घोरिद/घेरेंद/घेरेंड सनातनी/बखमनी हिंदु राजा इतिहास

 आइए जानते हैं समृद्ध भारतीय संस्कृति और सभ्यता घुरिडों ने शुरू में गजनवीड्स और बाद में सेल्जुकों के जागीरदारों के रूप में शासन किया । हालांकि, बारहवीं शताब्दी की शुरुआत के दौरान सेल्जूक्स और गजनवीड्स के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता ने पूर्वी अफगानिस्तान और पंजाब में एक शक्ति निर्वात पैदा कर दिया, जिसका घुरिडों ने फायदा उठाया और अपना क्षेत्रीय विस्तार शुरू किया। अला अल-दीन हुसैन ने घांजाविड्स के लिए घुरिद अधीनता को समाप्त कर दिया, उनकी राजधानी को बेरहमी से बर्खास्त कर दिया, हालांकि वह जल्द ही पराजित हो गए और उन्हें श्रद्धांजलि देना बंद करने के बाद सेल्जूक्स द्वारा अधिकृत किया गया, हालांकि, सेल्जुक शाही शक्ति खुद पूर्वी ईरान में बह गई थी ओघुज खानाबदोशों का समकालीन आगमन.

अलाउद्दीन के भतीजों - घियाथ अल-दीन मुहम्मद और घोर के मुहम्मद के द्वैध शासन के दौरान , घुरिद साम्राज्य अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय सीमा तक पहुंच गया, जिसमें पूर्वी ईरान से पूर्वी भारत के माध्यम से शामिल क्षेत्र शामिल थे । जबकि घियाथ अल-दीन का पश्चिम में घुरिद विस्तार पर कब्जा था, द्वैध शासन में उनके कनिष्ठ साथी , घोर के मुहम्मद और उनके लेफ्टिनेंट सिंधु के पूर्व में बंगाल तक सक्रिय थे और अंततः गंगा के मैदान के व्यापक क्षेत्रों को जीतने में सफल रहे , जबकि पश्चिम में घियाथ अल-दीन के साथ, एक लंबी लड़ाई में उलझा हुआख़्वारज़्म के शाह , घुरिड्स, कैस्पियन सागर के तट पर गोरगन (वर्तमान ईरान ) तक पहुँचे , यद्यपि थोड़े समय के लिए।

गियाथ अल-दीन मुहम्मद की मृत्यु 1203 में गठिया संबंधी विकारों के कारण हुई बीमारी के कारण हुई थी और इसके तुरंत बाद घुरिडों को अपने तुर्की प्रतिद्वंद्वियों ख्वारेज़मियों के खिलाफ तबाही का सामना करना पड़ा था, जो 1204 में अंदखुद की लड़ाई में क़ारा खितैस से समय पर सुदृढीकरण द्वारा सहायता प्राप्त थी। मुहम्मद की जल्द ही हत्या कर दी गई थी मार्च 1206 जिसने खुरासान में घुरिद प्रभाव को समाप्त कर दिया और शाह मुहम्मद द्वितीय द्वारा एक दशक के भीतर सभी को एक साथ बुझा दिया गया, जिसने 1215 तक घुरिडों को उखाड़ फेंका।कुतुब उद दीन ऐबक ।

मूलसंपादन करना

19वीं शताब्दी में माउंटस्टुअर्ट एल्फिन्स्टन जैसे कुछ यूरोपीय विद्वानों ने इस विचार का समर्थन किया कि घुरिद राजवंश आज के पश्तून लोगों से संबंधित था 

लेकिन यह आम तौर पर आधुनिक विद्वानों द्वारा खारिज कर दिया गया है और जैसा कि मॉर्गनस्टिएरने ने समझाया है इस्लाम का विश्वकोश , "विभिन्न कारणों से बहुत ही असंभव" है। 

 कुछ विद्वानों का कहना है कि राजवंश ताजिक मूल का था। 

 "न ही हम सामान्य रूप से सूरी के जातीय स्टॉक और विशेष रूप से संसबनी के बारे में कुछ भी जानते हैं; हम केवल यह मान सकते हैं कि वे पूर्वी ईरानी ताजिक थे"।

 बोसवर्थ आगे बताते हैं कि घुरिद परिवार का वास्तविक नाम, अल-ए संसाब (फारसी: संसाबनी ), मूल रूप से मध्य फ़ारसी नाम विस्नास्प का अरबी उच्चारण है। 

