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LPG gas ⛽ के लिए हाहाकार
क्या गाजा भूखा है
संविधान क्या केवल भीम राव का था
औरंगजेब और ज्ञानवापी मन्दिर का सच
ज्ञानवापी मंदिर तोड़ने का फरमान औरंगज़ेब ने जारी किया था
*****
पर आप जानते हैं - क्यों?
कच्छ की महारानी के साथ मंदिर के महन्त ने बलात्कार की कोशिश की थी
मंदिर के तहखाने में अनेक औरतें और लाशें बंद पाई गई थीं
मंदिर तोड़ने से पहले औरंगज़ेब ने महारानी से पूछा था कि क्या करना है
महारानी ने जब तोड़ने की अनुमति दी तब फरमान जारी हुआ था
देखिए
इतिहासकार बी द्वारा एन पांडेय के अनुसार: कच्छ की 8 रानियां बनारस शहर में काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए गईं, जिनमें से सुंदर रानी का ब्राह्मण महंतों द्वारा अपहरण कर लिया गया।
कच्छ के राजा द्वारा औरंगजेब को इसकी सूचना दी गई, जिन्होंने कहा कि यह उनका धार्मिक व व्यक्तिगत मामला है।वह उनके आपसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन जब कच्छ के राजा ने शिकायत की, तो औरंगजेब ने सच्चाई का पता लगाने के लिए कुछ हिंदू सैनिकों को भेजा, लेकिन महंत के लोगों ने औरंगजेब के सैनिकों को मार डाला, डांटा और भगा दिया।
जब औरंगजेब को इस बात का पता चला तो उसने स्थिति का जायजा लेने के लिए कुछ विशेषज्ञ सैनिकों को भेजा, लेकिन मंदिर के पुजारियों ने उनका विरोध किया। मुगल सेना भी लड़ाई में आ गई, मुगल सैनिक और महंत मंदिर के अंदर फंस गए और युद्ध में मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया।तीसरे दिन सैनिकों को सुरंग में प्रवेश करने में सफलता मिली और वहां हड्डियों की कई संरचनाएं मिलीं। जो केवल महिलाओं के थे।
सैनिकों ने मंदिर में प्रवेश किया और लापता रानी की तलाश शुरू कर दी।
इस संबंध में, मुख्य मूर्ति (देवता) के पीछे एक गुप्त सुरंग की खोज की गई थी जो बहुत जहरीली गंध छोड़ रही थी। दो दिन तक दवा छिड़ककर बदबू दूर करने की कोशिश करते रहे और सैनिक देखते रहे।
कच्छ की लापता रानी का शव भी उसी स्थान पर पड़ा हुआ था, उसके शरीर पर एक कपड़ा भी नहीं था। मंदिर के मुख्य महंत को गिरफ्तार कर लिया गया और कड़ी सजा दी गई।
(बी. एन. पाण्डेय, खुदाबख्श मेमोरियल एनविल लेक्चर्स, पटना, 1986 द्वारा उद्धृत। ओम प्रकाश प्रसाद: औरंगज़ेब एक नई दृष्टि, पृष्ठ 20, 21)
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आलू का हलवा
आलू का हलवा
आलू को आप व्रत में नमकीन आलू फ्राई बनाकर तो खाते ही है, आलू का हलवा (Potato Halwa) भी बनाया जाता है, ये आलू का हलवा अधिकतर व्रत के समय बनाकर खाया जाता है, ये हलवा भी बहुत ही स्वादिष्ट बनता है और बड़ी जल्दी बन जाता है, बनाने में बड़ा आसान भी है. आइये आज हम आलू का हलवा (Aloo Ka Halwa ) बनायें.आवश्यक सामग्री - Ingredients for Potato Halwa
आलू - 300 (4या 5 मध्यम साइज केआलू)चीनी - 100 ग्राम(आधा कप)
घी - 4 टेबल स्पून
दूध - एक कप
किशमिश - 1 टेबल स्पून (डंठल तोड़िये और धो लीजिये)
काजू - 1 टेबल स्पून ( काजू के 5-6 टुकड़ों में काट लीजिये)
इलाइची - 5-6 (छील कर कूट लीजिये)
बादाम - 6-7 (बारीक कतर लीजिये)
विधि - How to make Potato halwa
आलू को धो कर, उबाल लीजिये, ठंडा कीजिये, छील कर तोड़ लीजिये.कढ़ाई में 2 चम्मच घी डालिये, गरम होने दीजिये. घी में आलू डाल कर कलछी से चलाते हुए धीमी आग पर 7-8 मिनिट तक कलछी से भुनिये. भुने हुये आलू में दूध और चीनी, किशमिश और काजू डाल दीजिये. इस समय आप हलवा को लगातार कलछी से चलाते रहें, 6-7 मिनट में आलू का हलवा बनकर तैयार हो जायेगा. आग बन्द कर दीजिये. आलू के हलवे में इलाइची पाउडर डाल कर मिला दीजिये. बचा हुआ घी भी डाल दीजिये, लीजिये आपका आलू का हलवा तैयार है.
