रेलवे में पेंट्रीकार वालो की लुट

रेल गाड़ी में पैंट्री कार वालों की लूट का नया तरीका! (सभी रेल यात्री ध्यान दें)

दोस्तों, आज कल ट्रेनों में पैंट्री कार वालों ने यात्रियों को लूटने का एक नया और बेहद चालाकी भरा तरीका निकाल लिया है। पहले समझिए कि यह पूरा खेल क्या है—

IRCTC के नियम के मुताबिक साधारण चाय (Ready Tea) या टी-बैग वाली चाय की आधिकारिक दर आज भी **₹10** ही है। लेकिन पैंट्री वालों ने ₹10 वाली साधारण चाय को मेन्यू से गायब ही कर दिया है। अब ये नया धंधा लेकर आए हैं—'प्रीमिक्स चाय और कॉफी'। चाय ₹20 और कॉफी ₹25 वसूल रहे हैं।

पिछले दिनों मैं 22308 बीकानेर हावड़ा एक्सप्रेस में सफर कर रहा था। सुबह-सुबह "चाय-चाय" की आवाज सुन आँख खुली। मैंने कहा—"एक चाय दो।"

वेंडर ने पूछा—"कौन सी? मसाला या इलायची?"

मैंने मसाला कह दिया।

उसने चाय दी और ₹20 लेकर चलता बना।

अगली बार वह फिर आया,

तो मैंने पूछ ही लिया—"भाई क्या बात है, जितने भी चाय वाले घूम रहे हैं सभी प्रीमिक्स ही बेच रहे हैं, ₹10 वाली रेडी चाय नहीं आएगी क्या?"

उसका जवाब सुनकर मेरा सर घूम गया!

बोला—"IRCTC ने बंद कर दी, अब यही बिकती है।"

मैंने वहीं उसका झूठ पकड़ा और

पैंतरा बदलते हुए कहा—"मैं खुद IRCTC से जुड़ा हूँ, तुम्हारे मैनेजर को बुलाओ।"

यह सुनते ही वह घबरा गया

और बहानों की झड़ी लगा दी—"दूध नहीं है... चूल्हा खाली नहीं है... चूल्हा खराब है।"

मैंने कड़े लहजे में कहा—"तुम्हारा दिमाग खराब है! एलएचबी (LHB) पैंट्री में अब खाना बनाने का सिस्टम ही नहीं होता, सिर्फ वाटर बॉयलर होता है, तो चूल्हा कहाँ से खराब हो गया? पहले ₹10 वाली चाय लाओ और मैनेजर को भेजो, नहीं तो अभी शिकायत मेल करता हूँ।"

वह चला गया। मेरे सामने बैठे एक परिवार ने बताया कि वे 6 लोग हैं और सुबह से सिर्फ दो बार चाय पीने में उनके ₹200 खर्च हो गए! सोचिए, आम जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।

थोड़ी देर में वही वेंडर आया और बोला—"लीजिए ₹10 वाली चाय।" उसने तुरंत एक 'एव्रीडे' का दूध पाउच फाड़ा, गर्म पानी में मिलाया, टी-बैग डाला और दे दिया। यानी दूध भी था और सामान भी, बस छिपाकर रखा था! मैंने पूछा—"मैनेजर कहाँ है?" तो बोला—"अभी सोकर नहीं उठे हैं।"

मैंने उसे साफ कहा—"तुम्हारा मैनेजर सोया है और तुम पैसेंजर्स को सुबह 5 बजे से चिल्लाकर जगा रहे हो? जबकि IRCTC का सख्त नियम है कि रात 11 से सुबह 6 बजे तक कोई वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेचेगा।" वह चुपचाप खिसक गया।

करीब सवा छह बजे पैंट्री कार के मैनेजर साहब खुद आए। चेहरे पर हवाईयाँ उड़ रही थीं।

बनावटी मुस्कान के साथ बोले—"सर नमस्कार, मैं पैंट्री मैनेजर हूँ। वेंडर छोटा लड़का है, गलती हो गई।"

मैंने उन्हें सीधे शब्दों में आइना दिखाया—"गलती वेंडर की नहीं, तुम्हारी है। तुम लोग मिलकर पूरे सिस्टम को दीमक की तरह चाट रहे हो। एक तो सुबह 5 बजे चिल्लाकर नियम तोड़ रहे हो, 

ऊपर से ₹10 वाली चाय छुपाकर ₹20 का प्रीमिक्स जबरन बेच रहे हो (Forced Selling)। स्टॉक कम होने का बहाना मत बनाना, क्योंकि मेरे टोकते ही तुरंत पाउच और टी-बैग बाहर आ गए।"

मैनेजर पूरी तरह सकपका गया और हाथ जोड़कर बोला—"सर प्लीज शिकायत मत कीजिए, आइंदा से पूरी ट्रेन में सबको ₹10 वाली चाय ही मिलेगी और टाइमिंग का पूरा ध्यान रखेंगे।"

मैंने कहा—"शिकायत तो मैं फिर भी करूंगा ताकि तुम लोगों को सबक मिले, लेकिन फिलहाल इस पूरे कोच में जो भी चाय मांगेगा, उसे ₹10 वाली ऑफिशियल चाय ही दोगे। 

अगर दोबारा कोई ₹20 प्रीमिक्स चिल्लाता मिला, तो सीधा RailMadad' ऐप पर तुम्हारी पैंट्री का लाइसेंस सस्पेंड करने की कंप्लेंट डालूंगा।"

मैनेजर 'जी सर, बिल्कुल सर' करता हुआ वेंडर को लेकर दबे पाँव भाग खड़ा हुआ।

साथियों, यह लड़ाई सिर्फ ₹10 की नहीं है, यह हमारे हक की है। जब भी ट्रेन में सफर करें, सजग रहें:

1. सुबह 6 बजे से पहले और रात 11 बजे के बाद वेंडर कोच में चिल्लाकर सामान नहीं बेच सकते।

2. ₹10 वाली साधारण चाय मांगना आपका हक है।

3. कोई वेंडर मनमानी करे तो बिल मांगिए। नियम है—"No Bill, No Earnings"।

4. वेंडर न माने तो तुरंत RailMadad' ऐप या टोल-फ्री नंबर 139 पर शिकायत दर्ज करें।

एक बात और ध्यान रखें कि आईआरसीटीसी के खाने की थाली की रेट 80 रुपये ही है अगली बार जब आप ट्रेन में खाना खरीदे तो 80 वाली थाली की ही मांग करें अगर नहीं देवें तो तुरन्त शिकायत करें. हाथ जोड़कर 80 वाली थाली देकर जाएगा

जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, ये पैंट्री वाले ऐसे ही आम यात्रियों को लूटते रहेंगे। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर रेल यात्री अपने अधिकारों को जान सके!

आपकी क्या राय है कॉमेंट में बताए....Read News

अम्बेडकर फर्जी दलित

‼️बिग एक्सपोज
भारत में एक सबसे बड़ा झूठा दावा किया जाता है कि अंबेडकर ने दलितों और आदिवासियों को अधिकार दिलाया‼️
पर वास्तविकता ये है कि अंबेडकर दलितों को वोट देने के पक्ष में थे लेकिन आदिवासियों के बारे में उनका विचार यह था

Ambedkar clearly states on Aboriginal Tribes (आदिवासी/जनजाति, आज के Scheduled Tribes):

"The Aboriginal Tribes have not as yet developed any political sense to make the best use of their political opportunities and they may easily become mere instruments in the hands either of a majority or a minority and thereby disturb the balance without doing any good to themselves."

उन्होंने इनको वोट का अधिकार देने या सामान्य राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने से भी इनकार कर दिया।
उनके हिसाब से दलित समझदार है लेकिन आदिवासी नहीं अगर उन्हें कोर्ट का अधिकार मिला तो वह इसका दुरुपयोग कर सकते है
आज उन्हें फालतू में झूठ बोलकर आदिवासियों का भगवान बनाया जा रहा है 
।आज Aboriginal Tribes (Scheduled Tribes) में कौन-कौन सी मुख्य जातियां/समुदाय आते है
भारत में 700+ notified Scheduled Tribes हैं (कुल आबादी ~8.6%)। राज्य-wise लिस्ट अलग-अलग है, लेकिन प्रमुख: 

भिल (Bhil) - राजस्थान, गुजरात, MP, MH 

गोंड (Gond) - MP, MH, छत्तीसगढ़, आंध्र 

संthal (Santhal) - झारखंड, ओडिशा, बिहार, WB 

मुंडा, ओरांव, हो - झारखंड क्षेत्र 

मीणा (Meena) - राजस्थान 

पूर्वोत्तर: नागा, मिजो, खासी, बोरो आदि। 

अन्य: बैगा, सहारिया, जारावा (अंडमान) आदि।

Ambedkar Dalits के लिए लड़ सकते थे क्योंकि वे "सेंसिबल" मानते थे, लेकिन आदिवासियों को "not developed any political sense" कहकर अलग रखना चाहते थे। 
आज के आदिवासियों से प्रश्न है कि क्या वह दलितों से कम परिपक्व थे जो उन्हें उस समय वोट के अधिकार की जरूरतनहीं थी
अंबेडकर कैसे तुम्हारे मसीहा हुए
 मसीहा थे या एक शत्रु?
(दोनों स्क्रीनशॉट्स पूरी तरह authentic हैं — Writings & Speeches Vol.1 से।)

CSP वालो की लुट

मेरे पड़ोस की एक अम्मा मुझे हर बार बोलती कि हमारे बैंक पैसे काट लेती है! वृद्धा पेंशन कम मिलती है! आज अम्मा की पेंशन निकलवाने मैं एक SBI के CSP केंद्र पर गया !

