आर्य भारतीय है या बिदेसी अपने अपने मत

आर्यन्स का भारत में आगमन

घटना क्रम

1500 B .C और 600 B .C के युग को पूर्व वैदिक युग (ऋग वैदिक काल) तथा बाद के वैदिक युग में विभाजित किया गया |

  • पूर्व वैदिक काल : 1500 B .C – 1000 B . C ; यह वह युग था जब आर्यन्स भारत पर आक्रमण कर सकते थे |
  • बाद का वैदिक युग : 1000 B . C – 600 B . C

प्रारंभिक घर व पहचान

  • आर्यन्स चरवाहे थे यानी वे खेतीबाड़ी नहीं करते थे |
  • उन्होने कई  जानवर पाले थे परंतु घोड़े इनमें सबसे महत्वपूर्ण थे |
  • आर्यन्स ने अपनी यात्रा  पश्चिम एशिया से  भारत की ओर 200 B .C के उपरान्त शुरू की |
  • आर्यन्स का पहला पड़ाव भारत की यात्रा के दौरान ईरान था |

ऋग वेद

  • यह इंडो यूरोपियन भाषा की सबसे पुरानी पुस्तक है |
  • इसमें प्रार्थना का सार- संग्रह है, इसे दस किताबों या मण्डल  में विभाजित किया  गया है |
  • इसमें प्रार्थनाओं का संकलन है जिसे विभिन्न देवता जैसे अग्नि, वरुण, इन्द्र, मित्रा, इत्यादि को समर्पित किया गया है |
  • ऋग वेद ने अपने प्रसंग अवेस्ता, ईरनियों की सबसे पुरानी किताब जिसमें ईश्वर के विभिन्न नाम तथा कुछ सामाजिक वर्गों में बांटे हैं |

वैदिक काल में नदियाँ

  • पहले, आर्यन्स पूर्वी अफ़गानिस्तान, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में रहते थे |
  • कुछ नदियाँ जैसे कुम्भ, सरस्वती, सिंधु, और इसकी का ऋग वेद में उल्लेख किया गया है|
  • सप्त सिंधु या सात मुख्य नदियों के समूह का भारत के ऋग वेद में उल्लेख किया गया है |
  • वे सात नदियाँ शायद इन के बीच में थीं:
      1. पूर्व में सरस्वती
      2. पश्चिम में सिंधु
      3. सतुद्रु (सतलुज)
      4. विपासा (ब्यास)
      5. असिक्नी(चेनाब)
      6. परुषनी(रावी) और
      7. वितस्ता( झेलम)

      आदिवासी संघर्ष

      • आर्यन के प्रथम दस्ते ने भारत में लगभग 1500 B .C  में आक्रमण किया |
      • उन्हें भारत के मूल निवासियों जैसे दास व दस्यु से संघर्ष करना पड़ा|
      • हालांकि दास को आर्यन की तरफ से कभी भी आक्रमण के लिए उत्तेजित नहीं किया गया, पर दस्यु हत्या का ऋग वेद में बारबार उल्लेख किया गया है |
      • इन्द्र को ऋग वेद में पुरान्द्र के नाम से भी उल्लेख किया गया है जिसे किलों का भंजक भी कहा गया है |
      • पूर्व आर्यन के किलों का उल्लेख हरप्पा संस्कृति की वजह से भी किया गया है |
      • आर्यन मूल निवासियों पर इसलिए भी विजय प्राप्त कर पाये क्यूंकि उनके पास बेहतर हथियार,वरमान, तथा घोड़े वाले रथ थे |
      • आर्यन् दो तरह के संघर्षों  में व्यस्त रहे  एक तो स्वदेशी लोग व अपने आप में |
      • आर्यन को पाँच आदिवासी जातियों में विभाजित किया गया जिसे पंचजन कहा गया तथा गैर आर्यन की भी मदद प्राप्त की |
      • आर्यन गोत्र के शासक भरत व त्रित्सु थे जिन्हे वसिष्ठ पुरोहित मदद करते थे |
      • भारतवर्ष देश का नाम राजा भरत के ऊपर रखा गया

