Your blog your knowledge, I am indian blogger । This blog is hindustani message, all world know zero, point, dot, medical traeatment, schooling and more ,so i am creating in this blog ।
सम्राट अशोक असम में हार गए थे उसी असम में अलाउद्दीन खिलजी भी हार गया
हिंदू राजा महाराजा की गैर हिन्दू प्रेमिका पत्नी
कभी भी हिन्दु राजा हो या रानी मुस्लिम समुदाय से शादी-ब्याह करके खुश नही रही थी
इतिहासकारों ने गलत इतिहास पढ़ाया
लेकिन इनमें से 👇 किसी को 35 टुकड़े का दिन न देखना पड़ा
• अकबर की बेटी शहज़ादी खानूम से महाराजा अमर सिंह जी का विवाह।
• कुँवर जगत सिंह ने उड़ीसा के अफगान नवाब कुतुल खा कि बेटी मरियम से विवाह।
• महाराणा सांगा मुस्लिम सेनापति की बेटी मेरूनीसा से ओर तीन मुस्लिम लड़किया से विवाह
• विजयनगर के सम्राट कृष्ण देव राय का गुजरात के नवाब सुल्तान महमूदशाह की बेटी मिहिरिमा सुल्तान से विवाह।
• महाराणा कुंभा (अपराजित योद्धा) का जागीरदार वजीर खा की बेटी से विवाह।
• बप्पा रावल (फादर ऑफ रावलपिंडी) गजनी के मुस्लिम शासक की पुत्री से और 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारीयो से विवाह
• विक्रमजीत सिंह गोतम का आज़मगढ़ की मुस्लिम लड़की से विवाह।
• जोधपुर के राजा राजा हनुमंत सिंह का मुस्लिम लड़की ज़ुबेदा
• कश्मीर के राजा सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ का तुर्की के खालीफा मुहम्मद बिन क़ासिम की बेटी जैनम से विवाह इसके अलावा उनकी 8 मुस्लिम बीबीया भी थी
• महाराणा उदय सिंह ने एक मुस्लिम लड़की लाला बाई से विवाह
• राजा मान सिंह मुस्लिम लड़की मुबारक से विवाह।
• अमरकोट के राजा वीरसाल का हामिदा बानो से विवाह।
• राजा छत्रसाल का हैदराबाद के निजाम की बेटी रूहानी बाई से विवाह।
• मीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन का राजपूत राजा बिन्दुसार से विवाह।
वैवाहिक संबंध तो हुई ही बहुत सारे हिंदू राजाओ की मुस्लिम प्रेमिकाएं भी थी
• अल्लाउदीन खिलजी की बेटी "फिरोजा" जो जालोर के राजकुमार विरमदेव की दीवानी थी वीरमदेव की युद्ध मै वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा सती हो गयी थी
• औरंगजेब की एक बेटी ज़ेबुनिशा जो कुँवर छत्रसाल के पीछे दीवानी थी ओर प्रेम पत्र लिखा करती थी ओर छत्रसाल के अलावा किसी ओर से शादी करने से इंकार कर दिया था
• औरंगजेब की पोती ओर मोहम्मद अकबर की बेटी सफियत्नीशा जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम की दीवानी थी
• इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान जो राजपूत जागीरदार कर्म चंद्र से प्रेम करती थी
• औरंगजेब की बहन भी छत्रपति शिवाजी की दीवानी थी शिवाजी से मिलने आया करती थी।
मराठा साम्राज्य के वीर शिरोमणि सेनापति वाजीराव और उनकी पत्नी मस्तानी की प्रेम कहानी तो सब जानते है वह भी जब उन पर हिंदी भाषा में फिल्म बना तब,
हिन्दू राजाओ की और भी बहुत सी मुस्लिम बीवीया थी लेकिन वो राज परिवार और कुलीन वर्ग से थी भी और नही भी
लेकिन उस समय की किताबो में ब्रिटिश और उस समय के कवियों के रचनाओ में जिक्र स्पष्ट है
और ब्रिटिश रिकॉर्ड में भी औऱ ज्यादातर हिन्दू राजाओ की एक से ज्यादा मुस्लिम बीवीया थी लेकिन रक्त शुध्दता की वजह से इनके बच्चो को अपनाया नहीं जाता ओर उन बच्चों को वर्णशंकर मान के जागिर दे दी जाती थी
तो ये ऐतिहासिक प्रक्षेप चप्पल की तरह फेंक कर उनके मुह पर अवश्य मारिए जो हिन्दुओ को जोधा अकबर जैसे झूठे ऐतिहासिक तथ्यों पर बहस करते हैं
कभी इनपर भी "बॉलीवुड" फिल्म बनाए
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है
कलाशा यानी नूरिस्तान में हिन्दू धर्म
काफिरिस्तान के काफिर...
