LPG gas ⛽ के लिए हाहाकार

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है।😡
भारत कभी विकसित या विश्वगुरु नहीं बन सकता क्योंकि भारत चूतियों का देश है, भारत गधों का देश है, भारत प्रचंड मूर्खों का देश है, भारत स्वार्थी और पागलों का देश है

LPG गैस सिलेंडर के नाम पर ऐसे रंडी रोना किया जा रहा है, जैसे सामूहिक शोक हो गया हो

दूसरे देशों में युद्ध छिड़ा है तो भारत के लोगों का गैस के नाम पर रो-रोकर बुरा हाल है

जरा सोचिए कि अगर अपना देश महीने भर के लिए युद्ध में चला जाए तो ये लोग क्या करेंगे ?

अमेरिका, इजरायल, ईरान में युद्ध हो रहा है तो मोदी क्या करे ? सेना लेकर कूद जाए भेंचो कि हमारे तेल के भेजो, बाद में फिर लड़ लेना क्योंकि हमारे लोगों को सिलेंडर सुलगाकर उस पर पिछवाड़ा सेंकना है

जरा भी कॉमनसेंस नहीं है भारत की बड़ी आबादी में

जब भारत LPG का 60% हिस्सा आयात करता है और खाड़ी देशों में युद्ध छिड़ा है तो थोड़ा बहुत क्राइसिस होगा ही, फिर गैस एजेंसिया क्राइसिस को बढ़ावा देंगी, फिर विपक्षी नेता इस क्राइसिस को और बढ़ावा देंगे और जनता LPG के नाम पर हाय हाय मोदी मर जा तू कहते हुए दहाड़ें मारकर रोएगी

5-7 साल पहले दिल्ली के अफ़वाह उड़ी कि नमक खत्म हो गया तो आधी दिल्ली परचूनी/किराना की दुकानों पर लाइन में लग गई थी और 50-50 किलो नमक ख़रीदकर घरों में रख लिया था

हम नमक के लिए रोने लगते हैं, प्याज के नाम पर रोते हैं, LPG के लिए रो रहे हैं और फिर भी कहते हैं कि हम तो विश्वगुरु और विकसित बनेंगे

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है

भारत के आधे लोग ईरान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन वहां भयानक महंगाई है, जरूरत की तमाम चीजें नहीं मिल रही हैं. आपको ईरान का समर्थन करना है कि ईरान युद्ध के कारण LPG संकट आ गया तो रोने लगे भेंचो

आधे लोग इजरायल का समर्थन कर रहे हैं, वहां ईरान ताबड़तोड़ बम और मिसाइलें मार रहा है, भयानक तबाही मची है. आपको इजरायल का समर्थन करके बहादुर बनना है लेकिन LPG संकट के नाम पर रंडी रोना भी करना है

भाई, भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के हर देश में ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा पदार्थों का संकट आया है तो इस समय रोने की नहीं धैर्य की जरूरत है

मोदी पेशाब करके क्रूड आयल पैदा नहीं कर देगा जिससे पेट्रोल, डीजल या LPG बन सके

या मोदी के बदले राहुल को Pm बना दो तो भी वो आपके घरों में गैस से भरे सिलेंडर नहीं भेज देंगे क्योंकि क्रूड तो उनकी पेशाब से भी नहीं निकलेगा, वहां से भी मूत निकलेगा

पूरे देश को पैनिक मोड में लाकर खड़ा कर दिया है भेंचो

इसमें एक बड़ा वर्ग उन लोगों का है, जिनके पास 5/7 साल पहले तक गैस सिलेंडर नहीं थे, मोदी ने ही दिए और मोदी के दिए हुए सिलेंडर ही मोदी पर भारी पड़ रहे हैं

तुम दूसरे देशों के बीच युद्ध के कारण इस तरह रो रहे हो और तुम चाहते हो कि तुम्हें पाकिस्तान के साथ युद्ध करके कश्मीर दे दिया जाये, बलूचिस्तान, सिंध, गिलगिट बाल्टिस्तान को आजाद कराया जाए

अबे अगर ऐसा करने का सोचा भी तो तुम संसद और PM आवास घेर लोगे नामक, तेल, आटा या किसी अन्य चीज के नाम पर