        दसराजन युद्ध

        • भारत पर भरत गोत्र के राजा ने शासन किया तथा उन्हें दस राजाओं का विरोध भी झेलना पड़ा; पाँच आर्यन तथा पाँच गैर आर्यन|
        • इनके बीच में हुए युद्ध को दस राजाओं के युद्ध या दसराजन युद्ध के नाम से जाना  गया |
        • परुषनी या रावी नदी पर किया गया युद्ध सूद के द्वारा जीता गया |
        • बाद में भरत ने पुरू के साथ नाता जोड़ लिया जिससे कुरु नाम का नया गोत्र बना |

        बाद के वैदिक युग में कुरु व पांचालों ने गंगा के ऊपरी पठारों की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जहाँ उन्होने एक साथ राज किया |

        सम्राट अशोक के समय सामाजिक जीवन

        अशोक के समय का सामाजिक जीवन और कला का स्थान

        अशोक के शासन-काल में भारत की सामाजिक स्थिति में बहुत परिवर्तन दिखे. ब्राह्मण, श्रवण, आजीवक आदि अनेक सम्प्रदाय थे परन्तु राज्य की ओर से सबके साथ निष्पक्षता का व्यवहार किया जाता था और सभी को इस बात की हिदायत दी जाती थी  कि धर्म के मामलों में सहिष्णु होना सीखें, सत्य का आदर करें आदि. कई साधु भी देश और समाज की भलाई कैसे हो, इसमें अपनी पूरी ऊर्जा झोकते थे. कभी-कभी ऐसा देखने को भी मिलता था कि स्वयं राजकुमार और राजकुमारियाँ दूर देश जा कर धर्म का प्रचार कर रहे हैं. लोगों का धार्मिक दृष्टिकोण उदार था और कभी-कभी विदेशियों को भी शिक्षा-दीक्षा दे कर हिन्दू बना दिया जाता था जिन्हें लोग सहर्ष स्वीकार करते थे.

        एक यूनानी हिन्दू-धर्म में दीक्षित किया गया और उसका नाम धर्मरक्षित रखा गया. अशोक ने अपनी शिक्षाओं को बोल-चाल की भाषा में स्तंभों पर खुदवाया था. दूसरी तरफ आशिक के काल में कई मठ और पाठशालाएँ भी थीं. इससे मालूम होता है कि उस समय शिक्षा का अच्छा-खासा प्रसार था. इतिहासकार स्मिथ अशोक के काल में शिक्षा का स्थान के सम्बन्ध कुछ इस तरह कहते हैं  -

        मेरे अनुसार अशोक के समय की बौद्ध-जनता में प्रतिशत शिक्षितों की संख्या, आधुनिक ब्रिटिश भारत के अनेक प्रान्तों की अपेक्षा कहीं अधिक थी.

        ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चारों वर्ण अशोक के शासन-काल में सुखी तथा सदाचारी थे. संबंधियों, मित्रों, नौकरों तथा पशुओं पर भी लोग दया का भाव रखते थे. बाल-विवाह और बहुविवाह की प्रथाएँ अशोक के समय में भी थीं. खुद अशोक की कई रानियाँ थीं. अशोक ने 18 वर्ष की आयु में शादी किया था और उसके बहन की शादी 14 वर्ष की अवस्था में हुई थी. मांसाहार का प्रचालन अशोक के समय घट रहा था.

