाएं #ब्रह्मवादिनी के रूप में जानी जाती थी

जब मनु स्मृति थी #लक्ष्मी बाई ने बचपन में ही #युद्ध कौशल सीखा था और बाद में युद्ध के मैदान में अंग्रेजों के को पराजित किया था 

जब मनुस्मृति थी तो भारत की #संविधान सभा में 15 महिला है बिना किसी #आरक्षण के चुनकर आई थी जिसमें #वंचित समाज की भी महिलाएं थी

लेकिन जब संविधान से व्यवस्थाएं संचालित होती हैं तो भारत में महिलाओं को उनका प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था करनी पड़ रही है
#मनस्मृति

अल्पसंख्यक की परिभाषा स्पष्ट नहीं है भारत में

सुप्रीम कोर्ट ने उस PIL को खारिज कर दिया, जिसमें यह मांग की गई थी कि भारत के Minorities स्कूलों में भी Right to Education Act (RTE) लागू किया जाए। ⚖️📚

यह PIL एक NGO द्वारा दायर की गई थी, जिस पर Supreme Court ने ₹1 लाख की पेनल्टी भी लगाई है। 💰

माननीय न्यायमूर्ति नागरत्ना और न्यायमूर्ति महादेवन की पीठ के समक्ष आया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 2014 में प्रमाती एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट मामले में यह फैसला दे चुका है कि माइनॉरिटी स्कूलों पर RTE एक्ट लागू नहीं होगा।

🙏 नम्रतापूर्वक माननीय सुप्रीम कोर्ट से कुछ प्रश्न हैं —
❓ Minorities की परिभाषा कहाँ है?
❓ किस कानून के अंतर्गत माइनॉरिटी को परिभाषित किया गया है?
📘 National Minority Commission Act में भी माइनॉरिटी की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है।
📄 माइनॉरिटी एजुकेशन से संबंधित 2004 के प्रावधानों में भी माइनॉरिटी की परिभाषा नहीं दी गई है।
आज तक माइनॉरिटी की पहचान करने के लिए —
❌ कोई आयोग नहीं बनाया गया
❌ कोई विशेषज्ञ समिति नहीं बनी
यह भी आज तक तय नहीं हुआ कि —
❓ माइनॉरिटी 1% होगी, 2% होगी या 3%
❓ पहचान राज्य स्तर पर होगी या राष्ट्रीय स्तर पर
❓ जिला स्तर पर पहचान होगी या नहीं
❓ माइनॉरिटी की यूनिट 100 होगी, 1000 होगी, लाख होगी या करोड़ होगी
📜 भारत के संविधान में माइनॉरिटी की कोई परिभाषा नहीं है।
⚖️ भारत के किसी भी कानून में माइनॉरिटी की स्पष्ट परिभाषा नहीं है।
इसके बावजूद —
✔️ माइनॉरिटी कमीशन चल रहा है
✔️ माइनॉरिटी अफ़र्मेटिव एक्शन चल रहा है
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर लोन दिए जा रहे हैं
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर छात्रवृत्तियाँ हैं
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटियाँ चल रही हैं
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर वक़्फ़ बोर्ड चल रहा है
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर वक़्फ़ ट्रिब्यूनल चल रहा है
लेकिन —
❌ न संविधान में माइनॉरिटी परिभाषित है
❌ न किसी कानून में माइनॉरिटी परिभाषित है
और दुख की बात यह है कि
माननीय सुप्रीम कोर्ट भी इस विषय को परिभाषित नहीं करना चाहता,
इस पर आना नहीं चाहता,
और इस पर चर्चा करना नहीं चाहता।
⚖️📜
#MinorityDefinition #EqualLaw #RTE
#Constitution
@HMOIndia @PMOIndia 

मनुस्मृति और नारी अधिकार

मनुस्मृति। जब मुद्दाविहीन हो जाओ तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब स्वयं को आधुनिक व बुद्धिजीवी दिखाना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो। जब वोक दिखना हो तो मनुस्मृति को गाली दे दो।

मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना बेहतर है, लेकिन उसका विवाह किसी गुणहीन पुरुष से नहीं किया जाना चाहिए। नारी-सशक्तिकरण के लिए इससे बेहतर समझ रखते हैं आप? मनुस्मृति कहती है कि शारीरिक परिपक्वता के बाद निर्धारित अवधि तक प्रतीक्षा करने के बाद ही लड़की का विवाह हो, उस समय के हिसाब से 17 वर्ष तक। बाल-विवाह के विरुद्ध इससे बेहतर कोई प्रमाण है आपके पास?