काफिरिस्तान का नाम सुने हैं ?? पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर एक छोटा सा इलाका है यह। बड़ा ही महत्वपूर्ण क्षेत्र ! जानते हैं क्यों ?? क्योंकि आज से सवा सौ वर्ष पूर्व तक वहाँ विश्व की सबसे प्राचीन परंपरा को मानने वाले लोग बसते थे।
रुकिए !
हिन्दू ही थे वे, पर हमसे थोड़े अलग थे। विशुद्ध वैदिक परम्पराओं को मानने वाले हिन्दू... सूर्य, इंद्र, वरुण आदि प्राकृतिक शक्तियों को पूजने वाले वैदिक हिन्दू...
वैदिक काल से अबतक हमारी परम्पराओं में असँख्य परिवर्तन हुए हैं। हमने समय के अनुसार असँख्य बार स्वयं में परिवर्तन किया है, पर काफिरिस्तान के लोगों ने नहीं किया था।
बड़े शक्तिशाली लोग थे काफिरिस्तान के! इतने शक्तिशाली कि मोहम्मद बिन कासिम से लेकर अहमद शाह अब्दाली तक हजार वर्षों में हुए असँख्य अरबी आक्रमणों के बाद भी वे नहीं बदले।
वर्तमान अफगानिस्तान के अधिकांश लोग अशोक और कनिष्क के काल में हिन्दू से बौद्ध हो गए थे। आठवीं सदी में जब वहाँ अरबी आक्रमण शुरू हुआ तो ये बौद्ध स्वयं को पच्चीस वर्षों तक भी नहीं बचा पाए। वे तो गए ही, साथ ही शेष हिन्दू भी पतित हो गए। पर यदि कोई नहीं बदला, तो वे चंद सूर्यपूजक सनातनी लोग नहीं बदले।
युग बदल गया, पर वे नहीं बदले। तलवारों के भय से धर्म बदलने वाले हिन्दू और बौद्ध धीरे-धीरे इन प्राचीन लोगों को काफिर, और इनके क्षेत्र को काफिरिस्तान कहने लगे।
वैदिक सनातनियों का यह क्षेत्र बहुत ऊँचा पहाड़ी क्षेत्र है। ऊँचे ऊँचे पर्वतों और उनपर उगे घने जंगलों में बसी सभ्यता इतनी मजबूत थी कि वे पचास से अधिक आक्रमणों के बाद भी कभी पराजित नहीं हुए। न टूटे न बदले...
काफिरिस्तान के लोग जितने शक्तिशाली थे, उतने ही सुन्दर भी थे। वहाँ की लड़कियाँ दुनिया की सबसे सुन्दर लड़कियां लगती हैं। माथे पर मोर पंख सजा कर फूल की तरह खिली हुई लड़कियां, जैसे लड़कियाँ नहीं परियाँ हों...