आलू के हलवा को प्याले में निकालिये. कतरे हुये बादाम ऊपर से डालकर सजाइये. गरमा गरम आलू का हलवा परोसिये और खाइये. ठंडा होने पर भी यह हलवा बहुत अच्छा लगता है.
आलू के हलवा (Alu ka Halwa) में आप अपनी पसन्द से कोई भी मेवा हटा सकते हैं और अपनी पसन्द की मेवा डाल भी सकते हैं.
4 सदस्यों के लिये
समय - 25 मिनिट
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ब्रेड का हलवा
ब्रेड का हलवा
ब्रेड का हलवा बनाने के लिये आप सूखी ब्रेड का चूरे से ब्रेड का हलवा बना सकते हैं. ब्रेड के छोटे छोटे टुकडे करके इसे घी में तल कर भी ब्रेड का हलवा बना सकते है लेकिन ब्रेड के छोटे छोटे टुकडों को कड़ाही में भूनकर हलवा बनाना अधिक सुविधा जनक लगता है.आइये ब्रेड का हलवा बनाना शुरू करते हैं.
आवश्यक सामग्री - Ingredients for Bread Halwa
ब्रेड स्लाइस - 10दूध - 600 ग्राम (3 कप)
घी - आधा कप
चीनी -100 - 150 ग्राम ( 1/2 - 3/4 कप)
काजू - 12 -14 (छोटे छोटे काट लीजिये)
बादाम 8-10 (छोटे छोटे काट लीजिये)
इलाइची - 6-7 (इलाइची छील कर कूट लीजिये)
विधि - How to make Bread ka halwa
आटे या मैदा किसी भी तरह की ब्रेड हलवा के लिये ली जा सकती हैं. यदि आप चाहें तो मल्टीग्रेन ब्रेड भी ले सकते है. हर तरह के ब्रेड के हलवा (Bread Halwa) का अपना अलग स्वाद होता है.ब्रेड को छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लीजिये. कढ़ाई में 2 टेबल स्पून घी डालकर गरम कीजिये, घी में ब्रेड के टुकड़े डालिये, मीडियम और धीमी आग पर ब्रेड के टुकड़े सुनहरी होने तक भून लीजिये.
भुने हुये ब्रेड के टुकड़े में दूध और चीनी डालिये और लगातार चलाते हुये हलवा को पकाइये, चमचे से दबा कर ब्रेड के टुकड़ों को तोड़ दीजिये, 2 टेबल स्पून घी डालकर हलवे को चिकना होने तक पकाइये. थोड़े से काजू बचा कर हलवा में सारे कतरे हुये काजू, बादाम और इलाइची डालकर मिला दीजिये.
ब्रेड का हलवा (Bread Halwa) तैयार है. ब्रेड के हलवा को प्याले में निकालिये, हलवा के ऊपर पिघला हुआ घी और काजू डालकर सजाइये. गरमा गरम ब्रेड का हलवा (Bread Halwa) परोसिये और खाइये.
4-5 सदस्यों के लिये
समय - 35 मिनिट
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पेठा का हलवा
पेठे का हलवा
पेठा के नाम से हमें आगरे का पेठा (Agra Petha Recipe) का ध्यान आ जाता है जबकि पेठा के फल से सब्जियां, हलवा आदि भी बहुत स्वादिष्ट बनाये जाते हैं. आज हम पेठे का हलवा बनायेंगे.पेठे का फल बाहर से एकदम सफेद लेकिन आकार में कद्दू से छोटा होता है. बाजार में पेठे का फल आराम से मिल जाता है. सब्जियां बनाने के लिये पेठे का फल कच्चा लेकिन पेठा मुरब्बा (Agra Petha) या पेठे का हलवा बनाने के लिये पका हुआ पेठा फल अधिक अच्छा रहता है.