        मौर्यकालीन कला (Mauryan Art)

        अशोक ने बहुत-से नगर, स्तूप, विहार और मठ बनवाये. कई जगह स्तंभों को गड़वाया. उसने कश्मीर की राजधानी श्रीनगर की स्थापना की और एक दूसरा नगर उसने नेपाल में बसवाया. कहा जाता है कि अशोक अपनी बेटी चारुमती और उसके पति देवपाल के साथ वहाँ गया था. अशोक का महल इतना सुन्दर था कि लगभग 900 वर्ष के बाद जब चीनी यात्री फाह्यान भारत आया तो उसे देखकर वह चकित रह गया. उसे विश्वास नहीं हुआ कि वह महल मनुष्य के हाथ का बनाया हुआ है. उसकी चित्रकारी और पत्थर की खुदाई देखकर वह मुग्ध हो गया.

        अशोक स्तम्भ (Pillars of Ashoka)

        अशोक की बनवाई हुई बहुत-सी ईमारतें अब तो नष्ट हो गई हैं परन्तु साँची का स्तूप (भोपाल में स्थित) तथा भरहुत (इलाहबाद से कुछ दूरी पर) के स्तूप अब भी उसकी स्मृति की रक्षा कर रहे हैं. अशोक ने कई स्तम्भ खड़े करवाए जो देश के विभिन्न भागों में पाए जाते हैं. इनमें से साँची, प्रयाग, सारनाथ और लौरिया नंदन-गढ़ के स्तम्भ अधिक प्रसिद्ध हैं. इनमें कुछ स्तंभों पर सिंह की मूर्तियाँ हैं.

        दिल्ली के अशोक स्तम्भ  को 1356 ई. में फिरोज शाह तुगलक टोपरा नामक गाँव (मेरठ जिले में स्थित) से उठाकर लगवाया था. यह उस काल के स्थापत्य का एक सुन्दर नमूना है. इसकी बनावट और चमक अत्यंत सुन्दर है. इस स्तम्भ को उठाकर खड़ा करने में उस काल के इंजीनियरों ने जो कुशलता दिखाई, वह भी काबिले-तारीफ है. सर जान मार्शल का कथन है कि सारनाथ के शिला-स्तम्भ पर जानवरों के जो चित्र खोदे गये हैं वह कला और शैली दोनों दृष्टि से बहुत उच्च कोटि के हैं. पत्थर पर इतनी सुन्दर खुदाई भारत में कभी नहीं हुई और न प्राचीन संसार में ही इसके जोड़ की कोई चीज मिलती है.

        गुफाएँ

        अशोक की कुछ ऐसी गुफाएँ भी हैं जिन पर अशोक के लेख खुदे हुए हैं. ऐसी कुल सात गुफाएँ हैं और गया के पास बराबर की पहाड़ियों में स्थित हैं. उन पर मौर्य-काल की चमकीली पॉलिश हैं. दीवारें और छतें शीशे की तरह चमकती है. मौर्य-काल के कारीगरी जौहरी का काम भी खूब जानते थे. वे बड़ी होशियारी और सफलता के साथ पत्थरों को काटते और उन पर पॉलिश करते थे.

        यूनानी कला का प्रभाव

        कुछ विद्वानों का मत है कि मौर्य-कालीन कला पर यूनानी तथा ईरानी कला का प्रभाव पड़ा है. किन्तु इस कथन का कोई विश्वसनीय प्रमाण देखने को नहीं मिलता. यह अवश्य है कि उस काल में कई विदेशी भारत आये और यहीं बस गए. अशोक ने पश्चिम के देशों के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित कर लिया था. संभव है कि उन देशों की कला का यहाँ की कला पर प्रभाव पड़ा हो.

