नपुंसकता

नपुंसकता

परिचय-

          जब कोई व्यक्ति यौन संम्बन्ध नहीं बना पाता है या संभोगक्रिया के समय जल्द ही शिथिल हो जाता है तो कहा जाता है कि वह व्यक्ति नपुंसकता के रोग से पीड़ित है। इस रोग का सम्बंध ज्ञानेन्द्रियों से होता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपनी इस समस्या को किसी को भी बताने में संकोच करता है जिसके कारण उसका यह रोग बढ़ता ही चला जाता है। यह रोग अधिक उम्र वाले व्यक्तियों में अधिक पाया जाता है। संभोगक्रिया के समय इस रोग से पीड़ित व्यक्ति का लिंग उत्तेजित तो हो जाता है लेकिन फिर भी उसके लिंग से वीर्य नहीं निकलता है।

 कारण-

नपुंसकता रोग होने के 3 कारण होते हैं-

1. शारीरिक- नपुंसकता रोग शरीर की कमजोरी के कारण होता है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो वह शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता। जिसके कारण उसे नपुंसकता रोग हो जाता है।

2. मानसिक- नपुंसकता रोग ज्यादा चिंता और तनाव में रहने से भी हो सकता है। लिंग के उत्तेजित न होने का सबसे प्रमुख कारण तो मानसिक ही होता है। कोई व्यक्ति जब ज्यादा थक जाता है या तनावग्रस्त होता है या किसी कारण से चिंतित हो या किसी समस्या के कारण व्यक्ति का आत्मविश्वास बुरी तरह से टूट चुका हो तो उस व्यक्ति को नपुंसकता रोग हो सकता है। हस्तमैथुन या ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसकता के शिकार हो सकते हैं। ऐसे नवयुवकों में संभोग की इच्छा कम हो जाती है। कभी-कभी तो बैर-भाव, गुस्सा या पश्चाताप भी लिंग के उत्तेजित न होने का एक कारण हो सकता है या वह डरता है कि कहीं उसकी पत्नी गर्भवती न हो जाए या किसी तरह से पत्नी को चोट न पहुंच जाए जिसके कारण उस व्यक्ति को मानसिक तनाव होता है।

3. अपराध-बोध- कभी-कभी बेहद मुश्किल माहौल में परवरिश या अपने बचपन में यौन दुराचार का शिकार होने के कारण भी सेक्स के बारे में मन में नकारात्मक भावनाएं पैदा हो जाती हैं जिसके कारण नपुंसकता रोग हो जाता है।

     

लक्षण-

        पुरुष का लिंग संभोग करने के योग्य न रहना नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। पुरुषों के लिंग में थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना इसका दूसरा लक्षण है। पुरुषों में संभोग अथवा ज्यादा संभोग के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में लिंग पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति का लिंग कभी-कभी थोड़े समय के लिए ही उत्तेजित रहता है तथा जब रोगी स्त्री के साथ संभोग क्रिया करता है तो कुछ समय के बाद ही उसके लिंग की उत्तेजना खत्म हो जाती है और वह संभोग क्रिया करने में असमर्थ हो जाता है। इसके कारण रोगी की पत्नी अपने पति से बहुत नाराज हो जाती है तथा उनके आपसी सम्बंधों में मन-मुटाव हो जाता है।

एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा नपुंसकता रोग का उपचार-

          नपुंसकता रोग का इलाज करने के लिए रोगी की पत्नी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि रोगी की पत्नी अपने पति के साथ अच्छा बर्ताव करे तथा वह अपनी पति का इलाज कराने में मदद करें तो रोगी जल्दी ठीक हो सकता है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को भी अपनी पत्नी को विश्वास दिलाना चाहिए कि उसे प्यार करना और प्यार पाना बहुत ही अच्छा लगता है।

(प्रतिबिम्ब बिन्दु पर दबाव डालकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा इलाज करने का चित्र)

        इस च को अपनज किसी अच्छे एक्यूप्रेशर चिकित्सक की देख-रेख में कराना चाहिए क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सक को सही दबाव देने का अनुभव होता है और वह सही तरीके से नपुसंकता से पीड़ित रोगी का उपचार कर सकता है

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