पथरी

मूत्राशय में पथरी

परिचय-

   मूत्राशय में पथरी हो जाने पर रोगी को पेशाब करने में दिक्कत होती है तथा उसके पेट में दर्द होने लगता है। इस रोग के कारण रोगी के पेशाब में पीब, खून तथा एलुब्यूमिन निकलने लगता है। इस रोग में जब रोगी पेशाब करता है तो उसका मूत्राशय सिकुड़ जाता है और पथरी मूत्राशय के मांस के साथ लग जाती है जिसके कारण रोगी को बहुत तेज दर्द होने लगता है। कभी-कभी तो छोटी पथरी पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है लेकिन जो बड़ी पथरी होती है वह पेशाब के साथ बाहर नहीं निकल पाती है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा इस बड़ी पथरी को बिना किसी यन्त्र तथा बिना दवाई के पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकाला जा सकता है। एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के बाद दुबारा पथरी का बनना रुक जाता है।

        एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के साथ-साथ कुछ देशी औषधियों के नुस्खे उपयोग में लाए जाए तो मूत्राशय की पथरी जल्दी निकल जाती है। यदि रोगी व्यक्ति प्रतिदिन सुबह-शाम कागजी नींबू का रस पानी में मिलाकर पिए तो इस रोग में बहुत लाभ मिलता है। लगभग आधा कप गाजर का रस दिन में 3 बार लेने से रोगी का यह रोग जल्दी ठीक हो जाता है। पके जामुन रोजाना खाने से भी पथरी रोग ठीक हो जाता है। जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर चुटकी भर चूर्ण छोटी कटोरी भर दही में मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से मूत्राशय की पथरी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता हैं

        चित्र में दिये गये प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रतिदिन प्रेशर देने से पथरी का रोग धीरे-धीरे ठीक होने लगता है। इससे पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है और रोगी का पथरी के कारण होने वाला दर्द कम होता हैं  


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