        सम्राट अशोक का शासन काल

        1. अशोक का राज्यारोहण पिता बिंदुसार के निधन के उपरान्त मगध के सिंहासन पर 268 ई.पू. में हुआ.
        2. अशोक के शासन के 8वें वर्ष में (दीर्घ शिलालेख -XIII) कलिंग विजय के बाद अशोक ने क्षोभ व्यक्त किया. युद्ध का अंत कर धम्म के मार्ग पर चलने की घोषणा की.
        3. नवम वर्ष में बौद्ध धर्म स्वीकारा (लघु शिलालेख - I तथा II) परन्तु वह धर्म के प्रति उतना सक्रिय नहीं रहा.
        4. दशम वर्ष में बोधगया (दीर्घ शिलालेख/III) की यात्रा की और पूर्ण रूप से वह बौद्ध हो गया.
        5. राजकीय शिकार की प्रथा समाप्त कर दी और धम्म यात्रा प्रारम्भ की.
        6. 11वें-12वें शासन वर्ष में उसने धम्म पर मौखिक घोषनाएँ करनी शुरू की.
        7. विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों में सद्भाव स्थापित किया (लघु शिलालेख)
        8. पशुवध बंद किया (दीर्घ शिलालेख-I).
        9. भारत और विदेशों में अस्पताल खोले और वृक्ष लगवाए (दीर्घ शिलालेख-II)
        10. सीमाओं पर अपने सद्भाव का आश्वासन दिया (लघु कलिंग शिलालेख -II)
        11. विधि और न्याय से शासन करने का व्रत किया (पृथक कलिंग शिलालेख)
        12. धार्मिक सम्प्रदायों में आपसी विरोधों को रोकने का प्रयास किया (दीर्घ शिलालेख - XII)
        13. बारहवें वर्ष (दीर्घ स्तम्भ लेख - VI) में प्रथम राजाज्ञा अभिलिखित की और धम्म आदेश जारी करने शुरू किये.
        14. उसी वर्ष (दीर्घ शिलालेख - IV) धम्म प्रसार के लिए एक जन-प्रदर्शन किया.
        15. उसी वर्ष आजीविकों को (गुहा लेख - I, II) गुफाएँ प्रदान कीं.
        16. उसी वर्ष (दीर्घ शिलालेख - III) अधिकारीयों को अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण का आदेश दिया.
        17. 13वें वर्ष में (दीर्घ शिलालेख - V) धम्म-महामात्रों की नियुक्ति की.
        18. मुनि के स्तूप को दुगुना बढ़ाया (निगलिवा - दीर्घ स्तम्भ लेख)
        19. 19वें वर्ष में (गुज लेख -III) आजीविकों को तीसरी गुफा प्रदान की.
        20. 20वें वर्ष में लुम्बिनी (दीर्घ स्तम्भ लेख-निगलिवा शिलालेख) की यात्रा के मध्य एक स्तम्भ स्थापित करके बलि का अन्त और भू-राजस्व भाग 1/8 कर दिया.
        21. 22वें और 24वें वर्षों के मध्य विरुद्ध आचरण वाले बौद्ध भिक्षुओं को विहारों से निकालने का उल्लेख मिलता है और बौद्धों द्वारा गहन अध्ययन की संस्तुति का पता चलता है और द्वितीय महारानी कारूवाकी के दानों की घोषणा की सूचना मिलती है. उसके शासन के 27वें वर्ष में दान को संगठित रूप देने और विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों के कार्यकलाप की देखभाल के लिए महामात्रों की नियुक्ति का उल्लेख मिलता है.
        22. 26वें वर्ष प्रथम छह स्तम्भ-राज्यादेश जारी (दीर्घ स्तम्भ लेख - IV) किये, जिला अधिकारियों को जन-कल्याण के कार्य करने एवं न्यायपूर्ण निष्पक्ष शासन करने को उद्बोधन दिया (दीर्घ स्तम्भलेख - IV और V).
        23. 26वें वर्ष के बाद (महारानी का स्तम्भ अभिलेख) अपनी दूसरी रानी के द्वारा दिए गए उपहारों के बारे में अभिलिखित कराया.
        24. 27वें वर्ष में (दीर्घ स्तम्भ लेख - VII) 7वाँ स्तम्भ अभिलेख जारी किया.
        25. संभवतः 27वें वर्ष में (सारनाथ स्तम्भ अभिलेख के बाद) नियम-विरुद्ध प्रवृत्तियों की भर्त्सना की.