अम्मा को 500 रुपए निकलवाने थे अंगूठा लगवाकर उसने पैसे दे दिए ! लेकिन पासबुक प्रिंट नहीं की मैने कहा भाई इसे प्रिंट कर अम्मा के पैसे हर बार ज्यादा कट रहे हैं मैं भी देखूं बैंक किस बात का चार्ज ले रही है!

वो बहाने बनाने लगा मैने मोबाइल निकाला और वीडियो बनाना शुरू कर दिया ! बहस होने लगी फिर उसने प्रिंट किया तो उसमें 1000 रुपए की निकासी प्रिंट हुई ! मैंने पूंछा कब से कर रहा है ऐसा ?

वहां मौजूद और भी महिलाएं कहने लगीं हमसे भी बोल देता था कि बैंक ने अपना टैक्स काट लिया तो कभी बोलता इस बार कम आए हैं! हंगामा बढ़ता देख उसने शटर गिरा दिया !

वहां भीड़ इकठ्ठा हो गई मैने कहा सबके पैसे वापिस कर वरना पुलिस बुलाऊंगा और वीडियो ट्वीट करूंगा ! ट्विटर का नाम सुनते ही वो हाथ जोड़ने लगा ! फिर उसने सबके पैसे वापिस किए !

भविष्य में ऐसा न करने की कसम खाई! CSP सेंटर वाले गांव की भोली औरतों को खूब लूट रहे हैं! इसलिए अपनी दादी अम्माओ के साथ एक जागरूक युवा जरूर जाना चाहिए..? काफी मिन्नतों के बाद मैने वीडियो डिलीट कर दिए !

मणिपुर में CRPF को खुली छूट मिली news

मणिपुर में CRPF का सख्त संदेश 🚨

मणिपुर में तैनात CRPF जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक जी. पी. सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा—

"यदि उपद्रवियों और हथियारबंद तत्वों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं करनी है, तो सुरक्षा बलों को हथियार और गोला-बारूद देने का क्या अर्थ है?"

उन्होंने जवानों को यह भरोसा भी दिलाया कि ड्यूटी के दौरान कानून के दायरे में की गई हर वैध कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी नेतृत्व उठाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब मणिपुर में शांति बहाली और हिंसक गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। इसे जवानों का मनोबल बढ़ाने और कानून तोड़ने वालों को स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

🇮🇳 राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है।

पश्चिम बंगाल का जगन्नाथ मंदिर

दीघा का जगन्नाथ मंदिर अब होगा श्रीश्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 

- ममता के शासनकाल में इसे जगन्नाथ धाम का नाम देकर उत्पन्न किया था विवाद

- भारतीय संस्कृति में देश में सिर्फ चार ही धाम, उड़ीसा समेत देशभर के लोगों में खुशी का माहौल 

अशोक झा /सिलीगुड़ी: मिदनापुर जिले के दीघा में स्थित पश्चिम बंगाल के जगन्नाथ मंदिर को अब हिंदू धर्म के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक धाम नहीं माना जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि अब इस मंदिर परिसर को 'श्रीश्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' के नाम से जाना जाएगा। शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पुरी से भाजपा सांसद संबित पात्रा, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का पत्र लेकर एक प्रतिनिधि के तौर पर आए थे।सीएम ने बताया कि कैबिनेट ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है और एचआईडीसीओ टेंडर तथा सरकारी फंड भी मंजूर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहां ठाकुर की पूजा होती है, उस ढांचे को मंदिर के रूप में जाना जाएगा। इसे 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' के नाम से जाना जाएगा।टेंडर में भी नहीं था धाम का जिक्र: परिसर के भीतर स्थित मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा निर्धारित नियमों व रीति-रिवाजों के अनुसार की जाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी की पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रिमंडल प्रस्ताव और परिसर के निर्माण के लिए जारी निविदा नोटिस में परियोजना को 'सांस्कृतिक केंद्र' कहा गया था, जिसमें 'धाम' शब्द का कोई प्रावधान नहीं था, जिससे संकेत मिलता है कि यह शब्द बाद में जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि इस शब्द पर शुरू से ही बहस हो रही थी और पिछली सरकार ने इसे शामिल करके सनातनी भावनाओं का अपमान किया था।
खत्म हुआ दीघा के धाम का विवाद: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव को आवश्यक अधिसूचना जारी करने और परिसर का प्रबंधन करने वाले न्यास को इस बदलाव के बारे में सूचित करने का निर्देश दिया है। इस कदम का मकसद दीघा मंदिर के नामकरण को लेकर हुए विवाद को खत्म करना है। इस नामकरण से ओडिशा के लोगों में नाराजगी थी, क्योंकि 12वीं सदी का पुरी जगन्नाथ मंदिर लंबे समय से "जगन्नाथ धाम" के नाम से जाना जाता है।
दीघा जगन्नाथ मंदिर: शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दीघा मंदिर में पूजा भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में बताए गए जगन्नाथ देव की पूजा के नियमों के अनुसार और सात्विक तरीके से की जाएगी। प्रसाद बांटा जाएगा और ट्रस्ट समिति की जानकारी मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। दीघा जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हम माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर मुझसे चर्चा की थी और हम बहुत खुश हैं कि अब से इस मंदिर को 'दीघा जगन्नाथ मंदिर' के नाम से जाना जाएगा।
राधारमण से की थी सीएम ने चर्चा: कुछ दिन पहले, सीएम ने मायापुर में इस्कॉन मंदिर का दौरा किया था और राधारमण के साथ इस मामले पर चर्चा की थी। दीघा मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी इस्कॉन की है। पिछली तृणमूल सरकार की आलोचना करते हुए उन्‍होंने ने कहा कि मंदिर के नाम में 'धाम' शब्द का इस्तेमाल करना सही नहीं है। मैंने दस्तावेज देखे हैं, और इसे एक सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर बनाया गया था। पिछली सरकार ने पारंपरिक संस्कृति का जो अपमान किया था, यह सरकार वैसा नहीं करेगी।
संबित पात्रा बोले ओडिशा के साथ बंगाल भी खुश: 
संबित पात्रा ने ओडिशा की आपत्ति के बारे में बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम हैं। उनमें से एक ओडिशा में जगन्नाथ धाम है, जहां नारायण का वास है। आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना की थी। इसलिए जब दीघा में मंदिर बनाया गया और उसे 'धाम' कहा गया, तो न केवल साढ़े चार करोड़ ओडिया लोगों को, बल्कि बंगाल के भक्तों को भी दुख पहुंचा। संबित पात्रा ने ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए सीएम सुवेंदु अधिकारी का धन्यवाद किया। कहा कि नई सरकार परंपरा का सम्मान करती है।
ओडिशा सीएम ने पत्र में क्या लिखा था: ओडिशा के मुख्यमंत्री ने 6 मई, 2025 को पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखे एक पत्र में कहा था कि दीघा मंदिर के लिए धाम शब्द का इस्तेमाल करने से पुरी की खास विरासत कमजोर होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे लाखों तीर्थयात्रियों और भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। माझी ने कहा था कि पुरी मंदिर का धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेमिसाल है, न सिर्फ़ ओडिशा के लोगों के लिए, बल्कि पूरे भारत और दुनिया भर के लाखों भक्तों के लिए भी

नेहरू गांधी का आतंक धारा 30

मोदी का दूसरा प्रहार आ रहा है,
धारा 30 समाप्त हो सकती है!"
मोदी ने हिंदुओं के साथ नेहरू द्वारा किए गए विश्वासघात को सुधारने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
क्या आपने "धारा 30" के बारे में सुना है?
क्या आप जानते हैं कि धारा 30 का मतलब क्या है?
'धारा 30' एक हिंदू-विरोधी कानून है, जिसे नेहरू ने अन्यायपूर्ण तरीके से संविधान में शामिल किया था!
जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने का प्रयास किया, तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा था,
"यह कानून हिंदुओं के साथ विश्वासघात है; अगर यह कानून संविधान में लाया गया तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा!"
आखिरकार, नेहरू को सरदार पटेल के प्रतिरोध के सामने झुकना पड़ा।
लेकिन दुर्भाग्यवश, इस घटना के कुछ समय बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल का अचानक निधन हो गया...!!
पटेल की मृत्यु के बाद नेहरू ने तुरंत इस कानून को संविधान में शामिल कर दिया! 😡

