यह PIL एक NGO द्वारा दायर की गई थी, जिस पर Supreme Court ने ₹1 लाख की पेनल्टी भी लगाई है। 💰
माननीय न्यायमूर्ति नागरत्ना और न्यायमूर्ति महादेवन की पीठ के समक्ष आया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 2014 में प्रमाती एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट मामले में यह फैसला दे चुका है कि माइनॉरिटी स्कूलों पर RTE एक्ट लागू नहीं होगा।
🙏 नम्रतापूर्वक माननीय सुप्रीम कोर्ट से कुछ प्रश्न हैं —
❓ Minorities की परिभाषा कहाँ है?
❓ किस कानून के अंतर्गत माइनॉरिटी को परिभाषित किया गया है?
📘 National Minority Commission Act में भी माइनॉरिटी की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है।
📄 माइनॉरिटी एजुकेशन से संबंधित 2004 के प्रावधानों में भी माइनॉरिटी की परिभाषा नहीं दी गई है।
आज तक माइनॉरिटी की पहचान करने के लिए —
❌ कोई आयोग नहीं बनाया गया
❌ कोई विशेषज्ञ समिति नहीं बनी
यह भी आज तक तय नहीं हुआ कि —
❓ माइनॉरिटी 1% होगी, 2% होगी या 3%
❓ पहचान राज्य स्तर पर होगी या राष्ट्रीय स्तर पर
❓ जिला स्तर पर पहचान होगी या नहीं
❓ माइनॉरिटी की यूनिट 100 होगी, 1000 होगी, लाख होगी या करोड़ होगी
📜 भारत के संविधान में माइनॉरिटी की कोई परिभाषा नहीं है।
⚖️ भारत के किसी भी कानून में माइनॉरिटी की स्पष्ट परिभाषा नहीं है।
इसके बावजूद —
✔️ माइनॉरिटी कमीशन चल रहा है
✔️ माइनॉरिटी अफ़र्मेटिव एक्शन चल रहा है
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर लोन दिए जा रहे हैं
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर छात्रवृत्तियाँ हैं
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटियाँ चल रही हैं
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर वक़्फ़ बोर्ड चल रहा है
✔️ माइनॉरिटी के नाम पर वक़्फ़ ट्रिब्यूनल चल रहा है
लेकिन —
❌ न संविधान में माइनॉरिटी परिभाषित है
❌ न किसी कानून में माइनॉरिटी परिभाषित है
और दुख की बात यह है कि
माननीय सुप्रीम कोर्ट भी इस विषय को परिभाषित नहीं करना चाहता,
इस पर आना नहीं चाहता,
और इस पर चर्चा करना नहीं चाहता।
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#MinorityDefinition #EqualLaw #RTE
#Constitution
@HMOIndia @PMOIndia
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