white discharge, सफेद पानी का गिरना

 

श्वेतप्रदर

परिचय-

अक्सर स्त्रियों को श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) की शिकायत बहुत मिलती है। यह रोग किसी भी उम्र की स्त्री को हो सकता है। कई बार लड़कियां जिनकी शादी नहीं हुई होती है वे भी शर्म या दूसरे कारणों से बिना जांच और इलाज के अन्दर ही अन्दर दिमाग में परेशानी पालती रहती है जिसकी वजह से यह रोग उनमें और बढ़ जाता है।

कारण-

          श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) का रोग खुद में एक रोग न होकर ज्यादातर दूसरे रोगों के कारण होता है। इस रोग को मुख्यत: 2 भागों में बांट सकते हैं।

          स्त्रियों में श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) का रोग होने का कारण पोषण की कमी, शरीर में खून की कमी होना या भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण विटामिन, कैल्शियम की कमी हो जाना है। श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) का रोग ज्यादा चिंता, ज्यादा थकान वाले काम करना, ज्यादा यौन सम्बंधों में लिप्त होना, जल्दी-जल्दी मां बनना या बार-बार गर्भपात होना आदि कारणों से भी हो सकता है। श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) का रोग होने का सबसे खास कारण है बच्चेदानी के मुंह पर घाव होना, यौन रोग, सुजाक (गिनोरिया) आदि होना।

लक्षण-

          स्त्रियों का योनिमार्ग थोड़ा बहुत हमेशा गीला रहता है और यौन उत्तेजना के समय तो यह गीलापन बढ़ता ही जाता है। स्त्रियों के गर्भकाल में, मासिकधर्म से ठीक पहले, मासिकधर्म बंद होने के बाद जब स्त्री-डिम्ब डिम्बाशय से निकलकर डिम्ब-नलिका से होते हुए गर्भाशय की तरफ बढ़ता रहता है और पुरुष शुक्राणु के न मिलने के कारण समाप्त हो जाता है तब इस डिम्ब-निष्कासन और डिम्ब-विर्सजन की अवधि में भी गीलापन बढ़ जाता है। इस स्राव को श्वेतप्रदर नहीं कहा जाता और न ही इसके लिए किसी चिंता या चिकित्सा की जरूरत है।

          सामान्य श्वेतप्रदर बहुत ज्यादा पोषण की कमी और ताकत से ज्यादा थकाने वालों कामों का नतीजा होता है। लेकिन कई बार यह रोग दिमागी परेशानी से भी हो सकता है। मधुमेह, लगातार खांसी या दमा रोग के कारण भी श्वेतप्रदर हो सकता है। इन सभी कारणों को दूर करने और मधुमेह, दमा तथा खांसी का इलाज करवाने से यह रोग ठीक हो सकता है। पोषण की कमी न हो तो इस सामान्य श्वेतप्रदर में न तो कमरदर्द की, न ही योनिप्रदेश पर खुजली की, न ही बदबूदार पानी की और न ही चिपचिपे या ज्यादा गाढ़े स्राव की शिकायत होती है। श्वेतप्रदर रोग के गंभीर न होने पर भी भोजन और जीवन में सुधार करके या डॉक्टर से पूछकर टॉनिक आदि लेकर इनसे बचने की कोशिश करें ताकि कमजोरी ज्यादा न बढ़े और जल्दी इन्फैक्शन न हो।

 शरीर पर एक्यूप्रेशर दबाव देकर श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) रोग का उपचार किया जा सकता है। रोगी स्त्री को अपना इलाज किसी अच्छे एक्यूप्रेशर चिकित्सक की देख-रेख में ही कराना चाहिए क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सक को सही दबाव देने का अनुभव होता है और वह सही तरीके से श्वेतप्रदर (योनि में से सफेद पानी आने) रोग का उपचार कर सकता है  

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