भारत पाकिस्तान बांग्लादेश

राजस्थान से 1070 किमी लंबा तथा जम्मू-कश्मीर से 1222 किमी लंबा भारत पाकिस्तान के बीच अन्तर्राष्ट्रीय सीमा है...

राजस्थान में कोई आतंकवादी इतनी जल्दी आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश नहीं करता हैं लेकिन कुछ समय अंतराल के बाद बारम्बार लगातार जम्मू कश्मीर में कोई न कोई बड़ी आतंकवादी घटना को बड़ी गुमचुप तरीके से अंजाम दे दिया जाता है |

कारण क्या है ?

राजस्थान हिन्दू बहुल है और जम्मू कश्मीर मुस्लिम बहुल...राजस्थान में इस्लामिक जिहाद के समर्थक नहीं है | जबकि जम्मू कश्मीर में इस्लामिक जिहाद के समर्थक घर-घर भरे पड़ें है | राजस्थान में इस्लामिक जिहाद के समर्थकों का इलाज वहां के स्थानीय लोग बेहिचक करने में जरा भी चिंता नहीं करेंगे | जबकि जम्मू कश्मीर में वहाँ के स्थानीय लोग इस्लामिक किताब के कारण खुलकर "तेरा मेरा रिस्ता क्या! ला इल्लाह! इ ललाह!" का रिस्ता निभाते आये हैं |

इस्लामिक जिहाद और कट्टरपंथी मुस्लिम देश के कोने-कोने में भारत की बर्बादी और तबाही की बेसर्बी से प्रतीक्षा "सेकुलरिज्म की आड़" में कर रहें हैं और भारत का गैर-मुस्लिम समाज आज भी गहरी नींद में सोया हैं| सेक्युलर लोग और सेक्युलर पार्टियां से जुड़े स्वार्थी लोग एक दिन इस भारत का सत्यानाश करवा के ही रहेंगे | 

"कट्टरपंथी सोच इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद, सत्ता और मुस्लिम वोट के लिए इनकी आँखों पर बंधी मुस्लिम पट्टी और मौन साधना भारत के लिए सबसे खतरनाक है" 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस तरह से सेक्युलर नेताओं और उनके समर्थकों का इस्लामिक जिहाद और आतंकवाद पर सोशल मीडिया पर घमासान मचा हुआ है भारत में अंदरूनी सोच और जमीनी हकीकत उससे भी भयावह है जिसे जानने और समझने में भारत के तमाम धर्म और जाति के गैर मुस्लिम लोगों ने जानने और समझने में बहुत देर कर दी है | सेक्युलर सोच ने देश में इस्लामिक जिहाद और कट्टरपंथ को इतना सुदृढ़ और मजबूत कर दिया है संविधान की दुहाई निकट भविष्य में किसी काम की नहीं रहेगी |

5 लाख से जायदा मुस्लिम महिलाओं का पाकिस्तानी नागरिक से विवाह और देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसबैठियों का बेधड़क दाखिल होना झारखण्ड के आदिवासी इलाकों में, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में, बिहार के सीमांचल में.... असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरला, हैदराबाद, महाराष्ट्र, दिल्ली में बगावत के किनारे खड़े हैं | 

भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के 99.99 फीसदी मुसलमान कुरान के आगे नतमस्तक हैं | कुरान ही इनके दिलों दिमाग में इसके अतिरिक्त सब शून्य सा महसूस होता है | इस्लामिक जिहाद में मानवता करुणा दया और इंसानियत की कोई जगह नहीं हैं | हैवानियत और बात-बात में इंशाअल्लाह का उद्घोष कट्टर होने, दिखाने और एकजुट होने का बेहद खतरनाक मंत्र है |

उदाहरण अगर प्रेम, करुणा, दया, मानवता होता तो भारत में 'मदरसे' सार्वजानिक रूप से संचालित किये जाते, किसी के आने-जाने पर धर्म को देखकर पाबन्दी नहीं होती, जबकि गैर-मुस्लिम में ऐसा कोई सख्त पाबन्दी मैंने नहीं देखा न सुना |  

रामायण छोड़ के केवल 25 प्रतिशत भारतवंशी सिर्फ महाभारत के आगे नतमस्तक हो जाए भारत में कट्टरपंथी सोच, इस्लामिक जिहाद, आंतकवाद और आतंकवादियों के समर्थक और अनियंत्रित दोगली सेकुलरिज्म सबको आसानी से नियंत्रित किया जा सकता हैं अन्यथा "हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है", सुनने को नहीं मिलेगा बल्कि शीघ्र ही यहाँ से इस्लामिक जिहादियों और मुस्लिम आतंकियों के कारण भारत से भगा दिए जाओगे या बेहरमी से मार दिए जाओगे |

हमारे प्राचीन संस्कृति की देन है- सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक विनम्रता, धैर्य, संयम, सहलशीलता, त्याग, प्रेम, करुणा, दया, मानवता और इंसानियत का विश्व में कोई जोड़ा नहीं हैं, न ही होगा !

