#छत्रपति शिवाजी राज महाराज
वंश – #यदुवंश/#यदुवंशी/#यदु
कुल– हैहयवंशी_यादव (#क्षत्रिय कुलीन वर्ग)
जन्म दिवस (16 फरवरी 1630, शिवनेरी किला) निर्वाण दिवस ( 3 अप्रैल 1680 , राजगढ़ किला)
पिता – शाह जी भोसले जाधव
माता – जीजाबाई जाधव
उपलब्धि – हिंदवी स्वराज्य संस्थापक,
युद्ध – अनेक राज्यों को जीत लिया गया
विवाह– पहली पत्नी 14 मई 1640 , सइबाई निंबालकर जाधव – पुत्र संभाजी बाद मे द्वितीय महाराज छत्रपति संभाजी महाराज बने ये विश्व के पहले बाल साहित्यकार हैं इन्होंने मात्र 14 वर्ष में ही संस्कृत, मराठी, फारसी, उर्दू, कन्नड़ तेलुगु , फारसी भाषा में किताब लिख दी थी।
यदुवंशी छत्रपति शिवाजी महाराज जी की अन्य पत्नियां भी थीं और इनके मात्र 2 पुत्र हुए थे
राज्याभिषेक–6 जून 1674 , रायगढ़ किला
राज्याभिषेक दिवस
6 जून 1674 को
#यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी महाराज जी का राज्याभिषेक हुआ था...
मगर स्थानीय ब्राह्मणों के पास उतनी योग्यता नहीं थी जितनी वाराणसी के #गंगाभट्ट जी पास थी तो #वाराणसी से #ब्राह्मण गए थे
#यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज
को राजा बनाया गया
#यदुवंशी_वीर_योद्धा का राज्याभिषेक करने काशी के सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण तैयार हुए थे जिसके बाद #गागा_भट्ट नाम के ब्राह्मण ने राज्याभिषेक कराया था इस पूरे कार्यक्रम में
7 करोड रुपए खर्च आया था , इस राज्याभिषेक में आसपास के अनेकों महाराजा राजा जागीरदार सामंत पहुंचे हुए थे दक्षिण भारत के लगभग सभी राजा महाराजा शामिल रहे थे नॉर्थ इंडिया से बिहार, बंगाल ओडिसा असम पंजाब सहित सिख महाराजा रणजीत सिंह जी भी उपस्थित रहे थे कुल 11 हजार ब्राह्मण शामिल हुए थे यह राजसूर्य यज्ञ जितना खर्च हुआ था
#यदुवंशी_यदुवीर_यदुकुल_शिरोमणि
#छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज का राज्याभिषेक संपन्न हुआ था
आज हमारे कुछ #यदुवंशी #यादव भाई अपनी गरीबी का रोना रोते हैं अपने को शोषित दबित पीड़ित वंचित पिछड़ा वर्ग का बोलते है यह वोट के लालच में खुद को अपमानित करने जैसा है यह खुद को धोखा देने जैसा है
#यदुवंशी_वीर_छत्रपति_शिवाजी_महाराज अपने जाति, धर्म,कर्म से और अपने ताकत से उन सामंतवादी आक्रमणकारी हमलावर को अपने कदमों में झुका दिए थे मुगल बादशाह औरंगजेब का भारत विजेता का सपना अधूरा रह गया वह अपनी हार और अपमान बर्दास्त न कर सका और दक्षिण भारत में ही कब्र में दफनाना गया
और कभी भी मुगलों का वो सपना की पूरा हिंदुस्तान अपना कभी भी पूरा नहीं होने दिया
भारत कभी भी पूरी तरह गुलाम रहा ही नहीं
यहां तक कि 1947 में जब अंग्रेज सरकार ने भारत छोड़ा उस समय भी लगभग 100 के आसपास स्वतंत्र देशी राजा महाराजा थे जो कि बिल्कुल आजाद थे
जय यदुवंशी जय श्री कृष्ण
💪#जय_वीर_शिवाजी 🙏
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