अब जानिए धारा 30 की विशेषताएँ...
इस कानून के अनुसार, हिंदू अपने 'सनातन धर्म' की शिक्षा स्कूलों और कॉलेजों में न तो दे सकते हैं और न ही ले सकते हैं!
क्या यह अजीब नहीं लगता?
"धारा 30" के तहत, मुसलमान और ईसाई अपने धर्म की शिक्षा देने के लिए इस्लामिक (मदरसा) और ईसाई (कॉन्वेंट) स्कूल चला सकते हैं, लेकिन हिंदू अपने गुरुकुल या वैदिक शिक्षा पर आधारित पारंपरिक स्कूल नहीं चला सकते, जो देश के मुख्य धर्म सनातन या हिंदू धर्म और संस्कृति को संरक्षित कर सके। यदि वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें इस कानून के तहत दंडित किया जाएगा!
साथ ही, मस्जिदों और चर्चों में दान से जमा सारा पैसा और सोना केवल उन्हीं का होता है। वे उस संपत्ति का उपयोग अपने अनुयायियों को बढ़ावा देने और अशिक्षित या कम शिक्षित हिंदुओं को धन के लालच में धर्मांतरण के लिए करते हैं। लेकिन हिंदू मंदिरों में जमा धन और सोने पर सरकार का नियंत्रण होता है!
नेहरू ने यह सब उस कुटिल गांधी के साथ मिलकर किया ताकि मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदुओं के धर्मांतरण में सुविधा हो सके।
"धारा 30" हिंदुओं के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया विश्वासघात है!

मुस्लिम बच्चों के लिए अपनी धार्मिक पुस्तक, कुरान पढ़ना और सीखना अनिवार्य है, और यही नियम ईसाइयों पर लागू होता है! लेकिन हमारे हिंदुओं के बारे में क्या? हमें अपने एकमात्र धर्म, जो इस प्राचीन विज्ञान पर आधारित है, की सही समझ भी नहीं है!
आइए, हम सभी सनातन धर्म की रक्षा करें। इस लेख को पढ़ें, समझें और नेहरू और कुटिल गांधी द्वारा किए गए इस अन्याय के बारे में हर जगह जागरूकता फैलाएँ।
क्योंकि धारा 30 के कारण, हम अपने स्कूलों और कॉलेजों में भगवद गीता नहीं पढ़ा सकते हैं, जबकि यह हमारा सनातन धर्म देश है।

सनातन

फव्वारे, मकबरे और बिरियानी की हकीकत!!
"ऊंट को काटकर उसमें गाय भरो, गाय में बकरा भरो, बकरे में मुर्गा भरो और मुर्गे में अंडे भरो! फिर इसे 12 घण्टे पकाकर उस पर टूट पड़ो।"
जब सबसे बड़ी पार्टी होती थी तब यही उनकी पसंद की डिश थी। यह एकमात्र ऐसा क्रिएटिव अविष्कार है जो उनके देशों में विकसित हुआ।
इसके अलावा..... 
जहां पानी का नामोनिशान नहीं था, एक जलस्रोत के लिए लाखों लोग कत्ल किये गए, जहां हरियाली की कमी को हरे रंग से पूरा किया गया, जहां स्नान और मुंह धोने तक को पानी नहीं था, उन्होंने फव्वारा बना दिया!! न ग्रेविटी का ज्ञान न भूगोल न खगोल।
पृथ्वी की गतियों को अब भी नकारते हैं और फव्वारा बना गये!!
जहां शौच जाने के बाद गुदा को रेत पर रगड़ा जाता था क्योंकि वहाँ पानी बहुत कीमती था। और यदि रेत गर्म है तो मरे हुए ऊंट की घुटने वाली चिकनी हड्डी से पौंछने का विधान है क्योंकि पत्थर वहां थे ही नहीं।
पत्थर थे ही नहीं लेकिन उन्होंने विशाल भवनों के आर्किटेक्ट दिमाग में रखे, यह कैसे सम्भव है?
जहां चावल तो क्या, गेहूँ और मक्का तक नहीं होता था, खेती के नाम पर यहूदियों के बगीचों में कंटीले खजूर थे, उन्होंने 17 मसालों वाली बिरियानी खोज ली.... है न जादू!!
जहां लिखने वालों की सर्वश्रेष्ठ कल्पना भी शहद, शराब और मानव देह तक उड़ कर शांत हो गई, उन्होंने मार्बल, बगीचे और विज्ञान की खोज की होगी।
जिन्हें कभी घोड़े और ऊँट से नीचे उतरने की फुर्सत भी नहीं मिली उन्होंने 20-20 वर्ष में बनने वाले स्ट्रक्चर बनाये होंगे!!
जिनके घर का दूसरा तल्ला भी कभी नहीं बन सका उन्होंने कुतुबमीनार बनवा दी!
जिनकी किताब में लूट, खसोट, धोखा देने के तरीके और नियमों की भरमार है, वे ज्यामिति या नैतिकता के सौंदर्य बोध को समझेंगे?
जिन्हें नशा, वासना और कामुकता का इतना ज्वार था कि स्त्री को मात्र भोग्या के, अन्य कोई उपाधि ही नहीं दे सके और स्त्रियों का इतना अकाल था कि उनकी कमी छोटे नर बालकों से पूरी की जाती थी।
मुगलिया स्ट्रक्चर और मुगल स्थापत्यकला विशुद्ध वामपंथी प्रोपेगेंडा था जो इन्होंने भारतीय इतिहास में आरोपित कर दिया।
   आज आपको सच इसलिए लगता है क्योंकि आपने मास्टरी की परीक्षा देने से पहले वामपंथी चापलूसों द्वारा सुझाये गये, उन्हीं द्वारा स्थापित GK(जीके) में इसे बार बार पढ़ा है।
और आप क्लर्क से लेकर आईएएस भी तभी बन पाए, जब आपने इसे एकदम सच माना।
चारों तरफ युद्ध के माहौल से घिरे एक गुलाम 1206 से 1210 तक चार साल शासन करने वाले कुतुबुद्दीन ऐबक ने 72.5 मीटर ऊंची मीनार बनवा दी!! (जय जीके, जय कोचिंग)

अगर सच्चाई ही जाननी है तो उनके स्वयं के लिखे दस्तावेजों को ही खंगाल दीजिये जिनमें वे स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि उनके नाम पर जो जो भी स्थापित है, या तो वह लूट का माल है अथवा जबर्दस्ती का कब्ज़ा। जो सभी लुटेरों में बराबर का बांटेगा । औरतें भी और हां स्त्री को माल इन अमन पसन्द लोगों ने ही बनाया, जिन के यहां खुद की बेटी , बहन , मां , भाभी और बहू के साथ भी अपने बाग का फल खुद ही खाने और  हलाला के नाम पर रातें बीता सकतें हैं वो स्त्री को माल ही समझेंगे।
  
    जय हिंद 🇮🇳🇮🇳 राष्ट्रवादी

सनातनी योद्धा भाइयों और बहनों ध्यान दो

लड़का एक पैदा करेंगे, कोठी 04 बनाएंगे,
फिर झाडू पौछा औऱ घर में काम वाली बाई रेहाना औऱ नफीसा को रखेंगे!

साइकिल, स्कूटर औऱ कार क़ी मरम्मत कल्लन औऱ मुश्ताक से करवायेंगे, बाल व दाढ़ी जुम्मन मियाँ से बनवाएंगे!

दूध रफीक औऱ शफीक से लेंगे, कपडे हुसैन और महबूब से सिलवाएंगे, नफीस के प्रेस में शादी का कार्ड छपवायेंगे, मेहंदी सहनवाज और शान मोहमद से लगाएंगे, आजाद का 50 हजार का बैंड बजवाएंगे, मुनव्वर की आतिशबाजी छुड़वाएंगे, बग्गी रईस की करेंगे,
टेंट रशीद का करेंगे, बस खालिद भाई की करेंगे, नाई फरीद को बुलाएंगे!

फिर अपनी लुगाइयों को,
आधे कपड़े पहना कर उनके बीच में सड़कों पर ठुमके लगवाएंगे!