आवश्यक सामग्री - Ingredients for Petha Halwa
पेठा - 1 किग्राचीनी - 250 ग्राम (1 1/4 कप)
घी - 50 ग्राम (1/4 कप)
मावा - 250 ग्राम (एक कप)
काजू - 2 टेबल स्पून (एक काजू के 5-6 टुकड़े करते हुये काट लीजिये)
नारियल - कद्दूकस किया हुआ (2 टेबल स्पून)
पिस्ते - 1 टेबल स्पून(बारीक काट लीजिये)
बादाम - 1 टेबल स्पून (बारीक काट लीजिये)
छोटी इलाइची - 6-8 (छील कर कूट लीजिये)
विधि - How to make Petha Halwa
पेठे को मोटा छिलका उतारते हुये छीलिये, बीज और स्पंजी गूदा निकाल कर अलग कर दीजिये. पेठे का सख्त गूदा बड़े टुकड़े में काटिये, इन बड़े टुकड़ों को कद्दूकस (grate) कर लीजिये.किसी बर्तन में इतना पानी लीजिये जिसमें ये कद्दूकस किया गया पेठा (grated petha) अच्छी तरह डूब सके. इस पानी में कद्दूकस किया पेठा डाल कर डुबाइये और दो बार धो कर निचोड़ लीजिये.
कढ़ाई गैस पर रखिये, घी डालकर गरम कीजिये, घी में पानी निचोड़ा हुआ पेठा डालिये और भूनिये, पेठे का रंग बदलने के बाद चीनी डालिये और धीमी आग पर पकने दीजिये, बीच बीच में पेठे चीनी को चलाते रहें.
मावा को अलग कढ़ाई में हल्का गुलाबी होने तक भून लीजिये.
पेठे और चीनी में पानी न रहने के बाद मावा मिलाइये और चलाते हुये 3-4 मिनिट तक भून लीजिये, हल्वे में कटे हुये सूखे मेवे मिला दीजिये (थोड़े से कटे मेवे हलवा के ऊपर डालने के लिये बचा लीजिये) आग बन्द कर दीजिये, पेठे के हलवा (Petha Halwa) में इलाइची डालकर मिला दीजिये.
पेठे का हलवा तैयार है, पेठे के हलवे को प्याले में निकालिये, कटे हुये मेवे डालकर हलवे को सजाइये, ताजा ताजा स्वादिष्ट पेठे का हलवा परोसिये और खाइये, बचा हुआ पेठे का हलवा कन्टेनर में भर कर फ्रिज में रख लीजिये, जब भी आपका मन करे पेठे का हलवा फ्रिज से निकालिये और 7 दिन तक खाइये.
पेठे के हलवे को चलाते हुये जमने वाली कनसिसटैन्सी तक पका लिया जाय, किसी ट्रे में घी लगाकर जमा दिया जाय, तब यह बर्फी की तरह टुकड़ों में काटा जा सकता है और आप इसे पेठे की बर्फी भी कह सकते हैं.
पेठा - पेठा कद्दू से थोड़ा छोटा सफेद रंग का फल होता है जिससे इसके कच्चे फल से सब्जी और पके हुये फल से हलवा और पेठा मिठाई (मुरब्बा) बनाई जाती है. पेठे की मिठाई इतना अधिक प्रसिद्ध है कि इसे ही पेठा कहा जाने लगा है. इस फल का चित्र निम्न है.
बाजरे के आटे का हलवा
बाजरा के आटे का हलवा
सर्दी के मौसम में आयरन, कैल्सियम, और फाइबर बाजरा हम परम्परागत रूप से खाते रहे हैं. कड़कड़ाती सर्दी परेशान करे तो गरमागर्म बाजरे का हलवा का आनन्द लीजियेआवश्यक सामग्री - Ingredients for Bajra halwa recipe
बाजरे का आटा - 1/2 कप (80 ग्राम)चीनी - 1/2 कप (100 ग्राम)
घी - 1/3 कप (80 ग्राम)
काजू - 8-10
किशमिश - 20-25
नारियल - 1 टेबल स्पून (कटा हुआ)
इलायची - 4 - 5
विधि - How to make Bajra Halwa
पैन में घी डाल कर गरम कीजिये. घी के हल्का गरम होने पर बाजरे का आटा डाल दीजिए. धीमी और मध्यम आंच पर आटे को लगातार चलाते हुये, हल्का ब्राउन, कलर डार्क होने और अच्छी महक आने तक भून लीजिये.अब इसमें 1¼ कप पानी डाल दीजिए और चीनी डाल कर अच्छी तरह से मिला दीजिए और मध्यम आग पर पकने दीजिए और तब तक पकाएं जब तक कि हलवा गाढ़ा न हो जाए.