मनुस्मृति कहती है - विन्देत सदृशं पतिम्। कन्या अपने योग्य पति का स्वयं वरण करे। यदि अभिभावक विवाह नहीं कराते और कन्या स्वयं पति चुन ले, तो न कन्या किसी पाप या अपराध की भागी होती है, और न वह पुरुष जिसे वह चुनती है। स्वेच्छा और कंसेंट को इससे बेहतर परिभाषित कर सकते हैं आप?

पुत्रेण दुहिता समा। पुत्री पुत्र के समान है। स्त्री-पुरुष समानता के लिए मनुस्मृति से बेहतर कुछ ला सकते हैं आप? क़ुरान या बाइबिल लेकर आइए, देख लीजिए। स्वयं डॉ आंबेडकर ने बुढ़ापे में मनुस्मृति का लोहा माना है, उत्तराधिकार वाले विषय को लेकर। मनुस्मृति माता की निजी संपत्ति को अलग से मान्यता देती है और उसे अविवाहित पुत्री का भाग बताती है। परिवार में महिलाओं को सशक्त रखने के लिए इससे बेहतर कोई व्यवस्था अबतक लेकर आए आप?

बल, दबाव या जबरन नियंत्रण से स्त्रियों को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। विश्वसनीय पुरुष भी उन्हें क़ैद नहीं रख सकते। आत्मानमात्मना यास्तु रक्षेयुस्ताः सुरक्षिताः। मतलब, जो स्त्री अपने विवेक से अपनी रक्षा करती हैं, वही सुरक्षित है। बाहरी निगरानी से ऊपर विवेक को रखा गया है। स्त्रियों को विवेकी माना गया है। इससे अधिक सम्मान देते हैं आप? आपने तो अपनी बहन तक को चुनावी राजनीति में खुद के 2 दशक बाद उतारा।

धन के देखभाल एवं प्रबंधन के लिए मनुस्मृति ने स्त्रियों पर विश्वास जताया है। राजा को मनुस्मृति आदेश देती है कि ऐसी स्त्रियों की रक्षा करे जिनके पति बाहर हैं, जिनका परिवार प्रभावशाली नहीं है, जो बीमार हैं या जिनके पति या पुत्र नहीं हैं। अगर कोई संबंधी भी किसी स्त्री की संपत्ति हड़पता है तो उसे चोर मानकर दंड देने को कहा है। इससे अधिक परवाह है आपको स्त्रियों की?

पति को आदेश है कि बाहर जाने से पहले पत्नी की आजीविका की व्यवस्था करके जाए। अब ये मत कहिएगा कि पत्नी ख़ुद नहीं कर सकती क्या। जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः। आगे ये भी लिखा है कि पति न करे तो स्त्री ख़ुद सम्मानजनक कार्यों के जरिए कमाए। आत्मनिर्भरता के लिए इससे बेहतर नियम बना लेंगे आप?

तस्मात्साधारणो धर्मः श्रुतौ पत्न्या सहोदितः। धार्मिक कार्य पति-पत्नी साथ मिलकर करें। पत्नी के बिना कोई अनुष्ठान पूरा नहीं होता है। हमारे यहाँ पत्नी को बेगम नहीं, अर्धांगिनी कहा गया है। यहीं से निकला है 'आधी आबादी'। पूरे पचास प्रतिशत - उतना ही, जितना पुरुष का हिस्सा। पचास-पचास। इससे अधिक सटीक तरीके से बराबरी का सन्देश दे सकते हैं आप? अन्योन्यस्य। एक-दूसरे के प्रति। वैवाहिक जीवन में भी दोनों की ज़िम्मेदारियाँ हैं। मनुस्मृति कहती है कि न स्त्री और न ही पुरुष वैवाहिक मर्यादा का उल्लंघन करे। इसमें क्या जोड़ देंगे आप क्रांतिकारी कहलाने के लिए? कुछ बाक़ी है क्या? मनुस्मृति कहती है कि नियम दोनों पर हैं।

मनुस्मृति ने स्त्री को महाभागाः (सौभाग्यशालिनी और सौभाग्य लाने वाली) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को पूजार्हाः (सम्मान की अधिकारी) कहा। मनुस्मृति ने स्त्री को गृहदीप्तयः (घर को प्रकाशित और प्रसन्न रखने वाली) कहा। परिवार के सुख का आधार कहा। गृहस्थ-जीवन का प्रत्यक्ष आधार कहा।