समय और वर्तमान परिस्तिथियों के आधार पर "सच कड़वा है" और यह मेरे व्यक्तिगत विचार एवं ऐसा मानना हैं...सहमत होना या न होना जरुरी नहीं है |

पुरे देश को समझाने-बुझाने वाले अहिंसावादी हिन्दू 'गाँधी' एक कट्टरपंथी 'जिन्ना' को नहीं समझा पाए थे...ठीक वैसा ही समय आ रहा है सेक्युलर हिंदू...कुरानी सोच, इस्लामिक कट्टरपंथी और जिहादी को नहीं समझा पाएंगे...लिख के रख लीजिये !

@nirajbabu121

सिंधु जल संधि क्या है

सिंधु नदी जल समझौता ,पूरा पढ़िए थ्रेड🧵 

ब्रिटिश राज के दौरान ही दक्षिण पंजाब में सिंधु नदी घाटी पर बड़ी नहर का निर्माण करवाया गया था. उस इलाक़े को इसका इतना लाभ मिला कि बाद में वो दक्षिण एशिया का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र बन गया.

भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के दौरान जब पंजाब को विभाजित किया गया तो इसका पूर्वी भाग भारत के पास और पश्चिमी भाग पाकिस्तान के पास गया.

बंटवारे के दौरान ही सिंधु नदी घाटी और इसकी विशाल नहरों को भी विभाजित किया गया. लेकिन इससे होकर मिलने वाले पानी के लिए पाकिस्तान पूरी तरह भारत पर निर्भर था

पानी के बहाव को बनाए रखने के उद्देश्य से पूर्व और पश्चिम पंजाब के चीफ़ इंजीनियरों के बीच 20 दिसंबर 1947 को एक समझौता हुआ.

इसके तहत बंटवारे से पहले तय किया गया पानी का निश्चित हिस्सा भारत को 31 मार्च 1948 तक पाकिस्तान को देते रहना तय हुआ.

1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया जिससे पाकिस्तानी पंजाब की 17 लाख एकड़ ज़मीन पर हालात ख़राब हो गए.

भारत के इस क़दम के कई कारण बताए गए जिसमें एक था कि भारत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना चाहता था.

बाद में हुए समझौते के बाद भारत पानी की आपूर्ति जारी रखने पर राज़ी हो गया 

स्टडी के मुताबिक 1951 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने टेनसी वैली अथॉरिटी के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियंथल को भारत बुलाया.

लिलियंथल पाकिस्तान भी गए और वापस अमेरिका लौटकर उन्होंने सिंधु नदी घाटी जल बंटवारे पर एक लेख लिखा.

ये लेख विश्व बैंक प्रमुख और लिलियंथल के दोस्त डेविड ब्लैक ने भी पढ़ा और उन्होंने भारत और पाकिस्तान के प्रमुखों से इस बारे में संपर्क किया. और फिर दोनों पक्षों के बीच बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ.

ये बैठकें क़रीब एक दशक तक चलीं और आख़िरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु नदी घाटी संधि पर हस्ताक्षर हुए.

समझौते की शर्ते निम्न प्रकार से है :

संधि के मुताबिक़, सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां बताते हुए इनका पानी पाकिस्तान के लिए तय किया गया. जबकि रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां बताते हुए इनका पानी भारत के लिए तय किया गया.

इसके मुताबिक़,भारत पूर्वी नदियों के पानी का, कुछ अपवादों को छोड़कर, बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है.

वहीं पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया था. जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी.

इस संधि में दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत करने और साइट के मुआयना आदि का प्रावधान भी था.

इसी संधि में सिंधु आयोग भी स्थापित किया गया. इस आयोग के तहत दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था.

संधि में दोनों कमिश्नरों के बीच किसी भी विवादित मुद्दे पर बातचीत का प्रावधान है.

इसमें यह भी था कि जब कोई एक देश किसी परियोजना पर काम करता है और दूसरे को उस पर कोई आपत्ति है तो पहला देश उसका जवाब देगा. इसके लिए दोनों पक्षों की बैठकें होंगी.

