तिब्बत को त्रिविष्टप कहा जाता था जहां रिशिका (Rishika) और तुशारा (East Tushara) नामक राज्य थे।
त्रिविष्टप अर्थात तिब्बत या देवलोक से वैवस्वत मनु के नेतृत्व में प्रथम पीढ़ी के मानवों (देवों) का मेरु प्रदेश में अवतरण हुआ।
तिब्बत में पहले हिन्दू फिर बाद में बौद्ध धर्म प्रचारित हुआ और यह बौद्धों का प्रमुख केंद्र बन गया। शाक्यवंशियों का शासनकाल 1207 ईस्वी में प्रांरभ हुआ। बाद में चीन के राजा का शासन रहा।
19वीं शताब्दी तक तिब्बत ने अपनी स्वतंत्र सत्ता बनाए रखी। इस बीच लद्दाख पर कश्मीर के शासक ने तथा सिक्किम पर अंग्रेंजों ने आधिपत्य जमा लिया।
चीन और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1907 के लगभग बैठक हुई और इसे दो भागों में विभाजित कर दिया। पूर्वी भाग चीन के पास और दक्षिणी भाग लामा के पास रहा।
1951 की संधि के अनुसार यह साम्यवादी चीन के प्रशासन में एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया। इस दौरान स्वतंत्र भारत के नेता,
भारतीय प्रधानमन्त ने जवाहर लाल नेहरू ने अपनी नोबल पुरस्कार के चक्कर मे तिब्बत को चीन का हिस्सा मानकर बड़ी भूल की थी। हालाकि नेहरू को नोबेल पुरस्कार नही मिला,
चीन के स्वतंत्र घोषित करना विश्व को धोखा देना था,
चीन की बिस्तारवादी नीति ने तिब्बत को भी हड़प लिया और बौध धर्म के धर्म गुरु दलाई लामा को जेल में डाल दिया, इससे पूरे विश्व में बौध धर्म अनुयायी लोग और देशों में खलबली मच गई, भारी दबाव में चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने दलाई लामा को देश छोड़ने पर बिवस कर दिया, दलाई लामा भारत आ गए, उधर चीन ने तिब्बत हड़प लिया,
दलाई लामा आज भारत में निर्वासित जीवन जीने को मजबूर है
आज विश्व में 56 देश बौध धर्म अनुयाई हैं, हालाकि आपको जान कर आश्चर्य होगा कि बौध धर्म का उदय बिहार के बोध गया में हुवा था,
बिहार के लिच्छवी गणराज के राजकुमार गौतम बुध ने इस संप्रदाय की शुरुआत की थी,
गौतम बुध सम्राट अशोक के समकालीन थे,
आप जान कर आश्चर्य चकित हो जायेंगे की सम्राट अशोक के समय भारत में पुरा अरब देश, ईरान, इराक, अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान, भारत का दिल्ली, पटना, बंगाल,ओडिशा, बांग्लादेश, मध्यप्रदेश, म्यांमार,इंडोनेशिया, श्री लंका, भूटान, तिब्बत, चीन के हिस्से, तुर्की, ताइवान, हांगकांग, चिली तक के राज्य शामिल थे,