अब जिसने परिवार नामक संस्था को ख़त्म करने का लक्ष्य ले रखा हो, उसे ये सब बुरा लगेगा ही। वो पूछेगा कि स्त्री परिवार के सुख के लिए तिनका भी क्यों हिलाए। वो ये नहीं पूछेगा कि मनुस्मृति ने पुरुष को भी स्त्री के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी उठाने को क्यों कहा है।

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते… रटा-रटाया है, इसीलिए इसे नहीं गिनाया। सबको पता है। इसी प्रसङ्ग में ये भी लिखा है कि जिस घर में स्त्री दुःखी रहती है वह परिवार शीघ्र नष्ट होता है। यानी, परिवार की स्थिति का पैमाना यह तय कर दिया गया है कि उसमें महिलाओं को प्रसन्न रखा जा रहा है या नहीं।

लेकिन नहीं, गाली तो केवल मनुस्मृति को ही पड़ेगी। क़ुरान और बाइबिल का नाम नहीं लिया जाएगा। राहुल गाँधी आज 'स्त्रीवादी' बने हैं, काश मनुस्मृति पढ़ लिया होता कम से कम। पढ़ा तो हमने भी नहीं है, इसीलिए जो कहा जाता है मान लेते हैं। सफाई देने लगते हैं कि ये उस समय की व्यवस्था थी।

मनुस्मृति से अधिक फेमिनिज्म और कहीं नहीं है। फ़िलहाल इस इकोसिस्टम के लिए तो फेमिनिज्म सिर्फ़ अश्लीलता और अंग-प्रदर्शन ही है।

बिहार में देश का अब तक का सबसे बड़ा शिक्षक भर्ती घोटाला 2003-2026

*📢 बिहार शिक्षक भर्ती: 2003 से 2026 तक ठेके से घोटाले तक*

*🛑2003 - शिक्षा मित्र योजना*
- लालू-राबड़ी सरकार में पंचायत स्तर पर ठेके पर भर्ती
- मानदेय: ₹1500 महीना, योग्यता: सिर्फ 12वीं पा
- बिना परीक्षा, मुखिया जी ने बहाल किया 6830

🛑2006 - नियोजित शिक्षक नियमावली*
- नीतीश सरकार ने नियमावली बनाई, शिक्षा मित्रों को नियोजित बना दिया
- पंचायत शिक्षक, प्रखंड शिक्षक, नगर शिक्षक - अलग अलग
- मानदेय ₹4000-5000, फिर 2010 में ₹1000-1000 बढ़ा, 2013 में ₹3000 बढ़ा
- सर्टिफिकेट देखकर नियोजन, कोई परीक्षा नहीं, 50% महिला आरक्षण cf786830

*🛑 2015-2022 नियोजन*
- इसी पैटर्न पर हर साल नियोजन होता रहा
- नियोजित = ना पेंशन, ना PF, ना DA - सिर्फ मानदेय
- इग्नू से ट्रेनिंग करवाकर 

*2023 - BPSC TRE 1.0 - पहला सरकारी शिक्षक*
- 1.70 लाख पदों पर BPSC से पहली बार परीक्षा से भर्ती
- राज्य कर्मी का दर्जा मिला, पर फर्जीवाड़ा शुरू

*🛑2023-24 - TRE 2.0 & TRE 3.0 - घोटाले का दौर*
- TRE 2.0: EOU चार्जशीट में पेपर लीक कन्फर्म
- TRE 3.0: पिकअप वैन से पेपर लीक, फर्जी डोमिसाइल
- आपके RTI से खुलासा: TRE 1 और 2 में महिला आरक्षण Vertical, TRE 3 में Horizontal - एक भर्ती में 2 नियम

*🛑2025-26 - बर्खास्तगी और पर्दाफाश*
- बक्सर: 15 बर्खास्त, 14 UP के - फर्जी जाति प्रमाण
- मधेपुरा: अयोग्य शिक्षकों को नोटिस
- गया फतेहपुर: 44 में 43 बाहर के राज्यों के
- BPSC जवाब: "जांच हमारी जिम्मेदारी नहीं"

*🛑2026 - TRE 4.0 - नया नोटिफिकेशन*
- 18 अगस्त 2026 को 32,388 पदों का विज्ञापन जारी 7b98