काजू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए, इलायची छिलकर कूट कर पाउडर बना लीजिए.
हलवे के गाढा़ होने पर इसमें काजू, किशमिश, कटा हुआ नारियल और इलायची का पाउडर डालकर सभी चीजों को अच्छे से मिला दीजिए और 2 मिनिट के लिए और पका लीजिए. बाजरे के आटे का स्वादिष्ट हलवा बनकर तैयार है, हलवा को प्याले में निकाल लीजिए.
ऊपर से थोडा़ सा घी और कटे हुये काजू डालकर सजाइये और परोसिये. बाजरे के आटे के हलवे को फ्रिज में रखकर के 3-4 दिनों तक आराम से खाया जा सकता है.
सुझाव:
हलवा में चीनी अपनी पसन्द के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है.हलवा में अपने पसन्द के ड्राई फ्रूट जो आपको ज्यादा पसन्द हो वह ज्यादा डाल दीजिये और जो आप नहीं पसन्द करते उन्हैं हटा दीजिये.
4 सदस्यों के लिये
समय - 30 मिनिट
good morning, breakfast , सूजी का हलवा
माइक्रोवेव में सूजी का हलवा
सूजी का हलवा बनाना इतना आसान ओर तुरत फुरत बन जाता है कि जब भी कुछ मीठा खाने का मन हो इसे बना लीजिये. माइक्रोवेव में यही सूजी का हलवा और भी अधिक आसानी से बन जाता है.आवश्यक सामग्री - Ingredients for Sooji Sheera
सूजी - 1/2 कपपिस्ते - 5-6 (पतले पतले बारीक काट लीजिये)
छोटी इलाइची - 4 (छील कर पाउडर बना लीजिये)
चीनी - आधा कप से थोड़ी सी ज्यादा
घी - 1/4 कप
बादाम - 6-7 ( छोटे छोटे काट लीजिये)
किशमिश - 1 टेबल स्पून (डंठल हटा दीजिये )
दूध - 1 1/4 कप
विधि How to make Semolina Halwa in Microwave
माइक्रोवेव में सूजी का हलवा बनाने के लिये, माइक्रोवेव सेफ प्याले में सूजी डालिये और आधा घी डालकर सूजी में मिक्स कर दीजिये.सूजी को माइक्रोवेव में 4 मिनिट तक भून लीजिये, सूजी को पहले माइक्रोवेव में हाई पावर पर 2 मिनिट तक भूनिये, अब सूजी को अच्छी तरह चमचे से चलाइये और 1 मिनिट भूनिये और चलाइये और फिर से 1 मिनिट भूनिये, सूजी भुन कर तैयार हो जायेगी.
सूजी में दूध डालकर मिला दीजिये, चीनी भी डालकर मिक्स कर दीजिये और हलवा को 4 मिनिट के लिये माइक्रोवेव कीजिये, हाई पावर पर पहले 2 मिनिट माइक्रोवेव कीजिये, हलवा को चमचे से चला दीजिये, अब 1 मिनिट हलवा को माइक्रोवेव कीजिये और चला दीजिये, और 1 मिनिट हाई पावर पर ही माइक्रोवेव कीजिये और चलाइये.
इसके बाद हलवा में 2 चम्मच घी बचाकर सारा घी डाल दीजिये, मेवे बादाम, किशमिश और इलाइची पाउडर भी डालकर मिक्स कर दीजिये.
हलवा को ढककर मीडियम पावर पर 2 मिनिट माइक्रोवेव कीजिये. हलवा को माइक्रोवेव से निकालिये और 2 मिनिट तक ढककर स्टेन्डिग टाइम दीजिये, हलवा अभी भी पक रहा है. प्याले को खोलिये, हलवा तैयार है, सूजी के हलवा को प्लेट या प्याले में निकालिये हलवा के ऊपर पिघला हुआ घी डालिये और पिस्ते डालकर गार्निस कीजिये.
माइक्रोवेव में बना हुआ स्वादिष्ट सूजी का हलवा तैयार है. गरमा गरम सूजी का हलवा परोसिये और खाइये.