फिर दारू पीकर 100,200, 500, 2000 हजार रू० के नोट बरसाएंगे,
Social Media पर जिहाद जिहाद चिल्लाएंगे, बढ़ती मुस्लिम आबादी का शोर मचाएंगे,

बन्द करो यह फालतू का रोना धोना,अगर हिंदुत्व की वास्तव में चिंता करते हो तो यह प्रतिज्ञा करो कि हिन्दू विरोधी को आज से कोई भी आर्थिक लाभ नहीं देंगे,

जब किसी मुस्लिम फकीर के पास न जमीन है न नौकरी फिर वह कैसे 14 बच्चे पाल रहा है क्योंकि तुम रोज उसकी झोली में 50 किलो आटा भर देते हो, इस आटे को खाकर ही वह 14 बच्चे बनाता है व रोज गाय का मांस लाता है
मुस्लिम आबादी का 05% प्रतिशत भाग फकीरों का है यानि देश में एक करोड़ जिहादियों की आबादी हमारे दिए आटे से पल व बढ़ रही है।

कल से इन जिहादियों को केवल भीख देनी ही बन्द करके देख लो न आबादी बढ़ा पाएंगे न जिहाद चला पाएंगे

देश की दुर्दशा का प्रमुख घटक खुद हिंदू है

मकान बनाओगे कलीम से
प्लंबर होगा अनीश
इलेक्ट्रीशियन होगा फारुख
कारपेंटर होगा सलीम
अगर ऐसे ही इन जिहादियों को रोजगार देते रहोगे तो कुछ वर्षों के बाद सिवाय हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं  बचेगा

जागो हिन्दू जागो
अभी नहीं तो फिर कभी नहीं

लंदन के बस चालक का जवाब सुनिए... रोचक लेकिन सच्ची घटना

एक अरब मुस्लिम लन्दन में एक बस में चढ़ा और उसने बस चालक से अनुरोध किया कि "बस में बज रहे पाश्चात्य संगीत (Western Music) को तत्काल बन्द कर दे।"

बस चालक ने इसका कारण पूछा तो अरब मुस्लिम ने कहा कि "इस्लाम की शिक्षा के अनुसार संगीत सुनना हराम है क्यूँ कि प्यारे नबी के समय संगीत नहीं था और विशेष रूप से पाश्चात्य संगीत।"

बस चालक ने विनम्रतापूर्वक रेडियो बन्द कर दिया!

बस का दरवाज़ा खोला और अरब मुस्लिम को बस से नीचे उतर जाने का निवेदन किया!

अरब मुस्लिम ने इसका कारण पूछा

बस चालक ने विनम्रता से उत्तर दिया - "हे अरबी भाई! प्यारे नबी के समय कोई टेक्सी नहीं थी, कोई बस नहीं थी, कोई बम नहीं थे, हवाई जहाजों का अपहरण करने वाले नहीं थे, मस्जिद में शोरगुल मचाने वाले लाउडस्पीकर नहीं थे, कोई आत्मघाती हमले नहीं होते थे, आर डी एक्स नहीं था, AK 47 नहीं थी, सर्वत्र केवल शान्ति थी

इस्लामियत के नाम पर दोहरी चाल कहीं और जाकर चलाओ। चुपचाप नीचे उतर जाओ और गंतव्य तक पहुँचने के लिए ऊँट का इन्तजार करो

नानक से पहले कोई सिक्ख नहीं था!
जीसस से पहले कोई ईसाई नहीं था! 
मुहम्मद से पहले कोई मुसलमान नहीं था!
ऋषभदेव से पहले कोई जैनी नहीं था! 
बुद्घ से पहले कोई बौद्ध नहीं था!
कार्ल मार्क्स से पहले कोई वामपंथी नहीं था! 

लेकिन :
कृष्ण से पहले राम
राम से पहले जमदग्नि
जमदग्नि से पहले अत्री
अत्री से पहले अगस्त्य
अगस्त्य से पहले पतंजलि
पतंजलि से पहले *कणाद
कणाद से पहले *याज्ञवल्क्य
याज्ञवलक्य से पहले...  
सभी "सनातन वैदिक" धर्मी थे..!

 "राजनीतिक शतरंज" की इन चालों को, ध्यान से समझें 

01. मुगल," "भारतीय" बन गए और, "भारतीय" "काफ़िर"

02. मोमिन "कश्मीरी" बन गए
और, "कश्मीरी पंडित", "शरणार्थी"

03. "बांग्लादेशी"- "बंगाली" बन गये
और, "बंगाली", "बाहरी हिन्दू"

04. सैनिको के "हत्यारे" और "पत्थर बरसाने वाले "आंदोलनकारी" बन गए और,"सेना", 
"मानवाधिकार उल्लंघनकारी"

05. "टुकड़े- टुकड़े गैंग", "देशभक्त" बन गया और, "देशभक्त", ब्रांडेड कट्टर अतिवादी

06. "चिता की लकड़ी", पर्यावरणीय चिंता" बन गई और, "दफनाने" में "बर्बाद होने वाली भूमि", "जन्मसिद्ध अधिकार" हो गई

07. "राखी" में इस्तेमाल किया गये "ऊन" से, "भेड़" को "चोट" पहुंची और "बकरीद" में "हजारों बकरियों" का "कत्ल", "धार्मिक स्वतंत्रता" बन गया

08 "तुष्टिकरण", "धर्मनिरपेक्ष" हो गया
जबकि, "समानता", "कम्यूनल" हो गई

9. "आरएसएस", "आतंकवादी" बन गया
और, "ओसामा जी"..., "हाफिज साहेब" और -"हुर्रियत", "शांति के शिखर"

10. “भारत माता की जय”, "सांप्रदायिक" हो गया" और, “भारत तेरे टुकडे होंगे,” "फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन हो गया"

ऐसे ही सोए रहे
तो - पता भी नही चलेगा?
कब "आतंकी" देश के "नागरिक" बन गए

अब केवल पढ़ेंगे या RT LIKE करके आगे भी बढ़ायेंगे 🤦

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (#कोयरी) अनपढ़ हैं

जन सुराज के प्रेस वार्ता में बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर जो आरोप लगाए थे उससे जुड़े तथ्य ⬇️

@IndiaToday ने November 29, 1999 को इसे अपने आर्टिकल में रिपोर्ट किया है।

Reporter: Sanjay Jha

तब के राज्यपाल सूरजभान जी ने न सिर्फ सम्राट चौधरी जी को बर्खास्त किया बल्कि Fraud और Forgery (गलत आयु, नाम) के लिए FIR दर्ज करने के लिए निर्देश दिया था।

इसके साथ ही मंत्री के तौर पर वेतन, भत्ता वसूल किए जाने का निर्देश दिया था।

इसके पश्चात उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त (बिहार) बसु साब ने बिहार के अगले राज्यपाल को समर्पित रिपोर्ट में कहा कि सम्राट चौधरी ने जांच में सहयोग नहीं किया और अपनी सही उम्र भी साबित नहीं कर सके।

BJP के नए चरित्रवान मुख्यमंत्री जी कुंडली है..

indiatoday.in/magazine/state…

@jansuraajonline @PrashantKishor
@UdaySinghJS @ManojBhartiJSP
@samrat4bjp @BJP4Bihar @BJP4India @narendramodi @AmitShah @ANI @ians_india @TheNewspinch @Abhinav_Pan @News18Bihar @BiharTakChannel @Live_Cities @ABPNews

#लव_जिहाद, हिंदुओं को समाप्त करने की पुरजोर तरीका

एक हिंदू ब्राह्मण परिवार की महिला की मुलाकात फेसबुक पर नवीन राणा नाम के एक व्यक्ति से हुई। जाति आधारित पारिवारिक प्रतिबंधों के कारण, वह उसके साथ इंदौर से दिल्ली भाग गई।

वहाँ पहुँचने पर उनकी मुलाकात नवीन के मित्र शाहनवाज से हुई, जिन्होंने दावा किया कि उनके पास रहने की कोई जगह नहीं है और उन्हें उत्तर प्रदेश के फुलत में मौलाना कलीम सिद्दीकी द्वारा संचालित एक मदरसे में भेज दिया।

महिला ने मदरसे को एक उच्च सुरक्षा सुविधा के रूप में वर्णित किया, जहाँ महिलाओं को बाहर जाने की मनाही थी। आगमन के कुछ ही समय बादः

उसे नवीन से अलग कर दिया गया और उसका फोन छीन लिया गया, जिससे उसके पास अपने परिवार से संपर्क करने का कोई साधन नहीं बचा।

उन्हें मेरठ के एक अन्य मदरसे में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्हें बताया गया कि उन्हें कई दिनों तक रहना होगा।

नवीन अंततः संक्षिप्त रूप से उससे मिलने गया, लेकिन केवल उसे यह सूचित करने के लिए कि वह अब "घर से बहुत दूर" है और उसे इस्लाम का अध्ययन करना चाहिए और निकाह (विवाह) करना चाहिए।

महिला का आरोप है कि उसे व्यवस्थित रूप से "यातना" दी गई, जिसमें उसे जबरन कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और तहज्जुद के लिए सुबह 4:00 बजे जगाया गया।

उसका दावा है कि हिंदू लड़कियों को भेदभावपूर्ण व्यवहार का शिकार बनाया जाता था। जहाँ अन्य लड़कियों को बेहतर भोजन मिलता था, वहीं उसे नाश्ते में केवल चाय और बाकी भोजन में केवल चावल /रोटी चटनी के साथ दी जाती थी।

मदरसे के अधिकारियों ने उसे स्पष्ट रूप से बताया कि उसके भोजन और उपचार में तभी सुधार होगा जब वह इस्लामी आयतों, नमाज़ और कुरान को सफलतापूर्वक याद कर लेगी।