भारतीय संविधान रुप रेखा और विकास

भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत

भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है। भारत के संविधान का निर्माण 10 देशो के संविधान से प्रमुख तथ्य लेकर बनाया गया है। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।भारत के संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, संविधान की सर्वोच्चता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निर्वाचित राष्ट्रपति एवं उस पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात, न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  • ब्रिटेन: संसदात्मक शासन-प्रणाली, एकल नागरिकता एवं विधि निर्माण प्रक्रिया, विधि का शासन, मंत्रिमंडल प्रणाली, परमाधिकार लेख, संसदीय विशेषाधिकार और द्विसदनवाद
  • आयरलैंड: नीति निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति के निर्वाचक-मंडल की व्यवस्था, राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज-सेवा इत्यादि के क्षेत्र में ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों का मनोनयन
  • ऑस्ट्रेलिया: प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची का प्रावधान, केंद्र एवं राज्य के बीच संबंध तथा शक्तियों का विभाजन, व्यापार-वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
  • जर्मनी: आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां, आपातकाल के समय मूल अधिकारों का स्थगन
  • कनाडा: संघात्‍मक विशेषताएं, अवशिष्‍ट शक्तियां केंद्र के पास, केंद्र द्वारा राज्य के राज्यपालों की नियुक्ति और उच्चतम न्यायालय का परामर्श न्याय निर्णयन
  • दक्षिण अफ्रीका: संविधान संशोधन की प्रक्रिया प्रावधान, राज्यसभा में सदस्यों का निर्वाचन
  • सोवियत संघ (पूर्व): मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान, मूल कर्तव्यों और प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) का आदर्श
  • जापान: विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
  • फ्रांस: गणतंत्रात्मक और प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता, बंधुता के आदर्श
  • भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव ‘भारतीय शासन अधिनियम: 1935 का है. भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो 1935 ई० के अधिनियम से या तो शब्दश: लिए गए हैं या फिर उनमें बहुत थोड़ा परिवर्तन किया गया है।

    भारतीय संविधान के हिसाब किताब

    भारतीय संविधान के विदेशी स्रोत

    भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है। भारत के संविधान का निर्माण 10 देशो के संविधान से प्रमुख तथ्य लेकर बनाया गया है। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है।भारत के संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, संविधान की सर्वोच्चता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निर्वाचित राष्ट्रपति एवं उस पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात, न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  • ब्रिटेन: संसदात्मक शासन-प्रणाली, एकल नागरिकता एवं विधि निर्माण प्रक्रिया, विधि का शासन, मंत्रिमंडल प्रणाली, परमाधिकार लेख, संसदीय विशेषाधिकार और द्विसदनवाद
  • आयरलैंड: नीति निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति के निर्वाचक-मंडल की व्यवस्था, राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज-सेवा इत्यादि के क्षेत्र में ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों का मनोनयन
  • ऑस्ट्रेलिया: प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची का प्रावधान, केंद्र एवं राज्य के बीच संबंध तथा शक्तियों का विभाजन, व्यापार-वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
  • जर्मनी: आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां, आपातकाल के समय मूल अधिकारों का स्थगन
  • कनाडा: संघात्‍मक विशेषताएं, अवशिष्‍ट शक्तियां केंद्र के पास, केंद्र द्वारा राज्य के राज्यपालों की नियुक्ति और उच्चतम न्यायालय का परामर्श न्याय निर्णयन
  • दक्षिण अफ्रीका: संविधान संशोधन की प्रक्रिया प्रावधान, राज्यसभा में सदस्यों का निर्वाचन
  • सोवियत संघ (पूर्व): मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान, मूल कर्तव्यों और प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) का आदर्श
  • जापान: विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।
  • फ्रांस: गणतंत्रात्मक और प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता, बंधुता के आदर्श
  • भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव ‘भारतीय शासन अधिनियम: 1935 का है. भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो 1935 ई० के अधिनियम से या तो शब्दश: लिए गए हैं या फिर उनमें बहुत थोड़ा परिवर्तन किया गया है।

    भारत शासन अधिनियम, 1935- संगीय तंत्र, राज्यपाल का कार्यकाल, न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन उपबंध व प्रसानिक विवरण