क्षत्रिय यदुवंशी
यदुवंश
यदुवंश अथवा यदुवंशी क्षत्रिय शब्द भारत के उस जन-समुदाय के लिए प्रयुक्त होता है जो स्वयं को प्राचीन राजा यदु का वंशज बताते हैं। यदुवंशी क्षत्रिय मूलतः अहीर थे।[1] भारतीय मानव वैज्ञानिक कुमार सुरेश सिंह के अनुसार माधुरीपुत्र, ईश्वरसेन व शिवदत्त नामक कई विख्यात अहीर राजा कालांतर में राजपूतों मे सम्मिलित होकर यदुवंशी राजपूत कहलाए।[2] तिजारा के खानजादा मुस्लिम भी अपनी उत्पत्ति यदुवंशी राजपूतों से बताते हैं।[3] मैसूर साम्राज्य के हिन्दू राजवंश को भी यादव कुल का वंशज बताया गया है।[4][5] चूड़ासमा राजपूतों को भी विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों मे मूल रूप से सिंध प्रांत का आभीर,[6][7][8] या सिंध का यादव माना गया है, जो कि 9वीं शताब्दी में गुजरात में आए थे।[9]
यदुवंश पौराणिक कथा
यदु ऋग्वेद में वर्णित पाँच भारतीय आर्य जनों (पंचजन, पंचक्षत्रिय या पंचमानुष) में से एक है।[11]
हिन्दू महाकाव्य महाभारत, हरिवंश व पुराण में यदु को राजा ययाति व रानी देवयानी का पुत्र बताया गया है। राजकुमार यदु एक स्वाभिमानी व सुसंस्थापित शासक थे। विष्णु पुराण, भगवत पुराण व गरुण पुराण के अनुसार यदु के चार पुत्र थे, जबकि बाकी के पुराणो के अनुसार उनके पाँच पुत्र थे।[12] बुध व ययाति के मध्य के सभी राजाओं को सोमवंशी या चंद्रवंशी कहा गया है। महाभारत व विष्णु पुराण के अनुसार यदु ने पिता ययाति को अपनी युवावस्था प्रदान करना स्वीकार नहीं किया था जिसके कारण ययाति ने यदु के किसी भी वंशज को अपने वंश व साम्राज्य मे शामिल न हो पाने का श्राप दिया था।[13] इस कारण से यदु के वंशज सोमवंश से प्रथक हो गए व मात्र राजा पुरू के वंशज ही कालांतर में सोमवंशी कहे गए। इसके बाद महाराज यदु ने यह घोषणा की कि उनके वंशज भविष्य में यादव या यदुवंशी कहलएंगे। यदु के वंशजों ने अभूतपूर्व उन्नति की परंतु बाद मे वे दो भागों मे विभाजित हो गए।
उत्पत्ति
यदुवंशी अहीर कृष्ण के प्राचीन यादव जनजाति के वंशज माने जाते हैं। यदुवंशियो की उत्पत्ति पौराणिक राजा यदु से मानी जाती है।
वे टॉड की 36 राजवंशो की सूची में भी शामिल हैं। [16]
विभिन्न हिंदू धर्मग्रंथों और पुराने लेखों से संकेत मिलता है कि भारत में उनकी मौजूदगी 6000 ई.पू. से भी पहले प्राचीन काल से है।
वंशज जातियाँ
राजा सहस्रजीत के वंश को हैहय वंश कहा गया व उनके पौत्र का नाम भी हैहय था। राजा क्रोष्टा के वंशजों को कोई विशेष नाम नही दिया गया वे समान्यतः यादव कहलाए।,पी॰ एल॰ भार्गव के अनुसार जब राज्य का विभाजन हुआ तो सिंधु नदी के पश्चिम का राज्य सहस्रजीत को मिला व पूर्व का भाग क्रोष्टा को दिया गया।
आधुनिक भारत की अनेक जातियाँ जैसे कि यादव, पंजाबी सैनी, आयर, जडेजा, भाटी राजपूत,जादौन, तथा अहीर इत्यादि स्वयं को यदु वंशज मानते हैं।
कुछ विद्वान चूड़ासमा, जाडेजा व देवगिरि के यादवो को आभीर ही मानते हैं।[29]