नवीन राणा के लापता होने के बाद, फुलत मदरसा के मौलाना कलीम सिद्दीकी ने उस महिला का विवाह एक दूसरे मौलाना से करवा दिया।

उन्हें मुजफ्फरनगर ले जाया गया। उनके पति घर से बाहर जाते समय उन्हें पूरी तरह से ताला लगाकर रखते थे।

उसके द्वारा उसका विश्वास जीतने और भागने का रास्ता खोजने के प्रयासों के बावजूद, अंततः उसने उसे तलाक दे दिया और उसे फुलत मदरसा वापस भेज दिया।

मदरसे के अधिकारियों ने उससे कहा कि वह कभी भी अपने ब्राह्मण परिवार में वापस नहीं लौट सकती क्योंकि वे अब उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्हें सख्त नकाब/पर्दा पहनने के लिए मजबूर किया गया था, जिसमें नाखून तक दिखाई नहीं देते थे; उन्हें हर समय दस्ताने और मोजे पहनने पड़ते थे।

उसकी दूसरी शादी एक अलग स्थान पर हुई।

उनकी कहानी निकाह हलाला के एक परेशान करने वाले चक्र का विवरण देती है। पति अपने साले (जीजा) की शादी करवाता था और फिर उसे तलाक दे देता था ताकि वह खुद उससे दोबारा शादी कर सके।

वह अपने जीवन के इस दौर में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की संलिप्तता का उल्लेख करती हैं।

2019 में, उनकी शादी एक हाफ़िज़-ए-कुरान से हुई थी, जिसने झूठ बोला था और दावा किया था कि उसकी पहली पत्नी की मृत्यु हो गई है।

उसने उसे चार साल तक अपने पास रखा। एक और तलाक के बाद, उसके परिवार ने उसे एक कमरे में ही कैद कर दिया।

अंततः उसने उसे एक गुप्त फ्लैट में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ उसने अपने बहनोई के साथ मिलकर उससे दोबारा शादी करने के लिए हलाला अनुष्ठान किया।

एक महिला मित्र ने उसे भागने के लिए आवश्यक साहस और समर्थन प्रदान किया।

उसने पुलिस स्टेशन में हलाला और वर्षों से हो रहे दुर्व्यवहार का ब्योरा देते हुए शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, उसका आरोप है कि थाने के एसएचओ (स्टेशन हाउस ऑफिसर) ने मामले को साधारण "पति-पत्नी विवाद" में बदल दिया क्योंकि आरोपी धनी है, एक बड़ा स्कूल/मदरसा चलाता है, और कथित तौर पर एफआईआर दर्ज कराने में रिश्वत का इस्तेमाल किया।

उनका मामला फिलहाल अदालत में लंबित है। न्याय अवश्य मिलेगा।

लव जिहाद कोई सिद्धांत नहीं है... यह हिंदू लड़कियों की जिंदगी तबाह कर देता है।

"प्यार के वेश में किया गया विश्वासघात आत्मा पर एक ऐसा घाव छोड़ जाता है जो कभी नहीं भरता"

LPG gas ⛽ के लिए हाहाकार

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है।😡
भारत कभी विकसित या विश्वगुरु नहीं बन सकता क्योंकि भारत चूतियों का देश है, भारत गधों का देश है, भारत प्रचंड मूर्खों का देश है, भारत स्वार्थी और पागलों का देश है

LPG गैस सिलेंडर के नाम पर ऐसे रंडी रोना किया जा रहा है, जैसे सामूहिक शोक हो गया हो

दूसरे देशों में युद्ध छिड़ा है तो भारत के लोगों का गैस के नाम पर रो-रोकर बुरा हाल है

जरा सोचिए कि अगर अपना देश महीने भर के लिए युद्ध में चला जाए तो ये लोग क्या करेंगे ?

अमेरिका, इजरायल, ईरान में युद्ध हो रहा है तो मोदी क्या करे ? सेना लेकर कूद जाए भेंचो कि हमारे तेल के भेजो, बाद में फिर लड़ लेना क्योंकि हमारे लोगों को सिलेंडर सुलगाकर उस पर पिछवाड़ा सेंकना है

जरा भी कॉमनसेंस नहीं है भारत की बड़ी आबादी में

जब भारत LPG का 60% हिस्सा आयात करता है और खाड़ी देशों में युद्ध छिड़ा है तो थोड़ा बहुत क्राइसिस होगा ही, फिर गैस एजेंसिया क्राइसिस को बढ़ावा देंगी, फिर विपक्षी नेता इस क्राइसिस को और बढ़ावा देंगे और जनता LPG के नाम पर हाय हाय मोदी मर जा तू कहते हुए दहाड़ें मारकर रोएगी

5-7 साल पहले दिल्ली के अफ़वाह उड़ी कि नमक खत्म हो गया तो आधी दिल्ली परचूनी/किराना की दुकानों पर लाइन में लग गई थी और 50-50 किलो नमक ख़रीदकर घरों में रख लिया था

हम नमक के लिए रोने लगते हैं, प्याज के नाम पर रोते हैं, LPG के लिए रो रहे हैं और फिर भी कहते हैं कि हम तो विश्वगुरु और विकसित बनेंगे

भारत कृषि प्रधान नहीं बल्कि चूतिया प्रधान और रोतड़ू प्रधान देश है

भारत के आधे लोग ईरान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन वहां भयानक महंगाई है, जरूरत की तमाम चीजें नहीं मिल रही हैं. आपको ईरान का समर्थन करना है कि ईरान युद्ध के कारण LPG संकट आ गया तो रोने लगे भेंचो

आधे लोग इजरायल का समर्थन कर रहे हैं, वहां ईरान ताबड़तोड़ बम और मिसाइलें मार रहा है, भयानक तबाही मची है. आपको इजरायल का समर्थन करके बहादुर बनना है लेकिन LPG संकट के नाम पर रंडी रोना भी करना है

भाई, भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के हर देश में ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा पदार्थों का संकट आया है तो इस समय रोने की नहीं धैर्य की जरूरत है

मोदी पेशाब करके क्रूड आयल पैदा नहीं कर देगा जिससे पेट्रोल, डीजल या LPG बन सके

या मोदी के बदले राहुल को Pm बना दो तो भी वो आपके घरों में गैस से भरे सिलेंडर नहीं भेज देंगे क्योंकि क्रूड तो उनकी पेशाब से भी नहीं निकलेगा, वहां से भी मूत निकलेगा

पूरे देश को पैनिक मोड में लाकर खड़ा कर दिया है भेंचो

इसमें एक बड़ा वर्ग उन लोगों का है, जिनके पास 5/7 साल पहले तक गैस सिलेंडर नहीं थे, मोदी ने ही दिए और मोदी के दिए हुए सिलेंडर ही मोदी पर भारी पड़ रहे हैं

तुम दूसरे देशों के बीच युद्ध के कारण इस तरह रो रहे हो और तुम चाहते हो कि तुम्हें पाकिस्तान के साथ युद्ध करके कश्मीर दे दिया जाये, बलूचिस्तान, सिंध, गिलगिट बाल्टिस्तान को आजाद कराया जाए

अबे अगर ऐसा करने का सोचा भी तो तुम संसद और PM आवास घेर लोगे नामक, तेल, आटा या किसी अन्य चीज के नाम पर

भारत जैसे महान देश में कैसे विशुद्ध पगलैट पब्लिक पैदा होती है यार 

अरे सिलेंडर मिल जायेगा यार और अगर कालाबाजारी के कारण न भी मिले तो इंडेक्शन ले लो, इंडेक्शन न मिले तो कुछ चूल्हे पर पका लेना

देश के प्रति कुछ तो दायित्व निभाओ

ये देश सिर्फ उनका ही नहीं है जो सीमा पर मर जाते हैं, ये देश आपका भी है और सिर्फ वोट देकर आप अपने दायित्व की इतिश्री नहीं कर सकते

जब संकट भी घड़ी हो आपको भी सैनिक बनकर किसी युद्ध लड़ना पड़ सकता है

हरिओम पंवार साहब ने लिखा है

क्या ये देश उन्हीं का है जो सीमा पर मर जाते हैं
अपना लहू बहाकर टीका सरहद पर कर जाते हैं
ऐसा युद्ध वतन की ख़ातिर सबको लड़ना पड़ता है
संकट की घड़ियों में सबको सैनिक बनना पड़ता है
जो भी क़ौम वतन की ख़ातिर लड़ने को तैयार नहीं
उसकी संतति को आजादी जीने का अधिकार नहीं।😐

