कंठमाला

कंठमाला

परिचय-

कंठमाला एक ऐसा रोग है जिसमें संक्रमण शरीर की कई ग्रन्थियों को प्रभावित करता है विशेषकर लार-ग्रन्थियों को।

कारण-

          कंठमाला एक संक्रमित रोग है। इसका संक्रमण किसी के खांसने या बोलने पर लार के कणों के साथ हवा में फैलने लगता है। अगर इस रोग से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक किसी स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में रहता है तो उस व्यक्ति में इस रोग के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। जिसे पहले यह रोग न हुआ हो उसे इस रोग से ग्रस्त रोगी के संक्रमण में आने पर इस रोग की चपेट में आने का खतरा ज्यादा रहता है। ज्यादातर लोगों को कंठमाला रोग बचपन से ही होता है लेकिन बराबर टीके लगवाते रहने से इस यह रोग कम होता जाता है।

लक्षण-

          कंठमाला रोग के संक्रमण को उभरने में 12 से 26 दिन का समय लगता है। जब यह रोग कम होता है तो रोगी को इस रोग का हल्का अहसास होता है। इस रोग में रोगी के जबड़े के पीछे स्थित ग्रन्थियों में हल्का दर्द होता रहता है। इस रोग के गंभीर मामलों में रोगी की ग्रन्थियों में सूजन और जलन हो सकती है। रोगी को बुखार, सिरदर्द और खाना खाने में परेशानी भी हो सकती है। इस रोग के कई मामलों में अंडकोषों में सूजन और नरमाहट पैदा हो सकती है। यह रोग नपुंसकता तक भी पहुंच सकता है। बड़े व्यक्तियों में यह रोग रोगी के अग्न्याशय तक पंहुच सकता है।

चिकित्सा-

          कंठमाला का रोग वैसे तो कुछ दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाता है लेकिन इस रोग में होने वाले दर्द से बचने के लिये दर्दनाशक औषधि ले सकते हैं।

         



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