राजपूत, पांचवीं और छठी शताब्दीमें पहली बार चित्र में आये थे। इसलिए यह किसी की कल्पना और समझ से परे है कि कैसे करौली के यादव (अलवर जिले में), रतलाम (मध्य प्रदेश में) और बीकानेर के भाटी (राजस्थान) खुद को राजपूत जाति के साथ कैसे जोड़ते हैं। हालाँकि, यह संभव है कि विदेशी "मनगढ़ंत खानाबदोशों" द्वारा आक्रमण के दौरान और उनके द्वारा प्राप्त की गई लगातार जीत के चलते, छोटे यादव राज्योंने अन्य रियासतों के साथ गठन करते समय, अपनी पहचान विलय कर दी हो।
यदुवंशी महाराज परीक्षित जी के बाद कि वंशावलि
कलियुग वंशावली पुराणों पर आधारित विभिन्न राजाओं की वंशावली है। यहां यह वंशावली मौर्य वंश तक की दी जायेगी। यह भारत के इतिहास को प्राचीन वंशावली, जो द्वापर के अन्त तक ही सीमित थी, से आगे महाभारत के युग के पश्चात के काल में ले आती है।
कुरु वंश - महाभारत पर्यान्त वंशावलीसंपादित करें
- परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव
ब्रहाद्रथ वंशसंपादित करें
यह वंश मगध में स्थापित था।
मगध वंशसंपादित करें
नन्द वंशसंपादित करें
- उग्रसेन ४२४-४०४
- पण्डुक ४०४-३९४
- पण्डुगति ३९४-३८४
- भूतपाल ३८४-३७२
- राष्ट्रपाल ३७२-३६०
- देवानन्द ३६०-३४८
- यज्ञभङ्ग ३४८-३४२
- मौर्यानन्द ३४२-३३६
- महानन्द ३३६-३२४
चाणक्य नीति भाग 15
पन्द्रहवां अध्याय
तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटाभस्मलेपनैः ।।१।।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चानृणी भवेत् ।।२।।
उपानद् मुखभङ्गो वा दूरतैव विसर्जनम् ।।३।।
सूर्योदये वाऽस्तमिते शयानं विमुञ्चति श्रीर्यदि चक्रपाणिः ।।४।।
तं चार्थवन्तं पुनराश्रयन्ते ह्यर्थो हि लोके पुरुषस्य बन्धुः ।।५।।
प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति ।।६।।
अमृतं राहवे मृत्युर्विषं शंकरभूषणम् ।।७।।
तत्सौहृदं यत्क्रियते परस्मिन् ।
सा प्राज्ञता या न करोति पापं
दम्भं विना यः क्रियते पापं
दम्भं विना यः क्रियते स धर्मः ।।८।।
क्रय विक्रयवेलायां काचः काचो मणिर्मणिः ।।९।।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं, हंसो यथा क्षीरमिवम्बुमध्यात् ।।१०।।
अनर्चयित्वा यो भुङ्क्ते स वै चाण्डाल उच्यते ।।११।।
आत्मानं नैव जानन्ति दवी पाकरसं यथा ।।१२।।
तरन्त्यधोगताः सर्वे उपरिस्थाः पतन्त्यधः ।।१३।।
अमृतमयशरीरः कान्तियुक्तोऽपि चन्द्रः ।।
भवति विगतरश्मिर्मण्डलं प्राप्य भानोः ।
परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति ।।१४।।
विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते ।।१५।।
दाबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी में ।
गेहं मे छेदयन्ति प्रतिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं
तस्मात्खिन्नासदात्हंद्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ।।१६।।
अगस्त्य ऋषि ने गुस्से में समुद्र को ( जो मेरे पिता है) पी लिया.
भृगु मुनि ने आपकी छाती पर लात मारी.
ब्राह्मणों को पढने में बहोत आनंद आता है और वे मेरी जो स्पर्धक है उस सरस्वती की हरदम कृपा चाहते है.
और वे रोज कमल के फूल को जो मेरा निवास है जलाशय से निकलते है और भगवान् शिव की पूजा करते है.