    सेक्स के सपने दूर करने के नुक्शे

    सेक्स के सपने

    युवावस्था की सामान्य प्रॉब्लम है कि उन्हें उम्र के साथ सेक्स के सपने परेशान करते हैं। यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि नेचुरल प्रोसेस है आपके बड़े होने की। लेकिन अति हर बात की बुरी होती है। इस स्वप्न दोष भी कहते हैं। अगर आपका ऐसे सपनों पर कोई कंट्रोल नहीं है तो पेश है कुछ आसान से घरेलू उपचार : 

    आंवले का मुरब्बा रोज खाएं ऊपर से गाजर का रस पिएं। 

    तुलसी की जड़ के टुकड़े को पीसकर पानी के साथ पीना लाभकारी होता है। अगर जड़ नहीं उपलब्ध हो तो तो बीज 2 चम्मच शाम के समय लें। 

    लहसुन की दो कली कुचल कर निगल जाएं। थोड़ी देर बाद गाजर का रस पिएं। 

    मुलहठी का चूर्ण आधा चम्मच और आक की छाल का चूर्ण एक चम्मच दूध के साथ लें। 

    काली तुलसी के पत्ते 10-12 रात में जल के साथ लें। 

    रात को एक लीटर पानी में त्रिफला चूर्ण भिगा दें सुबह मथकर महीन कपड़े से छानकर पी जाएँ। 

    अदरक रस 2 चम्मच, प्याज रस 3 चम्मच, शहद 2 चम्मच, गाय का घी 2 चम्मच, सबको मिलाकर सेवन करने से स्वप्नदोष तो ठीक होगा ही साथ मर्दाना ताकत भी बढ़ती है। 

    नीम की पत्तियां नित्य चबाकर खाते रहने से स्वप्नदोष जड़ से गायब हो जाएगा। 

    पेट में कब्ज हो तो भी जवानी के सपने ज्यादा आते हैं और ठंडी रात में बहुत परेशान करते हैं 

    याददाश्त तेज कैसे करें

    याददाश्त कमजोर होना (Memory weakness)

    परिचय: इस रोग के होने के कारण रोगी व्यक्ति की याददाश्त बहुत कमजोर हो जाती है। वह किसी भी चीजों को पहचान नहीं पाता है अगर पहचानता भी है तो कुछ समय सोचने के बाद।

    याददाश्त कमजोर होने का लक्षण : जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसके सिर में हल्का दर्द रहता है, शोर बर्दाश्त नहीं होता है, एकाग्रता नहीं रख पाता है तथा वह किसी भी बात तथा किसी भी चीजों को याद नहीं रख पाता है।

    याददास्त कमजोर होने का कारण :-

    यह रोग दिमाग (मस्तिष्क) में रक्तसंचार की कमी हो जाने के कारण होता है।
    बहुत अधिक समस्याओं में उलझे रहने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
    सिर पर किसी दुर्घटना के कारण तेज चोट लगने तथा किसी दिमागी बीमारी के कारण भी यह रोग हो सकता है।
    अत्यधिक मानसिक बीमारी होने के कारण भी यह रोग हो सकता है।

    याददाश्त कमजोर होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

    इस रोग से पीड़ित रोगी को कॉफी, चाय, मैदा, कोला, शराब तथा मैदा और मैदा से बनी चीजों का सेवन बंद कर देना चाहिए।
    इस रोग से पीड़ित रोगी को संतुलित आहार जिसमें ताजी सब्जियां, फल, अंकुरित अन्न आदि हो उसका सेवन करना चाहिए जिसके फलस्वरूप कुछ ही दिनों में यह रोग ठीक हो जाता है।
    प्रतिदिन गाय के दूध में तिल को डालकर पीने से कुछ ही दिनों में यह रोग ठीक हो जाता है।
    अंगूर तथा सेब का अधिक सेवन करने से रोगी को बहुत लाभ मिलता है।
    पांच-छ: अखरोट तथा दो अंजीर प्रतिदिन खाने से याददाश्त से सम्बन्धित रोग दूर हो सकते हैं।
    रात के समय में बादाम या मुनक्का को भिगोकर सुबह के समय में चबाकर खाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
    बादाम, तुलसी तथा काली मिर्च को पीसकर तथा इन्हें आपस में मिलाकर फिर इसमें शहद मिलाकर प्रतिदिन खाने से यह रोग ठीक हो जाता है।
    तुलसी का रस शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से याददाश्त मजबूत होती है।
    बादाम का तेल नाक में प्रतिदिन डालने से याददाश्त मजबूत होती है।
    इस रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन जलनेति क्रिया करनी चाहिए तथा इसके बाद टबस्नान, कटिस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद मेहनस्नान करने से यह रोग ठीक हो जाता है।
    इस रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार की यौगिक क्रियाएं तथा योगासन हैं जिसे प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। ये आसन तथा यौगिक क्रियाएं इस प्रकार हैं- भस्त्रिका प्राणायाम,  नाड़ीशोधन, पश्चिमोत्तानासन, वज्रासन, शवासन, योगनिद्रा, ध्यान का अभ्यास तथा ज्ञानमुद्रा करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है। 