वहाँ के चौड़ी छाती और लंबे शरीर वाले पुरुष, देवदूत की तरह लगते थे। दूध की तरह गोरा रङ्ग, बड़ी-बड़ी नीली आँखें... जैसे स्वर्ग का कोई निर्वासित देवता हो।
कहते हैं कि यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के भगवान श्री कृष्ण जी महाराज के वंशजों के लोग हैं यह आज भी गाय पुजा, सूर्य चंद्र पुजा, मोर पंख पूजा अर्चना आदि करते हैं
पूजा पाठ के समय नृत्य करने की परंपरा है
नूरिस्तानी लोगों को उन्नीसवी सदी के अंत में अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान ख़ान ने पराजित करके मुस्लिम बनाया था जबकि बहुत से कलश लोग अभी भी अपने हिन्दू धर्म से मिलते-जुलते प्राचीन धर्म कलश लोग अधिकतर बुमबुरेत, रुम्बुर और बिरिर नाम की तीन घाटियों में रहते हैं और कलश भाषा में इस क्षेत्र को "कलश देश" कहा जाता है।
अरबी तलवार जब आठ सौ वर्षों में भी उन्हें नहीं बदल पायी, तो उन्होंने हमले का तरीका बदल दिया। अफगानी लोग उनसे मिल-जुल कर रहने लगे। दोनों लोगों में मेल जोल हो गया।
फिर !
सन अठारह सौ छानबे...
1896
अफगानिस्तान के तात्कालिक शासक अब्दीर रहमान खान ने काफिरिस्तान पर आखिरी आक्रमण किया। इस बार प्रतिरोध उतना मजबूत नहीं था। काफिरों में असँख्य थे जिन्हें लगता था कि हमें प्रेम से रहना चाहिए, युद्ध नहीं करना चाहिए। फल यह हुआ कि हजार वर्षों तक अपराजेय रहने वाले काफिरिस्तान के सनातनी एक झटके में समाप्त हो गए। पूर्णतः समाप्त हो गए...
पराजित हुए। फिर हमेशा की तरह हत्या और बलात्कार का ताण्डव शुरू हुआ। आधे लोग मार डाले गए, जो बचे उनका धर्म बदल दिया गया। कोई नहीं बचा! कोई भी नहीं... काफिरिस्तान का नाम बदल कर नूरिस्तान कर दिया गया।
आज काफिरिस्तान या नूरिस्तान या कलाशा का नाम लेने वाला कोई नहीं।
पर रुकिए !
मुझे आज पता चला कि काफिरिस्तान के वैदिक हिन्दुओं की ही एक शाखा पाकिस्तान के कलाशा में आज भी जीवित है। वे आज भी वैदिक रीतियों का पालन करते हैं। लगभग छह हजार की सँख्या है उनकी...
लेकिन कब तक ?? यह मुझे नहीं पता...
काफिरस्तान जी हां बिल्कुल सही 6 हजार साल की सभ्यता
महाराणा का शुभर्क
!!!---: महाराणा का शुभ्रक :---!!!
कुतुबुद्दीन घोड़े से गिर कर मरा, यह तो सब जानते हैं, लेकिन कैसे? भारतीय इतिहास के छुपाए गए पन्ने
यह आज हम आपको बताएंगे..
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी का महान 'चेतक' सबको याद है, लेकिन शायद स्वामी भक्त 'शुभ्रक' नहीं होगा!!
तो मित्रो आज सुनिए कहानी 'शुभ्रक' की......
कुतुबुद्दीन ऐबक ने राजपूताना में जम कर कहर बरपाया, और मेवाड़ (उदयपुर) के 'राजकुंवर कर्णसिंह' को बंदी बनाकर लाहौर ले गया।
कुंवर का 'शुभ्रक' नामक एक स्वामिभक्त घोड़ा था,
जो कुतुबुद्दीन को पसंद आ गया और वो उसे भी साथ ले गया।
एक दिन कैद से भागने के प्रयास में कुँवर को सजा-ए-मौत सुनाई गई.. और सजा देने के लिए 'जन्नत बाग' में लाया गया। यह तय हुआ कि राजकुंवर का सिर काटकर उससे 'पोलो' (उस समय उस खेल का नाम और खेलने का तरीका कुछ और ही था) खेला जाएगा..
