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पति-पत्नी के अनबन को दूर करने के लिए उपाय

जोड़े कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते-झगड़ते हैं

कुछ जोड़े कुत्ते-बिल्लियों की तरह लड़ते-झगड़ते रहते हैं, जिनके कारण उनका वैवाहिक जीवन एकदम खराब हो जाता है। इसे दूर करने के लिए आप सूर्योदय से पहले स्नान आदि के बाद किसी मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और इस मंत्र का जाप करें।

ओम् नम: संभवाय च मयो भवाय च नम:
शंकराय च मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।

पति-पत्नी के मतभेद को दूर करने के लिए कुछ लोग मंत्र जाप का भी सहारा लेते हैं। कहते हैं यदि यह जप विधि-विधान से किया जाए तो पति-पत्नी के बीच कभी अनबन नहीं होती साथ ही प्रेम भी बढ़ता है।

अक्ष्यौ नौ मधुसंकाशे अनीकं नौ समंजनम्।
अंत: कृणुष्व मां ह्रदि मन इन्नौ सहासति।।
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अघोरी

रहस्यमयी है अघोरियों की साधना विधि




अघोरी: अघोरियों के बारे में ये बातें जानकर हैरान रह जाएंगे आप... अघोरियों की साधना विधि सबसे ज्यादा रहस्यमयी है। उनकी अपनी शैली, अपना विधान है, अपनी अलग विधियां हैं। अघोरी उसे कहते हैं जो घोर नहीं हो। यानी बहुत सरल और सहज हो। जिसके मन में कोई भेदभाव नहीं हो। अघोरी हर चीज में समान भाव रखते हैं। वे सड़ते जीव के मांस को भी उतना ही स्वाद लेकर खा सकते हैं जितना स्वादिष्ट पकवानों को स्वाद लेकर खाया जा सकता है। अघोरियों की दुनिया ही नहीं, उनकी हर बात निराली है। वे जिस पर प्रसन्न हो जाएं उसे सबकुछ दे देते हैं। अघोरियों की कई बातें ऐसी हैं जो सुनकर आप दांतों तले अंगुली दबा लेंगे। हम आपको अघोरियों की दुनिया की कुछ ऐसी ही बातें बता रहे हैं, जिनको पढ़कर आपको एहसास होगा कि वे कितनी कठिन साधना करते हैं।अघोरी गाय का मांस छोड़ कर बाकी सभी चीजों को खाते हैं। मानव मल से लेकर मुर्दे का मांस तक। अघोरपंथ में श्मशान साधना का विशेष महत्व है इसलिए वे श्मशान में रहना ही ज्यादा पंसद करते हैं। श्मशान में साधना करना शीघ्र ही फलदायक होता है। श्मशान में साधारण मानव जाता ही नहीं, इसीलिए साधना में विध्न पड़ने का कोई प्रश्न नहीं। उनके मन से अच्छे बुरे का भाव निकल जाता है, इसलिए वे प्यास लगने पर खुद का मूत्र भी पी लेते हैं। अघोरियों के बारे में कई बातें प्रसिद्ध हैं जैसे कि वे बहुत ही हठी होते हैं, अगर किसी बात पर अड़ जाएं तो उसे पूरा किए बगैर नहीं छोड़ते। गुस्सा हो जाएं तो किसी भी हद तक जा सकते हैं।