भारत जैसे महान देश में कैसे विशुद्ध पगलैट पब्लिक पैदा होती है यार 

अरे सिलेंडर मिल जायेगा यार और अगर कालाबाजारी के कारण न भी मिले तो इंडेक्शन ले लो, इंडेक्शन न मिले तो कुछ चूल्हे पर पका लेना

देश के प्रति कुछ तो दायित्व निभाओ

ये देश सिर्फ उनका ही नहीं है जो सीमा पर मर जाते हैं, ये देश आपका भी है और सिर्फ वोट देकर आप अपने दायित्व की इतिश्री नहीं कर सकते

जब संकट भी घड़ी हो आपको भी सैनिक बनकर किसी युद्ध लड़ना पड़ सकता है

हरिओम पंवार साहब ने लिखा है

क्या ये देश उन्हीं का है जो सीमा पर मर जाते हैं
अपना लहू बहाकर टीका सरहद पर कर जाते हैं
ऐसा युद्ध वतन की ख़ातिर सबको लड़ना पड़ता है
संकट की घड़ियों में सबको सैनिक बनना पड़ता है
जो भी क़ौम वतन की ख़ातिर लड़ने को तैयार नहीं
उसकी संतति को आजादी जीने का अधिकार नहीं।😐

यहूदी

My heart is with Israel!! ❣️

बेंजामिन नेतन्याह के भाषण का अंश:--

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास न कोई देश था न कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65000 थें। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमलें होतें रहे, होते रहे। लेबनान, सीरिया, इराक़, जॉर्डन,मिश्र, लीबिया, सऊदी, अरब जैसे कई देशों ने हमारे उपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे, किंतु हम बच गए।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमें धरती दी,
वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। 
हमने उसको भी अपने खून से सींचा। 
हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सबकुछ था। 
हम कुछ नहीं भूलें। हम फिर इन से बच गए। 
हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए।
हम अरब से बच गए। 
हम सद्दाम हुसैन से बच गए। 
हम गद्दाफी से बच गए। 
हम हमास से भी बचेंगे, 
हम हिज्बुल्लाह से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरुसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 
39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया..
लेकिन हम अपने जेरुसलम को कभी नहीं भूले वह हमारे हृदय में हैं, वह हमारे मस्तिष्क में हैं और जब तक हम रहेंगे जेरुसलम हमारी आत्मा में रहेगा। 
संसार यें याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिश्र, लेबनान, वेवीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गयें है। 
हम फिर भी बचे रहें।

हमें वे (इस्लाम) खत्म करना चाहते हैं। 
उन्होंने हमारें रस्म रिवाज को कब्जाया। 
उन्होंने हमारें उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारें पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिया गया, सोलोमन, सुलेमान हो गया, डेविड, दाऊद बना दिया गया। मोजेज मूसा कर दिया गया। फिर एक दिन उन्होंने कहा - तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे नहीं स्वीकार किया। करते भी कैसे ? उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा स्वीकार करो़, कबूल लो। हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहर को कब्जाया गया। 
हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम क़त्ल हुए,भगा दिए गए।

मक्का के काबा में हम दों लाख थें, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर क़त्ल किया गया। 
फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। 
हम तीन लाख थें मार दिए गए इराक़ में हम दों लाख थें, तुर्की में चार लाख हमें मारा जाता रहा, मारें जाता रहा। वें हमें मार रहे हैं, मारते जा रहें हैं। हमारे शहर,धन, दौलत, घर, पशु, मान सम्मान सब कुछ कब्जाये़ जातें रहें, फिर भी हम बचें रहें। 1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया, फिर भी हम बचें रहें। 75 साल पहले वें हम पर थूकते थें, ज़लील करतें थें, मारते थे।हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे हैं।

