श्रीलंका :
'श्रीलंका' भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित एक बड़ा द्वीप है। यह भारत के चोल और पांडय, यादव जनपद के अंतर्गत आता था।
5000 हजार वर्ष पूर्व तक श्रीलंका की संपूर्ण आबादी वैदिक धर्म का पालन करती थी।
सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र को श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा और वहां के सिंहल राजा ने बौद्ध धर्म अपनाकर इसे राजधर्म घोषित कर दिया।
बौद्ध और हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार यहां पर प्राचीनकाल में शैव, यक्ष और नागवंशियों का राज था।
श्रीलंका के प्राचीन इतिहास के बारे में जानने के लिए सबसे महत्वपूर्ण लिखित स्रोत सुप्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ 'महावंस' है।
श्रीलंका के आदिम निवासी और दक्षिण भारत के आदिमानव एक ही थे।
भारत के एक राज्य तमिलनाडु और श्री लंका के तमिल एक ही जाति और गोत्र के लोग हैं आज भी अनेकों लोगो के शादी विवाह वाहा श्री लंका में होता रहता है,एक खुदाई से पता चला है कि श्रीलंका के शुरुआती मानव का संबंध उत्तर भारत के लोगों से था।
भाषिक विश्लेषणों से पता चलता है कि सिंहली भाषा गुजराती और सिन्धी भाषा से जुड़ी है।
ऐसी मान्यता है कि श्रीलंका को भगवान शिव ने बसाया था।
बाद में उन्होंने इसे कुबेर को दे दिया था।
कुबेर से रावण ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था। ईसा पूर्व 9 लाख बर्ष पहले भगवान राम ने रावण का संहार कर श्रीलंका को भारतवर्ष का एक जनपद बना दिया था।
श्रीलंका पर पहले पुर्तगालियों, फिर डच लोगों ने अधिकार कर शासन किया
1800 ईस्वी के प्रारंभ में अंग्रेजों ने इस पर आधिपत्य जमाना शुरू किया और 1818 में इसे अपने पूर्ण अधिकार में ले लिया। अंग्रेज काल में अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत तमिल और सिंहलियों के बीच सांप्रदायिक एकता को बिगाड़ा। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 4 फरवरी 1948 को श्रीलंका को ब्रिटिश भारत से स्वतंत्र घोषित किया गया,
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