नेपाल :
नेपाल को देवघर कहा जाता है। नेपाल यदुवंशी क्षत्रीय समाज के वीरों ने बसाया था,
यह भी कभी अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था। भगवान श्रीराम की पत्नी सीता का जन्म स्थल मिथिला नेपाल में है।
नेपाल के जनकपुर में सीता जन्म स्थल पर सीता माता का विशाल मंदिर भी बना हुआ है।
भगवान बुद्ध का जन्म भी नेपाल के लुंबिनी में हुआ था। यहां पर 1500 ईसा पूर्व से ही हिन्दू आर्य लोगों का शासन रहा है।
250 ईसा पूर्व यह मौर्यों के साम्राज्य का एक हिस्सा था। फिर चौथी शताब्दी में गुप्त वंश का एक जनपद रहा। 7वीं शताब्दी में इस पर तिब्बत का आधिपत्य हो गया था।
11वीं शताब्दी में नेपाल में ठाकुरी वंश के राजा राज्य करते थे।
उनके बाद यहां पर मल्ल वंश का शासन रहा, फिर गोरखाओं ने राज किया।
मध्यकाल के रजवाड़ों की सदियों से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता को समाप्त करने का श्रेय जाता है गोरखा राजा पृथ्वी नारायण शाह को।
राजा पृथ्वी नारायण शाह ने 1765 में नेपाल की एकता की मुहिम शुरू की और मध्य हिमालय के 46 से अधिक छोटे-बड़े रियासतों के राजा जो कि अहीर समाज और यदुवंशी क्षत्रीय समाज में आते थे को संगठित कर 1768 तक इसमें सफल हो गए। यहीं से आधुनिक नेपाल का जन्म होता है।
स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी इस क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते समय-समय पर शरण लेते थे।
अंग्रेजों ने विचारपूर्वक 1904 में वर्तमान के बिहार स्थित सुगौली नामक स्थान पर उस समय के पहाड़ी राजाओं के नरेश से संधि कर नेपाल को एक आजाद देश का दर्जा प्रदान कर अपना रेजीडेंट बैठा दिया। इस प्रकार से नेपाल स्वतंत्र राज्य होने पर भी अंग्रेज के अप्रत्यक्ष अधीन ही था।
रेजीडेंट के बिना महाराजा पृथ्वी नारायण शाह को कुछ भी खरीदने तक की अनुमति नहीं थी। इस कारण राजा-महाराजाओं में यहां तनाव था।
दरअसल, शाह राजवंश के 5 वें राजा राजेंद्र बिक्रम शाह के शासनकाल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने नेपाल को भी कब्जे में लेने का प्रयास किया और सीमावर्ती कुछ इलाकों पर कब्जा भी कर लिया, लेकिन गोरखाओं ने 1815 में लड़ाई छेड़ दी। इसका अंत सुगौली संधि से हुआ।
भारत में हुई 1857 की क्रांति में विद्रोहियों के खिलाफ नेपाल ने अंग्रेजों का साथ दिया था इसलिए उसकी स्वतंत्रता पर कभी आंच नहीं आई।
1923 में ब्रिटेन और नेपाल के बीच एक संधि हुई जिसके अधीन नेपाल की स्वतंत्रता को स्वीकार कर लिया गया।
1940 के दशक में नेपाल में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की शुरुआत हुई यह आंदोलन बस्तुत। एक चीन समर्थित उग्रवादी संगठन के रुप मे मावोवाद के रूप में शामिल हैं उसने नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड के रुप मे छापामार युद्ध शुरु कर दिया, और लाखो नेपाली आम जनता, मिलिट्री के लोग, यहां तक कि राजशाही परिवार के लोग की भी हत्या तक करने में सफल रहा,
1991 में पहली बहुदलीय संसद का गठन हुआ और इस तरह राजशाही शासन के अंत की शुरुआत हुई। यह दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र था लेकिन वर्तमान में वामपंथी वर्चस्व के कारण अब यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
नेपाल के राजवंश और भारत के राजवंशों का गहरा आपसी रिश्ता है,
भारत के बहुत से रियासत के राजकुमार की शादी नेपाली राजकुमारी के साथ होने के वर्णन इतिहास में मिलते हैं,
नेपाल भी भारत और भारत के लोगो से नफरत सा करने लगा है, जबकि नेपाली लोग भारत के सेना, पुलिस, और व्यापार करने के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि नेपाल में भारतीय जनता को यह सहूलियत नही मिलती है
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