आज हमारे पास एक अपना देश है। 
एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक जैसी कई संस्थाएं हमने इस दौर में बनाई।
आज हमारे चिकित्सक दवा बना रहे हैं, 
लेखक किताबें लिख रहें हैं। यें सबके लिए है, 
यह मानवता के कल्याण के लिए है।
हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला, 
हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है। हम किसी के दुश्मन नहीं है, 
हमने किसी को खत्म करने की क़सम नहीं खाई है। हमें किसी को बर्बाद नहीं करना, हम साजिश भी नहीं करते, हम जीना चाहते हैं सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, 
खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे। हम 3000 सालों से यरुसलम में ही थें। आज़ हम अपने पहले देश इजरायल में है। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा। यरुसलम हमसे है और हम यरुसलम से है।

जेरूसलम से एक यहूदी


आपको बता दिया जाए कि 1300 सौ ईसवी तक ईरान फारस देश था और ये फारसी हिंदू लोग हैं अग्नि और सूर्य पूजक वाले लोग 

#BenjaminNetanyahu
#Israel

#यदुवंशी वैदिक क्षत्रिय छत्रपति शिवाजी महाराज

#हिंदवी_स्वराज्य संस्थापक 
#छत्रपति शिवाजी राज महाराज 
वंश – #यदुवंश/#यदुवंशी/#यदु
कुल– हैहयवंशी_यादव (#क्षत्रिय कुलीन वर्ग)
जन्म दिवस (16 फरवरी 1630, शिवनेरी किला) निर्वाण दिवस ( 3 अप्रैल 1680 , राजगढ़ किला)
पिता – शाह जी भोसले जाधव 
माता – जीजाबाई जाधव 
उपलब्धि – हिंदवी स्वराज्य संस्थापक,
युद्ध – अनेक राज्यों को जीत लिया गया 
विवाह– पहली पत्नी 14 मई 1640 , सइबाई निंबालकर जाधव – पुत्र संभाजी बाद मे द्वितीय महाराज छत्रपति संभाजी महाराज बने ये विश्व के पहले बाल साहित्यकार हैं इन्होंने मात्र 14 वर्ष में ही संस्कृत, मराठी, फारसी, उर्दू, कन्नड़ तेलुगु , फारसी भाषा में किताब लिख दी थी।

यदुवंशी छत्रपति शिवाजी महाराज जी की अन्य पत्नियां भी थीं और इनके मात्र 2 पुत्र हुए थे 

राज्याभिषेक–6 जून 1674 , रायगढ़ किला 


राज्याभिषेक दिवस 
6 जून 1674 को
 #यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी महाराज जी का राज्याभिषेक हुआ था...
मगर स्थानीय ब्राह्मणों के पास उतनी योग्यता नहीं थी जितनी वाराणसी के #गंगाभट्ट जी पास थी तो #वाराणसी से #ब्राह्मण गए थे 
#यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज 
को राजा बनाया गया 
#यदुवंशी_वीर_योद्धा का राज्याभिषेक करने काशी के सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण तैयार हुए थे जिसके बाद #गागा_भट्ट नाम के ब्राह्मण ने राज्याभिषेक कराया था इस पूरे कार्यक्रम में 
7 करोड रुपए खर्च आया था , इस राज्याभिषेक में आसपास के अनेकों महाराजा राजा जागीरदार सामंत पहुंचे हुए थे दक्षिण भारत के लगभग सभी राजा महाराजा शामिल रहे थे नॉर्थ इंडिया से बिहार, बंगाल ओडिसा असम पंजाब सहित सिख महाराजा रणजीत सिंह जी भी उपस्थित रहे थे कुल 11 हजार ब्राह्मण शामिल हुए थे यह राजसूर्य यज्ञ जितना खर्च हुआ था 

#यदुवंशी_यदुवीर_यदुकुल_शिरोमणि 
#छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज का राज्याभिषेक संपन्न हुआ था 

आज हमारे कुछ #यदुवंशी #यादव भाई अपनी गरीबी का रोना रोते हैं अपने को शोषित दबित पीड़ित वंचित पिछड़ा वर्ग का बोलते है यह वोट के लालच में खुद को अपमानित करने जैसा है यह खुद को धोखा देने जैसा है 