कुतुबुद्दीन ख़ुद, कुँवर के ही घोड़े 'शुभ्रक' पर सवार होकर अपनी खिलाड़ी टोली के साथ 'जन्नत बाग' में आया।
'शुभ्रक' ने जैसे ही कैदी अवस्था में अपने राजकुंवर को देखा, उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे। जैसे ही सिर कलम करने के लिए कुँवर सा की जंजीरों को खोला गया, तो 'शुभ्रक' से रहा नहीं गया.. उसने उछलकर कुतुबुद्दीन को घोड़े से गिरा दिया और उसकी छाती पर अपने मजबूत पैरों से कई वार किए, जिससे कुतुबुद्दीन के प्राण पखेरू उड़ गए! इस्लामिक सैनिक अचंभित होकर देखते रह गए..
मौके का फायदा उठाकर कुंवर, सैनिकों से छूटे और 'शुभ्रक' पर सवार हो गए। 'शुभ्रक' ने हवा से बाजी लगा दी.. लाहौर से मेवाड़ बिना रुके , बिना थके दौडा और महल के सामने आकर ही रुका!
राजकुंवर घोड़े से उतरे और अपने प्रिय अश्व को पुचकारने के लिए हाथ बढ़ाया, तो पाया कि वह तो प्रतिमा बना खडा था.. उसमें प्राण नहीं बचे थे।
सिर पर हाथ रखते ही 'शुभ्रक' का निष्प्राण शरीर लुढक गया..
भारत के इतिहास में यह तथ्य कहीं नहीं पढ़ाया जाता क्योंकि वामपंथी लेखक अपने नाजायज बाप की ऐसी दुर्गति वाली मौत बताने से हिचकिचाते हैं! जबकि फारसी की कई प्राचीन पुस्तकों में कुतुबुद्दीन की मौत इसी तरह लिखी बताई गई है।
नमन स्वामीभक्त 'शुभ्रक' को..
#भारत माता की जय
Advertisment
अगस्त और विभाजन एक त्रासदी रावलपिंडी
भारतीय संविधान में विदेशी श्रोत
भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है। भारत के संविधान का निर्माण 10 देशो के संविधान से प्रमुख तथ्य लेकर बनाया गया है। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।भारत के संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है:
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव ‘भारतीय शासन अधिनियम: 1935 का है. भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो 1935 ई० के अधिनियम से या तो शब्दश: लिए गए हैं या फिर उनमें बहुत थोड़ा परिवर्तन किया गया है।
भारत शासन अधिनियम, 1935- संगीय तंत्र, राज्यपाल का कार्यकाल, न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध व प्रसानिक विवरण
घोरिद/घेरेंद/घेरेंड सनातनी/बखमनी हिंदु राजा इतिहास
अलाउद्दीन के भतीजों - घियाथ अल-दीन मुहम्मद और घोर के मुहम्मद के द्वैध शासन के दौरान , घुरिद साम्राज्य अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय सीमा तक पहुंच गया, जिसमें पूर्वी ईरान से पूर्वी भारत के माध्यम से शामिल क्षेत्र शामिल थे । जबकि घियाथ अल-दीन का पश्चिम में घुरिद विस्तार पर कब्जा था, द्वैध शासन में उनके कनिष्ठ साथी , घोर के मुहम्मद और उनके लेफ्टिनेंट सिंधु के पूर्व में बंगाल तक सक्रिय थे और अंततः गंगा के मैदान के व्यापक क्षेत्रों को जीतने में सफल रहे , जबकि पश्चिम में घियाथ अल-दीन के साथ, एक लंबी लड़ाई में उलझा हुआख़्वारज़्म के शाह , घुरिड्स, कैस्पियन सागर के तट पर गोरगन (वर्तमान ईरान ) तक पहुँचे , यद्यपि थोड़े समय के लिए।
