ये बात बताना भी प्रासंगिक है कि सन 1700 में यह जिला भारत का सबसे समृद्ध जिला था। एक अनुमान के अनुसार तत्कालीन भारत की 20% जीडीपी और पूरे विश्व की 5% अर्थव्यवस्था का उत्पादन आज के मुर्शिदाबाद में होता था। यहां का रेशम पूरे विश्व में निर्यात होता था..
उस जमाने के सबसे बड़े व्यापारी जगत सेठ इसी जिले के थे और मुर्शीद कुली खान के साथ मिलकर उन्होंने मुर्शिदाबाद को शहर और बाद में बंगाल की राजधानी (ढाका से बदलकर) बनने योगदान दिया. जैसे अमेरिका में कभी रोथचाइल्ड परिवार था, वैसे ही जगत सेठ के पास अकूत धन और विस्तृत व्यापार था।
मुर्शिदाबाद औरंगजेब की सबसे दुधारू गाय थी. मुर्शिदकुली औरंग को सबसे अधिक कर वसूल कर देते थे। 1~2 करोड़ प्रतिवर्ष...
और आज?
मुर्शिदाबाद में मोम्बीज की जनसंख्या बहुसंख्य (70%) हैं। नतीजा भारत के सबसे समृद्ध जिले से आज गरीब जिले में बदल चुका हैं। तुलनात्मक रूप से भारत की औसत पर कैपिटा आय 205,000/व्यक्ति/वर्ष है तो मुर्शिदाबाद में यह घटकर 149,000 / व्यक्ति/वर्ष है.
आज मुर्शिदाबाद उत्तर बंगाल और झारखंड के बीच "चिकन नेक" जैसा हैं।
विडंबना है कि जो कभी शक्तिपीठ था, आज वहां से हिंदुओं का पलायन हो रहा है.
यह शक्तिपीठ भी कब तक सुरक्षित है, समय बतायेगा...
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