#यदुवंशी_वीर_छत्रपति_शिवाजी_महाराज अपने जाति, धर्म,कर्म से और अपने ताकत से उन सामंतवादी आक्रमणकारी हमलावर को अपने कदमों में झुका दिए थे मुगल बादशाह औरंगजेब का भारत विजेता का सपना अधूरा रह गया वह अपनी हार और अपमान बर्दास्त न कर सका और दक्षिण भारत में ही कब्र में दफनाना गया 
और कभी भी मुगलों का वो सपना की पूरा हिंदुस्तान अपना कभी भी पूरा नहीं होने दिया 


भारत कभी भी पूरी तरह गुलाम रहा ही नहीं 
यहां तक कि 1947 में जब अंग्रेज सरकार ने भारत छोड़ा उस समय भी लगभग 100 के आसपास स्वतंत्र देशी राजा महाराजा थे जो कि बिल्कुल आजाद थे 

#छत्रपती_श्री_शिवाजी_महाराज 
 जय यदुवंशी जय श्री कृष्ण 
💪#जय_वीर_शिवाजी 🙏

वीर अहीर आल्हा जयंती

#जय_श्री_कृष्ण
#जय_श्री_कृष्ण_जय_यदुवंश 
#यदुवंशी_वैदिक_क्षत्रिय_ब्राह्मण 
#भागवत_धर्म_की_जय 

#यदुवंशी परम प्रतापी, बलशाली, अदम्य साहस अकल्पनीय अपराजित अजेय योद्धा,
 52 गढ़ (#किला) और
 56 सूबों (राजा महाराजा) के विजेता जिसे कोई कभी न हरा सका..
जिसने कभी निहत्थे, भागते हुए और पहले दुश्मन पर वार नहीं किया जिसकी वीरता का सम्मान दुश्मन भी करते थे..

 ऐसे #वीर_अहीर_आल्हा की जयंती पर कोटि कोटि नमन।
आइए अपने समृद्ध वैभवशाली गौरव विरासत को याद करे 

#जय_मां_शारदा_भवानी 
#VeerAhirAlha
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
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#VeerAhirAlhaJayanti 
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क्या गाजा भूखा है

इज़रियल फ़िलिस्तीन में रसद नहीं पहुँचने दे रहा है- ये एक आम नैरेटिव है जो हाल में चल रहा है। जो फ़िलिस्तीन के समर्थक है, वो इस पे क्रन्दन करते है। जो फ़िलिस्तीन के विरोधी है, वो इस पे हंसते है।

हकीकत क्या है? क्या वाक़ई में फ़िलिस्तीन को खाना नहीं मिल रहा है?

इसका उत्तर यूएई के एक प्रख्यात पत्रकार और एनालिस्ट अमजद तहा के इस ट्वीट से समझें।

आपके सुभीते के लिए इस ट्वीट का हिंदी अनुवाद ये है-


मुझे पता है कि आपको तर्क पसंद नहीं है। 7 अक्टूबर 2023 से, ग़ाज़ा को 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक मानवीय सहायता मिली है, जो 22,000 से अधिक ट्रकों के माध्यम से केवल 2.1 मिलियन लोगों की आबादी के लिए पहुँचाई गई है। इसका मतलब है कि कुछ ही महीनों में प्रति व्यक्ति लगभग 143 किलोग्राम सहायता। यदि हम मान लें कि एक किलोग्राम खाद्य सामग्री में औसतन 3,500 कैलोरी होती है (जो आपातकालीन राशन के लिए मानक है), तो यह सहायता कुल मिलाकर 1.05 ट्रिलियन से अधिक कैलोरी प्रदान करती है। ग़ाज़ा की जनसंख्या को प्रतिदिन लगभग 4.2 अरब कैलोरी की आवश्यकता होती है (प्रति व्यक्ति 2,000 कैलोरी के हिसाब से), तो यह सहायता अकेले ही पूरी आबादी को लगातार 250 से अधिक दिनों तक तीन समय का भोजन और मिठाई सहित खिलाने के लिए पर्याप्त है। अगर भोजन की मात्रा बढ़ाकर दिन में चार भारी भोजन कर दी जाए (जो किसी भी मानवीय न्यूनतम से कहीं अधिक है), तब भी ग़ाज़ा की आबादी के लिए यह सहायता लगभग 190 दिनों तक पर्याप्त होगी।