अधिकतर अघोरियों की आंखें लाल होती हैं जैसे वो बहुत गुस्सा हो लेकिन उनका मन उतना ही शांत भी होता है। काले वस्त्रों में लिपटे अघोरी गले में धातु की बनी नरमुंड की माला पहनते हैं। अघोरी अक्सर श्मशानों में ही अपनी कुटिया बनाते हैं। जहां एक छोटी सी धूनि जलती रहती है। जानवरों में वो सिर्फ कुत्ते पालना पसंद करते हैं। उनके साथ उनके शिष्य रहते हैं जो उनकी सेवा करते हैं। अघोरी अपनी बात के बहुत पक्के होते हैं, वे अगर किसी से कोई बात कह दें तो उसे पूरा करते हैं। अघोरी अमूमन आम दुनिया से कटे हुए होते हैं। वे अपने आप में मस्त रहने वाले, अधिकांश समय दिन में सोने और रात को श्मशान में साधना करने वाले होते हैं। वे आम लोगों से कोई सम्पर्क नहीं रखते। ना ही ज्यादा बातें करते हैं। वे अधिकांश समय अपना सिद्ध मंत्र ही जाप करते रहते हैं। अघोरी मूलतः तीन तरह की साधनाएं करते हैं। शिव साधना. शव शाधना और श्मशान साधना। शिव साधना में शव के ऊपर पैर रखकर खड़े रहकर साधना की जाती है। बाकी तरीके शव साधना की ही तरह होते हैं। इस साधना का मूल शिव की छाती पर पार्वती द्वारा रखा हुआ पाँव है। ऐसी साधनाओं में मुर्दे को प्रसाद के रूप में मांस और मदिरा चढ़ाया जाता है। शव और शिव साधना के अतिरिक्त तीसरी साधना होती है श्‍मशान साधना, जिसमें आम परिवारजनों को भी शामिल किया जा सकता है। इस साधना में मुर्दे की जगह शवपीठ की पूजा की जाती है। उस पर गंगा जल चढ़ाया जाता है। यहाँ प्रसाद के रूप में भी मांस-मंदिरा की जगह मावा चढ़ाया जाता हैं   

इंद्रजाल

जानकारी




भारतीय प्राचीन विद्याओं में जिन विषयों से सम्बंधित पुस्तकों के प्रति जनसामान्य भी लालायित रहता है, इंद्रजाल उनमें से एक है. इंद्रजाल में दत्तात्रेय द्वारा भगवान शिव से प्राप्त तंत्र-मंत्र-यंत्र का गुप्त दुर्लभ ज्ञान संकलित किया गया है. इंद्रजाल में संकलित तंत्र-मन्त्र आदि कामना पूर्ति कारक प्रयोगों के उत्कीलन की आवश्यकता नहीं होती. दत्तात्रेय तंत्र में कहा गया है कि

ब्राहमण काम क्रोध वश रहेऊ,
त्याहिकरण सब कीलित भयऊ,
कहौ नाथ बिन कीलेमंत्रा,
औरहु सिद्व होय जिमितंत्रा.

देखा जाये तो इंद्रजाल तंत्र के षटकर्मों जैसे शांति कर्म, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन एवं मारण कर्मों में किये जाने वाले विविध प्रकार के तंत्र-मंत्र-यंत्र से सम्बंधित प्रयोगों का विवरण दिया गया है. अलग-अलग लेखकों एवं प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित इंद्रजाल नामक पुस्तक में शिव-दत्तात्रेय वार्ता के दौरान भगवान शिव द्वारा बताये गए तांत्रिक प्रयोगों का समावेश भी किया गया है. इंद्रजाल को कौतुक रत्न कोष भी माना जाता है. क्योंकि इंद्रजाल में दिए गए प्रयोग आश्चर्यजनक परिणाम प्रदान करते हैं. तंत्र-मंत्र प्रयोगों के अतिरिक्त इंद्रजाल में रसायन शास्त्र, औषधि विज्ञान, चमत्कार दिखाने वाले खेल भी दिए गए हैं. हाथ की सफाई से किये जाने वाले जादू के खेलों का संकलन भी इंद्रजाल में किया गया है. इंद्रजाल में औद्योगिक उपयोग के नुस्खे भी बताये गए हैं. इंद्रजाल के कुछ कौतुक प्रयोगों के नाम आगे दिए जा रहे हैं. जैसे :- एक घंटे में पेड़ लगाना, नींबू से खून निकालना, अंडे को बोतल में डालना, अंडे का स्वत: उछलना, छलनी में पानी भरना, अग्नि से वस्त्र न जलना आदि रोचक एवं विस्मय उत्पन्न करने वाले प्रयोगों का विवरण दिया गया है. इसके अतिरिक्त नजर दोष निवारण के लिए भी अनेक प्रभावशाली प्रयोगों, एवं झाड़े आदि का विवरण दिया गया है. इंद्रजाल में यक्षिणी सिद्वि के बारे में भी विस्तार से बताया गया है. विभिन्न प्रकार की यक्षिणियां किस प्रकार की विशेषता से युक्त होती है तथा प्रसन्न होने पर साधक को किस प्रकार से लाभ पहुंचाती है, इसका विवरण भी इंद्रजाल में दिया गया है.





सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...