पेप्टिक अल्सर
परिचय-
शरीर में पाये जाने वाले पाचनतन्त्र में होने वाले घाव को अल्सर कहते हैं। इस रोग में रोगी के आमाशय तथा आंत दोनों में अल्सर हो जाता है। वैसे यह रोग अधिकतर अधेड़ उम्र के पुरुषों तथा स्त्रियों में होता है। जब आमाशय या आंत के किसी भाग की सतह में पाचक रसों के प्रतिरोध की क्षमता खो जाती है तो इस प्रकार का रोग हो जाता है।कारण-
आमाशय तथा आंत का अल्सर कई कारणों से हो सकता है जैसे- अधिक मात्रा में शराब का सेवन या धूम्रपान करने आदि से। यह रोग उन व्यक्तियों को भी हो सकता है जो अनियमित रूप से भोजन का सेवन करते हैं। इस कारण से होने वाले रोगों को पेप्टिक अल्सर कह सकते हैं। इनके अलावा यह रोग कई सारी दवाईयों के साइड इफेक्ट से भी हो सकता है।
लक्षण-
इस रोग के कारण व्यक्ति के पेट के ऊपरी भाग या बाईं पसलियों के नीचे की ओर जलन युक्त दर्द होता है। कई बार यह दर्द खाना खाने के बाद शुरू हो जाता है। लेकिन कई बार खाना खाने से यह दर्द कम भी हो जाता है। वैसे यह दर्द लम्बे समय तक रुक-रुककर भी होता रहता है। इस रोग से पीड़ित कुछ व्यक्तियों को जी-मिचलाने की भी शिकायत हो सकती है।
एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा पेप्टिक अल्सर रोग का उपचार-
देखा जाए तो यह रोग कुछ महीने के अन्दर ही ठीक हो सकता है लेकिन कभी-कभी इस तरह के रोग को ठीक होने में वर्षों भी लग जाते हैं। यह रोग कई वर्षों तक बना रहता है। कुछ अल्सर रोग में रोगी को उल्टी या मल के साथ खून आना शुरू हो जाता है। यह रोग आगे चलकर कैंसर का रूप भी धारण कर सकता है। इसलिए इन रोगों का सही तरीके से इलाज करना चाहिए। पेप्टिक अल्सर रोग का उपचार एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा भी किया जा सकत हैं।
अल्सर रोग का उपचार किया जा सकता है। रोगी को अपना इलाज किसी अच्छे एक्यूप्रेशर चिकित्सक की देख-रेख में कराना चाहिए क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सक को सही दबाव देने का अनुभव होता है और वह सही तरीके से पेप्टिक अल्सर से पीड़ित रोगी का उपचार कर सकता है। जब रोगी को पेट में इस रोग के कारण दर्द हो रहा हो तो रोगी को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए तथा सदैव पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।
Hindustani treatment
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