    पेट की चर्बी कम कैसे होगा, बिल्कुल होगा, खानपान से

    पेट कम करने के लिए आयुर्वेद आहार जो बिल्कुल ही जरूरी है 

    गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं। इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं।

    मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियाँ पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं। हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है।

    भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।

    आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।

    भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक-सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।

    सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।

    पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।

    सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रातः 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।

    भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन, सर्वागासऩ, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पाँच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पाँच बार करें तो पाँच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे। इन आसनों की विधि वेबदुनिया के योग चैनल से प्राप्त की जा सकती है।

    भोजन में गेहूँ के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएँ। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।

    प्रातः एक गिलास ठण्डे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है। दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी। 


     

    एकीकृत भारत:– गौरवशाली परंपरा, पूरा वर्ल्ड भारत पार्ट 1

     एकीकृत भारत:–गौरवशाली परंपरा

    इस कॉलम में शामिल किया है भारत का प्राचीनतम सभ्यता और संस्कृति

    इस भारत को जो आज हम देखते हैं, इसे विश्व विख्यात जाना जाता था,

    आज के भारत को हम 1971 के बाद का भारत देखते हैं वह ईसवी सन् 2071 ,

    मै ज्ञात स्रोतों से आप को बता रहा हूं की पूरा वर्ल्ड भारत ही था, सभी सनातन धर्म संस्कृति के ही लोग थे,

    बाद मे जैसे जैसे जनसंख्या वृद्धि होती गई, समाज सुधार आते गए, धर्म बनता गया और आज सभी एक दूसरे के खून के प्यासे हैं कि मैं सबसे बड़ा तो मैं सबसे बड़ा,

    मेरे हिसाब से बड़ा कहा, अगर सनातन धर्म संस्कृति से पहले आय होते तो बात मानी जाती,

    लेकिन आप आते हैं ईस्वी के पुर्व, या ईस्वी सन के बाद,

    जबकि हमारी संस्कृति और सभ्यता कहती है कि इस पृथ्वी mins Earth 🌍 पर मानवीय का उद्भव सिंधु घाटी सभ्यता में हुई और यह भारत ही था,

    सिंधु नदी के किनारे मानव जीवन को शुरुआत हुई थी,

    मानव के पहले मानव का नाम मनु और औरत का नाम सतरूपा था,

    मनु से मानव कहलाए,

    Note:–

    <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6420740347582206"

         crossorigin="anonymous"></script>


    एकीकृत भारत:–गौरवशाली परंपरा, मलेशिया


    मलेशिया :
    वर्तमान के जो देश चार ( 4) देश मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और कंबोडिया प्राचीन भारत के मलय प्रायद्वीप के जनपद हुआ करते थे।
     मलय प्रायद्वीप का दक्षिणी भाग मलेशिया देश के नाम से जाना जाता है। 
    इसके उत्तर में थाईलैंड, पूर्व में चीन का सागर तथा दक्षिण और पश्चिम में मलक्का का जलडमरूमध्य है। उत्तर मलेशिया में बुजांग घाटी तथा मरबाक के समुद्री किनारे के पास पुराने समय के अनेक हिन्दू तथा बौद्ध मंदिर आज भी हैं। 
    मलेशिया अंग्रेजों की गुलामी से 1957 में मुक्त हुआ। वहां पहाड़ी पर बटुकेश्वर का मंदिर है जिसे बातू गुफा मंदिर कहते हैं। 
    पहाड़ी पर कुछ प्राचीन गुफाएं भी हैं। पहाड़ी के पास स्थित एक बड़े मंदिर में हनुमानजी की भी एक भीमकाय मूर्ति लगी है। 
    भारत में सनातन धर्म संस्कृति के लोग थे,
    भारत उप महाद्वीप में शामिल यह सभी लोग सनातन धर्म संस्कृति यानी हिन्दू थे, लेकिन जैसे जैसे अन्य समाज या धर्म में परिवर्तन होते गए देश के टुकड़े टुकड़े होते गए,
    मलेशिया वर्तमान में एक मुस्लिम राष्ट्र है। 