यहूदी

My heart is with Israel!! ❣️

बेंजामिन नेतन्याह के भाषण का अंश:--

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास न कोई देश था न कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65000 थें। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमलें होतें रहे, होते रहे। लेबनान, सीरिया, इराक़, जॉर्डन,मिश्र, लीबिया, सऊदी, अरब जैसे कई देशों ने हमारे उपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे, किंतु हम बच गए।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने हमें धरती दी,
वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। 
हमने उसको भी अपने खून से सींचा। 
हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सबकुछ था। 
हम कुछ नहीं भूलें। हम फिर इन से बच गए। 
हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए।
हम अरब से बच गए। 
हम सद्दाम हुसैन से बच गए। 
हम गद्दाफी से बच गए। 
हम हमास से भी बचेंगे, 
हम हिज्बुल्लाह से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरुसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 
39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया..
लेकिन हम अपने जेरुसलम को कभी नहीं भूले वह हमारे हृदय में हैं, वह हमारे मस्तिष्क में हैं और जब तक हम रहेंगे जेरुसलम हमारी आत्मा में रहेगा। 
संसार यें याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिश्र, लेबनान, वेवीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गयें है। 
हम फिर भी बचे रहें।

हमें वे (इस्लाम) खत्म करना चाहते हैं। 
उन्होंने हमारें रस्म रिवाज को कब्जाया। 
उन्होंने हमारें उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारें पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिया गया, सोलोमन, सुलेमान हो गया, डेविड, दाऊद बना दिया गया। मोजेज मूसा कर दिया गया। फिर एक दिन उन्होंने कहा - तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे नहीं स्वीकार किया। करते भी कैसे ? उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा स्वीकार करो़, कबूल लो। हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहर को कब्जाया गया। 
हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम क़त्ल हुए,भगा दिए गए।

मक्का के काबा में हम दों लाख थें, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर क़त्ल किया गया। 
फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। 
हम तीन लाख थें मार दिए गए इराक़ में हम दों लाख थें, तुर्की में चार लाख हमें मारा जाता रहा, मारें जाता रहा। वें हमें मार रहे हैं, मारते जा रहें हैं। हमारे शहर,धन, दौलत, घर, पशु, मान सम्मान सब कुछ कब्जाये़ जातें रहें, फिर भी हम बचें रहें। 1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया, फिर भी हम बचें रहें। 75 साल पहले वें हम पर थूकते थें, ज़लील करतें थें, मारते थे।हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे हैं।

आज हमारे पास एक अपना देश है। 
एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक जैसी कई संस्थाएं हमने इस दौर में बनाई।
आज हमारे चिकित्सक दवा बना रहे हैं, 
लेखक किताबें लिख रहें हैं। यें सबके लिए है, 
यह मानवता के कल्याण के लिए है।
हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला, 
हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है। हम किसी के दुश्मन नहीं है, 
हमने किसी को खत्म करने की क़सम नहीं खाई है। हमें किसी को बर्बाद नहीं करना, हम साजिश भी नहीं करते, हम जीना चाहते हैं सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, 
खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे। हम 3000 सालों से यरुसलम में ही थें। आज़ हम अपने पहले देश इजरायल में है। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा। यरुसलम हमसे है और हम यरुसलम से है।

जेरूसलम से एक यहूदी


आपको बता दिया जाए कि 1300 सौ ईसवी तक ईरान फारस देश था और ये फारसी हिंदू लोग हैं अग्नि और सूर्य पूजक वाले लोग 

#BenjaminNetanyahu
#Israel

#यदुवंशी वैदिक क्षत्रिय छत्रपति शिवाजी महाराज

#हिंदवी_स्वराज्य संस्थापक 
#छत्रपति शिवाजी राज महाराज 
वंश – #यदुवंश/#यदुवंशी/#यदु
कुल– हैहयवंशी_यादव (#क्षत्रिय कुलीन वर्ग)
जन्म दिवस (16 फरवरी 1630, शिवनेरी किला) निर्वाण दिवस ( 3 अप्रैल 1680 , राजगढ़ किला)
पिता – शाह जी भोसले जाधव 
माता – जीजाबाई जाधव 
उपलब्धि – हिंदवी स्वराज्य संस्थापक,
युद्ध – अनेक राज्यों को जीत लिया गया 
विवाह– पहली पत्नी 14 मई 1640 , सइबाई निंबालकर जाधव – पुत्र संभाजी बाद मे द्वितीय महाराज छत्रपति संभाजी महाराज बने ये विश्व के पहले बाल साहित्यकार हैं इन्होंने मात्र 14 वर्ष में ही संस्कृत, मराठी, फारसी, उर्दू, कन्नड़ तेलुगु , फारसी भाषा में किताब लिख दी थी।

यदुवंशी छत्रपति शिवाजी महाराज जी की अन्य पत्नियां भी थीं और इनके मात्र 2 पुत्र हुए थे 

राज्याभिषेक–6 जून 1674 , रायगढ़ किला 


राज्याभिषेक दिवस 
6 जून 1674 को
 #यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी महाराज जी का राज्याभिषेक हुआ था...
मगर स्थानीय ब्राह्मणों के पास उतनी योग्यता नहीं थी जितनी वाराणसी के #गंगाभट्ट जी पास थी तो #वाराणसी से #ब्राह्मण गए थे 
#यदुवंशी_छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज 
को राजा बनाया गया 
#यदुवंशी_वीर_योद्धा का राज्याभिषेक करने काशी के सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण तैयार हुए थे जिसके बाद #गागा_भट्ट नाम के ब्राह्मण ने राज्याभिषेक कराया था इस पूरे कार्यक्रम में 
7 करोड रुपए खर्च आया था , इस राज्याभिषेक में आसपास के अनेकों महाराजा राजा जागीरदार सामंत पहुंचे हुए थे दक्षिण भारत के लगभग सभी राजा महाराजा शामिल रहे थे नॉर्थ इंडिया से बिहार, बंगाल ओडिसा असम पंजाब सहित सिख महाराजा रणजीत सिंह जी भी उपस्थित रहे थे कुल 11 हजार ब्राह्मण शामिल हुए थे यह राजसूर्य यज्ञ जितना खर्च हुआ था 

#यदुवंशी_यदुवीर_यदुकुल_शिरोमणि 
#छत्रपति_शिवाजी_राज_महाराज का राज्याभिषेक संपन्न हुआ था 

आज हमारे कुछ #यदुवंशी #यादव भाई अपनी गरीबी का रोना रोते हैं अपने को शोषित दबित पीड़ित वंचित पिछड़ा वर्ग का बोलते है यह वोट के लालच में खुद को अपमानित करने जैसा है यह खुद को धोखा देने जैसा है 

#यदुवंशी_वीर_छत्रपति_शिवाजी_महाराज अपने जाति, धर्म,कर्म से और अपने ताकत से उन सामंतवादी आक्रमणकारी हमलावर को अपने कदमों में झुका दिए थे मुगल बादशाह औरंगजेब का भारत विजेता का सपना अधूरा रह गया वह अपनी हार और अपमान बर्दास्त न कर सका और दक्षिण भारत में ही कब्र में दफनाना गया 
और कभी भी मुगलों का वो सपना की पूरा हिंदुस्तान अपना कभी भी पूरा नहीं होने दिया 


भारत कभी भी पूरी तरह गुलाम रहा ही नहीं 
यहां तक कि 1947 में जब अंग्रेज सरकार ने भारत छोड़ा उस समय भी लगभग 100 के आसपास स्वतंत्र देशी राजा महाराजा थे जो कि बिल्कुल आजाद थे 

#छत्रपती_श्री_शिवाजी_महाराज 
 जय यदुवंशी जय श्री कृष्ण 
💪#जय_वीर_शिवाजी 🙏

वीर अहीर आल्हा जयंती

#जय_श्री_कृष्ण
#जय_श्री_कृष्ण_जय_यदुवंश 
#यदुवंशी_वैदिक_क्षत्रिय_ब्राह्मण 
#भागवत_धर्म_की_जय 

#यदुवंशी परम प्रतापी, बलशाली, अदम्य साहस अकल्पनीय अपराजित अजेय योद्धा,
 52 गढ़ (#किला) और
 56 सूबों (राजा महाराजा) के विजेता जिसे कोई कभी न हरा सका..
जिसने कभी निहत्थे, भागते हुए और पहले दुश्मन पर वार नहीं किया जिसकी वीरता का सम्मान दुश्मन भी करते थे..

 ऐसे #वीर_अहीर_आल्हा की जयंती पर कोटि कोटि नमन।
आइए अपने समृद्ध वैभवशाली गौरव विरासत को याद करे 

#जय_मां_शारदा_भवानी 
#VeerAhirAlha
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
#VeerAhirAlha 
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#VeerAhirAlhaJayanti 
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क्या गाजा भूखा है

इज़रियल फ़िलिस्तीन में रसद नहीं पहुँचने दे रहा है- ये एक आम नैरेटिव है जो हाल में चल रहा है। जो फ़िलिस्तीन के समर्थक है, वो इस पे क्रन्दन करते है। जो फ़िलिस्तीन के विरोधी है, वो इस पे हंसते है।

हकीकत क्या है? क्या वाक़ई में फ़िलिस्तीन को खाना नहीं मिल रहा है?