        भारतीय महान शासक ,सम्राट अशोक

        अशोक के विषय में Important Facts

        1. अशोक का सर्वाधिक पसंदीदा पंक्षी मयूर था.
        2. अशोक के जीवित भाइयों और बहनों के परिवारों का उल्लेख पांचवे शिलालेख में मिलता है.
        3. राजतरंगिणी के अनुसार बौद्ध धर्म स्वीकार करने के पूर्व अशोक ब्राह्मण धर्म (शिव का उपासक) का अनुयायी था.
        4. दिव्यावदान के अनुसार, अशोक को बौद्ध धर्म में उपगुप्त ने दीक्षित किया था.
        5. अशोक को उसके शासन के चौथे वर्ष निग्रोध नामक सात वर्षीय भिक्षु ने बौद्ध मत में दीक्षित किया था, वह उल्लेख सिंहली अनुश्रुतियों (दीपवंश और महावंश) में होता है.
        6. वृहतशिलालेख पांच में अशोक द्वारा बौद्ध ग्रहण करने के बाद राजकीय पाकशाला में दो मयूर और एक हिरन का वध किये जाने का उल्लेख मिलता है.
        7. बौद्ध साहित्य में प्रयुक्त भिक्षु गतिक शब्दों का प्रयोग संघ में प्रविष्ट होने के लिए उन्मुख होने के सन्दर्भ में किया गया है.
        8. प्रथम लघु शिलालेक के अनुसार, बौद्ध धर्म ग्रहण के बाद अशोक 2 वर्ष 6 माह तक एक साधारण उपासक था.
        9. भाब्रू (बैराट, राजस्थान) से प्राप्त लघु शिलालेख जिसमें अशोक स्पष्टतः बुद्ध, धम्म और संघ का अभिवादन करता है.
        10. सारनाथ, साँची और कौशाम्बी के लघु स्तम्भों पर उत्कीर्ण शासनादेश अशोक को बौद्ध सिद्ध करते हैं.
        11. अशोक साँची, सारनाथ और कौशाम्बी लघु स्तम्भ लेखों में बौद्ध संघ में फूट डालने वाले भिक्षु और भिक्षुणियों को निष्कासन  चेतावनी देता है.
        12. बौद्ध संघ से सम्बंधित पबज्जा (प्रवज्या-संन्यास) नाम की प्रथा, अशोक के समय तक पर्याप्त सुदृढ़ हो चुकी थी.
        13. दिव्यावदान से अशोक द्वारा खस देश (नेपाल) के विजय का उल्लेख मिलता है.
        14. अशोक ने पालि भाषा और ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया.
        15. अशोक के अभिलेखों में प्राकृत प्रयुक्त भाषा है.
        16. तीसरे शिलालेख में अशोक ने अल्प व्यय और अल्प संग्रह को धम्म का अंग माना है.
        17. गार्गी संहिता ग्रन्थ में धम्म विजय का पालन करने के कारण अशोक की आलोचना की गई है.
        18. स्तम्भ अभिलेख न. 7 को अशोक के शासनकाल की अंतिम घोषणा माना जाता है.
        19. दिव्यावदान के अनुसार अशोक अपने जीवन के अंतिम समय में, कुक्कुटाराम विहार को उपहार देना चाहता था.
        20. अशोक की राजत्व सबंधी अवधारणा का विवेचन छठे शिलालेख में प्राप्त होती है.
        21. अशोक ने कश्मीर में श्रीनगर का निर्माण कराया था.
        22. दिव्यावदान के अनुसार अशोक ने नेपाल में देवपाटन नगर की स्थापना की. तारानाथ के विवरण के अनुसार अशोक ने नेपाल में 'ललितपत्तन” नामक नगर बसाया था और उसकी बेटी चारुमती ने देवपत्तन नामक नगर बसाया था.
        23. ब्रह्मगिरि शिलालेख में अशोक द्वारा 256 रातें धम्म यात्रा में बिताने का उल्लेख है.
        24. अशोक के धम्म की परिभाषा 'राहुलोवावसुत्त” ग्रंथ से ली गई है.

