होली

होली है भाई होली है,
होली की सुरुआत भगवान श्रीकृष्ण जी ने 5500 सौ साल पहले किये थे, और आज भी 10/3/2020 को होली मनाई जा रही हैं, यह केवल सनातन धर्म का ही नहीं ,हिन्दू धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म में भी होली मनाया जाने लगे

एडविना और उनके लवर नेहरू

कहनीआगे है

crona viros, क्रोना वायरस

Crona viros
क्रोनिक हो गया है, crona viros, आज चीन से लेकर पूरे विस्व में इस बीमारी ने सबको धीरे धीरे नहीं तेजी से सबको अपने चपेट में लेकर कई लोगो को मौत के मुँह में धकेल दिया है, इस बीमारी से चीन की अथवस्था 2% गिर गया है चीन की इस बीमारी ने सबसे ज्यादा उसके बिज़नेस को बर्बाद कर दिया भारत के साथ 5 अरब डॉलर के हिसाब से ब्यापार होता था, इस भारतीय होली के अवसर पर भी चीन की डुबती नैया पार होती नजर नहीं आ रही हैं
इस वायरस का केवल नाम बदला हुआ है है यह बर्ड फ्लू  ,और बर्ड फ्लू का इलाज ही क्रोना वायरस से बचाव हो सकता हैं,
मुर्गा का मिट न खाए, सुवर का मिट ना खाएं,
अगर खाना हि पड़े तो उसके स्किन को निकाल दें लेकिन अगर जिंदा रहना चाहते है तो भाई मुर्ग खाना छोड़ना हि होगा,
इसके इलाज में तुलसी का काढ़ा, अदरक की चाय, लवंग, तेजपत्ता की लाल चाय पिये, सर् पर आयुर्वेदिक तेल राहत रूह का इस्तेमाल जरूर करें, nice, क्रोसिन, dp jesic tab जरूर ले, डिटोल से कपड़े, हाथ जरूर धोये, हर 30 मीन पर हाथ जरूर धोये, बार बार हाथ चेहरे पर, मुह पर, आँख, नाक ना छुए, अपने नाक पर मास्क जरूर पहनें, 
संक्रमित ब्यक्ति को सांत्वना दे, लेकिन उससे 2 फिट दूर जरूर रहे, इलाज ही बचाव है,

नीरज बाबू जय प्रकाश, बिहार के बारे में 1

बिहार के बारे में कुछ बताने की कोशिश कर रहा हूँ, बिहार में विस्व के अनेक धर्म, सामाजिक जीवन, लोकतंत्र, चुने हुए प्रतिनिधि, लोकतांत्रिक गणराज्य, राजतंत्र गणतंत्र, एकात्म शासन, संघीय ढांचे की पहली सुरुआत बिहार में ही हुई, भारत का विशाल राजतंत्र पटना के मगध साम्राज्य के सम्राट(राजाओ के भी राजा, जिनका सभी दिशाओ में समान रूप से शासन हो), था, यह था ईसाई धर्म के पहले से भी 345 ईशा पूर्व लगभग का शासन और इस राजतंत्र के महान शासक सम्राट अशोक थे, जिनका राज्य ईरान, इराक, येरुशलम ,चीन, तुर्क, मंगोल, श्री लंका के राजा तक टेक्स देते थे, का राज एक आदरपूर्वक लिया जाता हैं, इनके शासन को निरंकुश मान सकते हैं क्योंकि राजाज्ञा ही अंतिम कानून था, और ठीक इसके विपरीत गंगा के उस पार हाजीपुर, बैशाली राज जो कि एक गणराज्य था जहाँ के राजा का चुनाव जनता करती थी बिल्कुल आज कल के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में होता है, लेकिन ये चुने हुए प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायित्व लेने को तैयार नहीं होते हैं, जबकि बैशाली गणराज्य के राजा की यह जिम्मेदारी होती थी कि जनता के प्रति उत्तरदायित्व और कर्तब्य का निर्वहन सही से हो, राजा अगर अपने कर्तव्य को लेकर जागरूक नहीं हैं, जनता के कल्याण के लिए कुछ भी नहीं करे,बहुत कुछ है बिहार में 
बिहार से ही लगभग 4-5 धर्म की उत्पत्ति हुई है, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म,

हम है राही प्यार के

राजकुमार कि बात ही निराला है, दिल तो है, लेकिन दिलवाला नहीं है

नीरज बाबू जय प्रकाश बिहार के दल

बिहार के राजनीतिक दलों के पास एक विज़न होना चाहिए कि बेरोजगारी, भरस्टाचार, पुलिस प्रशासन, सरकारी संस्थानों को प्राइवेट करने से रोकने, बंद चीनी मिलो को दुबारा चालू करने के लिए क्या उपाय है, बिहार में कम से कम 10 एयरपोर्ट है 1971 के पाकिस्तान से लड़ाई में बिहार में भी मिलिट्री एयरपोर्ट बनाया गया था, जो अब बिना उपयोग के खाली पड़ा है, सरकार को चाहिए था कि इन्ही एयरपोर्ट को मरम्मत कार्य कर के चालू कर दिया जाता तो अंतरास्ट्रीय नहीं तो कम से कम गोपालगंज से पटना, गोपालगंज से गया, गोपालगंज से दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, सासाराम, डेहरी, बाराणसी, इलाहाबाद, कानपूर, दिल्ली, मुंबई की सीधी उड़ान तो सुरु हो जाता तो उन्हें तो सहूलियत हो जाता जो गोपालगंज को डेवलपमेंट करने के लिए बिदेस जाते हैं, सरकार को अबिलम्ब जल्दी कार्यवाही करना होगा ताकि रोजगार भी बढ़े और बिहारी को सम्मान से जीने का हक मिले और क्या अगर तुम 

याद

याद का काम हि हैं याद करना, ना चाहते हुए भी याद करना पड़ता हैं, चाहें याद करो या ना करो, याद आ ही जाता है, कोई अपना हो या पराया याद तो आएगा हि, तुम कुछ भी कहो, जो अपना होगा वह तो भूल ही नहीं पायेगा, अपना ना भी हो अगर उसका ब्यवहार सही है ठीक है तो लोग भी उसे नहीं भूल पाते हैं, होना भी यही चाहिए, की कोई भूल ना पाये, अगर कोई एक बार मिल गया तो वो तुमको भूल ना पाये, अगर तुम भूलना भी चाहो तो भुलने नहीं देंगे, चगे हाथ

तुम्हारे भीतर

ये इन्सान की फितरत है कि अपने ग़लती कोइ नहीं देखता हैं, सब कोई दूसरे को देखते हैं

तेरा गम

तेरे आने की खुसी तेरे जाने का ग़म, तेरे लिए हम जिए या तेरे लिए हम मरे या तु कुछ भी कहो ग़म से मर जायेंगे हम, तुमसे पीछा छुड़ाना चाहे मगर दुरी सह ना पाए, जाए तो आखिर हम कहा जाये, अब तुम हि कहो हम कहा जाये, तेरे बगैर जी ना सकें तेरे बगैर जी ना पाए,तुझे देखे तो गुस्साए तूझे ना देखें तो जिया घबराए, अब तुम ही कहो हम कहा जाये, तुझसे रूठना चाहें मगर हो ना पाये, टेरे पयार को प्यार कहे या ििइन्तजार करे, अब तो तुम ही कह दो कब तक तेरा ििइन्तजार करे

आ और या

इसमें यह है कि जो भी कुछ हैं वह या तो या है नहीं तो वा

सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...