20 साल पहले ठेके पर भर्ती, आज पेपर लीक पर भर्ती।
शिक्षक बदले, सिस्टम नहीं बदला।
नियोजित से BPSC तक - बिहार के छात्रों के साथ धोखा जारी है।

*#BiharTeacherScam #NiyojitToBPSC #20SaalKaDhokha

यादव दैवीय जाति है

यादव दैवीय जाती है यादवों पर किसी का श्राप नहीं लगता है 

पूरे देश में यादवों को विभिन उपनाम से जाना जाता है जातीय जनगणना 2026-27 में सभी 'यादव' नाम से दर्ज कराएंगे 

Yadav Surnames of All States (Source: National Commission for Backward Classes - NCBC)

1. Andaman and Nicobar ,NCBC Entry No- ....

2. Andhra Pradesh, NCBC Entry No- (93)

Yadava (Golla) 

3. Assam ,NCBC Entry No -(09) 

Ghosh, Gop, Gowala, Gawala, Goal, Goala, yadav 

4. Bihar ,NCBC Entry No- (104) 

Yadav (Gwala, Ahir, Gope, Sadgope)

5. Chandigarh ,NCBC Entry No- (24)

 Gawala/Gwala/Gowala/ Gowale/ Gawla/Yadav/ Ahir

6. Chattisgarh ,NCBC Entry No- (01)

 Ahir, Brajwasi, Gawli, Gawali, Goli, Lingayat-Gaoli, Gowari (Gwari), Gowra, Gawari, Gwara, Jadav, Yadav, Raut, Thethwar, Gop/Gopal

7. Daman and Diu ,NCBC Entry No- (19) 

Yadav, Gavli

8. Dadra and Nagar Haveli,NCBC Entry No-(02) 

Ahir, Bharvad, Yadav

9. Delhi ,NCBC Entry No-(03)

 Ahir, Yadav, Gwala

10. Goa ,NCBC Entry No-(00)

 yadav, Ahir Gavli, Gavali

11. Gujarat ,NCBC Entry No- (02) 

Ahir,Ayar, Bericha, yadav 

12. Haryana ,NCBC Entry No- (26) 

Gawala, Gowala, Ahir,Yadav

13. Himachal Pradesh ,NCBC Entry No- (23)

 Gowala,Gwala, yadav 

14. Jammu and Kashmir ,NCBC Entry No- ...

15. Jharkhand ,NCBC Entry No- (118) 

Yadav Gwala, Ahir, Gope, Mehar, Sadgop

16. Karnataka ,NCBC Entry No- (22) 

Golla, Gouli, Lingayat Gowli/Gauli/Kawadiga, Gavali, Gavli, Konar, Konnur, Krishna Gavali, Gopal, Yadav, Asthanagolla, Yadava, Adavigolla, Gopala, Gopali, Maniyani

17. Kerala ,NCBC Entry No- (67) 

Yadava Kolaya, Ayar, Mayar, Maniyani & Iruman

18. Madhya Pradesh ,NCBC Entry No-(01) 

Ahir, Brajwasi, Gawli, Gawali, Goli, Lingayat-Gaoli, Gowari, (Gwari), Gowra, Gawari, Gwara Jadav, Yadav, Raut Thethwar, Gop/Gopal, Bargahi, Bargah

19. Maharashtra ,NCBC Entry No- (172) 

Yadav Ahir ,Gavli, Gavali

20. Manipur ,NCBC Entry No-

21. Odisha ,NCBC Entry No- (43) 

Gola, Golla, Gope/Gop, Sadgope/ Sadgop, Ahir, Gour, Gouda, Goudo, Mekala Golla, Punnu Golla, Yadav, Laxminarayan Gola and Goudia Gola, Gopal/Gopala, Sholakhandia, Maghada Gouda, Dumal Gouda, Mathurapuria Gouda, Gopapuria gouda, Nanda Gouda & Kanja Gouda

22. Puducherry ,NCBC Entry No- (30) 

Yadava-including:- Idayar, Konar, Sambar Yadava, Yadava Pillai, Gollalu

23. Punjab ,NCBC Entry No- (38) 

Gawala, Gowala, Yadav 

24. Rajasthan ,NCBC Entry No- (01) 

Ahir, Yadav

25. Sikkim ,NCBC Entry No- (05) 

Rai,Yadav 

26. Tamil Nadu ,NCBC Entry No- (168) 

Yadava (including Idaiyar, Telugu speaking Idaiyar known as Vaduga Ayar or Vaduga Idaiyar or Golla, Mond Golla and Asthanthra Golla)

