गैस्ट्रोएंट्रोंइटिस
परिचय-
जब बड़ी आंत और आमाशय में कोई संक्रमण होता है तो उसे गैस्ट्रोएंट्राइटिस कहते हैं। इस संक्रमण के कारण रोगी व्यक्ति का पेट खराब हो जाता है।कारण-
गैस्ट्रोएंट्राइटिस रोग वायरस के कारण होता है। ये वायरस आसानी से किसी भी व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर छोटी-मोटी महामारी का रूप ले लेते हैं।
यह रोग बैक्टीरिया आदि सूक्ष्मजीवियों द्वारा संक्रमित किए हुए भोजन या पेय पदार्थों से भी हो सकता है। इससे फूड पॉयजनिंग हो जाती है। ऐसी स्थिति अक्सर भोजन पकाते समय साफ-सफाई का पूरी तरह से ध्यान न रखने के कारण पैदा हो जाती है।
एंटीबायोटिक दवाईयां, आहार में तेजी से बदलाव या किसी बड़े गंभीर रोग के होने पर भी गैस्ट्रोएंट्राइटिस का रोग हो सकता है।
लक्षण-
गैस्ट्रोएंट्राइटिस रोग में रोगी को जी मिचलाने तथा दस्त लगने की शिकायत हो जाती है। कभी-कभी स्थिति कुछ ज्यादा गंभीर भी हो जाती है जिसमें रोगी को पेट दर्द, पेट में ऐंठन की शिकायत, उल्टी, पतले दस्त और बुखार तथा कमजोरी जैसी शिकायत भी हो सकती है।
चिकित्सा-
इस रोग में रोगी को अपने शरीर को पूरा आराम देना चाहिए। उसे नमक-चीनी या ओ.आर.एस का घोल पिलाते रहना चाहिए। रोगी को फलों का रस पिलाना चाहिए और दूध का सेवन नहीं कराना चाहिए। इस रोग का संक्रमण बड़ी आसानी से एक से दूसरे व्यक्ति के शरीर में फैल सकता है। इस रोग में साफ-सफाई का खासतौर पर ध्यान रखना होगा,
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