अगर इसकी तुलना यूरोप के शहरों से करें, तो 2.1 मिलियन आबादी वाला पेरिस शहर इसी मात्रा की कैलोरी से आठ महीने तक पूरी तरह खिलाया जा सकता है। बर्लिन, जिसकी आबादी 3.6 मिलियन है, को पांच महीने और रोम (2.8 मिलियन) को छह महीने तक यह सहायता पर्याप्त होती। इस बीच, अफ्रीका के कई देशों में वास्तविक अकाल की स्थिति है, जिन्हें न तो इतना ध्यान मिलता है और न ही इतनी सहायता। दक्षिण सूडान, जहाँ 6.3 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, ग़ाज़ा की प्रति व्यक्ति सहायता का एक चौथाई से भी कम पाते हैं। सोमालिया, जहाँ 7 मिलियन से अधिक लोग ज़रूरतमंद हैं, को इससे भी कम सहायता मिलती है—अनुमानों के अनुसार प्रति व्यक्ति केवल 30 डॉलर की सहायता मिलती है, जबकि ग़ाज़ा में यह लगभग 133 डॉलर प्रति व्यक्ति है। चाड, नाइजर और बुर्किना फासो को इतनी कम सहायता मिलती है कि वे वैश्विक न्यूनतम पोषण स्तर तक भी नहीं पहुँच पाते।

अगर हम #ग़ाज़ा को एक प्रतीकात्मक रेस्टोरेंट मानें, तो यह ऐसा है मानो हर दिन 400 ट्रक यहाँ सप्लाई दे रहे हों, हर गली में ‘गौर्मे’ स्तर की लॉजिस्टिक्स पहुँच रही हो, जबकि अफ्रीका के युद्धग्रस्त क्षेत्र पत्तियाँ बीनकर और गंदा पानी पीकर गुज़ारा करने को मजबूर हैं—बिलकुल बिना किसी मीडिया हेडलाइन या हैशटैग के।

अब यह भूख का मुद्दा नहीं रहा। यह एक पक्षपाती नैरेटिव को ज़रूरत से ज़्यादा पोषित करने का मामला बन गया है। जब मानवीय सहायता भेजी जाती है, तो यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि यह वास्तव में लोगों तक पहुँचे और आतंकवादी संगठन द्वारा नियंत्रित इलाक़े को उन संसाधनों से न भर दे जो अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों को नहीं मिलते। इस बीच, बर्मिंघम (यूके) में स्थित ‘इस्लामिक रिलीफ’ जैसे समूह तटस्थता का दावा करते हैं, जबकि उनकी सहायता सुविधा से गायब होकर हमास की सुरंगों और गोदामों में जा पहुँचती है। टिग्राय, नाइजर और #सूडान जैसे स्थानों में वास्तविक भूख चुपचाप मर रही है—बिना किसी कैमरे, बिना किसी रोशनी के—जबकि फ्रांस और यूके जैसे देश एक ऐसे संघर्ष को ईंधन दे रहे हैं जिसे वे हल करने का दिखावा कर रहे हैं।

——————-

अमजद तहा साफ़ बतला रहा है कि फ़िलिस्तीन को मनो भर रसद जा रही है और फिर भी नैरेटिव ऐसा चल रहा है जैसे वहाँ अक़ाल पड़ा हुआ है।

नैरेटिव बनाने में दूसरा पक्ष कितना हुशियार है।

इन नैरेटिव को ही अल तकिया कहा जाता है 

संविधान क्या केवल भीम राव का था

हिंदुओं को टॉर्चर किया जा रहा है और यह #संविधान निर्माताओं का अपमान है जो कि इसके असली हकदार को भूला दिया गया 

#संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष 
डॉ राजेंद्र प्रसाद (श्रीवास्तव –कायस्थ)

#संविधान_सभा के अटॉर्नी जनरल 
BN RAW (#यदुवंशी – #अहीर)

#संविधान_सभा के अस्थाई अध्यक्ष 
डॉ– सच्चिदानंद सिन्हा (#यदुवंशी – गोप)