    एकीकृत भारत :– श्री लंका

    श्रीलंका :
    'श्रीलंका' भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिण में हिन्द महासागर में स्थित एक बड़ा द्वीप है। यह भारत के चोल और पांडय, यादव जनपद के अंतर्गत आता था। 
    5000 हजार वर्ष पूर्व तक श्रीलंका की संपूर्ण आबादी वैदिक धर्म का पालन करती थी।
     सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र को श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा और वहां के सिंहल राजा ने बौद्ध धर्म अपनाकर इसे राजधर्म घोषित कर दिया। 
    बौद्ध और हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार यहां पर प्राचीनकाल में शैव, यक्ष और नागवंशियों का राज था। 
    श्रीलंका के प्राचीन इतिहास के बारे में जानने के लिए सबसे महत्वपूर्ण लिखित स्रोत सुप्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ 'महावंस' है।
     
     
    श्रीलंका के आदिम निवासी और दक्षिण भारत के आदिमानव एक ही थे। 
    भारत के एक राज्य तमिलनाडु और श्री लंका के तमिल एक ही जाति और गोत्र के लोग हैं आज भी अनेकों लोगो के शादी विवाह वाहा श्री लंका में होता रहता है,एक खुदाई से पता चला है कि श्रीलंका के शुरुआती मानव का संबंध उत्तर भारत के लोगों से था। 
    भाषिक विश्लेषणों से पता चलता है कि सिंहली भाषा गुजराती और सिन्धी भाषा से जुड़ी है। 
    ऐसी मान्यता है कि श्रीलंका को भगवान शिव ने बसाया था। 
    बाद में उन्होंने इसे कुबेर को दे दिया था। 
    कुबेर से रावण ने इसे अपने अधिकार में ले लिया था। ईसा पूर्व 9 लाख बर्ष पहले भगवान राम ने रावण का संहार कर श्रीलंका को भारतवर्ष का एक जनपद बना दिया था। 
     
    श्रीलंका पर पहले पुर्तगालियों, फिर डच लोगों ने अधिकार कर शासन किया 
    1800 ईस्वी के प्रारंभ में अंग्रेजों ने इस पर आधिपत्य जमाना शुरू किया और 1818 में इसे अपने पूर्ण अधिकार में ले लिया। अंग्रेज काल में अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत तमिल और सिंहलियों के बीच सांप्रदायिक एकता को बिगाड़ा। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 4 फरवरी 1948 को श्रीलंका को ब्रिटिश भारत से स्वतंत्र घोषित किया गया,

    एकीकृत भारत :–म्यांमार


    म्यांमार :
    म्यांमार कभी ब्रह्मदेश हुआ करता था। 
    इसे बर्मा भी कहते हैं, 
    जो कि ब्रह्मा का अपभ्रंश है।
     म्यांमार प्राचीनकाल से ही भारत का ही एक राज्य रहा है। 
    अशोक के काल में म्यांमार बौद्ध धर्म और संस्कृति का पूर्वी केंद्र बन गया था।
     यहां के बहुसंख्यक बौद्ध मतावलंबी ही हैं।
     मुस्लिम काल में म्यांमार शेष भारत से कटा रहा और तब तक यहां की राजवंश ने यहां पर  अपनी स्वतंत्र राजसत्ताएं कायम कर ली,
     1886 ई. में पूरा देश ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के अंतर्गत आ गया था
     किंतु ब्रिटिशों ने 1935 ई. के भारतीय शासन विधान के अंतर्गत म्यांमार को भारत से अलग कर दिया।
     
     
    1935 व 1937 में ईसाई ताकतों को लगा कि उन्हें कभी भी भारत व एशिया से जाना पड़ सकता है।
     समुद्र में अपना नौसैनिक बेड़ा बैठाने, उसके समर्थक राज्य स्थापित करने तथा स्वतंत्रता संग्राम से उन भू-भागों व समाजों को अलग करने हेतु सन् 1935 में श्रीलंका और 
     सन् 1937 में म्यांमार को अलग राजनीतिक देश की मान्यता दे दी।

    सनातन

    फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!! "ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इस...