मलेरिया
परिचय-
मलेरिया एक प्रकार का बहुत ही खतरनाक रोग है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को अक्सर बहुत तेज बुखार रहता है। इस रोग से रोगी के शरीर में खून की कमी हो जाती है और रक्त वाहिकाओं को बहुत नुकसान पहुंचता है जिसके कारण रोगी बहुत कमजोर हो जाता है तथा उसके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और उसे बहुत से कष्टों का सामना करना पड़ता है।लक्षण-
मलेरिया रोग हो जाने पर रोगी को सिर में तेज दर्द होता है, पेशियों में दर्द की अवस्था बनी रहती है तथा कपंकंपी के साथ तेज बुखार होने लगता है। रोगी को बुखार तेजी से चढ़ता है तथा उल्टी भी होने लगती है। कुछ समय बाद रोगी के शरीर से तेज पसीना निकलता है तथा शरीर के तापमान में गिरावट आने लगती है। व्यक्ति का बुखार उतरता-चढ़ता रहता है। पेट-दर्द, दस्त, पीलिया और नकसीर छूटना आदि लक्षण मलेरिया के शुरू होने की पहचान है। मलेरिया रोग के शुरुआती लक्षण काफी हद तक फ्लू रोग से मिलते-जुलते हैं।
कारण-
यह रोग एक प्रकार के सूक्ष्म एक कोशिकीय परजीवी के कारण होता है। यह सूक्ष्म परजीवी मच्छर के शरीर के अन्दर पलता है। जब यह संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो यह सूक्ष्म एक कोशिकीय परजीवी उस व्यक्ति के शरीर के अन्दर चला जाता है जिसके कारण उस व्यक्ति को मलेरिया का रोग हो जाता है। मलेरिया के रोग को फैलाने वाले परजीवी प्लाजमाडियम प्रजाति से सबंध रखते हैं। इसी प्रजाति का सबसे खतरनाक सदस्य प्लाजमोडियम फालसीपेरम है। इस प्रजाति के दूसरे सदस्यों के द्वारा होने वाले रोग कभी-कभी अधिक घातक नहीं होते हैं
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यह क्रिया करीब 1 महीने तक करनी चाहिए। व्यस्क व्यक्ति को यह क्रिया रोजाना 5 से 15 मिनट और छोटे बच्चों को 5 से 10 मिनट तक करनी चाहिए। रोगी को चिकित्सक की उचित सलाह लेकर अपना इलाज कराना चाहिए।
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