इसका उत्तर यूएई के एक प्रख्यात पत्रकार और एनालिस्ट अमजद तहा के इस ट्वीट से समझें।

आपके सुभीते के लिए इस ट्वीट का हिंदी अनुवाद ये है-


मुझे पता है कि आपको तर्क पसंद नहीं है। 7 अक्टूबर 2023 से, ग़ाज़ा को 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक मानवीय सहायता मिली है, जो 22,000 से अधिक ट्रकों के माध्यम से केवल 2.1 मिलियन लोगों की आबादी के लिए पहुँचाई गई है। इसका मतलब है कि कुछ ही महीनों में प्रति व्यक्ति लगभग 143 किलोग्राम सहायता। यदि हम मान लें कि एक किलोग्राम खाद्य सामग्री में औसतन 3,500 कैलोरी होती है (जो आपातकालीन राशन के लिए मानक है), तो यह सहायता कुल मिलाकर 1.05 ट्रिलियन से अधिक कैलोरी प्रदान करती है। ग़ाज़ा की जनसंख्या को प्रतिदिन लगभग 4.2 अरब कैलोरी की आवश्यकता होती है (प्रति व्यक्ति 2,000 कैलोरी के हिसाब से), तो यह सहायता अकेले ही पूरी आबादी को लगातार 250 से अधिक दिनों तक तीन समय का भोजन और मिठाई सहित खिलाने के लिए पर्याप्त है। अगर भोजन की मात्रा बढ़ाकर दिन में चार भारी भोजन कर दी जाए (जो किसी भी मानवीय न्यूनतम से कहीं अधिक है), तब भी ग़ाज़ा की आबादी के लिए यह सहायता लगभग 190 दिनों तक पर्याप्त होगी।

अगर इसकी तुलना यूरोप के शहरों से करें, तो 2.1 मिलियन आबादी वाला पेरिस शहर इसी मात्रा की कैलोरी से आठ महीने तक पूरी तरह खिलाया जा सकता है। बर्लिन, जिसकी आबादी 3.6 मिलियन है, को पांच महीने और रोम (2.8 मिलियन) को छह महीने तक यह सहायता पर्याप्त होती। इस बीच, अफ्रीका के कई देशों में वास्तविक अकाल की स्थिति है, जिन्हें न तो इतना ध्यान मिलता है और न ही इतनी सहायता। दक्षिण सूडान, जहाँ 6.3 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, ग़ाज़ा की प्रति व्यक्ति सहायता का एक चौथाई से भी कम पाते हैं। सोमालिया, जहाँ 7 मिलियन से अधिक लोग ज़रूरतमंद हैं, को इससे भी कम सहायता मिलती है—अनुमानों के अनुसार प्रति व्यक्ति केवल 30 डॉलर की सहायता मिलती है, जबकि ग़ाज़ा में यह लगभग 133 डॉलर प्रति व्यक्ति है। चाड, नाइजर और बुर्किना फासो को इतनी कम सहायता मिलती है कि वे वैश्विक न्यूनतम पोषण स्तर तक भी नहीं पहुँच पाते।

अगर हम #ग़ाज़ा को एक प्रतीकात्मक रेस्टोरेंट मानें, तो यह ऐसा है मानो हर दिन 400 ट्रक यहाँ सप्लाई दे रहे हों, हर गली में ‘गौर्मे’ स्तर की लॉजिस्टिक्स पहुँच रही हो, जबकि अफ्रीका के युद्धग्रस्त क्षेत्र पत्तियाँ बीनकर और गंदा पानी पीकर गुज़ारा करने को मजबूर हैं—बिलकुल बिना किसी मीडिया हेडलाइन या हैशटैग के।

अब यह भूख का मुद्दा नहीं रहा। यह एक पक्षपाती नैरेटिव को ज़रूरत से ज़्यादा पोषित करने का मामला बन गया है। जब मानवीय सहायता भेजी जाती है, तो यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि यह वास्तव में लोगों तक पहुँचे और आतंकवादी संगठन द्वारा नियंत्रित इलाक़े को उन संसाधनों से न भर दे जो अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों को नहीं मिलते। इस बीच, बर्मिंघम (यूके) में स्थित ‘इस्लामिक रिलीफ’ जैसे समूह तटस्थता का दावा करते हैं, जबकि उनकी सहायता सुविधा से गायब होकर हमास की सुरंगों और गोदामों में जा पहुँचती है। टिग्राय, नाइजर और #सूडान जैसे स्थानों में वास्तविक भूख चुपचाप मर रही है—बिना किसी कैमरे, बिना किसी रोशनी के—जबकि फ्रांस और यूके जैसे देश एक ऐसे संघर्ष को ईंधन दे रहे हैं जिसे वे हल करने का दिखावा कर रहे हैं।

——————-

अमजद तहा साफ़ बतला रहा है कि फ़िलिस्तीन को मनो भर रसद जा रही है और फिर भी नैरेटिव ऐसा चल रहा है जैसे वहाँ अक़ाल पड़ा हुआ है।

नैरेटिव बनाने में दूसरा पक्ष कितना हुशियार है।

इन नैरेटिव को ही अल तकिया कहा जाता है 

संविधान क्या केवल भीम राव का था

हिंदुओं को टॉर्चर किया जा रहा है और यह #संविधान निर्माताओं का अपमान है जो कि इसके असली हकदार को भूला दिया गया 

#संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष 
डॉ राजेंद्र प्रसाद (श्रीवास्तव –कायस्थ)

#संविधान_सभा के अटॉर्नी जनरल 
BN RAW (#यदुवंशी – #अहीर)

#संविधान_सभा के अस्थाई अध्यक्ष 
डॉ– सच्चिदानंद सिन्हा (#यदुवंशी – गोप)

#संविधान सभा की कुल 22 समितियाँ थीं । जिनमें से 8 समितियाँ प्रमुख समितियाँ थीं और बाकी छोटी समितियाँ थीं। 

इन छोटी #समितियों में से एक समिति जिसे #प्रस्तावना कहा जाता है उसके अध्यक्ष थे भीम राव आंबेडकर वह भी 7 माननीय सांसद महोदय के साथ थे 

#संविधान_सभा में कुल 292 जन प्रतिनिधि चुने हुए थे यानी सांसद महोदय थे 
93 देशी स्वतंत्र राजा महाराजा और ब्रिटिश क्राउन वाले राजा महाराजा के साथ साथ 4 गवर्नर प्रेसीडेंसी रूल के सदस्य थे 
मतलब कुल सदस्यों की संख्या 389 

तो देश के लोगों तुमने अपने जाति पूर्वजों पुरखों को भुला दिया 
लेकिन भीम राव आंबेडकर के जाति वाले ने उनको नहीं भुलाया नतीजा सामने है 
आज भीम राव आंबेडकर के ऊपर टिप्पणी हो जाए 
या #जयभीम
न बोलो तो ये लुटेरे वर्ग खुलेआम #SCSTACT लगाते है और कोर्ट उनको एकमुश्त 1 लाख रुपए नकद रुपया देती हैं वह भी टैक्स पेयर/#IMF #वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर 
इनकी भरपाई कौन करेगा???

उस पुलिस अधिकारी पर भी कार्यवाही होनी चाहिए जो कि हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के लिए उन पर बिना किसी ठोस सबूत के  #SCSTACT #scstact लगा देता है 

#संविधान हम सभी का है किसी एक का नहीं है 
बहुत हुआ बर्दास्त अब और नहीं 

#जागो_हिंदुओं_जागो 
#संविधान_बचाओ

india Balochistan

Dear international friends of Balochistan.

We are starting a campaign to connect the people of Bharat and Balochistan, understanding each other's cultural bonds, historic and brotherly relations.

We will start publishing your write ups, articles, personal thoughts, your experiences, your suggestions and solidarity messages for the people of Balochistan

Mode of communication:
You can share your content via email: bharatbalochistancc@gmail.com or send DM on @miryar_baloch

Content:

1: You can record 3 seconds to 1 minute video solidarity message.

2: You can photos of hoisting Balochistan and Indian flags with your friends circle.

3: You can organise a village gathering video and show your solidarity with Balochistan.

4: You can send your text (minimum 500 words) expressing your moral support and your suggestions.

5: You can approach to the foreign Embassies and send letters and urge them to raise voice about gross human rights violations in PoB Pakistan Occupied Balochistan.

6: You can approach your constituency MLA, MPA, Vidhayak and local Panchayaat have their words for the importance of Bharat Balochistan Friendship.

7: You can send us a group photo showing your solidarity with the Baloch people.

8: Even if you don't want to show your face, you can still write your solidarity message without revealing your identity.

9: You can suggest your government to have a long term strategy to include Balochistan to its foreign policy agenda.

10: People of the country have the power and it is the time show your power for the betterment of our two countries.

Let's connect.
Long Live #BhafatBalochistanFriendship

भारत पाकिस्तान बांग्लादेश

राजस्थान से 1070 किमी लंबा तथा जम्मू-कश्मीर से 1222 किमी लंबा भारत पाकिस्तान के बीच अन्तर्राष्ट्रीय सीमा है...