27. Tripura ,NCBC Entry No- (13) 

Goala, Gope, Yadav, Aheer

28. Uttar Pradesh ,NCBC Entry No- (01) 

Ahir, Yadav

29. Uttarakhand ,NCBC Entry No- (06)

 Ahir, Yadav

30. West Bengal ,NCBC Entry No-(03)

Goala-Gope(Pallav Gope, Ballav Gope, Yadav Gope/Ghosh, Gope, Ahir and Yadav)

31. Telangana ,NCBC Entry No- (74) 

Yadava,Golla

रेलवे में पेंट्रीकार वालो की लुट

रेल गाड़ी में पैंट्री कार वालों की लूट का नया तरीका! (सभी रेल यात्री ध्यान दें)

दोस्तों, आज कल ट्रेनों में पैंट्री कार वालों ने यात्रियों को लूटने का एक नया और बेहद चालाकी भरा तरीका निकाल लिया है। पहले समझिए कि यह पूरा खेल क्या है—

IRCTC के नियम के मुताबिक साधारण चाय (Ready Tea) या टी-बैग वाली चाय की आधिकारिक दर आज भी **₹10** ही है। लेकिन पैंट्री वालों ने ₹10 वाली साधारण चाय को मेन्यू से गायब ही कर दिया है। अब ये नया धंधा लेकर आए हैं—'प्रीमिक्स चाय और कॉफी'। चाय ₹20 और कॉफी ₹25 वसूल रहे हैं।

पिछले दिनों मैं 22308 बीकानेर हावड़ा एक्सप्रेस में सफर कर रहा था। सुबह-सुबह "चाय-चाय" की आवाज सुन आँख खुली। मैंने कहा—"एक चाय दो।"

वेंडर ने पूछा—"कौन सी? मसाला या इलायची?"

मैंने मसाला कह दिया।

उसने चाय दी और ₹20 लेकर चलता बना।

अगली बार वह फिर आया,

तो मैंने पूछ ही लिया—"भाई क्या बात है, जितने भी चाय वाले घूम रहे हैं सभी प्रीमिक्स ही बेच रहे हैं, ₹10 वाली रेडी चाय नहीं आएगी क्या?"

उसका जवाब सुनकर मेरा सर घूम गया!

बोला—"IRCTC ने बंद कर दी, अब यही बिकती है।"

मैंने वहीं उसका झूठ पकड़ा और

पैंतरा बदलते हुए कहा—"मैं खुद IRCTC से जुड़ा हूँ, तुम्हारे मैनेजर को बुलाओ।"

यह सुनते ही वह घबरा गया

और बहानों की झड़ी लगा दी—"दूध नहीं है... चूल्हा खाली नहीं है... चूल्हा खराब है।"

मैंने कड़े लहजे में कहा—"तुम्हारा दिमाग खराब है! एलएचबी (LHB) पैंट्री में अब खाना बनाने का सिस्टम ही नहीं होता, सिर्फ वाटर बॉयलर होता है, तो चूल्हा कहाँ से खराब हो गया? पहले ₹10 वाली चाय लाओ और मैनेजर को भेजो, नहीं तो अभी शिकायत मेल करता हूँ।"

वह चला गया। मेरे सामने बैठे एक परिवार ने बताया कि वे 6 लोग हैं और सुबह से सिर्फ दो बार चाय पीने में उनके ₹200 खर्च हो गए! सोचिए, आम जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।

थोड़ी देर में वही वेंडर आया और बोला—"लीजिए ₹10 वाली चाय।" उसने तुरंत एक 'एव्रीडे' का दूध पाउच फाड़ा, गर्म पानी में मिलाया, टी-बैग डाला और दे दिया। यानी दूध भी था और सामान भी, बस छिपाकर रखा था! मैंने पूछा—"मैनेजर कहाँ है?" तो बोला—"अभी सोकर नहीं उठे हैं।"

मैंने उसे साफ कहा—"तुम्हारा मैनेजर सोया है और तुम पैसेंजर्स को सुबह 5 बजे से चिल्लाकर जगा रहे हो? जबकि IRCTC का सख्त नियम है कि रात 11 से सुबह 6 बजे तक कोई वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेचेगा।" वह चुपचाप खिसक गया।

करीब सवा छह बजे पैंट्री कार के मैनेजर साहब खुद आए। चेहरे पर हवाईयाँ उड़ रही थीं।

बनावटी मुस्कान के साथ बोले—"सर नमस्कार, मैं पैंट्री मैनेजर हूँ। वेंडर छोटा लड़का है, गलती हो गई।"