बैठकों में भी अगर कोई हल नहीं निकल पाया तो दोनों देशों की सरकारों को इसे मिलकर सुलझाना होगा.

साथ ही ऐसे किसी भी विवादित मुद्दे पर तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान भी रखा गया है

जाती हैं कि जाति नही

मौत के घाट उतार दिया गया था। 

7) हाँ, जाति पूछकर ही 1979 में पटना के पास पारसबीघा में 11 दलित और एक यादव को भूमिहारों ने मौत के घाट उतार दिया था। 

८.) हाँ, जाति पूछकर ही शंकरबीघा में 1999 में 23 दलितों को मौत के घाट उतार दिया गया था। 

9) हाँ, जाति पूछकर ही 1988 में नोनहीगढ़ नगवाँ में 19 दलितों को मौत के घाट उतार दिया गया था। 

10) हाँ, जाति पूछकर ही 1989 में भोजपुर के दनवर-बिहटा गाँव में 23 दलितों का क़त्लेआम सिर्फ़ इसलिए हुआ क्यूँकि वो अपने मर्ज़ी से वोट कर आए थे। 

11) हाँ, जाति पूछकर ही दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने नहीं दिया जाता है। 

12) हाँ, जाति पूछकर ही दलित महिलाओं को अपना स्तन ढकने नहीं दिया जाता था।

13) हाँ, जाति पूछकर ही वेदों का मंत्र सुनने

मुर्शिदाबाद

आज जब मुर्शिदाबाद जल रहा है और वहां से हिंदू पलायन कर रहे हैं, तो एक बात अपने हृदय पर हाथ रख कर बताइएगा। क्या आपको पता था कि मुर्शिदाबाद में 51 शक्तिपीठों में से एक कीरिटेश्वरी पीठ है।

ये बात बताना भी प्रासंगिक है कि सन 1700 में यह जिला भारत का सबसे समृद्ध जिला था। एक अनुमान के अनुसार तत्कालीन भारत की 20% जीडीपी और पूरे विश्व की 5% अर्थव्यवस्था का उत्पादन आज के मुर्शिदाबाद में होता था। यहां का रेशम पूरे विश्व में निर्यात होता था..

उस जमाने के सबसे बड़े व्यापारी जगत सेठ इसी जिले के थे और मुर्शीद कुली खान के साथ मिलकर उन्होंने मुर्शिदाबाद को शहर और बाद में बंगाल की राजधानी (ढाका से बदलकर) बनने योगदान दिया. जैसे अमेरिका में कभी रोथचाइल्ड परिवार था, वैसे ही जगत सेठ के पास अकूत धन और विस्तृत व्यापार था।

मुर्शिदाबाद औरंगजेब की सबसे दुधारू गाय थी. मुर्शिदकुली औरंग को सबसे अधिक कर वसूल कर देते थे। 1~2 करोड़ प्रतिवर्ष...

और आज?

मुर्शिदाबाद में मोम्बीज की जनसंख्या बहुसंख्य (70%) हैं। नतीजा भारत के सबसे समृद्ध जिले से आज गरीब जिले में बदल चुका हैं। तुलनात्मक रूप से भारत की औसत पर कैपिटा आय 205,000/व्यक्ति/वर्ष है तो मुर्शिदाबाद में यह घटकर 149,000 / व्यक्ति/वर्ष है.

आज मुर्शिदाबाद उत्तर बंगाल और झारखंड के बीच "चिकन नेक" जैसा हैं।

विडंबना है कि जो कभी शक्तिपीठ था, आज वहां से हिंदुओं का पलायन हो रहा है. 

यह शक्तिपीठ भी कब तक सुरक्षित है, समय बतायेगा... 

जय भवानी 🚩

सनातन को समझे

⚘️पाँच तत्व ●  पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।
⚘️पाँच देवता ●  गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।
⚘️पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ ●  आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।
⚘️पाँच कर्म ●  रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।
⚘️पाँच  उंगलियां ● अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।
⚘️पाँच पूजा उपचार ● गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
⚘️पाँच अमृत ●  दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।
⚘️पाँच प्रेत ●  भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।
⚘️पाँच स्वाद ● मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।
⚘️पाँच वायु ● प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।
⚘️पाँच इन्द्रियाँ ● आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।
⚘️पाँच वटवृक्ष ● सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।
⚘️पाँच पत्ते ●  आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।
⚘️पाँच कन्या ●  अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।