#संविधान सभा की कुल 22 समितियाँ थीं । जिनमें से 8 समितियाँ प्रमुख समितियाँ थीं और बाकी छोटी समितियाँ थीं। 

इन छोटी #समितियों में से एक समिति जिसे #प्रस्तावना कहा जाता है उसके अध्यक्ष थे भीम राव आंबेडकर वह भी 7 माननीय सांसद महोदय के साथ थे 

#संविधान_सभा में कुल 292 जन प्रतिनिधि चुने हुए थे यानी सांसद महोदय थे 
93 देशी स्वतंत्र राजा महाराजा और ब्रिटिश क्राउन वाले राजा महाराजा के साथ साथ 4 गवर्नर प्रेसीडेंसी रूल के सदस्य थे 
मतलब कुल सदस्यों की संख्या 389 

तो देश के लोगों तुमने अपने जाति पूर्वजों पुरखों को भुला दिया 
लेकिन भीम राव आंबेडकर के जाति वाले ने उनको नहीं भुलाया नतीजा सामने है 
आज भीम राव आंबेडकर के ऊपर टिप्पणी हो जाए 
या #जयभीम
न बोलो तो ये लुटेरे वर्ग खुलेआम #SCSTACT लगाते है और कोर्ट उनको एकमुश्त 1 लाख रुपए नकद रुपया देती हैं वह भी टैक्स पेयर/#IMF #वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर 
इनकी भरपाई कौन करेगा???

उस पुलिस अधिकारी पर भी कार्यवाही होनी चाहिए जो कि हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के लिए उन पर बिना किसी ठोस सबूत के  #SCSTACT #scstact लगा देता है 

#संविधान हम सभी का है किसी एक का नहीं है 
बहुत हुआ बर्दास्त अब और नहीं 

#जागो_हिंदुओं_जागो 
#संविधान_बचाओ

india Balochistan

Dear international friends of Balochistan.

We are starting a campaign to connect the people of Bharat and Balochistan, understanding each other's cultural bonds, historic and brotherly relations.

We will start publishing your write ups, articles, personal thoughts, your experiences, your suggestions and solidarity messages for the people of Balochistan

Mode of communication:
You can share your content via email: bharatbalochistancc@gmail.com or send DM on @miryar_baloch

Content:

1: You can record 3 seconds to 1 minute video solidarity message.

2: You can photos of hoisting Balochistan and Indian flags with your friends circle.

3: You can organise a village gathering video and show your solidarity with Balochistan.

4: You can send your text (minimum 500 words) expressing your moral support and your suggestions.

5: You can approach to the foreign Embassies and send letters and urge them to raise voice about gross human rights violations in PoB Pakistan Occupied Balochistan.

6: You can approach your constituency MLA, MPA, Vidhayak and local Panchayaat have their words for the importance of Bharat Balochistan Friendship.

7: You can send us a group photo showing your solidarity with the Baloch people.

8: Even if you don't want to show your face, you can still write your solidarity message without revealing your identity.

9: You can suggest your government to have a long term strategy to include Balochistan to its foreign policy agenda.

10: People of the country have the power and it is the time show your power for the betterment of our two countries.

Let's connect.
Long Live #BhafatBalochistanFriendship

भारत पाकिस्तान बांग्लादेश

राजस्थान से 1070 किमी लंबा तथा जम्मू-कश्मीर से 1222 किमी लंबा भारत पाकिस्तान के बीच अन्तर्राष्ट्रीय सीमा है...

राजस्थान में कोई आतंकवादी इतनी जल्दी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश नहीं करता हैं लेकिन कुछ समय अंतराल के बाद बारम्बार लगातार जम्मू कश्मीर में कोई न कोई बड़ी आतंकवादी घटना को बड़ी गुमचुप तरीके से अंजाम दे दिया जाता है |

कारण क्या है ?