मैंने उन्हें सीधे शब्दों में आइना दिखाया—"गलती वेंडर की नहीं, तुम्हारी है। तुम लोग मिलकर पूरे सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे हो। एक तो सुबह 5 बजे चिल्लाकर नियम तोड़ रहे हो, 

ऊपर से ₹10 वाली चाय छुपाकर ₹20 का प्रीमिक्स जबरन बेच रहे हो (Forced Selling)। स्टॉक कम होने का बहाना मत बनाना, क्योंकि मेरे टोकते ही तुरंत पाउच और टी-बैग बाहर आ गए।"

मैनेजर पूरी तरह सकपका गया और हाथ जोड़कर बोला—"सर प्लीज शिकायत मत कीजिए, आइंदा से पूरी ट्रेन में सबको ₹10 वाली चाय ही मिलेगी और टाइमिंग का पूरा ध्यान रखेंगे।"

मैंने कहा—"शिकायत तो मैं फिर भी करूंगा ताकि तुम लोगों को सबक मिले, लेकिन फिलहाल इस पूरे कोच में जो भी चाय मांगेगा, उसे ₹10 वाली ऑफिशियल चाय ही दोगे। 

अगर दोबारा कोई ₹20 प्रीमिक्स चिल्लाता मिला, तो सीधा RailMadad' ऐप पर तुम्हारी पैंट्री का लाइसेंस सस्पेंड करने की कंप्लेंट डालूंगा।"

मैनेजर 'जी सर, बिल्कुल सर' करता हुआ वेंडर को लेकर दबे पाँव भाग खड़ा हुआ।

साथियों, यह लड़ाई सिर्फ ₹10 की नहीं है, यह हमारे हक की है। जब भी ट्रेन में सफर करें, सजग रहें:

1. सुबह 6 बजे से पहले और रात 11 बजे के बाद वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेच सकते।

2. ₹10 वाली साधारण चाय मांगना आपका हक है।

3. कोई वेंडर मनमानी करे तो बिल मांगिए। नियम है—"No Bill, No Earnings"।

4. वेंडर न माने तो तुरंत RailMadad' ऐप या टोल-फ्री नंबर 139 पर शिकायत दर्ज करें।

एक बात और ध्यान रखें कि आईआरसीटीसी के खाने की थाली की रेट 80 रुपये ही है अगली बार जब आप ट्रेन में खाना खरीदे तो 80 वाली थाली की ही मांग करें अगर नहीं देवें तो तुरन्त शिकायत करें. हाथ जोड़कर 80 वाली थाली देकर जाएगा

जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, ये पैंट्री वाले ऐसे ही आम यात्रियों को लूटते रहेंगे। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर रेल यात्री अपने अधिकारों को जान सके!

आपकी क्या राय है कॉमेंट में बताए....Read News

अम्बेडकर फर्जी दलित

‼️बिग एक्सपोज
भारत में एक सबसे बड़ा झूठा दावा किया जाता है कि अंबेडकर ने दलितों और आदिवासियों को अधिकार दिलाया‼️
पर वास्तविकता ये है कि अंबेडकर दलितों को वोट देने के पक्ष में थे लेकिन आदिवासियों के बारे में उनका विचार यह था

Ambedkar clearly states on Aboriginal Tribes (आदिवासी/जनजाति, आज के Scheduled Tribes):

"The Aboriginal Tribes have not as yet developed any political sense to make the best use of their political opportunities and they may easily become mere instruments in the hands either of a majority or a minority and thereby disturb the balance without doing any good to themselves."

उन्होंने इनको वोट का अधिकार देने या सामान्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने से भी इनकार कर दिया।
उनके हिसाब से दलित समझदार है लेकिन आदिवासी नहीं अगर उन्हें कोर्ट का अधिकार मिला तो वह इसका दुरुपयोग कर सकते है
आज उन्हें फालतू में झूठ बोलकर आदिवासियों का भगवान बनाया जा रहा है 
।आज Aboriginal Tribes (Scheduled Tribes) में कौन-कौन सी मुख्य जातियां/समुदाय आते है
भारत में 700+ notified Scheduled Tribes हैं (कुल आबादी ~8.6%)। राज्य-wise लिस्ट अलग-अलग है, लेकिन प्रमुख: 