राजस्थान में कोई आतंकवादी इतनी जल्दी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश नहीं करता हैं लेकिन कुछ समय अंतराल के बाद बारम्बार लगातार जम्मू कश्मीर में कोई न कोई बड़ी आतंकवादी घटना को बड़ी गुमचुप तरीके से अंजाम दे दिया जाता है |

कारण क्या है ?

राजस्थान हिन्दू बहुल है और जम्मू कश्मीर मुस्लिम बहुल...राजस्थान में इस्लामिक जिहाद के समर्थक नहीं है | जबकि जम्मू कश्मीर में इस्लामिक जिहाद के समर्थक घर-घर भरे पड़ें है | राजस्थान में इस्लामिक जिहाद के समर्थकों का इलाज वहां के स्थानीय लोग बेहिचक करने में जरा भी चिंता नहीं करेंगे | जबकि जम्मू कश्मीर में वहाँ के स्थानीय लोग इस्लामिक किताब के कारण खुलकर "तेरा मेरा रिस्ता क्या! ला इल्लाह! इ ललाह!" का रिस्ता निभाते आये हैं |

इस्लामिक जिहाद और कट्टरपंथी मुस्लिम देश के कोने-कोने में भारत की बर्बादी और तबाही की बेसर्बी से प्रतीक्षा "सेकुलरिज्म की आड़" में कर रहें हैं और भारत का गैर-मुस्लिम समाज आज भी गहरी नींद में सोया हैं| सेक्युलर लोग और सेक्युलर पार्टियां से जुड़े स्वार्थी लोग एक दिन इस भारत का सत्यानाश करवा के ही रहेंगे | 

"कट्टरपंथी सोच इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद, सत्ता और मुस्लिम वोट के लिए इनकी आँखों पर बंधी मुस्लिम पट्टी और मौन साधना भारत के लिए सबसे खतरनाक है" 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस तरह से सेक्युलर नेताओं और उनके समर्थकों का इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद पर सोशल मीडिया पर घमासान मचा हुआ है भारत में अंदरूनी सोच और जमीनी हकीकत उससे भी भयावह है जिसे जानने और समझने में भारत के तमाम धर्म और जाति के गैर मुस्लिम लोगों ने जानने और समझने में बहुत देर कर दी है | सेक्युलर सोच ने देश में इस्लामिक जिहाद और कट्टरपंथ को इतना सुदृढ़ और मजबूत कर दिया है संविधान की दुहाई निकट भविष्य में किसी काम की नहीं रहेगी |

5 लाख से जायदा मुस्लिम महिलाओं का पाकिस्तानी नागरिक से विवाह और देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसबैठियों का बेधड़क दाखिल होना झारखण्ड के आदिवासी इलाकों में, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में, बिहार के सीमांचल में.... असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरला, हैदराबाद, महाराष्ट्र, दिल्ली में बगावत के किनारे खड़े हैं | 

भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के 99.99 फीसदी मुसलमान कुरान के आगे नतमस्तक हैं | कुरान ही इनके दिलों दिमाग में इसके अतिरिक्त सब शून्य सा महसूस होता है | इस्लामिक जिहाद में मानवता करुणा दया और इंसानियत की कोई जगह नहीं हैं | हैवानियत और बात-बात में इंशाअल्लाह का उद्घोष कट्टर होने, दिखाने और एकजुट होने का बेहद खतरनाक मंत्र है |

उदाहरण अगर प्रेम, करुणा, दया, मानवता होता तो भारत में 'मदरसे' सार्वजानिक रूप से संचालित किये जाते, किसी के आने-जाने पर धर्म को देखकर पाबन्दी नहीं होती, जबकि गैर-मुस्लिम में ऐसा कोई सख्त पाबन्दी मैंने नहीं देखा न सुना |  

रामायण छोड़ के केवल 25 प्रतिशत भारतवंशी सिर्फ महाभारत के आगे नतमस्तक हो जाए भारत में कट्टरपंथी सोच, इस्लामिक जिहाद, आंतकवाद और आतंकवादियों के समर्थक और अनियंत्रित दोगली सेकुलरिज्म सबको आसानी से नियंत्रित किया जा सकता हैं अन्यथा "हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है", सुनने को नहीं मिलेगा बल्कि शीघ्र ही यहाँ से इस्लामिक जिहादियों और मुस्लिम आतंकियों के कारण भारत से भगा दिए जाओगे या बेहरमी से मार दिए जाओगे |

हमारे प्राचीन संस्कृति की देन है- सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक विनम्रता, धैर्य, संयम, सहलशीलता, त्याग, प्रेम, करुणा, दया, मानवता और इंसानियत का विश्व में कोई जोड़ा नहीं हैं, न ही होगा !

समय और वर्तमान परिस्तिथियों के आधार पर "सच कड़वा है" और यह मेरे व्यक्तिगत विचार एवं ऐसा मानना हैं...सहमत होना या न होना जरुरी नहीं है |

पुरे देश को समझाने-बुझाने वाले अहिंसावादी हिन्दू 'गाँधी' एक कट्टरपंथी 'जिन्ना' को नहीं समझा पाए थे...ठीक वैसा ही समय आ रहा है सेक्युलर हिंदू...कुरानी सोच, इस्लामिक कट्टरपंथी और जिहादी को नहीं समझा पाएंगे...लिख के रख लीजिये !

@nirajbabu121

सिंधु जल संधि क्या है

सिंधु नदी जल समझौता ,पूरा पढ़िए थ्रेड🧵 

ब्रिटिश राज के दौरान ही दक्षिण पंजाब में सिंधु नदी घाटी पर बड़ी नहर का निर्माण करवाया गया था. उस इलाक़े को इसका इतना लाभ मिला कि बाद में वो दक्षिण एशिया का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र बन गया.

भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के दौरान जब पंजाब को विभाजित किया गया तो इसका पूर्वी भाग भारत के पास और पश्चिमी भाग पाकिस्तान के पास गया.

बंटवारे के दौरान ही सिंधु नदी घाटी और इसकी विशाल नहरों को भी विभाजित किया गया. लेकिन इससे होकर मिलने वाले पानी के लिए पाकिस्तान पूरी तरह भारत पर निर्भर था

पानी के बहाव को बनाए रखने के उद्देश्य से पूर्व और पश्चिम पंजाब के चीफ़ इंजीनियरों के बीच 20 दिसंबर 1947 को एक समझौता हुआ.

इसके तहत बंटवारे से पहले तय किया गया पानी का निश्चित हिस्सा भारत को 31 मार्च 1948 तक पाकिस्तान को देते रहना तय हुआ.

1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया जिससे पाकिस्तानी पंजाब की 17 लाख एकड़ ज़मीन पर हालात ख़राब हो गए.

भारत के इस क़दम के कई कारण बताए गए जिसमें एक था कि भारत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहता था.

बाद में हुए समझौते के बाद भारत पानी की आपूर्ति जारी रखने पर राज़ी हो गया 

स्टडी के मुताबिक 1951 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने टेनसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियंथल को भारत बुलाया.

लिलियंथल पाकिस्तान भी गए और वापस अमेरिका लौटकर उन्होंने सिंधु नदी घाटी जल बंटवारे पर एक लेख लिखा.

ये लेख विश्व बैंक प्रमुख और लिलियंथल के दोस्त डेविड ब्लैक ने भी पढ़ा और उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रमुखों से इस बारे में संपर्क किया. और फिर दोनों पक्षों के बीच बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ.

ये बैठकें क़रीब एक दशक तक चलीं और आख़िरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु नदी घाटी संधि पर हस्ताक्षर हुए.

समझौते की शर्ते निम्न प्रकार से है :

संधि के मुताबिक़, सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां बताते हुए इनका पानी पाकिस्तान के लिए तय किया गया. जबकि रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां बताते हुए इनका पानी भारत के लिए तय किया गया.

इसके मुताबिक़,भारत पूर्वी नदियों के पानी का, कुछ अपवादों को छोड़कर, बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है.

वहीं पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया था. जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी.

इस संधि में दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत करने और साइट के मुआयना आदि का प्रावधान भी था.

इसी संधि में सिंधु आयोग भी स्थापित किया गया. इस आयोग के तहत दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था.

संधि में दोनों कमिश्नरों के बीच किसी भी विवादित मुद्दे पर बातचीत का प्रावधान है.

इसमें यह भी था कि जब कोई एक देश किसी परियोजना पर काम करता है और दूसरे को उस पर कोई आपत्ति है तो पहला देश उसका जवाब देगा. इसके लिए दोनों पक्षों की बैठकें होंगी.

बैठकों में भी अगर कोई हल नहीं निकल पाया तो दोनों देशों की सरकारों को इसे मिलकर सुलझाना होगा.

साथ ही ऐसे किसी भी विवादित मुद्दे पर तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान भी रखा गया है

रेलवे में पेंट्रीकार वालो की लुट

रेल गाड़ी में पैंट्री कार वालों की लूट का नया तरीका! (सभी रेल यात्री ध्यान दें) दोस्तों, आज कल ट्रेनों में पैंट्री कार वालों ने यात्रियों को...