राजस्थान हिन्दू बहुल है और जम्मू कश्मीर मुस्लिम बहुल...राजस्थान में इस्लामिक जिहाद के समर्थक नहीं है | जबकि जम्मू कश्मीर में इस्लामिक जिहाद के समर्थक घर-घर भरे पड़ें है | राजस्थान में इस्लामिक जिहाद के समर्थकों का इलाज वहां के स्थानीय लोग बेहिचक करने में जरा भी चिंता नहीं करेंगे | जबकि जम्मू कश्मीर में वहाँ के स्थानीय लोग इस्लामिक किताब के कारण खुलकर "तेरा मेरा रिस्ता क्या! ला इल्लाह! इ ललाह!" का रिस्ता निभाते आये हैं |

इस्लामिक जिहाद और कट्टरपंथी मुस्लिम देश के कोने-कोने में भारत की बर्बादी और तबाही की बेसर्बी से प्रतीक्षा "सेकुलरिज्म की आड़" में कर रहें हैं और भारत का गैर-मुस्लिम समाज आज भी गहरी नींद में सोया हैं| सेक्युलर लोग और सेक्युलर पार्टियां से जुड़े स्वार्थी लोग एक दिन इस भारत का सत्यानाश करवा के ही रहेंगे | 

"कट्टरपंथी सोच इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद, सत्ता और मुस्लिम वोट के लिए इनकी आँखों पर बंधी मुस्लिम पट्टी और मौन साधना भारत के लिए सबसे खतरनाक है" 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस तरह से सेक्युलर नेताओं और उनके समर्थकों का इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद पर सोशल मीडिया पर घमासान मचा हुआ है भारत में अंदरूनी सोच और जमीनी हकीकत उससे भी भयावह है जिसे जानने और समझने में भारत के तमाम धर्म और जाति के गैर मुस्लिम लोगों ने जानने और समझने में बहुत देर कर दी है | सेक्युलर सोच ने देश में इस्लामिक जिहाद और कट्टरपंथ को इतना सुदृढ़ और मजबूत कर दिया है संविधान की दुहाई निकट भविष्य में किसी काम की नहीं रहेगी |

5 लाख से जायदा मुस्लिम महिलाओं का पाकिस्तानी नागरिक से विवाह और देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसबैठियों का बेधड़क दाखिल होना झारखण्ड के आदिवासी इलाकों में, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में, बिहार के सीमांचल में.... असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरला, हैदराबाद, महाराष्ट्र, दिल्ली में बगावत के किनारे खड़े हैं | 

भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के 99.99 फीसदी मुसलमान कुरान के आगे नतमस्तक हैं | कुरान ही इनके दिलों दिमाग में इसके अतिरिक्त सब शून्य सा महसूस होता है | इस्लामिक जिहाद में मानवता करुणा दया और इंसानियत की कोई जगह नहीं हैं | हैवानियत और बात-बात में इंशाअल्लाह का उद्घोष कट्टर होने, दिखाने और एकजुट होने का बेहद खतरनाक मंत्र है |

उदाहरण अगर प्रेम, करुणा, दया, मानवता होता तो भारत में 'मदरसे' सार्वजानिक रूप से संचालित किये जाते, किसी के आने-जाने पर धर्म को देखकर पाबन्दी नहीं होती, जबकि गैर-मुस्लिम में ऐसा कोई सख्त पाबन्दी मैंने नहीं देखा न सुना |  

रामायण छोड़ के केवल 25 प्रतिशत भारतवंशी सिर्फ महाभारत के आगे नतमस्तक हो जाए भारत में कट्टरपंथी सोच, इस्लामिक जिहाद, आंतकवाद और आतंकवादियों के समर्थक और अनियंत्रित दोगली सेकुलरिज्म सबको आसानी से नियंत्रित किया जा सकता हैं अन्यथा "हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है", सुनने को नहीं मिलेगा बल्कि शीघ्र ही यहाँ से इस्लामिक जिहादियों और मुस्लिम आतंकियों के कारण भारत से भगा दिए जाओगे या बेहरमी से मार दिए जाओगे |

हमारे प्राचीन संस्कृति की देन है- सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक विनम्रता, धैर्य, संयम, सहलशीलता, त्याग, प्रेम, करुणा, दया, मानवता और इंसानियत का विश्व में कोई जोड़ा नहीं हैं, न ही होगा !