भिल (Bhil) - राजस्थान, गुजरात, MP, MH 

गोंड (Gond) - MP, MH, छत्तीसगढ़, आंध्र 

संthal (Santhal) - झारखंड, ओडिशा, बिहार, WB 

मुंडा, ओरांव, हो - झारखंड क्षेत्र 

मीणा (Meena) - राजस्थान 

पूर्वोत्तर: नागा, मिजो, खासी, बोरो आदि। 

अन्य: बैगा, सहारिया, जारावा (अंडमान) आदि।

Ambedkar Dalits के लिए लड़ सकते थे क्योंकि वे "सेंसिबल" मानते थे, लेकिन आदिवासियों को "not developed any political sense" कहकर अलग रखना चाहते थे। 
आज के आदिवासियों से प्रश्न है कि क्या वह दलितों से कम परिपक्व थे जो उन्हें उस समय वोट के अधिकार की जरूरतनहीं थी
अंबेडकर कैसे तुम्हारे मसीहा हुए
 मसीहा थे या एक शत्रु?
(दोनों स्क्रीनशॉट्स पूरी तरह authentic हैं — Writings & Speeches Vol.1 से।)

CSP वालो की लुट

मेरे पड़ोस की एक अम्मा मुझे हर बार बोलती कि हमारे बैंक पैसे काट लेती है! वृद्धा पेंशन कम मिलती है! आज अम्मा की पेंशन निकलवाने मैं एक SBI के CSP केंद्र पर गया !

अम्मा को 500 रुपए निकलवाने थे अंगूठा लगवाकर उसने पैसे दे दिए ! लेकिन पासबुक प्रिंट नहीं की मैने कहा भाई इसे प्रिंट कर अम्मा के पैसे हर बार ज्यादा कट रहे हैं मैं भी देखूं बैंक किस बात का चार्ज ले रही है!

वो बहाने बनाने लगा मैने मोबाइल निकाला और वीडियो बनाना शुरू कर दिया ! बहस होने लगी फिर उसने प्रिंट किया तो उसमें 1000 रुपए की निकासी प्रिंट हुई ! मैंने पूंछा कब से कर रहा है ऐसा ?

वहां मौजूद और भी महिलाएं कहने लगीं हमसे भी बोल देता था कि बैंक ने अपना टैक्स काट लिया तो कभी बोलता इस बार कम आए हैं! हंगामा बढ़ता देख उसने शटर गिरा दिया !

वहां भीड़ इकठ्ठा हो गई मैने कहा सबके पैसे वापिस कर वरना पुलिस बुलाऊंगा और वीडियो ट्वीट करूंगा ! ट्विटर का नाम सुनते ही वो हाथ जोड़ने लगा ! फिर उसने सबके पैसे वापिस किए !

भविष्य में ऐसा न करने की कसम खाई! CSP सेंटर वाले गांव की भोली औरतों को खूब लूट रहे हैं! इसलिए अपनी दादी अम्माओ के साथ एक जागरूक युवा जरूर जाना चाहिए..? काफी मिन्नतों के बाद मैने वीडियो डिलीट कर दिए !

मणिपुर में CRPF को खुली छूट मिली news

मणिपुर में CRPF का सख्त संदेश 🚨

मणिपुर में तैनात CRPF जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक जी. पी. सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा—

"यदि उपद्रवियों और हथियारबंद तत्वों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं करनी है, तो सुरक्षा बलों को हथियार और गोला-बारूद देने का क्या अर्थ है?"

उन्होंने जवानों को यह भरोसा भी दिलाया कि ड्यूटी के दौरान कानून के दायरे में की गई हर वैध कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी नेतृत्व उठाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब मणिपुर में शांति बहाली और हिंसक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। इसे जवानों का मनोबल बढ़ाने और कानून तोड़ने वालों को स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

🇮🇳 राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।

पश्चिम बंगाल का जगन्नाथ मंदिर

दीघा का जगन्नाथ मंदिर अब होगा श्रीश्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 

- ममता के शासनकाल में इसे जगन्नाथ धाम का नाम देकर उत्पन्न किया था विवाद

- भारतीय संस्कृति में देश में सिर्फ चार ही धाम, उड़ीसा समेत देशभर के लोगों में खुशी का माहौल 