        भारतीय रिंग्वेद

        1. ऋग्वेद में उल्लेख मिलता है कि उस समय कुछ स्त्रियाँ ऐसी थीं जो पूरी जिंदगी अविवाहित रहती थीं. ऐसी स्त्रियों/कन्याओं को अमाजू कहते थे.
        2. ऋग्वेद में अनेक बार पंचजन का उल्लेख हुआ है. निरुक्त (वेदों पर लिखा किताब) में उल्लेख है कि कुछ विद्वान् पंचजन से चार वर्णों और निषाद-समुदाय (नाविक वर्ग) का अर्थ समझते हैं.
        3. Rigveda में इंद्र को पञ्चजन्य बतलाया गया है.
        4. ऋग्वैदिक काल में वर्ण कर्म के आधार पर ही संगठित थे.
        5. इस वेद में दो भाइयों का उल्लेख मिलता है - शांतनु और देवापि, जिसमें शांतनु राजा है और देवापि एक पुरोहित है.
        6. Rigveda में केवल हिमालय और उसकी चोटी मूजवंत का उल्लेख मिलता है. शतपथ ब्राह्मण में त्रिककुट का भी उल्लेख है जिसको आजकल त्रिकोट कहते हैं.
        7. इस वेद में सिन्धु नदी को हिरण्ययी कहा गया है क्योंकि इस नदी के द्वारा धन की प्राप्ति होती थी.
        8. गृहस्थ शब्द के लिए ऋग्वेद में गृहपति शब्द का उल्लेख है.
        9. ऋग्वेद में ऋजाश्व और भृज्यु की कथाओं से स्पष्ट है कि पिता का पुत्र पर सम्पूर्ण अधिकार होता था.
        10. जंगल की देवी अरण्यानी का उल्लेख 'ऋक् संहिता” में प्राप्त होता है.
        11. शूद्र शब्द की सूचना ऋग्वेद के 10वें मंडल से प्राप्त होती है.
        12. Rigveda में फसलों के रूप में - जौ और धान्य का उल्लेख मिलता है.
        13. ऋग्वेद में मगध के लिए कीकट शब्द का प्रयोग किया गया है.

        न्यूज़ 11/3/2020

         दिल्ली. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला (Om Birla) ने बुधवार को कांग्रेस के सातों सदस्यों के निलंबन के आदेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की. सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने निलंबन वापस लेने का अनुरोध किया था, जिसके बाद ये फैसला लिया गया.

        बीते दिनों कांग्रेस के सात सांसदों गौरव गोगोई, टी.एन प्रतापन, एडवोकेट डीन कुरियाकोस, बेनी बेहनन, मणिक्कम टैगोर, राजमोहन उन्नीथन और गुरजीत सिंह औजला ने लोकसभा में दिल्ली हिंसा को लेकर हंगामा किया था. इन कांग्रेस सांसदों पर स्पीकर पर पेपर फेंकने का आरोप है. इस घटना के बाद स्पीकर ने इन सांसदों को लोकसभा के बजट सत्र तक निलंबित कर दिया था.

