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हिंदू राजा महाराजा की गैर हिन्दू प्रेमिका पत्नी

कभी भी हिन्दु राजा हो या रानी मुस्लिम समुदाय से शादी-ब्याह करके खुश नही रही थी

इतिहासकारों ने गलत इतिहास पढ़ाया

लेकिन इनमें से 👇 किसी को 35 टुकड़े का दिन न देखना पड़ा

• अकबर की बेटी शहज़ादी खानूम से महाराजा अमर सिंह जी का विवाह।

• कुँवर जगत सिंह ने उड़ीसा के अफगान नवाब कुतुल खा कि बेटी मरियम से विवाह।

• महाराणा सांगा मुस्लिम सेनापति की बेटी मेरूनीसा से ओर तीन मुस्लिम लड़किया से विवाह

• विजयनगर के सम्राट कृष्ण देव राय का गुजरात के नवाब सुल्तान महमूदशाह की बेटी मिहिरिमा सुल्तान से विवाह।

• महाराणा कुंभा (अपराजित योद्धा) का जागीरदार वजीर खा की बेटी से विवाह।

• बप्पा रावल (फादर ऑफ रावलपिंडी) गजनी के मुस्लिम शासक की पुत्री से और 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारीयो से विवाह

• विक्रमजीत सिंह गोतम का आज़मगढ़ की मुस्लिम लड़की से विवाह।

• जोधपुर के राजा राजा हनुमंत सिंह का मुस्लिम लड़की ज़ुबेदा

• कश्मीर के राजा सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ का तुर्की के खालीफा मुहम्मद बिन क़ासिम की बेटी जैनम से विवाह इसके अलावा उनकी 8 मुस्लिम बीबीया भी थी

• महाराणा उदय सिंह ने एक मुस्लिम लड़की लाला बाई से विवाह

• राजा मान सिंह मुस्लिम लड़की मुबारक से विवाह।

• अमरकोट के राजा वीरसाल का हामिदा बानो से विवाह।

• राजा छत्रसाल का हैदराबाद के निजाम की बेटी रूहानी बाई से विवाह।

• मीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन का राजपूत राजा बिन्दुसार से विवाह।

वैवाहिक संबंध तो हुई ही बहुत सारे हिंदू राजाओ की मुस्लिम प्रेमिकाएं भी थी

• अल्लाउदीन खिलजी की बेटी "फिरोजा" जो जालोर के राजकुमार विरमदेव की दीवानी थी वीरमदेव की युद्ध मै वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा सती हो गयी थी

• औरंगजेब की एक बेटी ज़ेबुनिशा जो कुँवर छत्रसाल के पीछे दीवानी थी ओर प्रेम पत्र लिखा करती थी ओर छत्रसाल के अलावा किसी ओर से शादी करने से इंकार कर दिया था

• औरंगजेब की पोती ओर मोहम्मद अकबर की बेटी सफियत्नीशा जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम की दीवानी थी

• इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान जो राजपूत जागीरदार कर्म चंद्र से प्रेम करती थी

• औरंगजेब की बहन भी छत्रपति शिवाजी की दीवानी थी शिवाजी से मिलने आया करती थी।

मराठा साम्राज्य के वीर शिरोमणि सेनापति वाजीराव और उनकी पत्नी मस्तानी की प्रेम कहानी तो सब जानते है वह भी जब उन पर हिंदी भाषा में फिल्म बना तब,

हिन्दू राजाओ की और भी बहुत सी मुस्लिम बीवीया थी लेकिन वो राज परिवार और कुलीन वर्ग से थी भी और नही भी 

लेकिन उस समय की किताबो में ब्रिटिश और उस समय के कवियों के रचनाओ में जिक्र स्पष्ट है

और ब्रिटिश रिकॉर्ड में भी औऱ ज्यादातर हिन्दू राजाओ की एक से ज्यादा मुस्लिम बीवीया थी लेकिन रक्त शुध्दता की वजह से इनके बच्चो को अपनाया नहीं जाता ओर उन बच्चों को वर्णशंकर मान के जागिर दे दी जाती थी

तो ये ऐतिहासिक प्रक्षेप चप्पल की तरह फेंक कर उनके मुह पर अवश्य मारिए जो हिन्दुओ को जोधा अकबर जैसे झूठे ऐतिहासिक तथ्यों पर बहस करते हैं

कभी इनपर भी "बॉलीवुड" फिल्म बनाए

#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है

महाराणा का शुभर्क

!!!---: महाराणा का शुभ्रक :---!!!


कुतुबुद्दीन घोड़े से गिर कर मरा, यह तो सब जानते हैं, लेकिन कैसे? भारतीय इतिहास के छुपाए गए पन्ने

यह आज हम आपको बताएंगे..

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी का महान 'चेतक' सबको याद है, लेकिन शायद स्वामी भक्त 'शुभ्रक' नहीं होगा!!

तो मित्रो आज सुनिए कहानी 'शुभ्रक' की......

कुतुबुद्दीन ऐबक ने राजपूताना में जम कर कहर बरपाया, और मेवाड़ (उदयपुर) के 'राजकुंवर कर्णसिंह' को बंदी बनाकर लाहौर ले गया।

कुंवर का 'शुभ्रक' नामक एक स्वामिभक्त घोड़ा था,

जो कुतुबुद्दीन को पसंद आ गया और वो उसे भी साथ ले गया।

एक दिन कैद से भागने के प्रयास में कुँवर को सजा-ए-मौत सुनाई गई.. और सजा देने के लिए 'जन्नत बाग' में लाया गया। यह तय हुआ कि राजकुंवर का सिर काटकर उससे 'पोलो' (उस समय उस खेल का नाम और खेलने का तरीका कुछ और ही था) खेला जाएगा..

कुतुबुद्दीन ख़ुद, कुँवर के ही घोड़े 'शुभ्रक' पर सवार होकर अपनी खिलाड़ी टोली के साथ 'जन्नत बाग' में आया।

'शुभ्रक' ने जैसे ही कैदी अवस्था में अपने राजकुंवर को देखा, उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे। जैसे ही सिर कलम करने के लिए कुँवर सा की जंजीरों को खोला गया, तो 'शुभ्रक' से रहा नहीं गया.. उसने उछलकर कुतुबुद्दीन को घोड़े से गिरा दिया और उसकी छाती पर अपने मजबूत पैरों से कई वार किए, जिससे कुतुबुद्दीन के प्राण पखेरू उड़ गए! इस्लामिक सैनिक अचंभित होकर देखते रह गए..

मौके का फायदा उठाकर कुंवर, सैनिकों से छूटे और 'शुभ्रक' पर सवार हो गए। 'शुभ्रक' ने हवा से बाजी लगा दी.. लाहौर से मेवाड़ बिना रुके , बिना थके दौडा और महल के सामने आकर ही रुका!

राजकुंवर घोड़े से उतरे और अपने प्रिय अश्व को पुचकारने के लिए हाथ बढ़ाया, तो पाया कि वह तो प्रतिमा बना खडा था.. उसमें प्राण नहीं बचे थे।

सिर पर हाथ रखते ही 'शुभ्रक' का निष्प्राण शरीर लुढक गया..

भारत के इतिहास में यह तथ्य कहीं नहीं पढ़ाया जाता क्योंकि वामपंथी लेखक अपने नाजायज बाप की ऐसी दुर्गति वाली मौत बताने से हिचकिचाते हैं! जबकि फारसी की कई प्राचीन पुस्तकों में कुतुबुद्दीन की मौत इसी तरह लिखी बताई गई है।

नमन स्वामीभक्त 'शुभ्रक' को..

#भारत माता की जय

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सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...