समय और वर्तमान परिस्तिथियों के आधार पर "सच कड़वा है" और यह मेरे व्यक्तिगत विचार एवं ऐसा मानना हैं...सहमत होना या न होना जरुरी नहीं है |

पुरे देश को समझाने-बुझाने वाले अहिंसावादी हिन्दू 'गाँधी' एक कट्टरपंथी 'जिन्ना' को नहीं समझा पाए थे...ठीक वैसा ही समय आ रहा है सेक्युलर हिंदू...कुरानी सोच, इस्लामिक कट्टरपंथी और जिहादी को नहीं समझा पाएंगे...लिख के रख लीजिये !

@nirajbabu121

सिंधु जल संधि क्या है

सिंधु नदी जल समझौता ,पूरा पढ़िए थ्रेड🧵 

ब्रिटिश राज के दौरान ही दक्षिण पंजाब में सिंधु नदी घाटी पर बड़ी नहर का निर्माण करवाया गया था. उस इलाक़े को इसका इतना लाभ मिला कि बाद में वो दक्षिण एशिया का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र बन गया.

भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के दौरान जब पंजाब को विभाजित किया गया तो इसका पूर्वी भाग भारत के पास और पश्चिमी भाग पाकिस्तान के पास गया.

बंटवारे के दौरान ही सिंधु नदी घाटी और इसकी विशाल नहरों को भी विभाजित किया गया. लेकिन इससे होकर मिलने वाले पानी के लिए पाकिस्तान पूरी तरह भारत पर निर्भर था

पानी के बहाव को बनाए रखने के उद्देश्य से पूर्व और पश्चिम पंजाब के चीफ़ इंजीनियरों के बीच 20 दिसंबर 1947 को एक समझौता हुआ.

इसके तहत बंटवारे से पहले तय किया गया पानी का निश्चित हिस्सा भारत को 31 मार्च 1948 तक पाकिस्तान को देते रहना तय हुआ.

1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया जिससे पाकिस्तानी पंजाब की 17 लाख एकड़ ज़मीन पर हालात ख़राब हो गए.

भारत के इस क़दम के कई कारण बताए गए जिसमें एक था कि भारत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहता था.

बाद में हुए समझौते के बाद भारत पानी की आपूर्ति जारी रखने पर राज़ी हो गया 

स्टडी के मुताबिक 1951 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने टेनसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियंथल को भारत बुलाया.

लिलियंथल पाकिस्तान भी गए और वापस अमेरिका लौटकर उन्होंने सिंधु नदी घाटी जल बंटवारे पर एक लेख लिखा.

ये लेख विश्व बैंक प्रमुख और लिलियंथल के दोस्त डेविड ब्लैक ने भी पढ़ा और उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रमुखों से इस बारे में संपर्क किया. और फिर दोनों पक्षों के बीच बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ.

ये बैठकें क़रीब एक दशक तक चलीं और आख़िरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु नदी घाटी संधि पर हस्ताक्षर हुए.

समझौते की शर्ते निम्न प्रकार से है :

संधि के मुताबिक़, सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां बताते हुए इनका पानी पाकिस्तान के लिए तय किया गया. जबकि रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां बताते हुए इनका पानी भारत के लिए तय किया गया.

इसके मुताबिक़,भारत पूर्वी नदियों के पानी का, कुछ अपवादों को छोड़कर, बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है.

वहीं पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया था. जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी.

इस संधि में दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत करने और साइट के मुआयना आदि का प्रावधान भी था.

इसी संधि में सिंधु आयोग भी स्थापित किया गया. इस आयोग के तहत दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था.

संधि में दोनों कमिश्नरों के बीच किसी भी विवादित मुद्दे पर बातचीत का प्रावधान है.

इसमें यह भी था कि जब कोई एक देश किसी परियोजना पर काम करता है और दूसरे को उस पर कोई आपत्ति है तो पहला देश उसका जवाब देगा. इसके लिए दोनों पक्षों की बैठकें होंगी.

बैठकों में भी अगर कोई हल नहीं निकल पाया तो दोनों देशों की सरकारों को इसे मिलकर सुलझाना होगा.

साथ ही ऐसे किसी भी विवादित मुद्दे पर तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान भी रखा गया है

सनातन

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