        होली

        होली है भाई होली है,
        होली की सुरुआत भगवान श्रीकृष्ण जी ने 5500 सौ साल पहले किये थे, और आज भी 10/3/2020 को होली मनाई जा रही हैं, यह केवल सनातन धर्म का ही नहीं ,हिन्दू धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म में भी होली मनाया जाने लगे

        एडविना और उनके लवर नेहरू

        कहनीआगे है

        crona viros, क्रोना वायरस

        Crona viros
        क्रोनिक हो गया है, crona viros, आज चीन से लेकर पूरे विस्व में इस बीमारी ने सबको धीरे धीरे नहीं तेजी से सबको अपने चपेट में लेकर कई लोगो को मौत के मुँह में धकेल दिया है, इस बीमारी से चीन की अथवस्था 2% गिर गया है चीन की इस बीमारी ने सबसे ज्यादा उसके बिज़नेस को बर्बाद कर दिया भारत के साथ 5 अरब डॉलर के हिसाब से ब्यापार होता था, इस भारतीय होली के अवसर पर भी चीन की डुबती नैया पार होती नजर नहीं आ रही हैं
        इस वायरस का केवल नाम बदला हुआ है है यह बर्ड फ्लू  ,और बर्ड फ्लू का इलाज ही क्रोना वायरस से बचाव हो सकता हैं,
        मुर्गा का मिट न खाए, सुवर का मिट ना खाएं,
        अगर खाना हि पड़े तो उसके स्किन को निकाल दें लेकिन अगर जिंदा रहना चाहते है तो भाई मुर्ग खाना छोड़ना हि होगा,
        इसके इलाज में तुलसी का काढ़ा, अदरक की चाय, लवंग, तेजपत्ता की लाल चाय पिये, सर् पर आयुर्वेदिक तेल राहत रूह का इस्तेमाल जरूर करें, nice, क्रोसिन, dp jesic tab जरूर ले, डिटोल से कपड़े, हाथ जरूर धोये, हर 30 मीन पर हाथ जरूर धोये, बार बार हाथ चेहरे पर, मुह पर, आँख, नाक ना छुए, अपने नाक पर मास्क जरूर पहनें, 
        संक्रमित ब्यक्ति को सांत्वना दे, लेकिन उससे 2 फिट दूर जरूर रहे, इलाज ही बचाव है,

        नीरज बाबू जय प्रकाश, बिहार के बारे में 1

        बिहार के बारे में कुछ बताने की कोशिश कर रहा हूँ, बिहार में विस्व के अनेक धर्म, सामाजिक जीवन, लोकतंत्र, चुने हुए प्रतिनिधि, लोकतांत्रिक गणराज्य, राजतंत्र गणतंत्र, एकात्म शासन, संघीय ढांचे की पहली सुरुआत बिहार में ही हुई, भारत का विशाल राजतंत्र पटना के मगध साम्राज्य के सम्राट(राजाओ के भी राजा, जिनका सभी दिशाओ में समान रूप से शासन हो), था, यह था ईसाई धर्म के पहले से भी 345 ईशा पूर्व लगभग का शासन और इस राजतंत्र के महान शासक सम्राट अशोक थे, जिनका राज्य ईरान, इराक, येरुशलम ,चीन, तुर्क, मंगोल, श्री लंका के राजा तक टेक्स देते थे, का राज एक आदरपूर्वक लिया जाता हैं, इनके शासन को निरंकुश मान सकते हैं क्योंकि राजाज्ञा ही अंतिम कानून था, और ठीक इसके विपरीत गंगा के उस पार हाजीपुर, बैशाली राज जो कि एक गणराज्य था जहाँ के राजा का चुनाव जनता करती थी बिल्कुल आज कल के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में होता है, लेकिन ये चुने हुए प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायित्व लेने को तैयार नहीं होते हैं, जबकि बैशाली गणराज्य के राजा की यह जिम्मेदारी होती थी कि जनता के प्रति उत्तरदायित्व और कर्तब्य का निर्वहन सही से हो, राजा अगर अपने कर्तव्य को लेकर जागरूक नहीं हैं, जनता के कल्याण के लिए कुछ भी नहीं करे,बहुत कुछ है बिहार में 
        बिहार से ही लगभग 4-5 धर्म की उत्पत्ति हुई है, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म,

        सनातन

        फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...