अशोक झा /सिलीगुड़ी: मिदनापुर जिले के दीघा में स्थित पश्चिम बंगाल के जगन्नाथ मंदिर को अब हिंदू धर्म के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक धाम नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि अब इस मंदिर परिसर को 'श्रीश्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' के नाम से जाना जाएगा। शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पुरी से भाजपा सांसद संबित पात्रा, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का पत्र लेकर एक प्रतिनिधि के तौर पर आए थे।सीएम ने बताया कि कैबिनेट ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है और एचआईडीसीओ टेंडर तथा सरकारी फंड भी मंजूर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहां ठाकुर की पूजा होती है, उस ढांचे को मंदिर के रूप में जाना जाएगा। इसे 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' के नाम से जाना जाएगा।टेंडर में भी नहीं था धाम का जिक्र: परिसर के भीतर स्थित मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा निर्धारित नियमों व रीति-रिवाजों के अनुसार की जाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रिमंडल प्रस्ताव और परिसर के निर्माण के लिए जारी निविदा नोटिस में परियोजना को 'सांस्कृतिक केंद्र' कहा गया था, जिसमें 'धाम' शब्द का कोई प्रावधान नहीं था, जिससे संकेत मिलता है कि यह शब्द बाद में जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि इस शब्द पर शुरू से ही बहस हो रही थी और पिछली सरकार ने इसे शामिल करके सनातनी भावनाओं का अपमान किया था।
खत्म हुआ दीघा के धाम का विवाद: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव को आवश्यक अधिसूचना जारी करने और परिसर का प्रबंधन करने वाले न्यास को इस बदलाव के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया है। इस कदम का मकसद दीघा मंदिर के नामकरण को लेकर हुए विवाद को खत्म करना है। इस नामकरण से ओडिशा के लोगों में नाराजगी थी, क्योंकि 12वीं सदी का पुरी जगन्नाथ मंदिर लंबे समय से "जगन्नाथ धाम" के नाम से जाना जाता है।
दीघा जगन्नाथ मंदिर: शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दीघा मंदिर में पूजा भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में बताए गए जगन्नाथ देव की पूजा के नियमों के अनुसार और सात्विक तरीके से की जाएगी। प्रसाद बांटा जाएगा और ट्रस्ट समिति की जानकारी मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। दीघा जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हम माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर मुझसे चर्चा की थी और हम बहुत खुश हैं कि अब से इस मंदिर को 'दीघा जगन्नाथ मंदिर' के नाम से जाना जाएगा।
राधारमण से की थी सीएम ने चर्चा: कुछ दिन पहले, सीएम ने मायापुर में इस्कॉन मंदिर का दौरा किया था और राधारमण के साथ इस मामले पर चर्चा की थी। दीघा मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी इस्कॉन की है। पिछली तृणमूल सरकार की आलोचना करते हुए उन्‍होंने ने कहा कि मंदिर के नाम में 'धाम' शब्द का इस्तेमाल करना सही नहीं है। मैंने दस्तावेज देखे हैं, और इसे एक सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर बनाया गया था। पिछली सरकार ने पारंपरिक संस्कृति का जो अपमान किया था, यह सरकार वैसा नहीं करेगी।
संबित पात्रा बोले ओडिशा के साथ बंगाल भी खुश: 
संबित पात्रा ने ओडिशा की आपत्ति के बारे में बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम हैं। उनमें से एक ओडिशा में जगन्नाथ धाम है, जहां नारायण का वास है। आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना की थी। इसलिए जब दीघा में मंदिर बनाया गया और उसे 'धाम' कहा गया, तो न केवल साढ़े चार करोड़ ओडिया लोगों को, बल्कि बंगाल के भक्तों को भी दुख पहुंचा। संबित पात्रा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए सीएम सुवेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया। कहा कि नई सरकार परंपरा का सम्मान करती है।
ओडिशा सीएम ने पत्र में क्या लिखा था: ओडिशा के मुख्यमंत्री ने 6 मई, 2025 को पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे एक पत्र में कहा था कि दीघा मंदिर के लिए धाम शब्द का इस्तेमाल करने से पुरी की खास विरासत कमजोर होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे लाखों तीर्थयात्रियों और भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। माझी ने कहा था कि पुरी मंदिर का धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेमिसाल है, न सिर्फ़ ओडिशा के लोगों के लिए, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर के लाखों भक्तों के लिए भी

मनुस्मृति जरूरी है न कि संविधान रद्दी का टुकड़ा

जब #मनुस्मृति थी तब #सावित्री ने अपने माता-पिता की मर्जी के बिना #सत्यवान के साथ विवाह किया था  जब मनु स्मृति थी तब माता #सीता ने #स्वयंवर क...