याद

याद का काम हि हैं याद करना, ना चाहते हुए भी याद करना पड़ता हैं, चाहें याद करो या ना करो, याद आ ही जाता है, कोई अपना हो या पराया याद तो आएगा हि, तुम कुछ भी कहो, जो अपना होगा वह तो भूल ही नहीं पायेगा, अपना ना भी हो अगर उसका ब्यवहार सही है ठीक है तो लोग भी उसे नहीं भूल पाते हैं, होना भी यही चाहिए, की कोई भूल ना पाये, अगर कोई एक बार मिल गया तो वो तुमको भूल ना पाये, अगर तुम भूलना भी चाहो तो भुलने नहीं देंगे, चगे हाथ

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