गियाथ अल-दीन मुहम्मद की मृत्यु 1203 में गठिया संबंधी विकारों के कारण हुई बीमारी के कारण हुई थी और इसके तुरंत बाद घुरिडों को अपने तुर्की प्रतिद्वंद्वियों ख्वारेज़मियों के खिलाफ तबाही का सामना करना पड़ा था, जो 1204 में अंदखुद की लड़ाई में क़ारा खितैस से समय पर सुदृढीकरण द्वारा सहायता प्राप्त थी। मुहम्मद की जल्द ही हत्या कर दी गई थी मार्च 1206 जिसने खुरासान में घुरिद प्रभाव को समाप्त कर दिया और शाह मुहम्मद द्वितीय द्वारा एक दशक के भीतर सभी को एक साथ बुझा दिया गया, जिसने 1215 तक घुरिडों को उखाड़ फेंका।कुतुब उद दीन ऐबक ।
मूलसंपादन करना
19वीं शताब्दी में माउंटस्टुअर्ट एल्फिन्स्टन जैसे कुछ यूरोपीय विद्वानों ने इस विचार का समर्थन किया कि घुरिद राजवंश आज के पश्तून लोगों से संबंधित था
लेकिन यह आम तौर पर आधुनिक विद्वानों द्वारा खारिज कर दिया गया है और जैसा कि मॉर्गनस्टिएरने ने समझाया है इस्लाम का विश्वकोश , "विभिन्न कारणों से बहुत ही असंभव" है।
कुछ विद्वानों का कहना है कि राजवंश ताजिक मूल का था।
"न ही हम सामान्य रूप से सूरी के जातीय स्टॉक और विशेष रूप से संसबनी के बारे में कुछ भी जानते हैं; हम केवल यह मान सकते हैं कि वे पूर्वी ईरानी ताजिक थे"।
बोसवर्थ आगे बताते हैं कि घुरिद परिवार का वास्तविक नाम, अल-ए संसाब (फारसी: संसाबनी ), मूल रूप से मध्य फ़ारसी नाम विस्नास्प का अरबी उच्चारण है।
भारतीय संविधान रुप रेखा और विकास
भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है। भारत के संविधान का निर्माण 10 देशो के संविधान से प्रमुख तथ्य लेकर बनाया गया है। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।भारत के संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है:
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव ‘भारतीय शासन अधिनियम: 1935 का है. भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो 1935 ई० के अधिनियम से या तो शब्दश: लिए गए हैं या फिर उनमें बहुत थोड़ा परिवर्तन किया गया है।
भारतीय संविधान के हिसाब किताब
भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है। भारत के संविधान का निर्माण 10 देशो के संविधान से प्रमुख तथ्य लेकर बनाया गया है। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।भारत के संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है:
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव ‘भारतीय शासन अधिनियम: 1935 का है. भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो 1935 ई० के अधिनियम से या तो शब्दश: लिए गए हैं या फिर उनमें बहुत थोड़ा परिवर्तन किया गया है।
भारत शासन अधिनियम, 1935- संगीय तंत्र, राज्यपाल का कार्यकाल, न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध व प्रसानिक विवरण
सनातन
फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...
-
बिहार के बारे में कुछ बताने की कोशिश कर रहा हूँ, बिहार में विस्व के अनेक धर्म, सामाजिक जीवन, लोकतंत्र, चुने हुए प्रतिनिधि, लोकता...
-
बोस्टन की चाय-पार्टी की घटना क्या थी? ब्रिटिश संसद ने चाय के व्यापार के सम्बन्ध में नया कानून बनाया था. इस कानून के ...
-
श्रीलंका : 'श्रीलंका' भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित एक बड़ा द्वीप है। यह भारत के चोल और पांडय, यादव जनपद क...