खशरा

खसरा

परिचय-

खसरा रोग का संक्रमण बचपन में ही भंयकर रूप ले सकता है। जिन रोगियों को खसरा शुरू में ही हो जाता है उनके शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक-क्षमता बहुत कम हो जाती है।

कारण-

          जब इस रोग से पीड़ित व्यक्ति खांसना और छींकता है तो इस रोग के वायरस दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उन्हें इस रोग से पीड़ित बना देते हैं। इस रोग के लक्षण उभरने के बाद लगभग एक हफ्ते तक संक्रमण बना रहता है।

लक्षण-

          खसरे के वायरस शरीर में प्रवेश करने के 7 से 14 दिनों के अन्दर इसके लक्षण नज़र आने लगते है। इस रोग के शुरुआती लक्षणों में बुखार, नाक बहना और आंखों में जलन महसूस होती है। इसके अलावा रोगी को खांसी और गले में खराश भी हो सकती है।

          खसरा रोग की शुरुआत दानों के साथ होती है। इस रोग में रोगी के मुंह के अन्दर लाल, गुलाबी रंग के दाने (जिनके अन्दर मवाद भरी होती है) उभरने लगते हैं। यह दाने सिर व गर्दन पर भी कुछ दिनों के बाद उभरने लगते हैं जो बाद में पूरे शरीर पर हो जाते हैं।

चिकित्सा-

          जब किसी व्यक्ति को खसरे का रोग हो जाता है तो उसे बिस्तर पर लिटा देना चाहिए और उसे पेय (पानी, चाय, रस) पदार्थों का सेवन कराना चाहिए। इस रोग की ज्यादा गम्भीर स्थिति में चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए

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