दारुभेदनिपुणोऽपिषण्डघ्निर्निष्क्रियोभवति पंकजकोशे ।।१७।।
वृध्दोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः
क्षीणोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः ।।१८।।
तेन त्वांदिवि भूतले च ससतं गोवर्धनी गीयसे ।
त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रेण तद् गण्यते
किंवा केशव भाषणेन बहुनापुण्यैर्यशो लभ्यते ।।१९।।
चाणक्य नीति भाग 16
स्त्री (यहाँ लम्पट स्त्री या पुरुष अभिप्रेत है) का ह्रदय पूर्ण नहीं है वह बटा हुआ है. जब वह एक आदमी से बात करती है तो दुसरे की ओर वासना से देखती है और मन में तीसरे को चाहती है. The heart of a woman is not united; it is divided. While she is talking with one man, she looks lustfully at another and thinks fondly of a third in her heart. |
मुर्ख को लगता है की वह हसीन लड़की उसे प्यार करती है. वह उसका गुलाम बन जाता है और उसके इशारो पर नाचता है. The fool (mudha) who fancies that a charming young lady loves him, becomes her slave and he dances like a shakuntal bird tied to a string. |
ऐसा यहाँ कौन है जिसमे दौलत पाने के बाद मस्ती नहीं आई. क्या कोई बेलगाम आदमी अपने संकटों पर रोक लगा पाया. इस दुनिया में किस आदमी को औरत ने कब्जे में नहीं किया. किस के ऊपर राजा की हरदम मेहेरबानी रही. किसके ऊपर समय के प्रकोप नहीं हुए. किस भिखारी को यहाँ शोहरत मिली. किस आदमी ने दुष्ट के दुर्गुण पाकर सुख को प्राप्त किया. Who is there who, having become rich, has not become proud? Which licentious (Free) man has put an end to his calamities (A grievous disaster)? Which man in this world has not been overcome by a woman? Who is always loved by the king? Who is there who has not been overcome by the ravages of time? Which beggar has attained glory? Who has become happy by contracting the vices of the wicked? |
व्यक्ति को महत्ता उसके गुण प्रदान करते है वह जिन पदों पर काम करता है सिर्फ उससे कुछ नहीं होता. क्या आप एक कौवे को गरुड़ कहेंगे यदि वह एक ऊँची ईमारत के छत पर जाकर बैठता है. A man attains greatness by his merits, not simply by occupying an exalted seat. Can we call a crow an eagle (garuda) simply because he sits on the top of a tall building. |
जो व्यक्ति गुणों से रहित है लेकिन जिसकी लोग सराहना करते है वह दुनिया में काबिल माना जा सकता है. लेकिन जो आदमी खुद की ही डींगे हाकता है वो अपने आप को दुसरे की नजरो में गिराता है भले ही वह स्वर्ग का राजा इंद्र हो. The man who is praised by others as great is regarded as worthy though he may be really void of all merit. But the man who sings his own praises lowers himself in the estimation of others though he should be Indra (the possessor of all excellences). |
यदि एक विवेक संपन्न व्यक्ति अच्छे गुणों का परिचय देता है तो उसके गुणों की आभा को रत्न जैसी मान्यता मिलती है. एक ऐसा रत्न जो प्रज्वलित है और सोने के अलंकर में मढने पर और चमकता है. If good qualities should characterise a man of discrimination, the brilliance of his qualities will be recognised just as a gem which is essentially bright really shines when fixed in an ornament of gold. |
वह व्यक्ति जो सर्व गुण संपन्न है अपने आप को सिद्ध नहीं कर सकता है जबतक उसे समुचित संरक्षण नहीं मिल जाता. उसी प्रकार जैसे एक मणि तब तक नहीं निखरता जब तक उसे आभूषण में सजाया ना जाए. Even one who by his qualities appears to be all knowing suffers without patronage; the gem, though precious, requires a gold setting. |
मुझे वह दौलत नहीं चाहिए जिसके लिए कठोर यातना सहनी पड़े, या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े. I do not deserve that wealth which is to be attained by enduring much suffering, or by transgressing the rules of virtue, or by flattering an enemy. |
जो अपनी दौलत, पकवान और औरते भोगकर संतुष्ट नहीं हुए ऐसे बहोत लोग पहले मर चुके है. अभी भी मर रहे है और भविष्य में भी मरेंगे. Those who were not satiated with the enjoyment of wealth, food and women have all passed away; there are others now passing away who have likewise remained unsatiated; and in the future still others will pass away feeling themselves unsatiated. |
सभी परोपकार और तप तात्कालिक लाभ देते है. लेकिन सुपात्र को जो दान दिया जाता है और सभी जीवो को जो संरक्षण प्रदान किया जाता है उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता. All charities and sacrifices (performed for fruitive gain) bring only temporary results, but gifts made to deserving persons (those who are Krishna consciousness) and protection offered to all creatures shall never perish. |
घास का तिनका हल्का है. कपास उससे भी हल्का है. भिखारी तो अनंत गुना हल्का है. फिर हवा का झोका उसे उड़ाके क्यों नहीं ले जाता. क्योकि वह डरता है कही वह भीख न मांग ले. A blade of grass is light, cotton is lighter, the beggar is infinitely lighter still. Why then does not the wind carry him away? Because it fears that he may ask alms of him. |
बेइज्जत होकर जीने से अच्छा है की मर जाए. मरने में एक क्षण का दुःख होता है पर बेइज्जत होकर जीने में हर रोज दुःख उठाना पड़ता है. It is better to die than to preserve this life by incurring disgrace. The loss of life causes but a moment's grief, but disgrace brings grief every day of one's life. |
सभी जीव मीठे वचनों से आनंदित होते है. इसीलिए हम सबसे मीठे वचन कहे. मीठे वचन की कोई कमी नहीं है. All the creatures are pleased by loving words; and therefore we should address words that are pleasing to all, for there is no lack of sweet words. |
इस दुनिया के वृक्ष को दो मीठे फल लगे है. मधुर वचन और सत्संग. There are two nectarean fruits hanging from the tree of this world: one is the hearing of sweet words (such as Krishna-katha) and the other, the society of saintly men. |
पहले के जन्मो की अच्छी आदते जैसे दान, विद्यार्जन और तप इस जनम में भी चलती रहती है. क्योकि सभी जनम एक श्रुंखला से जुड़े है. The good habits of charity, learning and austerity practised during many past lives continue to be cultivated in this birth by virtue of the link (yoga) of this present life to the previous ones. |
जिसका ज्ञान किताबो में सिमट गया है और जिसने अपनी दौलत दुसरो के सुपुर्द कर दी है वह जरुरत आने पर ज्ञान या दौलत कुछ भी इस्तमाल नहीं कर सकता. One whose knowledge is confined to books and whose wealth is in the possession of others, can use neither his knowledge nor wealth when the need for them arises. |
चाणक्य नीति भाग 15
पन्द्रहवां अध्याय
तस्य ज्ञानेन मोक्षेण किं जटाभस्मलेपनैः ।।१।।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चानृणी भवेत् ।।२।।
उपानद् मुखभङ्गो वा दूरतैव विसर्जनम् ।।३।।
सूर्योदये वाऽस्तमिते शयानं विमुञ्चति श्रीर्यदि चक्रपाणिः ।।४।।
तं चार्थवन्तं पुनराश्रयन्ते ह्यर्थो हि लोके पुरुषस्य बन्धुः ।।५।।
प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति ।।६।।
अमृतं राहवे मृत्युर्विषं शंकरभूषणम् ।।७।।
तत्सौहृदं यत्क्रियते परस्मिन् ।
सा प्राज्ञता या न करोति पापं
दम्भं विना यः क्रियते पापं
दम्भं विना यः क्रियते स धर्मः ।।८।।
क्रय विक्रयवेलायां काचः काचो मणिर्मणिः ।।९।।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं, हंसो यथा क्षीरमिवम्बुमध्यात् ।।१०।।
अनर्चयित्वा यो भुङ्क्ते स वै चाण्डाल उच्यते ।।११।।
आत्मानं नैव जानन्ति दवी पाकरसं यथा ।।१२।।
तरन्त्यधोगताः सर्वे उपरिस्थाः पतन्त्यधः ।।१३।।
अमृतमयशरीरः कान्तियुक्तोऽपि चन्द्रः ।।
भवति विगतरश्मिर्मण्डलं प्राप्य भानोः ।
परसदननिविष्टः को लघुत्वं न याति ।।१४।।
विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते ।।१५।।
दाबाल्याद्विप्रवर्यैः स्ववदनविवरे धार्यते वैरिणी में ।
गेहं मे छेदयन्ति प्रतिदिवसमुमाकान्तपूजानिमित्तं
तस्मात्खिन्नासदात्हंद्विजकुलनिलयं नाथ युक्तं त्यजामि ।।१६।।
अगस्त्य ऋषि ने गुस्से में समुद्र को ( जो मेरे पिता है) पी लिया.
भृगु मुनि ने आपकी छाती पर लात मारी.
ब्राह्मणों को पढने में बहोत आनंद आता है और वे मेरी जो स्पर्धक है उस सरस्वती की हरदम कृपा चाहते है.
और वे रोज कमल के फूल को जो मेरा निवास है जलाशय से निकलते है और भगवान् शिव की पूजा करते है.
दारुभेदनिपुणोऽपिषण्डघ्निर्निष्क्रियोभवति पंकजकोशे ।।१७।।
वृध्दोऽपि वारणपतिर्न जहाति लीलाम् ।
यंत्रार्पितो मधुरतां न जहाति चेक्षुः
क्षीणोऽपि न त्यजति शीलगुणान् कुलीनः ।।१८।।
तेन त्वांदिवि भूतले च ससतं गोवर्धनी गीयसे ।
त्वां त्रैलोक्यधरं वहामि कुचयोरग्रेण तद् गण्यते
किंवा केशव भाषणेन बहुनापुण्यैर्यशो लभ्यते ।।१९।।
यहूदी ही यादव है
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सनातन
फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...
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